ज्ञानेश कुमार ने पूर्व IAS अधिकारी को भाजपा के टिकट पर चुनाव लड़ने का दिया था प्रस्ताव?
थॉमसन के मुताबिक ज्ञानेश कुमार उस दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की काफी प्रशंसा कर रहे थे।
केरल के पूर्व मुख्य सचिव जिजी थॉमसन ने आरोप लगाया है कि वर्तमान मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) ज्ञानेश कुमार ने उन्हें 2019 के लोकसभा चुनाव में भारतीय जनता पार्टी (BJP) के उम्मीदवार के रूप में चुनाव लड़ने के लिए मनाने की कोशिश की थी।
इस मामले में लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने भी शनिवार को मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) ज्ञानेश कुमार पर गंभीर आरोप लगाए। राहुल गांधी ने आरोप लगाया कि ज्ञानेश कुमार ने पहले भारतीय जनता पार्टी (BJP) के लिए लोगों को चुनाव लड़ने के लिए तैयार करने का काम किया और अब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और गृह मंत्री अमित शाह ने उन्हें भारत के चुनावों का "अंपायर" बनाकर चुनावों में "मैच फिक्सिंग" की जिम्मेदारी दे दी है।
राहुल गांधी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X (पूर्व में ट्विटर) पर एक पोस्ट में कहा,
सबसे पहले, ज्ञानेश कुमार, जो उस समय केरल कैडर के सेवारत IAS अधिकारी थे, का इस्तेमाल BJP के लिए लोगों को भर्ती करने के लिए किया गया। फिर मोदी और शाह ने उन्हें अंपायर बना दिया और भारत के चुनावों में मैच फिक्सिंग की जिम्मेदारी सौंप दी।"
राहुल गांधी ने अपनी पोस्ट के साथ कांग्रेस की केरल इकाई की एक पोस्ट भी साझा की, जिसमें एक समाचार रिपोर्ट का वीडियो था। इस रिपोर्ट में केरल के पूर्व मुख्य सचिव जीजी थॉमसन द्वारा ज्ञानेश कुमार को लेकर लगाए गए आरोपों का उल्लेख किया गया था।
The Wire की एक रिपोर्ट के अनुसर, केरल के पूर्व मुख्य सचिव जीजी थॉमसन ने दावा किया है कि ज्ञानेश कुमार ने उन्हें 2019 का लोकसभा चुनाव BJP के टिकट पर लड़ने का प्रस्ताव दिया था।
थॉमसन के अनुसार,
ज्ञानेश कुमार ने उनसे उनके भविष्य की योजनाओं के बारे में पूछा और जानना चाहा कि क्या वह 2019 के लोकसभा चुनाव में BJP के टिकट पर चुनाव लड़ सकते हैं। थॉमसन का दावा है कि कुमार ने उनसे कहा था कि चुनाव जीतने के बाद वह केंद्र में मंत्री बन सकते हैं। थॉमसन ने बताया कि उन्होंने इस प्रस्ताव को तुरंत ठुकरा दिया, क्योंकि उनकी चुनाव लड़ने में कोई रुचि नहीं थी।
ज्ञानेश कुमार को लेकर सामने आया यह दावा ऐसे समय में आया है जब विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) समेत चुनाव आयोग के कामकाज को लेकर राजनीतिक विवाद चल रहा है। चुनाव आयुक्त सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी ने 10 महीनों के दौरान कम से कम 14 बार ऐसे फैसलों और आदेशों पर औपचारिक आपत्ति दर्ज कराई थी, जिन्हें कथित तौर पर उनकी जानकारी के बिना जारी किया गया था। इन रिपोर्टों के बाद चुनाव आयोग के तीनों सदस्यों के बीच मतभेद की खबरें सामने आई थीं।
हालांकि, शनिवार को चुनाव आयोग ने इन खबरों का खंडन करते हुए कहा कि आयोग के तीनों सदस्यों के बीच किसी तरह का मतभेद नहीं है। आयोग ने स्पष्ट किया कि SIR से जुड़े सभी फैसले पूर्ण आयोग की मंजूरी के बाद ही लिए गए हैं।
The Wire की एक रिपोर्ट के अनुसर,
जिजी थॉमसन ने बताया कि यह घटना उस समय की है जब वह केरल के मुख्य सचिव के पद पर कार्यरत थे। उन्होंने कहा कि दिल्ली जाने वाली एक उड़ान के दौरान ज्ञानेश कुमार ने उनसे केरल से BJP उम्मीदवार के तौर पर चुनाव लड़ने की संभावना के बारे में पूछा था।
थॉमसन के मुताबिक,
ज्ञानेश कुमार उस दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की काफी प्रशंसा कर रहे थे और उन्होंने उनसे पूछा कि क्या वह 2019 के लोकसभा चुनाव में पथानामथिट्टा सीट से BJP उम्मीदवार के रूप में चुनाव लड़ने में रुचि रखते हैं।
थॉमसन ने कहा कि,
ज्ञानेश कुमार ने उन्हें चुनाव लड़ने के लिए काफी मनाने की कोशिश की, लेकिन उन्होंने तुरंत प्रस्ताव को ठुकरा दिया। थॉमसन ने बताया कि ज्ञानेश कुमार ने उन्हें एक से अधिक बार चुनावी राजनीति में आने के लिए मनाने की कोशिश की थी।
बता दें कि ज्ञानेश कुमार 1988 बैच के केरल कैडर के IAS अधिकारी हैं। वहीं, जिजी थॉमसन 2016 में केरल के मुख्य सचिव पद से सेवानिवृत्त हुए थे। SIR की प्रक्रिया को लेकर ज्ञानेश कुमार की भूमिका पर राजनीतिक दलों और अन्य पक्षों की ओर से सवाल उठाए जा रहे हैं। रिपोर्टों के अनुसार, पिछले 10 महीनों में दो चुनाव आयुक्तों ने उनके कुछ फैसलों पर 14 बार औपचारिक आपत्ति दर्ज की है।
उधर, केरल के पूर्व मुख्य निर्वाचन अधिकारी (CEO) टीका राम मीणा ने भी ज्ञानेश कुमार के कामकाज को लेकर सवाल उठाए हैं। मीणा ने आरोप लगाया कि फॉर्म-6 से जुड़े बदलावों को लागू करते समय ज्ञानेश कुमार ने अन्य दो चुनाव आयुक्तों के विचारों की अनदेखी की। मीणा और ज्ञानेश कुमार एक ही बैच के अधिकारी हैं। चुनाव आयुक्त सुखबीर सिंह संधू भी उनके बैचमेट रहे हैं।
मीणा ने कहा कि,
चुनाव आयोग तीन सदस्यों वाला निकाय है और इसमें निर्णय लेते समय बहुमत की राय महत्वपूर्ण होती है। उनके अनुसार, इसके बावजूद ज्ञानेश कुमार ने मनमाने तरीके से फैसला लिया।
मीणा ने यह भी दावा किया कि,
फॉर्म-6 में किए गए बदलाव जनप्रतिनिधित्व अधिनियम, 1950 (Representation of the People Act, 1950) और चुनाव नियम, 1961 (Election Rules, 1961) के प्रावधानों के विपरीत थे।
इन आरोपों पर ज्ञानेश कुमार का पक्ष सामने आना अभी बाकी है।