चुनाव से पहले मुश्किल में घिरे नेतन्याहू, यूरोपीय देशों ने इजराइल को दिया बड़ा झटका
इजराइली अखबार HAARETZ की रिपोर्ट आने के बाद देशभर में प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू को विरोध का सामना करना पड़ रहा है।
इजराइल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू को उस रिपोर्ट के आने के बाद देश में तीखे राजनीतिक विरोध का सामना करना पड़ रहा है, जिसमें दावा किया गया है कि संयुक्त अरब अमीरात (UAE) के राष्ट्रपति मोहम्मद बिन जायद (MBZ) ने उन्हें 7 अक्टूबर 2023 के हमले से करीब 10 दिन पहले हमास की एक बड़ी कार्रवाई की चेतावनी दी थी।
प्रधानमंत्री कार्यालय ने इजराइली अखबार HAARETZ की रिपोर्ट को “सरासर झूठ” बताया है। हालांकि,
इजराइल में अक्टूबर में होने वाले चुनावों से दो महीने से भी कम समय पहले नेतन्याहू के विरोधियों ने इसे उन चेतावनियों की बढ़ती सूची का एक और उदाहरण बताया, जिन्हें प्रधानमंत्री ने नजरअंदाज किया।
CNN की एक रिपोर्ट के अनुासर, चार प्रमुख विपक्षी नेताओं— Gadi Eisenkot, Naftali Bennett, Avigdor Lieberman और Yair Golan ने एक संयुक्त बयान जारी कर नेतन्याहू की “नाकामियों और लापरवाही” की तत्काल एवं विस्तृत जांच की मांग की।
बयान में कहा गया,
इजराइली जनता को यह जानने का अधिकार है कि नेतन्याहू को क्या पता था, उन्हें कब पता चला, उन्होंने सुरक्षा एजेंसियों को इसकी जानकारी क्यों नहीं दी और नागरिकों की रक्षा के लिए कार्रवाई क्यों नहीं की?”
पूर्व प्रधानमंत्री Naftali Bennett ने रिपोर्ट को “सही” बताते हुए सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर लिखा कि,
नेतन्याहू द्वारा चेतावनियों की अनदेखी करना “आपराधिक लापरवाही” है।
पूर्व प्रधानमंत्री Yair Lapid ने कहा कि,
उन्होंने भी हमले से पहले सार्वजनिक रूप से संभावित खतरे की चेतावनी दी थी। उनके अनुसार, इजरायल के शीर्ष सुरक्षा अधिकारियों और मिस्र के अधिकारियों ने भी ऐसी चेतावनियां दी थीं।
Lapid ने कहा,
अगर नेतन्याहू ने अपनी जिम्मेदारी निभाई होती तो इस नरसंहार को रोका जा सकता था।”
इजरायली अखबार HAARETZ में प्रकाशित यह रिपोर्ट पत्रकार Shlomi Eldar और Ruth Yuval की नई किताब Kidnapped: 843 Days of Abandonment की जानकारियों पर आधारित है।
रिपोर्ट के अनुसार, UAE के राष्ट्रपति मोहम्मद बिन जायद (MBZ) ने 7 अक्टूबर से करीब 10 दिन पहले नेतन्याहू को फोन किया था। करीब 45 मिनट तक चली बातचीत में उन्होंने चेतावनी दी थी कि गाजा में हमास का नेता Yahya Sinwar इजरायल के खिलाफ एक बड़ी कार्रवाई की योजना बना रहा है, जिससे भारी रक्तपात हो सकता है और पूरा क्षेत्र अस्थिर हो सकता है।
रिपोर्ट में यह भी दावा किया गया कि सितंबर 2023 के मध्य में Yahya Sinwar ने एक फिलिस्तीनी मध्यस्थ के माध्यम से UAE और इजरायल को संदेश भेजकर आने वाले “जलजले” की चेतावनी दी थी।
HAARETZ के मुताबिक, नेतन्याहू ने इस जानकारी पर अपेक्षाकृत शांत प्रतिक्रिया दी और मोहम्मद बिन जायद (MBZ) को भरोसा दिलाया कि इजरायल किसी भी स्थिति से निपटने के लिए तैयार है।
UAE के विदेश मंत्रालय ने मंगलवार शाम जारी बयान में कहा कि वह दो देशों के राष्ट्राध्यक्षों के बीच हुई बातचीत से जुड़ी मीडिया रिपोर्टों या अटकलों पर टिप्पणी नहीं करता। हालांकि, मंत्रालय ने फोन कॉल से स्पष्ट रूप से इनकार भी नहीं किया। बयान में कहा गया, “जब भी जरूरी होता है, सभी संबंधित खुफिया जानकारियां संबंधित संस्थाओं के बीच साझा की जाती रही हैं और आगे भी की जाती रहेंगी।”
मामले से परिचित एक इजराइली सूत्र ने दावा किया कि, नेतन्याहू के कार्यालय ने UAE से HAARETZ की रिपोर्ट का खंडन करवाने का प्रयास किया था, लेकिन UAE केवल खुफिया जानकारियां साझा करने से संबंधित बयान जारी करने पर सहमत हुआ।
इजराइली प्रधानमंत्री कार्यालय ने रिपोर्ट को सिरे से खारिज करते हुए कहा,
संबंधित अवधि के दौरान नेतन्याहू ने UAE के राष्ट्रपति से बात नहीं की थी और न ही उन्हें उनकी ओर से कोई चेतावनी मिली थी।”
रिपोर्ट तैयार करने वाले पत्रकार Shlomi Eldar ने इस खंडन को चुनौती दी है। उन्होंने CNN से कहा,
रिपोर्ट सही है। मैंने इस पर करीब डेढ़ साल तक काम किया है। मेरे पास दस्तावेज और रिकॉर्ड हैं, जिनसे पता चलता है कि UAE के राष्ट्रपति ने 7 अक्टूबर से करीब डेढ़ सप्ताह पहले नेतन्याहू को फोन करके चेतावनी दी थी कि Yahya Sinwar इजरायल पर बड़े हमले की योजना बना रहा है।”
यह रिपोर्ट ऐसे समय सामने आई है जब नेतन्याहू के राजनीतिक प्रतिद्वंद्वी 7 अक्टूबर हमले की जवाबदेही को चुनाव का प्रमुख मुद्दा बनाने की कोशिश कर रहे हैं। 7 अक्टूबर 2023 को हुए हमास के हमले में 1,200 से अधिक लोग मारे गए थे और 250 से ज्यादा लोगों को बंधक बनाकर गाजा ले जाया गया था। इसे इजरायल के इतिहास का सबसे घातक हमला माना जाता है।
हमले के बाद तत्कालीन रक्षा मंत्री, सेना प्रमुख, सैन्य खुफिया विभाग, MOSSAD और Shin Bet के निदेशक या तो इस्तीफा दे चुके हैं, पद से हटाए जा चुके हैं अथवा उनका कार्यकाल समाप्त हो गया है। नेतन्याहू उस समय के लगभग सभी शीर्ष सुरक्षा अधिकारियों से अधिक समय तक पद पर बने हुए हैं।
चुनावी सर्वेक्षणों में नेतन्याहू के प्रमुख प्रतिद्वंद्वी बताए जा रहे Gadi Eisenkot ने कहा कि,
रिपोर्ट से पता चलता है कि नेतन्याहू ने इजरायल को “आंखें बंद करके” 7 अक्टूबर की विफलता की ओर बढ़ाया। उन्होंने सत्ता में आने पर सरकारी जांच आयोग गठित करने का वादा दोहराया। हमले के करीब तीन वर्ष बाद भी नेतन्याहू ने पीड़ित परिवारों और जीवित बचे लोगों की ओर से स्वतंत्र जांच आयोग गठित करने की मांग स्वीकार नहीं की है। नेतन्याहू और उनके सहयोगी इसके बजाय सुरक्षा प्रमुखों को जिम्मेदार ठहराते रहे हैं। हमले से पहले की रात हमास की संभावित कार्रवाई से जुड़े खुफिया संकेत मिलने के बावजूद सुरक्षा अधिकारियों ने प्रधानमंत्री को नहीं जगाया।
पिछले महीने नेतन्याहू की पत्नी Sara Netanyahu ने आरोप लगाया था कि,
वामपंथी डेमोक्रेट्स पार्टी के नेता और सेवानिवृत्त मेजर जनरल Yair Golan को हमले की पहले से जानकारी हो सकती थी। उन्होंने सवाल किया था कि Golan सुबह-सुबह दक्षिणी इजरायल जाने के लिए “पहले से तैयार” कैसे थे, जबकि प्रधानमंत्री समेत अन्य लोगों को कुछ पता नहीं था।
Golan ने इसे “घिनौना षड्यंत्र सिद्धांत” बताते हुए माफी की मांग की और मानहानि का मुकदमा दायर करने की चेतावनी दी।
HAARETZ की रिपोर्ट सामने आने के बाद Yair Golanने X पर लिखा,
“हमें जगाया नहीं गया वाला नैरेटिव खत्म हो गया है। नेतन्याहू को पता था और उन्हें चेतावनी दी गई थी।”
उन्होंने इसे “निर्णय लेने में हुई सामान्य गलती नहीं, बल्कि जानबूझकर किया गया आपराधिक कृत्य” बताया। इसके कुछ घंटों बाद डेमोक्रेट्स पार्टी ने तेल अवीव के मुख्य राजमार्ग के ऊपर एक विशाल होर्डिंग लगाया। उस पर लिखा था-
1,200 लोगों की हत्या की फाइल: लापरवाही से मौत का कारण।”
उधर एक ताजा घटनाक्रम में ब्रिटेन, कनाडा और फ्रांस समेत 12 देशों ने मंगलवार को घोषणा की कि वे कब्जे वाले वेस्ट बैंक में बनी इजराइली बस्तियों के साथ व्यापार पर प्रतिबंध लगाएंगे। यह फैसला फिलिस्तीनियों के खिलाफ इजराइली लोगों और सरकार की तरफ से बढ़ती हिंसा के बीच लिया गया है। डेनमार्क, फिनलैंड, आइसलैंड, आयरलैंड, नॉर्वे, पोलैंड, पुर्तगाल, स्पेन और स्वीडन भी इन बस्तियों के साथ व्यापार पर पाबंदियां लगाने की तैयारी कर रहे हैं। इन देशों के विदेश मंत्रियों ने एक संयुक्त बयान में इसकी जानकारी दी।
हाल के हफ्तों में वेस्ट बैंक के फिलिस्तीनी गांवों पर इजराइली बाशिंदों के हमले बढ़े हैं। इन घटनाओं की अंतरराष्ट्रीय समुदाय ने व्यापक निंदा की है।
आयरलैंड और स्पेन पहले ही इजराइली बस्तियों से होने वाले व्यापार के खिलाफ कदम उठा चुके हैं। फ्रांस भी कई हफ्तों से यूरोपीय संघ के स्तर पर इसी तरह का फैसला लेने की मांग कर रहा है। हालांकि, कुछ सदस्य देशों के विरोध के कारण अभी तक इस पर सहमति नहीं बन सकी है। यूरोपीय संघ इजराइल का सबसे बड़ा व्यापारिक साझेदार है।
संयुक्त बयान में 12 देशों के विदेश मंत्रियों ने कहा कि,
वेस्ट बैंक में इजराइली सरकार की गतिविधियां ‘दो-राष्ट्र समाधान की संभावना को कमजोर कर रही हैं’। दो-राष्ट्र समाधान के तहत इजराइल और फिलिस्तीन को दो अलग-अलग देशों के रूप में शांतिपूर्वक साथ रहने की परिकल्पना की गई है।
संसद को संबोधित करते हुए ब्रिटेन के विदेश मंत्री एड मिलिबैंड ने घोषणा की कि ब्रिटेन इजरायली कब्जे वाले फिलिस्तीनी क्षेत्रों में बनी अवैध बस्तियों से आने वाले सामान पर आयात प्रतिबंध लगाएगा।
एड मिलिबैंड ने कहा,
मुझे नहीं लगता कि ब्रिटेन के लोग चाहते हैं कि हमारी दुकानों और सुपरमार्केट में इन इजरायली कब्जे वाली बस्तियों के उत्पाद बेचकर हम कब्जे का समर्थन करें।