Politics

मुरली मनोहर जोशी क्यों मोदी सरकार के खिलाफ लगातार उठा रहे हैं आवाज?

TCN Desk TCN Desk | 1h ago · 6 min read
मुरली मनोहर जोशी क्यों मोदी सरकार के खिलाफ लगातार उठा रहे हैं आवाज?

मुरली मनोहर जोशी ने बद्रीनाथ में हाल ही में आयोजित सांस्कृतिक कार्यक्रम पर आपत्ति जताई है।

वरिष्ठ भाजपा नेता और पूर्व केंद्रीय मंत्री मुरली मनोहर जोशी ने हालिया साक्षात्कारों और बयानों में नरेंद्र मोदी सरकार की नीतियों, कार्यप्रणाली और प्राथमिकताओं पर कई गंभीर सवाल उठाए हैं। इस कड़ी में उत्तराखंड की बीजेपी सरकार के खिलाफ उनकी एक टिप्पणी से भाजपा नेताओं की बैचेनी बढ़ गई है।

दरअसल वरिष्ठ भाजपा नेता मुरली मनोहर जोशी ने बद्रीनाथ में हाल ही में आयोजित सांस्कृतिक कार्यक्रम पर आपत्ति जताई है। उन्होंने कहा कि पवित्र धाम में संगीत और DJ कार्यक्रम की अनुमति देना सांस्कृतिक मर्यादा का उल्लंघन है और इससे तीर्थस्थल की पवित्रता प्रभावित होती है। हैरानी की बात ये है कि वरिष्ठ भाजपा नेता जोशी की यह टिप्पणी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के 25 सितंबर, शुक्रवार को दिल्ली में आयोजित ‘भजन क्लबिंग’ कार्यक्रम में शामिल होने के बाद आई है।

और यह अकारण नहीं है,

दरअसल पिछले दिनों ऐसे कई मौकों पर मोदी सरकार की नीतियों के खिलाफ मुरली मनोहर जोशी अपनी नाराजगी खुले तौर पर जाहिर करते आ रहे हैं। चाहे जंतर-मंतर प्रदर्शन के दौरान छात्रों पर किए गए लाठी चार्ज का मामला हो या नीट पेपर लीक का - वरिष्ठ भाजपा नेता जोशी ने मोदी सरकार के खिलाफ अपना आक्रोश जाहिर किया है।

जोशी ने मोदी सरकार में शिक्षा बजट में कटौती, सरकारी स्कूलों के बंद होने और बढ़ते निजीकरण पर चिंता जताई है। उन्होंने यह भी सवाल किया था कि पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी के कार्यकाल में पेपर लीक जैसी घटनाएं क्यों नहीं होती थीं और मोदी के शासन में भ्रष्टाचार बढ़ता जा रहा है। जोशी ने,

दिल्ली में हुए छात्र विरोध प्रदर्शनों के दौरान पुलिस द्वारा बल प्रयोग की भी आलोचना की और कहा कि महिलाओं तथा युवाओं पर निर्मम बल प्रयोग से समाज का एक बड़ा वर्ग सरकार से दूर हो जाएगा। इतना ही नहीं उन्होंने सरकार द्वारा सड़कों पर अत्यधिक खर्च करने और प्राथमिक शिक्षा तथा स्वास्थ्य उपेक्षा पर तंज कसते हुए कहा था कि केवल सड़कें बनाना ही विकास नहीं है।

The Hindu की एक रिपोर्ट के अनुसार, ‘हमारी विरासत, हमारा भविष्य’ विषय पर दो दिवसीय देवभूमि सांस्कृतिक महोत्सव 19 और 20 सितंबर को बद्रीनाथ के टूरिस्ट अराइवल प्लाज़ा में आयोजित हुआ था। भारतीय सेना और चमोली जिला प्रशासन ने ‘ऑपरेशन सद्भावना’ के तहत इसका आयोजन किया। कार्यक्रम में सांस्कृतिक प्रस्तुतियाँ और लाइव संगीत शामिल थे जिसमें डीजे की तेज और कर्कश ध्वनि के बीच सांस्कृतिक कार्यक्रम आयोजित हुए थे। उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी समापन समारोह में शामिल हुए थे।


इसी कार्यक्रम की आलोचना करते वरिष्ठ भाजपा नेता जोशी ने X पर लिखा है कि,

बद्रीनाथ धाम में संगीत कार्यक्रम और DJ आयोजन की अनुमति देना “सांस्कृतिक मर्यादा का उल्लंघन” और धाम की पवित्रता पर “सीधा प्रहार” है। उन्होंने कहा कि आदि गुरु शंकराचार्य ने हिमालय के शांत वातावरण में भजन और ईश्वर भक्ति के लिए बद्रीनाथ धाम की स्थापना की थी।

जोशी के मुताबिक,

इस स्थान पर शंख बजाने तक की मनाही है, लेकिन इसके बावजूद तेज़ संगीत वाले कार्यक्रम आयोजित किए जा रहे हैं। उन्होंने कहा कि इससे भारतीय आध्यात्मिक, सांस्कृतिक और पर्यावरणीय मूल्यों की अनदेखी होती है। उन्होंने ऊँचाई वाले क्षेत्र में बड़ी संख्या में लोगों के नाचने से स्वास्थ्य पर पड़ने वाले संभावित असर पर भी चिंता जताई।

जोशी ने इस आयोजन को देवभूमि में बढ़ती ‘बाज़ारू संस्कृति’ का प्रतीक बताया। उन्होंने केंद्र और उत्तराखंड सरकार से ऐसे कार्यक्रमों पर रोक लगाने की मांग की। साथ ही शंकराचार्यों, संतों और भारतीय संस्कृति के अनुयायियों से इसके खिलाफ आवाज़ उठाने की अपील की। उन्होंने कहा कि,

हिमालय को रात्रिकालीन मनोरंजन का केंद्र बनाना करोड़ों लोगों की आस्था को ठेस पहुँचाता है।

ऐसा नहीं है कि सिर्फ भाजपा के वरिष्ठ नेता जोशी ने आलोचना की है। बद्रीनाथ धाम के पास तेज़ DJ संगीत और नृत्य प्रस्तुतियों को लेकर कुछ संतों और मंदिर के पुजारियों ने भी आलोचना की है। उत्तराखंड के बद्रीनाथ धाम में आयोजित दो दिवसीय सांस्कृतिक कार्यक्रम के वीडियो सोशल मीडिया पर सामने आने के बाद विवाद खड़ा हो गया है। Free Press की रिपोर्ट के मुताबिक,

वायरल वीडियो में मंच पर संगीत प्रस्तुति और उसके सामने लोगों को नाचते देखा जा सकता है। ऐसे में तेज संगीत वाले कार्यक्रम के आयोजन को लेकर धार्मिक नेताओं, स्थानीय हितधारकों और विपक्षी कांग्रेस ने भी आपत्ति जताई है।

संतो, धार्मिक नेताओं और विपक्षी नेताओं ने सवाल उठाया है कि बद्रीनाथ मंदिर की धार्मिक महत्ता और वहां की पारंपरिक मान्यताओं को देखते हुए मंदिर के इतने करीब तेज आवाज में संगीत का कार्यक्रम क्यों आयोजित किया गया।


चारधाम तीर्थ पुरोहित महापंचायत के महासचिव बृजेश सती ने कार्यक्रम के लिए चुनी गई जगह पर आपत्ति जताई। उन्होंने कहा कि,

बद्रीनाथ में भगवान विष्णु ध्यान की मुद्रा में विराजमान माने जाते हैं, इसलिए यहां तेज आवाज को लेकर परंपरागत रूप से सावधानी बरती जाती है।

सती के मुताबिक,

स्थानीय मान्यताओं और पर्यावरणीय कारणों से बद्रीनाथ में शंख बजाने को लेकर भी परंपराएं हैं। मंदिर के प्रवेश क्षेत्र में तेज संगीत बजाना स्वीकार्य नहीं है और मंदिर के प्रवेश क्षेत्र के पास इस तरह का आयोजन उचित नहीं है।


वहीं, ज्योतिर्मठ के शंकराचार्य की ओर से भी मंदिर के नजदीक डीजे और तेज संगीत को लेकर आपत्ति जताई गई है। धार्मिक पक्ष की आपत्ति का मुख्य आधार यह है कि बद्रीनाथ केवल एक पर्यटन स्थल नहीं, बल्कि एक प्रमुख हिंदू तीर्थ है। इसलिए यहां होने वाले सार्वजनिक आयोजनों को मंदिर की परंपराओं और धार्मिक वातावरण को ध्यान में रखकर आयोजित किया जाना चाहिए।

गौरतलब है कि बद्रीनाथ उत्तराखंड के चार धामों में शामिल है और भगवान विष्णु को समर्पित प्रमुख तीर्थस्थल है और समुद्र तल से करीब 3,133 मीटर की ऊंचाई पर अलकनंदा नदी के किनारे स्थित है। हर साल बड़ी संख्या में श्रद्धालु यहां आते हैं। तीर्थयात्रियों की बढ़ती संख्या के साथ बद्रीनाथ में पर्यटन और बुनियादी ढांचे का विस्तार भी हुआ है।

यह इलाका भौगोलिक और पर्यावरणीय रूप से संवेदनशील हिमालयी क्षेत्र का हिस्सा है। ऐसे में बड़े सार्वजनिक आयोजनों के दौरान धार्मिक परंपराओं के साथ-साथ ध्वनि प्रदूषण, भीड़ प्रबंधन, यातायात, कचरा और पर्यावरण जैसे सवाल भी महत्वपूर्ण हो जाते हैं।