मक्का के पास ड्रोन हमला नाकाम, सऊदी अरब में हाई अलर्ट
ड्रोन को मक्का के प्रतिबंधित हवाई क्षेत्र में प्रवेश करने से पहले ही मार गिराया गया।
सऊदी अरब के नेतृत्व वाले सैन्य गठबंधन ने बताया कि मक्का के दक्षिण में एक संदिग्ध हूती ड्रोन को सऊदी एयर डिफेंस सिस्टम ने बीच में ही रोककर नष्ट कर दिया गया। समाचार एजेंसी Reuters के मुताबिक, ड्रोन को मक्का के प्रतिबंधित हवाई क्षेत्र में प्रवेश करने से पहले ही मार गिराया गया। इस घटना के बाद सऊदी अरब ने मक्का समेत देश के कई हिस्सों में सुरक्षा अलर्ट जारी कर दिया है। बताया जा रहा है कि यह कदम हूती लड़ाकों द्वारा पिछले एक सप्ताह से किए जा रहे हमलों के बाद उठाया गया है।
सऊदी सैन्य गठबंधन के प्रवक्ता तुर्की अल-मलिकी ने कहा कि,
जुलाई 2017 में बैलिस्टिक मिसाइल हमले के बाद मक्का को निशाना बनाने की यह हूतियों की दूसरी कोशिश थी। उन्होंने चेतावनी दी कि गठबंधन ईरान समर्थित समूह के खिलाफ आवश्यक प्रतिरोधात्मक कार्रवाई करेगा। हालांकि, Reuters ने हूती सेना के एक सूत्र के हवाले से बताया कि मक्का या किसी अन्य इस्लामी पवित्र स्थल को कोई खतरा नहीं था।
Organisation of Islamic Cooperation (OIC) ने मक्का और मदीना क्षेत्र को निशाना बनाकर किए गए हूती हमलों की निंदा की है। OIC ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर जारी बयान में कहा कि पवित्र स्थलों की सुरक्षा हर हाल में सुनिश्चित की जानी चाहिए और उन्हें निशाना बनाने की कोई भी कोशिश अस्वीकार्य है।
हूतियों ने पिछले एक सप्ताह के दौरान सऊदी अरब पर कई हमले करने का दावा किया है। इनमें सोमवार को एक वायुसेना अड्डे पर किया गया हमला भी शामिल है। हूतियों का कहना है कि ये हमले यमन पर किए गए हवाई हमलों के जवाब में किए गए हैं।
Times Of Israel के मुताबिक,
रियाद द्वारा सुरक्षा अलर्ट जारी किए जाने के बाद अमेरिका ने भी अपने नागरिकों को सऊदी अरब की यात्रा न करने की सलाह दी है। बता दें कि यह घटना ऐसे समय हुई है, जब ईरान समर्थित हूती लड़ाकों ने पिछले एक सप्ताह के दौरान कई हमले किए हैं। इन हमलों के चलते सऊदी अरब की युद्ध में भूमिका और गहरी होती जा रही है।
मक्का इस्लाम के सबसे पवित्र स्थलों का केंद्र और वार्षिक हज यात्रा का प्रमुख स्थान है। अल-मल्की ने कहा कि मक्का की सुरक्षा सऊदी अरब के लिए एक “रेड लाइन” है। हालांकि, हूती ने मक्का को निशाना बनाने के आरोपों से इनकार किया है।
हूती नियंत्रित समाचार एजेंसी ‘सबा’ ने कहा कि मक्का को निशाना बनाने का आरोप “सरासर झूठ” है। सऊदी अरब ने मंगलवार को मक्का के लिए सुरक्षा अलर्ट जारी किया था।
सऊदी अरब पर हुए इन हमलों से वैश्विक ऊर्जा बाजारों में चिंता बढ़ गई है। छह महीने से जारी अमेरिका-ईरान युद्ध के कारण होर्मुज से जहाजों की आवाजाही पहले ही बेहद सीमित हो चुकी है।
हाल के दिनों में हूतियों ने यमन के Red Sea के कुछ हिस्सों पर नियंत्रण कर लिया है। ये इलाके दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण समुद्री व्यापार मार्गों में शामिल बाब अल-मंदेब के पास स्थित हैं। इससे होर्मुज के बजाय वैकल्पिक रास्तों से भेजे जा रहे सऊदी तेल निर्यात पर भी खतरा मंडरा रहा है। हूतियों ने पिछले एक सप्ताह में सऊदी अरब पर कई बड़े हमले करने का दावा किया है। सोमवार, 14 सितंबर को एक एयरबेस पर हमला किया गया, जिसे हूतियों ने यमन पर हुए हवाई हमलों का जवाब बताया। सऊदी नेतृत्व वाले सैन्य गठबंधन के अनुसार, इस हमले में 13 नागरिक घायल हुए।
सऊदी अरब ने शुक्रवार, 11 सितंबर को हुए एक अन्य हमले के लिए इराक स्थित ईरान समर्थक संगठन को जिम्मेदार ठहराया है। इस हमले के कारण अरब रेगिस्तान से गुजरने वाली सऊदी अरब की महत्वपूर्ण ‘ईस्ट-वेस्ट पाइपलाइन’ बंद हो गई। कारोबारियों का कहना है कि यदि यह पाइपलाइन लंबे समय तक बंद रही तो दुनिया की कुल तेल आपूर्ति का लगभग चार प्रतिशत प्रभावित हो सकता है। सऊदी अरब ने अभी यह नहीं बताया है कि पाइपलाइन का संचालन दोबारा कब शुरू होगा।
हालांकि, अमेरिका के ऊर्जा सचिव Chris Wright ने मंगलवार को CNBC से कहा कि पाइपलाइन से कुछ ही दिनों में कच्चे तेल की आपूर्ति फिर शुरू हो सकती है।
सऊदी अरब वर्ष 2015 से हूतियों के खिलाफ लड़ रहे सैन्य गठबंधन का नेतृत्व कर रहा है। हाल के वर्षों में संघर्ष विराम के कारण लड़ाई काफी हद तक शांत हो गई थी, लेकिन इस महीने हूतियों द्वारा यमन सरकार समर्थक सेनाओं को पीछे धकेलने के बाद संघर्ष फिर तेज हो गया। सऊदी क्राउन प्रिंस मोहम्मद बिन सलमान ने पिछले सप्ताह अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप से फोन पर बात कर सैन्य सहायता मांगी थी। हालांकि, अमेरिका की मदद अब तक खुफिया सूचनाएं उपलब्ध कराने तक ही सीमित रही है।