Politics

The Credible News : सवाल, संवाद और सरोकारी पत्रकारिता की ज़िद

Ashok Kumar Pandey Ashok Kumar Pandey | 09 Aug, 2026 · 4 min read
The Credible News : सवाल, संवाद और सरोकारी पत्रकारिता की ज़िद

हमारी नई न्यूज़ वेबसाइट के लॉन्च के अवसर पर

यह समय सूचनाओं के विस्फोट का है।

ख़बर चार घंटे में पुरानी हो जाती है। अखबारों की हेडलाइंस रात को सोशल मीडिया पर फैल चुकी होती है और सुबह तक बासी हो जाती है। ट्विटर है, फेसबुक है, यूट्यूब है।

साथ में यह प्रचार है कि लोगों का एकाग्रता स्पैन लगातार कम होता जा रहा है। लोग पढ़ना नहीं देखना चाहते हैं। ख़बर भी मनोरंजन है, मनोरंजन ही ख़बर है। फ़ेक और रीयल के बीच का भेद मिटता चला जा रहा है। ए आई हर मर्ज़ का इलाज़ है। लेखक और पाठक के बीच का फ़र्क़ खत्म हो रहा है। सच और झूठ के बीच का फ़र्क़ धुँधला रहा है। और ऐसी ही कितनी ही बातें।

ऐसे में हम द क्रेडिबल न्यूज़ के नाम से यह नई ख़बरी वेबसाईट लेकर आए हैं तो पहला सवाल यही आता है मन में कि आखिर क्यों? क्या ज़रूरत थी इसकी? ऐसा क्या कर देगा यह जो पहले नहीं हो रहा? कौन पढ़ेगा? क्यों पढ़ेगा?

सवाल एकदम जायज़ हैं और इस वेबसाइट की सबसे बड़ी ज़िम्मेदारी ही इन सवालों के मुकम्मल जवाब ढूँढ़ना है, क्योंकि अभी जो हमारे पास है वह एक उत्साह है, एक जुनून है, एक धुंधली सी तस्वीर है उस ख्वाब की, जिसे हम हक़ीक़त में बदलना चाहते हैं।

द क्रेडिबल हिस्ट्री नाम से जब हमने यूट्यूब चैनल शुरू किया था तो भी हमारे पास बस यही था- एक उत्साह , एक जुनून , एक धुंधली सी तस्वीर उस ख्वाब की, जिसे हम हक़ीक़त में बदलना चाहते थे। इतिहास से अंतर्राष्ट्रीय और राष्ट्रीय ख़बरों तक कवर करते हमने बहुत कुछ सीखा और आप सबने जिस तरह का समर्थन दिया, साथ दिया, उसने हमारी हिम्मत कई गुना बढ़ा दी।

समाचार सूचना नहीं है।

बाढ़ आई, एक गाँव बह गया, यह एक सूचना है, लेकिन तब तक अधूरी है यह सूचना जब तक यह न बताया जाए कि आज़ादी के अस्सी साल बाद भी ऐसी कोई व्यवस्था नहीं की गई जिससे इसे रोका जा सके या यह कि पास का जंगल किसी उद्योगपति के लिए न कटता तो गाँव न बहता। तो सूचना सिर्फ़ शुरुआत, विवेचना है जो उसे समाचार बनाती है। उसकी पूरी तस्वीर पेश करती है।

इसलिए शुरुआत हम यहीं से कर रहे हैं कि सूचनाओं के बंबार्डमेन्ट की जगह हमारा ज़ोर विवेचना पर है।

अपने लिए हमने जो राह चुनी है, वह है- सवाल, संवाद, सरोकार।

सवाल

पत्रकारिता का पहला काम शक करना है, सवाल पूछना है।

सवाल सत्ता से। सवाल ताक़तवर से। सवाल उनसे जो नीतियाँ बनाते हैं।

ताक़तवर के सामने झुका और ग़रीब के सामने अड़ा व्यक्ति और कुछ भी हो सकता है, पत्रकार नहीं हो सकता।

हमारी कोशिश जनता का प्रवक्ता बनने की है। हमारी कोशिश उन सवालों को सामने लाने की है, जो सत्ता के शोर में दब जाते हैं।

संवाद

लोकतंत्र का पूरा ढाँचा संवाद पर आधारित है। संसद क्या है? वह जगह जहाँ पक्ष-विपक्ष संवाद करते हैं, सवाल पूछते हैं। कोर्ट में भी पक्ष विपक्ष संवाद करते हैं, बहस करते हैं।

असल में लोकतंत्र और तानाशाही में सबसे बड़ा अंतर ही यही है कि तानाशाही में सवाल पूछने या संवाद की जगह नहीं होती। एक व्यक्ति का आदेश अंतिम होता है। इसीलिए तानाशाह ऐसी पत्रकारिता चाहता है जो जनता से संवाद न करे बल्कि उसके कहे को ही आखिरी सच की तरह पेश करती रहे। विरोध की हर आवाज़ को एंटी नेशनल बना दिया जाता है। तानाशाह की तारीफ़ और अंधभक्ति को ही देशभक्ति बना दिया जाता है। ईमानदार पत्रकारिता इसका प्रतिरोध तैयार करती है।

और यह प्रतिरोध जनता की शक्ति के बिना संभव नहीं इसीलिए सत्ता की जगह जनता से संवाद ज़रूरी है। हमारी कोशिश इसी संवाद को स्थापित करने की है। हमारे लिए आप सब संवाददाता हैं। आप सब यहाँ लिख सकते हैं। अपने आसपास की समस्याओं से हमें अवगत करा सकते हैं।

यह संवाद जितना विस्तृत और जितना मज़बूत होगा, लोकतंत्र की सेहत उतनी ही बेहतर होगी।

सरोकार

आज़ादी की लड़ाई में जो अखबार निकले, उनका उद्देश्य देश में सामाजिक-राजनैतिक चेतना का प्रसार था। उनका सरोकार बेहद स्पष्ट था और इसीलिए पत्रकारिता को पैसे कमाने से ज़्यादा सामाजिक काम माना गया।

समय बदला। पत्रकारिता फ़ायदे के धंधे में बदली। बड़े पैसेवाले उतरे और फिर अखबार धीरे-धीरे उनके दूसरे धंधों के लिए ढाल बन गया। ज़ाहिर है ऐसे में सामाजिक सरोकारों के लिए जगह काम होती गई और फिर तो गोदी मीडिया का ज़माना आया जहाँ चैनलों पर दो बड़े बिजनेस घरानों का क़ब्ज़ा हो गया। ऐसे-ऐसे पत्रकार आए जो क़ीमतें बढ़ने का भी फ़ायदा बताने लगे!

द क्रेडिबल न्यूज़ पर हमारी कोशिश उसी सामाजिक ज़िम्मेदारी को पूरा करने की है।

इन इरादों से हम शुरू कर रहे हैं, कहाँ तक पहुँच पाएंगे, यह तो वक़्त बताएगा।

उम्मीद यही कि आपका हमेशा की तरह सहयोग मिलता रहेगा।

आपका

Ashok Kumar Pandey

Ashok Kumar Pandey

Ashok Kumar Pandey is the Managing Editor of The Credible News.