क्यों अमेरिकी और यूरोपीय तेल कंपनियों का मुनाफा हो रहा डबल?
Exxon Mobil ने बताया कि दूसरी तिमाही में उसका मुनाफा दोगुना होकर 14.53 अरब डॉलर हो गया
दुनिया को अब यह जानने में कोई धोखा नहीं है कि युद्ध भी एक व्यापार है। अमेरिका, ब्रिटेन को तो इसमें जमाने से महारथ हासिल है। Weapon Of Mass Destruction (WMD) का हौव्वा खड़ा कर इराक को नेस्तनाबुत किया और अब परमाणु संयत्र का बहाना बना कर ईरान की तबाही का मंसूबा पाले हुए है। लेकिन यह तो सिर्फ दिखाने वाला सच है। असल बात तो धंधे की है। व्यापार की है। तेल के व्यापार की है।
बता दें कि ईरान और अमेरिका के बीच लड़ाई के कारण पेट्रोलियम आपूर्ति बाधित होने और दुनिया भर में ईंधन महंगा होने, उसकी कमी पैदा होने के बीच अमेरिकी तेल और गैस कंपनियों ने भी भारी मुनाफा कमाया है। तेल और गैस कंपनी BP का तिमाही मुनाफा 5.73 अरब डॉलर पहुंच गया है। इससे कुछ दिन पहले Shell ने अपने इतिहास की दूसरी सबसे बड़ी तिमाही कमाई दर्ज की थी। मध्य पूर्व संकट के कारण तेल और गैस की कीमतों में आई तेजी से BP ने रूस-यूक्रेन युद्ध के पहले साल के बाद से अपना सबसे अधिक तिमाही मुनाफा दर्ज किया है।
The Guardian की एक रिपोर्ट के अनुसार,
जून के अंत तक तीन महीनों में BP का तिमाही मुनाफा दोगुने से भी ज्यादा बढ़कर 5.73 अरब डॉलर (4.27 अरब पाउंड) हो गया। यह पिछली तिमाही के मुकाबले करीब 2.5 अरब डॉलर अधिक है। मध्य पूर्व में जारी संघर्ष के कारण खाड़ी क्षेत्र से ऊर्जा निर्यात बाधित हुआ है, जिससे तेल और गैस की कीमतें बढ़ी हैं।
उम्मीद से बेहतर मुनाफे के बावजूद BP की नई मुख्य कार्यकारी अधिकारी मेग ओ'नील ने कहा कि,
अभी “बहुत कुछ किया जाना बाकी है”, क्योंकि BP अपनी पूरी क्षमता का लाभ नहीं उठा पा रही है। ओ'नील से 117 साल पुरानी कंपनी में बड़े बदलाव करने की उम्मीद है। इनमें ब्रिटेन के नॉर्थ सी से बाहर निकलना भी शामिल है, जहां BP करीब छह दशकों से तेल और गैस का उत्पादन कर रही है।
BP ने अपने बढ़ते मुनाफे की जानकारी ऐसे समय दी है जब कुछ ही दिन पहले Shell ने मध्य पूर्व संकट से पैदा हुई बाजार की अस्थिरता के बीच अपने इतिहास की दूसरी सबसे बड़ी तिमाही कमाई दर्ज की।

यूरोप की सबसे बड़ी तेल कंपनी Shell का शुद्ध मुनाफा जून तक तीन महीनों में दोगुना होकर लगभग 10 अरब डॉलर हो गया। रूस के यूक्रेन पर हमले के बाद दर्ज रिकॉर्ड कमाई के बाद यह कंपनी की सबसे बड़ी तिमाही कमाई है।
मध्य पूर्व संकट से सऊदी अरब की तेल कंपनी Aramco को भी फायदा हुआ। 30 जून को समाप्त तीन महीनों में कंपनी का शुद्ध मुनाफा 44 प्रतिशत बढ़कर 32.69 अरब डॉलर हो गया। उधर, दुनिया की सबसे बड़ी तेल और गैस कंपनियों के इस अप्रत्याशित भारी मुनाफे की आलोचना भी हो रही है। एक तरफ परिवार और कारोबारी बढ़ते ऊर्जा बिलों से जूझ रहे हैं, वहीं यूरोप में लाखों लोग भीषण गर्मी की लहरों से प्रभावित हुए हैं। जीवाश्म ईंधन से पैदा हुआ जलवायु संकट ऐसी गर्मी की घटनाओं को अधिक संभावित और गंभीर बना रहा है।
PBS News के अनुसार, दुनिया भर में ईंधन महंगा होने तथा उसकी कमी पैदा होने के बीच अमेरिकी तेल और गैस कंपनियों ने भी इस दौरान भारी मुनाफा कमाया।
Exxon Mobil ने बताया कि दूसरी तिमाही में उसका मुनाफा दोगुना होकर 14.53 अरब डॉलर हो गया। रिकॉर्ड डीजल उत्पादन ने इसमें महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। टेक्सास के स्प्रिंग स्थित इस तेल कंपनी का राजस्व 42 प्रतिशत बढ़कर 116.02 अरब डॉलर हो गया। ह्यूस्टन स्थित Chevron का मुनाफा लगभग चार गुना बढ़कर 12.07 अरब डॉलर हो गया, जबकि उसका राजस्व 56 प्रतिशत बढ़कर 70.06 अरब डॉलर पहुंच गया।
यूरोप की छह सबसे बड़ी तेल कंपनियों ने पहली तिमाही में संयुक्त रूप से 22 अरब डॉलर का मुनाफा दर्ज किया, जो पिछले साल की तुलना में 40 प्रतिशत से अधिक है। Global Witness में जीवाश्म ईंधन मामलों के प्रमुख पैट्रिक गैली ने कहा,
“दुनिया में कुछ ऐसे समूह हैं जिनके लिए यह संकट बहुत फायदेमंद साबित हो रहा है और तेल उत्पादक उनमें से एक हैं।”
डोनाल्ड ट्रंप ने कहा है कि,
Chevron और ExxonMobil, जिन्होंने इस सप्ताह अपने मुनाफे में तेज बढ़ोतरी दर्ज की, “बहुत ज्यादा पैसा कमा रही हैं” और उन्हें अपने मुनाफे का कुछ हिस्सा जनता को वापस देना चाहिए।
Friends of the Earth की कैंपेन प्रमुख रोजी डाउन्स ने कहा,
“स्पष्ट है कि ऊर्जा संकट का दर्द हर कोई महसूस नहीं कर रहा है। BP एक बार फिर भारी मुनाफा कमा रही है, जबकि लाखों परिवार आसमान छूते ऊर्जा बिलों और तेजी से बेकाबू होते जलवायु संकट की कीमत चुका रहे हैं, जिसमें अधिक गंभीर हीटवेव, जंगल की आग और सूखा शामिल हैं।”
गौरतलब है कि वैश्विक आपूर्ति सीमित होने के कारण अंतरराष्ट्रीय मानक ब्रेंट क्रूड की कीमत लगभग 70 डॉलर प्रति बैरल से बढ़कर मार्च, अप्रैल और मई के अधिकांश समय में 100 डॉलर प्रति बैरल से ऊपर रही। एक समय कीमत 126 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गई थी। अप्रैल की शुरुआत से जून के अंत तक तेल कंपनियों द्वारा कमाए गए भारी मुनाफे पर इस साल अतिरिक्त राजनीतिक और सार्वजनिक निगरानी हो सकती है। इस दौरान पेट्रोल, डीजल और विमान ईंधन की कीमतें तेजी से बढ़ीं, जिससे वाहन चालकों और हवाई यात्रियों का खर्च बढ़ा।
कुछ देशों में ईंधन की आपूर्ति इतनी कम हो गई कि ऑस्ट्रेलिया में कुछ जगहों पर ईंधन की राशनिंग करनी पड़ी, जबकि नेपाल और श्रीलंका में सरकारी कार्यालय बंद करने पड़े।
Exxon और Chevron जैसी ऊर्जा कंपनियां अमेरिकी तेल की कीमत सीधे तय नहीं करतीं। तिमाही के दौरान अमेरिकी तेल की कीमत 68 डॉलर से बढ़कर 115 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गई। कीमतें मुख्य रूप से मांग और आपूर्ति तथा ट्रेडर्स, रिफाइनरियों और दूसरे खरीदारों द्वारा भुगतान की जाने वाली कीमतों से तय होती हैं। इसके बावजूद अमेरिकी कांग्रेस में डेमोक्रेट सांसदों ने मार्च में ऐसे विधेयक पेश किए जिनके तहत 2026 से बड़ी तेल कंपनियों के अतिरिक्त मुनाफे पर टैक्स लगाया जाएगा और उससे प्राप्त रकम उपभोक्ताओं में बांटी जाएगी।
ब्रिटेन और कुछ अन्य यूरोपीय देशों ने 2022 में जीवाश्म ईंधन कंपनियों पर अस्थायी विंडफॉल प्रॉफिट टैक्स लागू किया था। ब्रिटेन ने इसे 2030 तक बढ़ा दिया है। Exxon के CEO डैरेन वुड्स ने निवेशकों के साथ बातचीत में विंडफॉल टैक्स का विरोध करते हुए कहा कि संकट के समय इन देशों को ऊर्जा उपलब्ध कराने वाली कंपनियों को बाद में दंडित करना “बहुत अदूरदर्शी” कदम है। उन्होंने कहा कि पिछली बार यूरोप में विंडफॉल प्रॉफिट टैक्स लगाए जाने के बाद Exxon ने वहां की अपनी कुछ नियोजित निवेश परियोजनाएं रद्द कर दी थीं।
Satish Verma
सतीश वर्मा पेशे से पत्रकार हैं। हिंदी की मुख्यधारा की पत्रकारिता में इन्हें 20 साल से ज्यादा का अनुभव है।