फारस की खाड़ी में दो दिनों में तीन जहाजों पर हमला, 44 भारतीय थे सवार
पश्चिम एशिया संकट की चपेट में भारतीय नाविक, दो दिनों में तीन जहाजों पर हमला। सभी नाविक सुरक्षित।
पश्चिम एशिया में जारी सैन्य टकराव अब समुद्री व्यापार और भारतीय नाविकों के लिए गंभीर खतरा बनता जा रहा है। समुद्री प्रशासन निदेशालय (DGMA) की ओर से तैयार रिपोर्ट के मुताबिक, 8 और 9 सितंबर को विदेशी ध्वज वाले तीन जहाजों पर हमला किया गया। इन जहाजों पर कुल 44 भारतीय नाविक सवार थे। राहत की बात यह है कि सभी चालक दल के सदस्य सुरक्षित हैं और उनका पता लगा लिया गया है।
Hindustan Times की एक रिपोर्ट के अनुसार, जिम्बाब्वे के ध्वज वाला कच्चा तेल टैंकर ‘रिस्को’ (Riesco) 8 सितंबर को रात करीब 11 बजे ओमान की खाड़ी में अमेरिकी नौसैनिक बलों के हमले की चपेट में आया। हालांकि, क्षेत्र में लगातार बिगड़ती सुरक्षा स्थिति को देखते हुए जहाज पर सवार सभी लोग हमले से पहले ही उसे छोड़ चुके थे। वे ईरान के एक बंदरगाह पर बनाए गए सुरक्षित ठिकाने में पहुंच गए थे। इस जहाज पर चालक दल के सभी 21 सदस्य भारतीय थे।
इसी दिन रात लगभग 11:30 बजे पलाऊ के ध्वज वाले एलपीजी वाहक जहाज ‘होराइजन-1’ (Horizon 1) पर खोर फक्कान के आउटर पोर्ट लिमिट क्षेत्र में हमला किए जाने की सूचना मिली। जहाज के मालिक और तकनीकी प्रबंधक केबीटी शिप मैनेजमेंट ने पुष्टि की कि उस पर सवार सभी 16 लोगों को पास से गुजर रहे दूसरे जहाज ने सुरक्षित निकाल लिया।
चालक दल में 14 भारतीय और जॉर्जिया के दो नागरिक शामिल थे। किसी भी नाविक के घायल होने की सूचना नहीं है।
तीसरी घटना 9 सितंबर को फुजैराह के पास हुई। लाइबेरिया के ध्वज वाले कच्चा तेल टैंकर ‘मेर्सिन प्रॉस्पेरिटी’ (Mersin Prosperity) पर एक प्रोजेक्टाइल यानी मिसाइल या दूसरे प्रकार का विस्फोटक हथियार गिरने की सूचना है। जहाज पर सात भारतीय नाविक सवार थे। रिपोर्ट में कहा गया है कि चालक दल के सभी सदस्य सुरक्षित हैं और उनका पता लगा लिया गया है। समुद्री प्रशासन निदेशालय की रिपोर्ट बताती है कि,
होर्मुज के पश्चिम में स्थित फारस की खाड़ी में इस समय छह भारतीय ध्वज वाले और भारतीय हितों से जुड़े आठ विदेशी ध्वज वाले जहाज मौजूद हैं। इन 14 जहाजों पर कुल 173 भारतीय नाविक सवार हैं।
इसके अतिरिक्त भारतीय ध्वज वाले और भारत की ओर आ रहे विदेशी ध्वज वाले कुल 10 जहाज अब भी फारस की खाड़ी में फंसे हुए हैं। इन्हें निकासी अभियान के लिए चिह्नित किया गया है। लेकिन क्षेत्र में जारी सैन्य कार्रवाई, मिसाइल और ड्रोन हमलों तथा समुद्री मार्गों की अनिश्चित स्थिति के कारण इन जहाजों को सुरक्षित बाहर निकालना चुनौतीपूर्ण बना हुआ है।
DGMA की रिपोर्ट के मुताबिक, पश्चिम एशिया में युद्ध शुरू होने के बाद से भारतीय ध्वज वाले जहाजों से जुड़ी चार घटनाएं सामने आई हैं। वहीं, भारतीय चालक दल वाले विदेशी ध्वज के जहाजों से संबंधित 50 घटनाएं दर्ज की जा चुकी हैं। यह आंकड़ा बताता है कि भारतीय नाविकों पर संकट केवल भारत में पंजीकृत जहाजों तक सीमित नहीं है। बड़ी संख्या में भारतीय नागरिक विदेशी कंपनियों और विदेशी ध्वज वाले व्यापारिक जहाजों पर काम करते हैं।
AP की रिपोर्ट के अनुसार,
भारतीय नाविकों वाले जहाजों पर हमले की घटनाएं नई नहीं हैं। दिसंबर 2023 में लाइबेरिया के ध्वज वाले रासायनिक टैंकर एमवी केम प्लूटो पर गुजरात के वेरावल तट से करीब 200 किलोमीटर दूर ड्रोन हमला हुआ था। जहाज सऊदी अरब से भारत आ रहा था। हमले से जहाज में आग लग गई और उसे ढांचागत नुकसान पहुंचा, लेकिन भारतीयों सहित चालक दल के सभी सदस्य सुरक्षित रहे। भारतीय नौसेना ने विमान और युद्धपोत भेजकर उसकी सहायता की थी।
जनवरी 2024 में मार्शल आइलैंड्स के ध्वज वाले तेल टैंकर एमवी मार्लिन लुआंडा पर अदन की खाड़ी में मिसाइल हमला हुआ था। जहाज पर 22 भारतीय और बांग्लादेश का एक नाविक मौजूद था। हमले के बाद जहाज में भीषण आग लग गई थी। भारतीय नौसेना के युद्धपोत आईएनएस विशाखापत्तनम की टीम ने मौके पर पहुंचकर आग बुझाने और चालक दल को बचाने में मदद की थी।
अप्रैल 2024 में पुर्तगाल के ध्वज वाले कंटेनर जहाज एमएससी एरीज को ईरान के रिवोल्यूशनरी गार्ड्स ने होर्मुज जलडमरूमध्य के पास अपने नियंत्रण में ले लिया था। जहाज पर मौजूद 25 लोगों में 17 भारतीय नागरिक थे। चालक दल की सुरक्षा और रिहाई के लिए भारत को ईरानी अधिकारियों के साथ लंबी कूटनीतिक बातचीत करनी पड़ी थी।
स्ट्रेट ऑफ होर्मुज फारस की खाड़ी को ओमान की खाड़ी और अरब सागर से जोड़ता है। खाड़ी देशों से निकलने वाले कच्चे तेल और एलपीजी का बड़ा हिस्सा इसी संकरे समुद्री मार्ग से गुजरता है। भारत अपनी ऊर्जा आवश्यकताओं के लिए खाड़ी क्षेत्र पर काफी निर्भर है। इसलिए यहां जहाजों की आवाजाही बाधित होने से न केवल भारतीय नाविकों की सुरक्षा, बल्कि देश की तेल-गैस आपूर्ति, माल ढुलाई की लागत और महंगाई पर भी असर पड़ सकता है।
ताजा हमलों के बाद भारतीय अधिकारियों के सामने दोहरी चुनौती है खासकर फारस की खाड़ी में मौजूद भारतीय नाविकों को सुरक्षित निकालना और देश की ऊर्जा आपूर्ति से जुड़े समुद्री मार्गों को चालू रखना।