Editorial

क्या जन गण मन अंग्रेजों की तारीफ में लिखा गया है?
Politics

क्या जन गण मन अंग्रेजों की तारीफ में लिखा गया है?

रवींद्रनाथ से स्वंय एक युवा पुलिंद बिहारी सेन के आरोपों का जवाब देते हुए एक पत्र लिखकर विस्तार से बताते हुए लिखा था कि, "कांग्रेस के अधिवेशन का आयोजन चल रहा था। सरकार में प्रतिष्ठावान में मेरे एक मित्र ने जॉर्ज पंचम के जयगान के लिए विशेष रूप से मुझे अनुरोध किया। आश्चर्यचकित होने के साथ मेरे मन में गुस्सा भी हुआ। उसी की प्रबल प्रक्रिया में मैंने जन गण मन गीत में उस भारत भाग्य विधाता के जय की घोषणा की- पतन-अभ्युदय-वंधुर-पंथा, युग-युग से धावित यात्रियों के जो चिर सारथी हैं, जो जनता के अंतर्यामी पथ परिचारक हैं। मेरे राजभक्त मित्र भी समझ गए थे कि युग-युगांतर के वो मानव रथ चालक किसी भी हालत में पांचवे या छठे जॉर्ज नहीं हो सकते।"

18 Aug, 2026

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