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CIA की फाइलों से खुला बड़ा राज, 9/11 से पहले क्लिंटन और बुश को मिले थे कई अलर्ट

TCN Desk TCN Desk | 40m ago · 6 min read
CIA की फाइलों से खुला बड़ा राज,  9/11 से पहले क्लिंटन और बुश को मिले थे कई अलर्ट

यह 9/11 से संबंधित CIA के खुफिया विश्लेषण का अब तक का सबसे बड़ा सार्वजनिक संग्रह है।

अमेरिका में 11 सितंबर 2001 (9/11) को हुए आतंकवादी हमलों से कई साल पहले ही अमेरिकी खुफिया एजेंसियों ने तत्कालीन राष्ट्रपति बिल क्लिंटन और जॉर्ज डब्ल्यू. बुश को ओसामा बिन लादेन और उसके आतंकी नेटवर्क की विमान अपहरण संबंधी योजनाओं के बारे में कई बार चेतावनी दी थी। ट्रंप प्रशासन द्वारा जारी किए गए गोपनीय दस्तावेज़ों के एक बड़े संग्रह से यह जानकारी सामने आई है।

Fox News की एक रिपोर्ट के अनुसार, शुक्रवार को सार्वजनिक किए गए इन declassified दस्तावेज़ों में राष्ट्रपति को प्रतिदिन दी जाने वाली खुफिया रिपोर्टों, यानी ‘प्रेसिडेंट्स डेली ब्रीफ’ (PDB) और CIA के उच्चस्तरीय खुफिया ज्ञापनों को शामिल किया गया है।


इन रिपोर्टों के अनुसार,

अल-कायदा से जुड़े संदिग्ध आतंकवादियों ने World Trade Centre पर हमले से लगभग तीन साल पहले न्यूयॉर्क के एक अज्ञात हवाई अड्डे पर सुरक्षा जांच से बच निकलने का परीक्षण भी किया था। खुफिया सूचनाओं में आशंका जताई गई थी कि आतंकवादी बड़े व्यावसायिक विमानों का अपहरण करके अमेरिका पर हमला कर सकते हैं। उनकी योजना अपहृत विमानों का इस्तेमाल जेल में बंद चरमपंथियों की रिहाई के लिए दबाव बनाने में करने की भी थी। इनमें शेख उमर अब्देल-रहमान और रामजी यूसुफ जैसे नाम शामिल थे।

4 दिसंबर 1998 को राष्ट्रपति के लिए तैयार की गई दैनिक खुफिया रिपोर्ट (PDB) में कहा गया था कि विभिन्न सूत्रों के अनुसार,

बिन लादेन के नेटवर्क के कुछ सदस्यों ने विमान अपहरण का प्रशिक्षण प्राप्त किया था। हालांकि उस समय तक बिन लादेन के अल-कायदा संगठन से सीधे जुड़े किसी समूह ने विमान अपहरण की घटना को अंजाम नहीं दिया था। रिपोर्ट में यह भी आशंका जताई गई थी कि बिन लादेन अमेरिकी विमानों के खिलाफ किसी दूसरी तरह की कार्रवाई पर भी विचार कर रहा हो सकता है।

इससे कुछ महीने पहले 10 सितंबर 1998 की एक PDB रिपोर्ट में बताया गया था कि,

बिन लादेन की प्राथमिकता अमेरिकी धरती पर हमला करना थी और उसका प्रमुख निशाना Washington DC हो सकता था। रिपोर्ट में चेतावनी दी गई थी कि पूर्वी अफ्रीका में अमेरिकी दूतावासों पर बम हमले करने वाला आतंकी नेटवर्क विस्फोटकों से भरे विमान को किसी अमेरिकी शहर में गिराने की कोशिश कर सकता है।

CIA के दस्तावेज़ बताते हैं कि,

1998 के दौरान अमेरिकी खुफिया एजेंसियां बिन लादेन की गतिविधियों और उसके सहयोगी नेटवर्क पर लगातार नजर रख रही थीं। खुफिया अधिकारियों ने न्यूयॉर्क, कैलिफोर्निया, टेक्सास, मिशिगन और फ्लोरिडा सहित कई अमेरिकी राज्यों में सक्रिय उसके सहयोगियों और समर्थकों की पहचान भी की थी। ये चेतावनियां केवल एक राष्ट्रपति प्रशासन तक सीमित नहीं थीं। बिल क्लिंटन के बाद सत्ता संभालने वाले राष्ट्रपति जॉर्ज डब्ल्यू. बुश को भी ऐसी कई खुफिया जानकारियां दी गई थीं।

6 अगस्त 2001 को बुश को सौंपी गई एक चर्चित PDB का शीर्षक था—

बिन लादेन अमेरिका में हमला करने के लिए प्रतिबद्ध।

इस रिपोर्ट में राष्ट्रपति बुश को बताया गया था कि,

FBI ने अमेरिका के भीतर कई संदिग्ध गतिविधियों का पता लगाया है, जिनका संबंध विमान अपहरण या दूसरे संभावित आतंकवादी हमलों की तैयारी से हो सकता है। इसमें न्यूयॉर्क स्थित Federal इमारतों की हाल में की गई निगरानी का भी उल्लेख था।

दस्तावेज़ में कहा गया था कि अल-कायदा के सदस्य, जिनमें कुछ अमेरिकी नागरिक भी शामिल थे, कई वर्षों से अमेरिका में रह रहे थे या वहां की यात्राएं कर रहे थे। संगठन ने अमेरिका में एक ऐसा तंत्र विकसित कर लिया था, जो आतंकी हमलों को अंजाम देने में मदद कर सकता था। रिपोर्ट में यह भी बताया गया था कि 1998 में अफगानिस्तान स्थित अपने ठिकानों पर अमेरिकी मिसाइल हमलों के बाद बिन लादेन ने अपने समर्थकों से कहा था कि वह वॉशिंगटन में बदला लेना चाहता है।

11 सितंबर के हमलों से कुछ सप्ताह पहले राष्ट्रपति बुश को दी गई एक अन्य दैनिक खुफिया रिपोर्ट (PDB) में बताया गया था कि FBI पूरे अमेरिका में लगभग 70 ऐसी जांच कर रही थी, जिन्हें बिन लादेन से संबंधित माना जा रहा था।

ट्रंप प्रशासन ने इन दस्तावेज़ों को उस व्यापक अभियान के तहत सार्वजनिक किया है, जिसका उद्देश्य यह सामने लाना है कि 9/11 के हमलों से पहले अमेरिकी खुफिया एजेंसियों को क्या-क्या जानकारी थी। CIA के निदेशक John Ratcliffe ने सोशल मीडिया मंच ‘एक्स’ पर जारी बयान में कहा कि उन्होंने 9/11 में मारे गए लोगों और बाद में आतंकवाद के खिलाफ लड़ाई में जान गंवाने वाले CIA अधिकारियों को सम्मान देने के लिए राष्ट्रपति की 71 दैनिक खुफिया रिपोर्टों को सार्वजनिक करने की अनुमति दी।

CIA की इन 71 दस्तावेज़ों में से 69 को पहली बार सार्वजनिक किया गया है। Ratcliffe के अनुसार,

यह 9/11 से संबंधित CIA के खुफिया विश्लेषण का अब तक का सबसे बड़ा सार्वजनिक संग्रह है। इससे पहले डोनाल्ड ट्रंप के दूसरे कार्यकाल में राष्ट्रपति जॉन एफ. कैनेडी, उनके भाई रॉबर्ट एफ. कैनेडी और नागरिक अधिकार नेता मार्टिन लूथर किंग जूनियर की हत्याओं से संबंधित गोपनीय फाइलें भी जारी की गई थीं।

The Jerusalem Post की एक रिपोर्ट के अनुसार, नए दस्तावेज़ों के सामने आने के बाद वॉशिंगटन में एक पुरानी बहस फिर तेज हो सकती है। सवाल यह है कि क्या 9/11 को रोकने में विफलता की वजह खुफिया एजेंसियों द्वारा उपलब्ध सूचनाओं को समय रहते आपस में नहीं जोड़ पाना था, या राजनीतिक नेतृत्व और राष्ट्रीय सुरक्षा प्रतिष्ठान ने लगातार मिल रही चेतावनियों के बावजूद पर्याप्त कठोर कार्रवाई नहीं की।

9/11 आयोग ने अपनी जांच में निष्कर्ष निकाला था कि इस विफलता के लिए किसी एक एजेंसी को जिम्मेदार नहीं ठहराया जा सकता। आयोग ने इसके पीछे कई कारण बताए थे, जिनमें संभावित खतरे की कल्पना करने में विफलता, अलग-अलग सरकारी एजेंसियों के बीच कमजोर समन्वय और हमले की साजिश को नाकाम करने योग्य ठोस खुफिया जानकारी की कमी शामिल थी।

CIA भी वर्षों से यह कहती रही है कि,

अल-कायदा द्वारा अमेरिका पर हमला करने की कोशिश से जुड़े कई संकेत उपलब्ध थे, लेकिन 11 सितंबर से पहले उसके पास हमले की निश्चित तारीख, स्थान, विमानों या निशानों की पहचान करने वाली विशिष्ट जानकारी नहीं थी। ऐसी जानकारी के अभाव में हमले को सीधे रोकना संभव नहीं हुआ।

नए दस्तावेज़ इस पुराने आकलन को नहीं बदलते, लेकिन वे ऐतिहासिक रिकॉर्ड में एक महत्वपूर्ण पहलू जोड़ते हैं। इससे पता चलता है कि 19 अल-कायदा आतंकवादियों द्वारा चार यात्री विमानों का अपहरण करके करीब 3,000 लोगों की हत्या करने से कई साल पहले ही अमेरिकी खुफिया तंत्र में किसी विमान को अमेरिकी शहर पर हमला करने के लिए इस्तेमाल किए जाने की आशंका दर्ज हो चुकी थी। यह चेतावनी अमेरिकी सरकार के सर्वोच्च स्तर के नेता, खुफिया विभाग के अधिकारियों तक भी पहुंची थी।

दस्तावेज़ों के अनुसार,

केवल 2001 में ही राष्ट्रपति के लिए तैयार कम से कम 18 खुफिया रिपोर्टों में बिन लादेन का उल्लेख किया गया था। हालांकि एक महत्वपूर्ण सवाल अब भी अनुत्तरित है—
क्या राष्ट्रपति बिल क्लिंटन ने 1998 की वह रिपोर्ट स्वयं पढ़ी थी या उन्हें उसकी सामग्री के बारे में प्रत्यक्ष रूप से जानकारी दी गई थी।

उपलब्ध रिकॉर्ड से इसकी पुष्टि नहीं हो सकी है।

इस दस्तावेज़ का उल्लेख पहले 9/11 आयोग की रिपोर्ट में एक ‘खतरे संबंधी रिपोर्ट’ के रूप में किया गया था। लेकिन आयोग ने उस समय यह खुलासा नहीं किया था कि यह सूचना राष्ट्रपति की दैनिक खुफिया रिपोर्ट (PDB) प्राप्त करने वाले अधिकारियों तक भी पहुंचाई गई थी।

इन दस्तावेज़ों का सबसे अहम संदेश यही है कि 9/11 का सटीक समय, निशाना और तरीका भले ही अमेरिकी एजेंसियों को मालूम नहीं था, लेकिन बिन लादेन की अमेरिकी धरती पर हमला करने की मंशा, अल-कायदा की देश के भीतर मौजूदगी और विमानों के इस्तेमाल की संभावित योजना के बारे में वर्षों से चेतावनियां मिल रही थीं।