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भारतीय न्यूज चैनलों के शो में सिर्फ शोर और पागलपन होता है: अमेरिकी राजदूत

TCN Desk TCN Desk | 1h ago · 5 min read
भारतीय न्यूज चैनलों के शो में सिर्फ शोर और पागलपन होता है: अमेरिकी राजदूत

सर्जियो गोर ने कहा कि भारतीय न्यूज चैनल फेक न्यूज चलाने में अमेरिकी मीडिया से भी एक कदम आगे है।

अंतरराष्ट्रीय मीडिया में तो कई बार भारतीय न्यूज चैनल की रिपोर्टिंग को लेकर किरकिरी हो चुकी है लेकिन अब अमेरिकी राजदूत सर्जियो गोर की टिप्पणी ने भारतीय न्यूज चैनल के सच को पूरी तरह बेपर्दा कर दिया है।

सर्जियो गोर ने नई दिल्ली में एक अंग्रेजी अखबार के कार्यक्रम में कहा कि,

मुझे घर लौटकर भारतीय टीवी न्यूज शो देखना बहुत पसंद है। जैसे-जैसे रात बढ़ती जाती है, ये शो उतने ही ज्यादा पागलपन भरे होते जाते हैं। शाम छह बजे किसी कार्यक्रम में आठ लोग बहस कर रहे होते हैं। रात दस बजे तक 12 लोग एक साथ बोलने लगते हैं और वास्तव में किसी एक की भी बात सुनाई नहीं देती।


गोर ने ये भी कहा कि,

भारतीय चैनलों पर दिखाई जाने वाली कुछ खबरें अमेरिका की फेक न्यूज की समस्या को भी पीछे छोड़ देती हैं। पहले उन्हें लगता था कि अमेरिका में गलत और भ्रामक सूचनाओं पर आधारित फेक न्यूज एक गंभीर समस्या है, लेकिन भारतीय न्यूज चैनल तो ने उन्हें हैरान कर दिया। भारतीय न्यूज चैनल फेक न्यूज चलाने में अमेरिका से भी एक कदम आगे है।

नई दिल्ली में आयोजित इकोनॉमिक टाइम्स वर्ल्ड लीडर्स फोरम में विभिन्न मुद्दों पर बोलते हुए गोर ने भारतीय प्राइम टाइम टीवी की बेहद कूटनीतिक अंदाज में समीक्षा की। उन्होंने हैरानी जताई कि एक ही कार्यक्रम में इतने सारे लोग एक साथ चिल्लाते हुए भी तकनीकी रूप से बहस का हिस्सा बने रहते हैं। सोशल मीडिया पर सर्जियो गोर की टिप्पणी के बाद कई यूजर्स ने आशंका जताई है गोर ने यह टिप्पणी भारतीय टीवी मीडिया के जाने-माने एंकर अर्णब गोस्वामी के डिबेट शो देखने के बाद दी है।


गोर ने कहा,

यह अविश्वसनीय है कि भारतीय न्यूज चैनल के डिबेट शो में कोई किसी की बात काटता हुआ भी नहीं दिखता।

वैसे अमेरिकी केबल न्यूज़ भी तेज आवाज, तीखी बहस और चीखने-चिल्लाने से अनजान नहीं है। लेकिन लगता है कि इस क्षेत्र के अनुभवी लोग भी भारतीय प्राइम टाइम के उस अंदाज को बिल्कुल अलग श्रेणी में रखते हैं, जिसमें दस से अधिक लोग एक साथ बोलते हैं।

इसी मंच से गोर ने यह भी दावा किया कि फ्रांस में आयोजित G7 शिखर सम्मेलन के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की मुलाकात से पहले भारतीय विदेश मंत्रालय ने मीडिया के लिए यह योजना बनाई थी कि मीडिया को केवल दोनों नेताओं के शुरुआती बयान रिकॉर्ड करने की अनुमति दी जाए और पत्रकारों को सवाल पूछने का मौका न मिले। ट्रंप को इस व्यवस्था के बारे में पहले ही बताया गया था और उन्होंने इसके लिए हामी भी भर दी थी। इससे कुछ समय पहले होर्मुज में अमेरिकी नौसेना के हमले की चपेट में एक व्यावसायिक जहाज आ गया था, जिसमें तीन भारतीय नाविकों की मौत हो गई थी। प्रधानमंत्री मोदी ने ट्रंप के साथ बातचीत में इस घटना को सीधे उठाया था।

गोर ने कहा, “हम मंच के पीछे थे। एक समय वहां केवल राष्ट्रपति और मैं मौजूद थे। उन्होंने मुझसे पूछा कि भारतीय पक्ष किन मुद्दों को उठाने वाला है। हमने कुछ विषयों पर चर्चा की।”

उन्होंने आगे बताया,

“राष्ट्रपति ट्रंप ने पूछा कि क्या भारतीयों की कोई विशेष मांग है? विदेश मंत्रालय की केवल एक मांग थी—मीडिया को अंदर आने दिया जाए, लेकिन इसे प्रेस कॉन्फ्रेंस न बनाया जाए। मैंने राष्ट्रपति से कहा कि भारतीय पक्ष कोई सवाल नहीं चाहता। उन्होंने कहा, ठीक है, कोई समस्या नहीं।

गोर के मुताबिक, “बैठक शुरू हुई और करीब 50 कैमरों के साथ मीडिया अंदर आया। राष्ट्रपति एक ओर बैठे थे और प्रधानमंत्री दूसरी ओर। दोनों ने कुछ मिनट तक अपनी बात रखी। लेकिन शुरुआती बयान समाप्त होते ही ट्रंप शायद पहले से तय व्यवस्था और योजना के बारे में भूल गए। उन्होंने पत्रकारों की ओर देखकर पूछ लिया, “कोई सवाल?” इसके बाद सीमित मीडिया बातचीत करीब 45 मिनट लंबी प्रेस कॉन्फ्रेंस में बदल गई। भारतीय विदेश मंत्रालय की ओर से ‘कोई सवाल नहीं’ वाली मांग पर अब तक कोई प्रतिक्रिया नहीं आई है।

भारत-अमेरिका संबंधों पर गोर का लहजा अधिक सकारात्मक रहा। उन्होंने ट्रंप और मोदी के बीच व्यक्तिगत रिश्तों की चर्चा करते हुए कहा कि व्यापार, रक्षा, ऊर्जा और अंतरिक्ष जैसे क्षेत्रों में दोनों देशों का सहयोग लगातार मजबूत हो रहा है। इसके साथ ही वॉशिंगटन नई दिल्ली के साथ उच्चस्तरीय बातचीत को और नियमित बनाने पर जोर दे रहा है। गोर ने कहा कि ट्रंप को वह समर्थन आज भी याद है, जो सत्ता से बाहर रहने के चार वर्षों के दौरान मोदी ने उन्हें दिया था। उन्होंने भविष्य के चंद्र अभियानों में भारत-अमेरिका की बढ़ती साझेदारी का भी उल्लेख किया। दोनों देश विमानन, रक्षा, दवा और ऊर्जा सहित कई क्षेत्रों में सहयोग कर रहे हैं। गोर के अनुसार, क्वाड अब भी “बेहद महत्वपूर्ण” है। इस वर्ष इसके पांच मंत्रीस्तरीय सम्मेलन होने की संभावना है, जबकि पिछले वर्ष ऐसा एक भी सम्मेलन नहीं हुआ था।

हाल ही में जम्मू-कश्मीर और लद्दाख की यात्रा कर चुके गोर ने इससे पहले जम्मू-कश्मीर को “भारत का महत्वपूर्ण हिस्सा” बताया था। भारत और पाकिस्तान के बीच लंबे समय से विवाद का विषय रहे इस क्षेत्र पर उनकी टिप्पणी ने नई दिल्ली और इस्लामाबाद के बीच कूटनीतिक तनाव को एक बार फिर हवा दे दी।