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पश्चिम बंगाल चुनाव में BJP ने सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर्स पर खर्च किए लाखों रुपये : चुनाव आयोग

TCN Desk TCN Desk | 1h ago · 5 min read
पश्चिम बंगाल चुनाव में BJP ने सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर्स पर खर्च किए लाखों रुपये : चुनाव आयोग

इन इन्फ्लुएंसर्स की प्रचार सामग्री में भाजपा के पक्ष में रील, वीडियो, चुनावी गीत और राजनीतिक विश्लेषण शामिल थे।

पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव से पहले भारतीय जनता पार्टी ने राज्य के कुछ लोकप्रिय सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर्स को प्रचार सामग्री के लिए भुगतान किया था। चुनाव आयोग को सौंपे गए खर्च के आँकड़ों में यह जानकारी सामने आई है। इन इन्फ्लुएंसर्स की प्रचार सामग्री भाजपा के पक्ष में रील, वीडियो, चुनावी गीत और राजनीतिक विश्लेषण शामिल थे।

The Telegraph Online की एक रिपोर्ट के अनुसार, भुगतान पाने वालों की सूची में बंगाली अभिनेता और सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर Sayak Chakraborty का नाम भी है। आँकड़ों के मुताबिक उन्हें 2.5 लाख रुपये मिले।


चक्रवर्ती जनवरी में तब चर्चा में आए थे, जब उन्होंने आरोप लगाया कि कोलकाता के पार्क स्ट्रीट स्थित मशहूर रेस्तरां Olypub में उनके ऑर्डर किए मटन स्टेक की जगह उन्हें बीफ़ परोस दिया गया था। खाना परोसने में गलती का मामला जल्द ही सांप्रदायिक और राजनीतिक बहस में बदल गया। सोशल मीडिया पर भी इस घटना को लेकर लोगों की राय बँट गई। संबंधित वेटर को कुछ समय जेल में बिताना पड़ा। ज़मानत पर रिहा होने के बाद भी उन्हें अदालत की सुनवाई में पेश होना पड़ता है।


सूची में एक और नाम Shamik Adhikary का है, जो सोशल मीडिया पर Nonsane के नाम से जाने जाते हैं। उन्हें 13 लाख रुपये का भुगतान किया गया। जनवरी में अधिकारी ने ‘बटन’ नाम का वीडियो पोस्ट किया था।

आरजी कर बलात्कार और हत्या मामले की पृष्ठभूमि में बने इस वीडियो में उन्होंने तृणमूल कांग्रेस सरकार को निशाना बनाया और मतदाताओं से सोच-समझकर बटन दबाने की अपील की। वीडियो को काफी लोगों ने देखा और भाजपा नेताओं ने भी इसे साझा किया। फरवरी में एक महिला को गलत तरीके से बंधक बनाने और बलात्कार के आरोप में अधिकारी को गिरफ्तार किया गया था। उनकी गिरफ्तारी के बाद उस समय सत्तारूढ़ दल पर राजनीतिक बदले की कार्रवाई करने के आरोप भी लगे थे।


चुनाव आयोग के आँकड़ों के अनुसार,

भाजपा ने पश्चिम बंगाल चुनाव में 286.99 करोड़ खर्च किए। यह चार राज्यों और एक केंद्रशासित प्रदेश में हुए चुनावों पर पार्टी के कुल खर्च का 54 प्रतिशत था।

The Telegraph Online ने दोनों से प्रतिक्रिया मांगी, लेकिन किसी ने जवाब नहीं दिया। भुगतान पाने वालों की सूची में कई अन्य इन्फ्लुएंसर्स भी शामिल हैं। आयोग के आँकड़े सामने आने के बाद माकपा, तृणमूल कांग्रेस और नागरिक समाज के कुछ वर्गों ने विरोध जताया है।

सूत्रों के अनुसार, एक राजनीतिक परामर्श कंपनी ने भाजपा की ओर से इन्फ्लुएंसर्स से संपर्क किया था। भुगतान की रकम उनके सोशल मीडिया पर प्रभाव और पहुंच के आधार पर तय की गई। भाजपा के एक सूत्र ने कहा कि उन्हें विषयों को लेकर निर्देश भी दिए गए थे। सूत्र के मुताबिक, मुर्शिदाबाद में चुनाव प्रचार के लिए सीमा सुरक्षा जैसे मुद्दों पर ध्यान देने को कहा गया था, जबकि कोलकाता में आरजी कर मामला प्रमुख विषयों में था।

कानून और संचार क्षेत्र के एक से अधिक जानकारों ने कहा कि इस तरह की सामग्री को लेकर नियमों में अस्पष्टता है। सामाजिक कार्यकर्ता और अधिकार कार्यकर्ता सुमन सेनगुप्ता ने कहा कि,

पैसे लेकर किए गए प्रचार के साथ इसकी सूचना दी जानी चाहिए। उनके अनुसार, ऐसा खुलासा न होने पर दर्शक गुमराह हो सकते हैं। सेनगुप्ता ने एक पोस्ट भी साझा की, जिसमें भुगतान पाने वालों की आलोचना की गई थी।

एक संचार विशेषज्ञ ने कहा कि,

भुगतान का खुलासा न करना कम से कम नैतिक सवाल खड़े करता है। उन्होंने बताया कि किसी पार्टी के पक्ष में असर डालने के लिए सीधे उसे वोट देने की अपील करना ज़रूरी नहीं होता; विपक्षी दल पर हमला करके भी राजनीतिक संदेश दिया जा सकता है।

सूची में शामिल कोलकाता के एक इन्फ्लुएंसर ने कहा कि उन्होंने जनता की राय सामने रखी थी। उन्होंने पूछा कि ऐसी स्थिति में उन्हें भुगतान का खुलासा क्यों करना चाहिए। उनके मुताबिक, लोग तृणमूल के शासन से परेशान थे और उन्होंने उन्हीं लोगों की बात उठाई। ‘बटन’ वीडियो में भी भाजपा को वोट देने की सीधी अपील नहीं थी। वीडियो ने मतदाताओं से सोच-समझकर चुनाव करने को कहा और यह संकेत दिया कि महिलाओं की सुरक्षा के मामले में बंगाल की स्थिति चिंताजनक है।

तृणमूल विधायक कुणाल घोष, माकपा नेता शतरूप घोष और विपक्ष के कई अन्य सदस्यों ने सामग्री बनाने वाले इन्फ्लुएंसर्स तथा भाजपा की आलोचना की। तृणमूल की आईटी सेल प्रमुख और ममता बनर्जी की करीबी सहयोगी उपासना चौधरी ने Olypub के सामने बनाया गया अपना एक पुराना वीडियो फिर साझा करते हुए चक्रवर्ती पर निशाना साधा। पोस्ट के कैप्शन में उन्होंने बंगाली में पूछा कि,

क्या सायक बाबू ने 2.5 लाख रुपये ‘हज़म’ कर लिए। वीडियो में चौधरी ने खुद को सनातनी बताने वाले चक्रवर्ती के बीफ़ परोसने के लिए पहचाने जाने वाले रेस्तरां में जाने पर सवाल उठाया था। विवाद के समय भी कई लोगों ने यही सवाल किया था।

बंगाल भाजपा के मुख्य प्रवक्ता देबजीत सरकार ने भुगतान का बचाव किया। उन्होंने कहा,

हां, हमने इन्फ्लुएंसर्स को पैसे दिए हैं। तो क्या हुआ? हम फिर ऐसा करेंगे।” उनका कहना था कि पैसा सरकारी नहीं, पार्टी के कोष से दिया गया और हर रुपये का हिसाब दर्ज है। उन्होंने दावा किया कि पार्टी ने प्रचार के उपलब्ध माध्यमों का इस्तेमाल सभी नियमों और औपचारिकताओं का पालन करते हुए किया।

राजनीतिक दलों द्वारा अपने चुनावी अभियान को आगे बढ़ाने के लिए इन्फ्लुएंसर्स को भुगतान करना पहले से प्रचलित है। इस मामले में उठे सवाल का केंद्र यह है कि दर्शकों को किसी राजनीतिक सामग्री के भुगतान से जुड़े होने की जानकारी मिलनी चाहिए या नहीं।