Politics

राम मंदिर चढ़ावा चोरी मामले में चंपत राय बनाए गए सरकारी गवाह, हुए कई बड़े खुलासे

TCN Desk TCN Desk | 55m ago · 6 min read
राम मंदिर चढ़ावा चोरी मामले में चंपत राय बनाए गए सरकारी गवाह, हुए कई बड़े खुलासे

चार्जशीट में पुलिस ने माना कि चढ़ावे चोरी नोट गिनने और की छंटाई में लगे कर्मचारियों ने ही की।

राम मंदिर में श्रद्धालुओं के चढ़ावे चोरी के मामले में दाखिल आरोप पत्र में श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के पूर्व महासचिव चंपत राय और पूर्व ट्रस्टी अनिल कुमार मिश्रा को अभियोजन पक्ष का गवाह बनाया गया है। आरोप सामने आने के बाद दोनों की भूमिका को लेकर लगातार विपक्ष हमलावर थे और राजनीतिक सवाल उठ रहे थे। है। चार्जशीट में पुलिस ने माना कि चढ़ावे चोरी नोट गिनने और की छंटाई में लगे कर्मचारियों ने ही की। CCTV को अहम सबूत माना गया। इसी के सबूत दिए गए हैं।

लेकिन कमाल की बात ये है कि इस मामले में किसी भी आरोपी को अभी तक दोषी नहीं ठहराया गया है। दरअसल, जांच की गति और लेटलतीफी से ये पूरा मामला अब और संदिग्ध होता जा रहा है। दो-दो एसआईटी गठित करना और फिर चार्जशीट दाखिल करना। इस प्रक्रिया में लंबा समय बीत गया। जाहिर है यह पूरा मामला यूपी विधानसभा चुनाव तक खीचेंगा और नतीजा कुछ नहीं निकलेगा। यह पूरी कवायद बड़ी मछलियों को बचाने के लिए की जा रही है।


इस मामले में पुलिस ने,

फैजाबाद जिला कोर्ट में 73,480 पन्नों की चार्जशीट दाखिल की है। बता दें कि चढ़ावे की रकम चोरी होने का मामला पहली बार 4 जून, 2026 को सामने आया। चार्जशीट के मुताबिक, काउंटिंग रूम में कर्मचारियों को चढ़ावे के रुपए छिपाते हुए एक कर्मचारी ने ही देखा था। कर्मचारी आनंद चौधरी ने इसकी जानकारी तत्कालीन ट्रस्ट महासचिव चंपत राय को दी और वीडियो भी भेजा। वीडियो में कुछ कर्मचारी कमर में नोटों की गड्डियां छिपाते नजर आ रहे थे। आनंद ने आशंका जताई कि चोरी में करीब 67 कर्मचारी शामिल हो सकते हैं।

Hindustan Times की एक रिपोर्ट के अनुसार, घटना के दिन यानी 4 जून को चंपत राय अयोध्या में नहीं थे। 5 जून को चंपत ने अनिल मिश्रा, गोपाल राव और डॉ. नरेंद्र के साथ CCTV फुटेज देखे। इसके बाद मंदिर परिसर के CCTV फुटेज खंगाले गए। पुलिस के मुताबिक, चढ़ावा चोरी से जुड़ी 105 घटनाएं कैमरों में रिकॉर्ड मिलीं। 173 गवाहों के बयान दर्ज किए गए। चार्जशीट में पुलिस ने 8 आरोपियों के खिलाफ CCTV फुटेज, मोबाइल से मिले डिजिटल साक्ष्य, गवाहों के बयान, बैंक खातों में नकद जमा, संपत्तियों की खरीद और बरामदगी के सबूत पेश किए हैं। ट्रस्ट के पूर्व महासचिव चंपत राय, डॉ. अनिल मिश्रा और गोपाल राव को आरोपी नहीं, बल्कि गवाह बनाया गया है।


गौरतलब है कि 23 सितंबर को अयोध्या की विशेष भ्रष्टाचार निरोधक अदालत में दाखिल चार्जशीट के 59 पन्नों वाले शुरुआती हिस्से में कुल 133 गवाहों के नाम हैं। इनमें ट्रस्ट के तत्कालीन कार्यवाहक महासचिव और मामले के शिकायतकर्ता कृष्ण मोहन तथा ट्रस्ट के पूर्व विशेष आमंत्रित सदस्य एवं विहिप पदाधिकारी गोपाल एम. नागरकट्टे, जिन्हें गोपाल राव भी कहा जाता है, शामिल हैं।

चार्जशीट में चढ़ावे की गिनती करने वाले छह कर्मचारियों—अविनाश शुक्ला उर्फ शनि, अनुकल्प मिश्रा, लवकुश मिश्रा, मनीष कुमार यादव, करुणेश पांडे और रामाशंकर मिश्रा—को आरोपी बनाया गया है। सुभाष श्रीवास्तव और रामाशंकर यादव उर्फ टिन्नू दो अन्य आरोपी हैं।

जांच के दायरे में आने वाली अवधि में मिश्रा और राय ट्रस्ट में अहम पदों पर थे। जांचकर्ताओं ने चढ़ावे को संभालने की व्यवस्था के बारे में दोनों से पूछताछ की थी। मिश्रा का नाम लखनऊ के मंडलायुक्त विजय विश्वास पंत की अगुवाई वाली पहली विशेष जांच टीम की प्रारंभिक जांच में भी आया था। बाद में दोनों ने ट्रस्ट के अपने-अपने पदों से इस्तीफा दे दिया। ट्रस्ट ने 27 जून को उनके इस्तीफों की घोषणा की थी।

जांचकर्ताओं ने ट्रस्ट से जुड़े इन पदाधिकारियों के बयानों के आधार पर चढ़ावा इकट्ठा करने, उसकी गिनती करने और बैंक में जमा करने की प्रक्रिया का विवरण दिया है। मामला इस आरोप से जुड़ा है कि मंदिर परिसर में गिनती के दौरान नकद चढ़ावे का कुछ हिस्सा बैंक में जमा होने से पहले निकाल लिया गया या छिपा दिया गया।

चार्जशीट के मुताबिक,

छह गिनती कर्मचारियों को चढ़ावे की छंटाई और गिनती की जिम्मेदारी दी गई थी। जांचकर्ताओं का आरोप है कि उन्होंने नकदी तक अपनी पहुंच का दुरुपयोग किया और दो अन्य आरोपियों के साथ मिलकर चढ़ावे का कुछ हिस्सा हड़प लिया।


सुप्रीम कोर्ट के समक्ष रखी गई विशेष जांच टीम की स्थिति रिपोर्ट के अनुसार,

सीसीटीवी फुटेज और अन्य डिजिटल साक्ष्यों के विश्लेषण में गिनती कक्ष के भीतर नोटों को बिना अनुमति निकालने या छिपाने की 105 घटनाएं सामने आईं।

जांचकर्ताओं ने बैंक खातों, संपत्ति के लेनदेन, मोबाइल फोन डेटा और अन्य इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्यों की भी जांच की। शिकायतकर्ता कृष्ण मोहन की शिकायत पर प्राथमिकी दर्ज होने के एक दिन बाद, 26 जून को सभी आठ आरोपियों को गिरफ्तार किया गया था। आरोप पत्र 23 सितंबर को दाखिल किया गया, जो पहली गिरफ्तारियों से जुड़ी 90 दिन की वैधानिक अवधि की 25 सितंबर की समय सीमा से दो दिन पहले था। आठों के खिलाफ लगाए गए आरोप अभियोजन पक्ष के दावे हैं, जिनकी सुनवाई के दौरान जांच होगी।

पुलिस ने मोबाइल फोन से मिले टेक्स्ट मैसेज को भी महत्वपूर्ण सबूत बताया है। अनुकल्प मिश्रा, अविनाश शुक्ला और लवकुश मिश्रा के बीच कैश के बंडल रखने, छिपाने, अदला-बदली करने और इधर-उधर ले जाने से संबंधित मैसेज मिले हैं। CDR में इनकी बातचीत होने के सबूत हैं।
पुलिस जांच में कई आरोपियों व उनके परिजन के खातों में नकद जमा, जमीन/मकान, कार, बाइक, कैमरा और आभूषण खरीदने की जानकारी मिली है। पुलिस ने माना कि ये सब चोरी के रुपयों से खरीदा गया है।

चार्जशीट के मुताबिक,

CCTV फुटेज में अविनाश शुक्ला उर्फ सनी 85 बार खुद दान/चढ़ावे की रकम हटाते हुए और 4 बार दूसरे आरोपियों की मदद करते हुए दिखाई दिया। उसकी निशानदेही पर 20.39 लाख रुपए, 4,424 अमेरिकी डॉलर, चांदी-सोने के आभूषण और बाद में ब्रेजा कार बरामद करने का दावा किया गया है।
आरोपी लवकुश मिश्रा ने चोरी के रुपयों से पत्नी सुप्रिया मिश्रा के नाम 22.52 लाख रुपए की जमीन खरीदी और उस पर करीब 20.91 लाख रुपए से मकान बनाया। CCTV में लवकुश 4 बार खुद रकम हटाते दिख रहा है।
अनुकल्प मिश्रा के पिता रविंद्र मिश्रा के नाम खरीदे गए करीब 55 लाख रुपए के मकान का पैसा कहां से आया। इसकी जांच में 29.5 लाख बैंक ट्रांसफर और 25 लाख रुपए नकद भुगतान की जानकारी सामने आई, जिससे मकान खरीदा गया।
चार्जशीट में करुणेश पांडेय की पत्नी रूपा के SBI खाते में करीब 78.55 लाख रुपए नकद जमा मिलने का आरोप है। भाई के खातों में भी नकद जमा का विवरण दिया गया है। पुलिस ने CCTV में करुणेश को 2 बार खुद अपराध करते और 68 बार दूसरों की मदद करते हुए देखा है।
रमाशंकर मिश्रा और उनके परिजनों के बैंक खातों में करीब 20.93 लाख रुपए नकद जमा किए गए। 42 लाख रुपए में प्लॉट, 1.03 लाख रुपए का कैमरा और आभूषण खरीदने की जानकारी भी मिली है।
चार्जशीट में बताया है कि रमाशंकर यादव उर्फ टिन्नू ट्रस्ट की दान/चढ़ावे की रकम की गिनती और बैंक तक ले जाने की प्रक्रिया से लंबे समय से जुड़ा है। उसके खातों में 8.48 लाख रुपए जमा हुए। अर्टिगा कार, बुलेट मोटरसाइकिल और 9.50 लाख रुपए की संपत्ति भी मिली है।