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अब तो लोग बीजेपी को भी कहने लगे हैं एंटी नेशनल?

TCN Desk TCN Desk | 1h ago · 5 min read
अब तो लोग बीजेपी को भी कहने लगे हैं एंटी नेशनल?

अब तो लोग बीजेपी को भी सोशल मीडिया पर एंटी नेशनल कहने लगे हैं।

अब तो लोग बीजेपी को भी सोशल मीडिया पर एंटी नेशनल कहने लगे हैं। बीजेपी के नेता, कार्यकर्ता और समर्थक जिस नैरेटिव को विपक्ष या अपने विरोधियों को बदनाम करने के लिए इस्तेमाल करते थे, अब वो दांव उल्टा पड़ गया है। दरअसल बीजेपी की ओर से मुंबई-पुणे मिसिंग लिंक को बुनियादी ढांचे की शानदार उपलब्धि के रूप में पेश करने की कोशिश उस समय उलटी पड़ गई, जब उनके 9 सेकंड के वीडियो में एक पाकिस्तानी गाने का इस्तेमाल किया गया। इस पूरे मामले में दोहरे मापदंड को लेकर अब भारत और पाकिस्तान, दोनों तरफ से बहस छिड़ गई है।


बीजेपी ने लाहौर के पाकिस्तानी अल्टरनेटिव रॉक बैंड बयान (Bayaan) के 2024 में रिलीज़ हुए लोकप्रिय गाने ‘सफ़र’ (Safar) का इस्तेमाल किया।

यह गाना Instagram Reels और TikTok पर वायरल हो चुका है। Spotify पर इसे 3.47 करोड़ से अधिक बार स्ट्रीम किया जा चुका है और इसे हर दिन लगभग 2.94 लाख स्ट्रीम मिल रही हैं। यह बैंड के सबसे तेजी से लोकप्रिय होने वाले और चर्चित गानों में शामिल हो गया है।

बीजेपी के इस वीडियो को X पर 12 लाख से अधिक व्यूज़ मिले, लेकिन इसके साथ ही उसे भारी आलोचना का भी सामना करना पड़ा। विवाद इसलिए और तीखा हो गया क्योंकि,

भारत सरकार पहले ही डिजिटल स्ट्रीमिंग सेवाओं, ओवर-द-टॉप (OTT) प्लेटफॉर्म्स और ऑनलाइन इंटरमीडियरीज़ को पाकिस्तान से आने वाली सामग्री, जिसमें गाने, फिल्में, वेब सीरीज़ और पॉडकास्ट शामिल हैं, हटाने का निर्देश दे चुकी थी। यह कदम 2025 के पहलगाम आतंकी हमले के बाद राष्ट्रीय सुरक्षा संबंधी चिंताओं के मद्देनज़र उठाया गया था। इसके बाद Spotify India और YouTube Music जैसे बड़े प्लेटफॉर्म्स ने कई लोकप्रिय पाकिस्तानी गाने हटा दिए और उनके प्रमोशनल एल्बम आर्टवर्क तक बदल दिए।

राष्ट्रीय सुरक्षा का हवाला देते हुए भारत के सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय ने इस कार्रवाई को सही ठहराने के लिए सूचना प्रौद्योगिकी नियमों का सहारा लिया था।

मंत्रालय का कहना था कि पाकिस्तान से आने वाली मीडिया सामग्री भारत की संप्रभुता, अखंडता या सार्वजनिक व्यवस्था को प्रभावित कर सकती है।

पाकिस्तानी कलाकारों को भी फिल्मों के प्रचार से डिजिटल रूप से हटा दिया गया। ‘सनम तेरी कसम’ के Spotify और YouTube Music पर मौजूद एल्बम आर्टवर्क से पाकिस्तानी अभिनेत्री मावरा होकेन को हटा दिया गया और केवल उनके भारतीय सह-कलाकार हर्षवर्धन राणे दिखाई देने लगे।

इसी तरह ‘रईस’ (2017) के प्रमोशनल पोस्टरों और तस्वीरों से माहिरा खान को भी हटा दिया गया, जिससे शाहरुख खान अकेले दिखाई देने लगे।

ऐसे माहौल में बीजेपी द्वारा उसी पाकिस्तानी गाने का इस्तेमाल किए जाने पर सोशल मीडिया पर तीखी प्रतिक्रियाएं आने लगीं। इस बहस में भारतीयों के साथ-साथ पाकिस्तानियों ने भी हिस्सा लिया।

पाकिस्तानी X यूज़र शहीर मलिक ने लिखा,

“पिछले 20 साल से भारतीय लोगों को पाकिस्तान-विरोधी नैरेटिव बेचने के बाद सोशल मीडिया पोस्ट में पाकिस्तानी गाने इस्तेमाल करना वाकई बेहद दुस्साहसिक है।”

एक अन्य यूज़र eminem_chacha ने लिखा,

“राष्ट्रवाद के नाम पर पाकिस्तानी कलाकारों और पाकिस्तानी संगीत पर प्रतिबंध लगाना, लेकिन जब अपने काम आए तो पाकिस्तानी गाना इस्तेमाल करना। यह पाखंड संगीत से भी ज़्यादा तेज़ सुनाई दे रहा है।”


पाकिस्तानी अकाउंट Yang Goiने लिखा,

“अच्छा, ये तो सही है, लेकिन पाकिस्तानी गाना क्यों इस्तेमाल कर रहे हो? क्या आपके पास अपने गाने नहीं हैं? भारत में अरिजीत और दूसरे कलाकारों का क्या हुआ?”


वहीं Mensch नाम के एक अन्य X यूज़र ने मामले को हल्के-फुल्के अंदाज़ में लेते हुए लिखा,

“पाकिस्तानी संगीत इतना शानदार है कि बीजेपी भी इसकी वाइब्स लेने से खुद को नहीं रोक सकी।”

भारतीय यूज़र्स की प्रतिक्रियाएं भी कम नहीं थीं, खासकर कांग्रेस पार्टी से जुड़े लोगों की।

कर्नाटक राज्य बीज एवं जैविक प्रमाणीकरण एजेंसी की अध्यक्ष लावण्या बल्लाल जैन ने बीजेपी को टैग करते हुए लिखा,

“बीजेपी आपके अपने तर्क के अनुसार अब आप राष्ट्र-विरोधी हैं। क्या आपको कोई भारतीय गाना नहीं मिला? क्या पाकिस्तानी गाना ही चुनना था?”


INCAS के कोझिकोड ज़िला अध्यक्ष और कांग्रेस डिजिटल मीडिया सेल के सदस्य विजय थोट्टाथिल ने भी संगीत के चयन की आलोचना की।

उन्होंने लिखा,

बीजेपी और पाकिस्तान का रिश्ता इतना दिल को छू लेने वाला है कि वे इंफ्रास्ट्रक्चर के इस चमत्कार को दिखाने के लिए पाकिस्तानी गाना इस्तेमाल कर रहे हैं। आपको कोई भारतीय गाना नहीं मिला?”

गाने को लेकर उठा यह विवाद उस व्यापक पृष्ठभूमि का हिस्सा है, जिसमें भारत और पाकिस्तान के बीच राजनीतिक तनाव के कारण दोनों देशों के बीच सांस्कृतिक आदान-प्रदान बार-बार प्रभावित होता रहा है।

हालांकि, सांस्कृतिक विरोधाभास केवल एक दिशा में नहीं हैं। अप्रैल 2026 में पाकिस्तान की मीडिया नियामक संस्था पाकिस्तान इलेक्ट्रॉनिक मीडिया रेगुलेटरी अथॉरिटी (PEMRA) ने देश के सबसे बड़े मीडिया हाउस जियो न्यूज़ को भारतीय गायिका आशा भोसले से जुड़ी सामग्री प्रसारित करने को लेकर कारण बताओ नोटिस जारी किया था। PEMRA ने जियो न्यूज़ से भारतीय गानों और फिल्मों की क्लिप इस्तेमाल करने पर सवाल किया था। ये सामग्री आशा भोसले के निधन की खबर के दौरान प्रसारित की गई थी। नियामक संस्था ने पाकिस्तान में भारतीय सामग्री पर लागू प्रतिबंध और 2018 के सुप्रीम कोर्ट के फैसले का हवाला दिया था।