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SIR: सिर्फ ज्ञानेश कुमार नहीं, कैबिनेट सेक्रेटरी सोमनाथन और नरेन्द्र मोदी भी जिम्मेदार हैं

Pro. Hemantkumar Shah Pro. Hemantkumar Shah | 2h ago · 4 min read
SIR: सिर्फ ज्ञानेश कुमार नहीं, कैबिनेट सेक्रेटरी सोमनाथन और नरेन्द्र मोदी भी जिम्मेदार हैं

SIR में जो कुछ भी हुआ वह क्या चुनाव आयोग खुद करता था या कोई और करता था या किसी और की वह चाहत थी?

सच में चुनाव आयोग में SIR में जो कुछ भी हुआ वह क्या चुनाव आयोग खुद करता था या कोई और करता था या किसी और की वह चाहत थी?

The Indian Express अख़बार में रितिका चोपड़ा ने जो रपट अभी 23 सितम्बर के दिन लिखी है, इसमें यह बताया गया है कि किस प्रकार से चुनाव आयोग स्वतंत्र और स्वायत्त तरीके से काम नहीं कर रहा है। जबकि आयोग को भारत के लोकतंत्र को मद्देनजर रखते हुए काम करना चाहिए एवं जो हमारे संविधान का प्रावधान है। रपट के अनुसार, दोनों चुनाव आयुक्तों ने जो आरोप लगाया है, इसके लिए सच में अंत में जिम्मेदार कौन है?


देखिए, रितिका की रपट के अनुसार,

चुनाव आयुक्त सुखबीर सिंह संधू ने कैबिनेट सेक्रेटरी को दो बार ख़त लिखे एक ही दिन में। 29 जुलाई, 2026 को पहला ख़त लिखा और इसमें उन्होंने यह शिकायत की कि चुनाव आयोग की जानकारी के बिना ही चुनाव आयोग में काम करने वाले अधिकारियों के काम का बंटवारा बदल दिया गया।

इसमें एक काम था चुनाव आयोग का जो IT डिविज़न है इस पर आतंरिक निगरानी रखना। यह काम सँभालने वाले अधिकारी थे संजय कुमार। लेकिन 28 जुलाई 2026 को मनीष गर्ग नाम के एक वरिष्ठ डेप्युटी चुनाव आयुक्त को चुनाव आयोग के प्रशासन का चार्ज दिया गया और तुरंत उन्होंने आयोग के आयुक्तों के साथ परामर्श किये बिना ही संजय कुमार को इस काम से हटा दिया। मनीष गर्ग को किसने इस काम के लिए नियुक्त किया? कैबिनेट सेक्रेटरी ने। इसके बारे में संधू और अन्य चुनाव आयुक्त विवेक जोशी ने कैबिनेट सेक्रेटरी को अलग-अलग ख़त लिखकर आपत्ति जताई। और इसे चुनाव आयोग जिस कानून के तहत कार्य कर रहा है इस का उल्लंघन बताया और यह भी कहा कि मनीष गर्ग के खिलाफ कार्रवाई की जाए।

लेकिन ऐसा कुछ नहीं हुआ क्योंकि मनीष गर्ग को शायद यही काम करने के लिए प्रशासन का अधिक चार्ज दिया गया था। मनीष गर्ग ने जो किया इसका नतीज़ा यह हुआ कि IT डिविज़न की जो सभी फाइलें संधू और जोशी के पास निगरानी के लिए आम तौर पर आती थी वह आना बंद हो गई! मतलब, चुनाव आयोग जो कुछ भी SIR के बारे में काम करता था इस की जानकारी अब दो आयुक्तों को ना मिले इस का प्रावधान प्रशासन में किया गया। हालाँकि मनीष गर्ग के आदेश को 30 जुलाई के दिन संधू और जोशी ने रद्द कर दिया। लेकिन सवाल इस बात का है कि ऐसा कैबिनेट सेक्रेटरी सोमनाथन ने किया क्यों था?

दूसरी ओर, 14 अगस्त 2026 को सुखबीर सिंह संधू ने ख़त लिख कर यह कहा कि मुख्य मतदाता अधिकरी (CEO), जिला मतदाता अधिकारी (DEO) और मतदाता पंजीकरण अधिकारी (ERO) होते हैं वे सब वैधानिक तौर पर अधिकारी हैं लेकिन वे चुनाव आयोग की जो आईटी सिस्टम है इसको देख ही नहीं पाते! मतलब यह हुआ कि जो देख पाते हैं वे सीधे कैबिनेट सेक्रेटरी के साथ ही संपर्क रखते हैं, चुनाव आयोग से उनका कोई लेनदेन है ही नहीं! तो फिर कैसे कहा जा सकता है कि चुनाव आयोग स्वतन्त्र रूप से काम कर रहा है?

वह कौन है जो चुनाव आयोग की आईटी सिस्टम को देखता है? वह है डा. सीमा खन्ना। मतलब यह कि वैसे तो वह चुनाव आयोग में आईटी विभाग की हेड है, लेकिन वह जिम्मेदार है ही नहीं, वह तो अपने काम का रिपोर्ट देती है कैबिनेट सेक्रेटरी को। और कैबिनेट सेक्रेटरी रिपोर्ट देते हैं प्रधानमंत्री को।

अब यह जानिए कि कैबिनेट सेक्रेटरी कौन होता है। कैबिनेट सेक्रेटरी यानि मंत्रिमंडल सचिव भारत सरकार के सर्वोच्च कार्यकारी अधिकारी और वरिष्ठतम सिविल सेवक होते हैं। मंत्रिमंडल सचिव सिविल सेवा बोर्ड, मंत्रिमंडल सचिवालय, भारतीय प्रशासनिक सेवा (IAS) के पदेन प्रमुख होते हैं, और भारत की सभी सिविल सेवाएं सरकार के कार्य संचालन नियमों के तहत काम करती हैं। मंत्रिमंडल सचिव भारतीय प्रशासनिक सेवा का वरिष्ठतम कैडर पद है। मंत्रिमंडल सचिव सीधे प्रधानमंत्री के प्रभार में होते हैं। कैबिनेट सेक्रेटरी की नियुक्ति कैबिनेट नियुक्ति समिति करती है जिसके अध्यक्ष होते हैं प्रधानमंत्री।

यहाँ यह भी याद रखना चाहिए कि जो कैबिनेट सेक्रेटरी होते हैं वे मुख्य सचिव यानि प्रिंसिपल सेक्रेटरी से भी उपर का पद है। भारत सरकार के प्रशासन में उन के ऊपर कोई होता ही नहीं है। प्रिंसिपल सेक्रेटरी भी दूसरे नंबर पर आते हैं।

आज जो कैबिनेट सेक्रेटरी हैं टी. वी. सोमनाथन। इनकी नियुक्ति इस पद पर अगस्त-2024 में की गई थी। मतलब यह हुआ कि जो कुछ भी चुनाव आयोग में SIR के बारे में या इस के IT डिविज़न में हुआ वह सब आज के कैबिनेट सेक्रेटरी टी. वी. सोमनाथन ने किया है, जिनकी नियुक्ति खुद नरेन्द्र मोदी ने की है एवं जो सीधे प्रधानमंत्री के साथ काम करते हैं। यानि चुनाव आयोग में SIR के कारण जो कुछ भी 2025 से होता रहा इस के जिम्मेदार सीधे तौर पर नरेन्द्र मोदी हैं।
Pro. Hemantkumar Shah

Pro. Hemantkumar Shah

प्रो शाह जाने-माने अर्थशास्त्री हैं और गुजरात में लंबे समय तक अध्यापन के बाद लेखन और सामाजिक कार्यों में सक्रिय हैं।