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फिर तेहरान पहुंचे असीम मुनीर, क्या मक्का पैक्ट में शामिल होगा ईरान?

TCN Desk TCN Desk | 1h ago · 7 min read
फिर तेहरान पहुंचे असीम मुनीर, क्या मक्का पैक्ट में शामिल होगा ईरान?

असीम मुनीर का दौरा ऐसे समय हो रहा है, जब अमेरिका ईरान पर आर्थिक दबाव का नया दौर शुरू करने जा रहा है।

पाकिस्तान के आर्मी चीफ असीम मुनीर तेहरान पहुंच गए हैं। यह इस साल मुनीर की तीसरी ईरान यात्रा है। ईरान के विदेश मंत्रालय ने सोमवार को इसकी घोषणा की। इस्लामाबाद, अमेरिका और इजरायल की ईरान के खिलाफ जंग खत्म कराने के लिए मध्यस्थता की कोशिशें लगातार जारी रखे हुए है।


Al Jazeera की एक रिपोर्ट के अनुसार, नाम न जाहिर करने की शर्त पर पाकिस्तानी अधिकारियों ने मुनीर की यात्रा की पुष्टि की, लेकिन इसके एजेंडे के बारे में विस्तार से जानकारी देने से इनकार कर दिया। पाकिस्तानी सेना की मीडिया शाखा इंटर-सर्विसेज पब्लिक रिलेशंस (ISPR), विदेश मंत्रालय और सूचना मंत्रालय ने इस यात्रा पर टिप्पणी के लिए अल जजीरा के अनुरोधों का जवाब नहीं दिया। असामान्य रूप से इस दौरे की घोषणा इस्लामाबाद के बजाय तेहरान ने की है। ईरानी विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता इस्माइल बघाई ने कहा कि इस यात्रा से क्षेत्र में “शांति और सुरक्षा मजबूत करने” के पाकिस्तान के प्रयासों को आगे बढ़ाया जाएगा।


असीम मुनीर का दौरा ऐसे समय हो रहा है, जब अमेरिका ईरान पर आर्थिक दबाव का नया दौर शुरू करने जा रहा है। अमेरिकी वित्त मंत्री स्कॉट बेसेंट सोमवार को ईरान के खिलाफ उस प्रतिबंध पैकेज का विवरण पेश करने वाले हैं, जिसे अमेरिकी अधिकारियों ने “इतिहास के सबसे कठोर प्रतिबंध” बताया है। बेसेंट कह चुके हैं कि जारी नौसैनिक प्रतिबंध के साथ इन पाबंदियों का मकसद तेहरान की सरकार को “धराशायी” करना है। ईरान के विदेश मंत्रालय ने इस योजना को “आर्थिक युद्ध” करार दिया है।

ईरानी विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता इस्माइल बघाई बघाई ने तेहरान में पत्रकारों को बताया कि मुनीर अपने प्रवास के दौरान ईरान के वरिष्ठ अधिकारियों से बातचीत करेंगे। यह यात्रा चार दिनों के भीतर मुनीर और ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची के बीच हुई दो फोन वार्ताओं के बाद हो रही है। दोनों अधिकारियों ने बुधवार और शनिवार को फोन पर बातचीत की थी।

ईरान के सरकारी मीडिया के अनुसार, दोनों नेताओं ने “क्षेत्रीय घटनाक्रम” और पश्चिम एशिया में “शांति, स्थिरता और सुरक्षा” मजबूत करने के उपायों पर चर्चा की। इस साल मुनीर की पहली तेहरान यात्रा अप्रैल में हुई थी। यह दौरा इस्लामाबाद वार्ता के कुछ दिनों बाद हुआ था। चार दशकों से ज्यादा समय में अमेरिका और ईरान के बीच यह पहली सीधी बातचीत थी, लेकिन इसमें कोई सफलता नहीं मिली। मुनीर मई में दोबारा तेहरान पहुंचे थे। उनकी यह यात्रा अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो के उस बयान के कुछ घंटों बाद हुई थी, जिसमें उन्होंने कहा था कि वॉशिंगटन और तेहरान की बातचीत में “मामूली प्रगति” हुई है।

बातचीत में इसी महीने पाकिस्तान, सऊदी अरब और तुर्किये के बीच हुए मक्का संयुक्त रक्षा समझौते पर भी चर्चा होने की उम्मीद है। मुनीर इस समझौते के दौरान मक्का में मौजूद थे।

ईरानी अधिकारियों के साथ उनकी बातचीत में यमन के हूती लड़ाकों का मुद्दा भी उठ सकता है। हूतियों के समुद्री मार्गों पर हमलों ने कई बार इस संघर्ष के फैलने का खतरा पैदा किया है। माना जाता है कि हूतियों को तेहरान का समर्थन प्राप्त है। इस्लामाबाद के लिए यह मुद्दा खास तौर पर अहम है। 11 अगस्त को बाब स्ट्रेट ऑफ अल-मंदेब में हूती लड़ाकों ने तंजानिया के झंडे वाले एक वाणिज्यिक जहाज पर हमला किया था। इसमें तीन पाकिस्तानी नाविक मारे गए और कई अन्य घायल हुए थे। पाकिस्तान के उपप्रधानमंत्री और विदेश मंत्री इशाक डार ने उस समय इस हमले को अंतरराष्ट्रीय कानून का उल्लंघन बताते हुए इसकी “कड़ी निंदा” की थी।

मुनीर की यह यात्रा पाकिस्तान के मध्यस्थता प्रयासों के लिए बेहद नाजुक समय पर हो रही है। छह महीने पहले युद्ध शुरू होने के बाद से पाकिस्तान मध्यस्थता की कोशिशों का नेतृत्व कर रहा है। पाकिस्तान, ईरान और अमेरिका ने 17 जून को इस्लामाबाद समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर किए थे। इसमें तय की गई 60 दिनों की समयसीमा अगस्त के मध्य में समाप्त हो गई, लेकिन कोई भी पक्ष इसे आगे बढ़ाने पर सहमत नहीं हुआ। ईरान ने होर्मुज को बंद रखा है। तेहरान की मांग है कि वॉशिंगटन पहले अपना नौसैनिक प्रतिबंध हटाए, तेल प्रतिबंध खत्म करे, विदेशों में जमा ईरानी संपत्तियों को मुक्त करे और सैन्य हमलों की धमकियां बंद करे। ईरान का कहना है कि अमेरिका ने इन शर्तों को पूरा नहीं किया है।

मुनीर की यह यात्रा पिछले एक महीने में क्षेत्रीय समीकरणों में आए बदलावों के बाद हो रही है। पाकिस्तान, सऊदी अरब और तुर्किये ने 7 अगस्त को मक्का संयुक्त रक्षा समझौते पर हस्ताक्षर किए थे। इस पारस्परिक रक्षा समझौते के तहत किसी एक सदस्य देश पर हमला, तीनों देशों पर हमला माना जाएगा।

पाकिस्तान के गृह मंत्री मोहसिन नकवी ने ठप पड़ी मध्यस्थता प्रक्रिया को दोबारा शुरू कराने के लिए इसी महीने तेहरान का दौरा किया था, लेकिन वह बिना किसी ठोस नतीजे के लौट आए। विश्लेषकों का कहना है कि मुनीर की यात्रा से संकेत मिलता है कि क्षेत्र के प्रमुख मध्यस्थों ने ईरान और अमेरिका के बीच प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष बातचीत दोबारा शुरू कराने की उम्मीद नहीं छोड़ी है। हालांकि, साथ ही वे तेहरान और वॉशिंगटन के साथ अपने संबंधों में संतुलन बनाए रखने की कोशिश भी कर रहे हैं।

ओमान के विदेश मंत्री बद्र बिन हमद अलबुसैदी भी मंगलवार को तेहरान जाने वाले हैं। ईरान की सरकारी समाचार एजेंसी IRNA के अनुसार, अलबुसैदी ने भी हाल में अराघची से फोन पर बातचीत की है। विश्लेषकों के बीच इस बात पर मतभेद है कि पाकिस्तान की किसी समझौते को लागू कराने की सीमित क्षमता को देखते हुए मुनीर की यात्रा से वास्तव में कितना कुछ हासिल किया जा सकता है।

इस्लामाबाद स्थित सनोबर इंस्टीट्यूट के प्रमुख और राजनीतिक विश्लेषक कमर चीमा ने कहा,

दोनों पक्ष पाकिस्तान को ऐसे देश के रूप में देखते हैं, जिसने नतीजे में अपने किसी निजी हित के बिना बातचीत को संभव बनाने में मदद की है। उसे अपने लिए कुछ हासिल नहीं करना है। इससे उसे एक तरह की स्पष्टता मिलती है और वह सभी पक्षों को संकट से निकलने का रास्ता दे सकता है।”

तेहरान में पर्शियन गल्फ स्टडीज ग्रुप के निदेशक जवाद हेरान-निया ने कहा कि पाकिस्तान की लगातार कोशिशों के पीछे कुछ हद तक उसके अपने हित भी हैं। उन्होंने अल जजीरा से कहा,

पाकिस्तान बढ़ते तनाव और ईरान एवं अमेरिका के बीच एक और व्यापक युद्ध छिड़ने की आशंका से चिंतित है। इससे पूरा क्षेत्र और ज्यादा अस्थिर हो जाएगा। उन्होंने खाड़ी देशों से ऊर्जा आयात पर इस्लामाबाद की निर्भरता का भी जिक्र किया। साथ ही कहा कि अगर अस्थिरता फैलती है, तो खाड़ी देशों में काम करने वाले पाकिस्तानी नागरिकों से आने वाली रकम भी प्रभावित हो सकती है।

सेवानिवृत्त टू-स्टार जनरल और पाकिस्तानी रक्षा रणनीतिकार जाहिद महमूद ने इससे भी आगे बढ़कर कहा कि,

मुनीर वॉशिंगटन का प्रस्ताव लेकर तेहरान जा रहे हैं। पाकिस्तान प्रभावी रूप से अब भी वॉशिंगटन की ओर से तेहरान के लिए संकट से बाहर निकलने का रास्ता लेकर जा रहा है। दोनों के बीच संदेश पहुंचाने के लिए पाकिस्तान सबसे भरोसेमंद माध्यम बना हुआ है।

हालांकि, सभी विश्लेषक पाकिस्तान की भूमिका को इतना जरूरी नहीं मानते।

किंग्स कॉलेज लंदन में रक्षा अध्ययन के एसोसिएट प्रोफेसर एंड्रियास क्रेग के मुताबिक, पाकिस्तान नहीं बल्कि कतर अब भी मध्यस्थता का मुख्य माध्यम है। उन्होंने कहा, “कतर राजनीतिक मध्यस्थता का नेतृत्व कर रहा है और वॉशिंगटन तथा तेहरान के बीच संवाद का सबसे जरूरी पुल बना हुआ है।”

क्रेग के मुताबिक,

मुनीर की भूमिका सीमित है। वह “ईरान की उस व्यवस्था के साथ सैन्य स्तर पर संवाद का माध्यम हैं, जहां युद्ध और शांति से जुड़े फैसलों में IRGC तथा व्यापक सुरक्षा प्रतिष्ठान की भूमिका लगातार बढ़ती जा रही है।”कुछ विश्लेषकों का मानना है कि मुनीर की यात्रा होर्मुज के संयुक्त प्रबंधन को लेकर ईरान और ओमान के बीच समझौते को अंतिम रूप देने की जमीन तैयार कर सकती है।