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क्यों राष्ट्रपति भवन ने घंटे भर के अंदर बांग्लादेशी पीएम के दौरे पर लिया यू-टर्न?

TCN Desk TCN Desk | 1h ago · 5 min read
क्यों राष्ट्रपति भवन ने घंटे भर के अंदर बांग्लादेशी पीएम के दौरे पर लिया यू-टर्न?

सत्तारूढ़ बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी से ज्यादा आम जनता के बीच यह धारणा है कि भारत बांग्लादेश 2.0’ के साथ संबंध स्थापित करने को लेकर गंभीर नहीं है।

शुक्रवार को एक असामान्य घटनाक्रम में राष्ट्रपति भवन ने बांग्लादेश के प्रधानमंत्री तारिक रहमान की प्रस्तावित नई दिल्ली यात्रा से जुड़ी अपनी आधिकारिक प्रेस विज्ञप्ति जारी करने के एक घंटे से भी कम समय में वापस ले ली।


Indian Express की एक रिपोर्ट के अनुसार, शुक्रवार को राष्ट्रपति भवन की ओर से जारी विज्ञप्ति में कहा गया था कि बांग्लादेश के प्रधानमंत्री तारिक रहमान के औपचारिक स्वागत की फुल ड्रेस रिहर्सल के कारण शनिवार का ‘चेंज ऑफ गार्ड’ समारोह रद्द रहेगा। लेकिन कुछ ही देर बाद इस विज्ञप्ति को वापस ले लिया गया। इससे इस हाई-प्रोफाइल यात्रा को लेकर स्थिति और ज्यादा उलझ गई है। यह घटनाक्रम 12-13 सितंबर को होने वाले आगामी BRICS शिखर सम्मेलन से पहले नई दिल्ली और ढाका के बीच जारी कूटनीतिक तनाव को भी उजागर करता है। हाल के दिनों में दोनों देशों के संबंधों में तनाव बढ़ा है, जिसकी एक प्रमुख वजह बांग्लादेश की ओर से अपदस्थ पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना के प्रत्यर्पण की मांग है।

शुक्रवार दोपहर करीब 2 बजे राष्ट्रपति भवन की ओर से जारी प्रेस विज्ञप्ति में कहा गया था कि,

शनिवार को होने वाली ‘चेंज ऑफ गार्ड’ सेरेमनी नहीं होगी, क्योंकि बांग्लादेश के प्रधानमंत्री के औपचारिक स्वागत से पहले फुल ड्रेस रिहर्सल की जानी है।

इससे पहले ‘इस शनिवार चेंज ऑफ गार्ड समारोह नहीं होगा’ शीर्षक वाली विज्ञप्ति में कहा गया था, “राष्ट्रपति भवन के प्रांगण में होने वाला चेंज ऑफ गार्ड समारोह इस शनिवार (22 अगस्त, 2026) को नहीं होगा, क्योंकि बांग्लादेश के प्रधानमंत्री के औपचारिक स्वागत के लिए फुल ड्रेस रिहर्सल की जाएगी।” हालांकि, इस हाई-प्रोफाइल यात्रा की आधिकारिक घोषणा तब तक न तो नई दिल्ली और न ही ढाका की ओर से की गई थी। इसके बाद राष्ट्रपति भवन ने विज्ञप्ति वापस ले ली। करीब 3 बजे राष्ट्रपति कार्यालय की ओर से जारी नए बयान में कहा गया,

21 अगस्त, 2026 को ‘इस शनिवार चेंज ऑफ गार्ड समारोह नहीं होगा’ विषय पर जारी प्रेस विज्ञप्ति वापस ली जाती है।

भारत की राजकीय यात्रा पर आने वाले राष्ट्राध्यक्षों और अन्य विदेशी गणमान्य व्यक्तियों के लिए राष्ट्रपति भवन में औपचारिक स्वागत समारोह आयोजित किया जाता है। यह भारत की एक महत्वपूर्ण सैन्य और कूटनीतिक परंपरा है। राष्ट्रपति भवन के प्रांगण में होने वाले इस समारोह में तीनों सेनाओं की ओर से औपचारिक ‘गार्ड ऑफ ऑनर’, दोनों देशों के राष्ट्रगान और भारत के राष्ट्रपति तथा प्रधानमंत्री से औपचारिक परिचय शामिल होता है। इस समारोह से एक दिन पहले फुल ड्रेस रिहर्सल की जाती है। बाद में राष्ट्रपति की ओर से अतिथि नेता के सम्मान में रात्रिभोज भी आयोजित किया जाता है।

मंगलवार को भारतीय उच्चायुक्त दिनेश त्रिवेदी ने ढाका में बांग्लादेशी कारोबारी नेताओं और भारत से आए एक प्रतिनिधिमंडल के लिए आयोजित स्वागत समारोह के दौरान दोनों देशों के बीच जारी तनाव को कम करने की कोशिश की थी। कार्यक्रम के दौरान उन्होंने बताया था कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी चाहते हैं कि रहमान की यात्रा “यादगार” बने। त्रिवेदी ने कहा था, प्रधानमंत्री मोदी ने बस एक बात कही—हमें मिलना चाहिए।”

हालांकि, ढाका के कूटनीतिक गलियारों से मिल रहे संकेत अब भी सतर्कता भरे थे। गुरुवार को सरकारी समाचार एजेंसी BSS को दिए एक इंटरव्यू में बांग्लादेश के विदेश मामलों के सलाहकार हुमायूं कबीर ने कहा कि,

रहमान की शिखर सम्मेलन के लिए भारत यात्रा की संभावना तब तक “कम” है, जब तक “आपसी विश्वास” का माहौल नहीं बनता और नई दिल्ली की ओर से “सम्मानजनक निमंत्रण” नहीं मिलता।

रहमान सरकार भारत-विरोधी नीति पर नहीं चल रही है और वह नई दिल्ली के साथ स्थिर तथा मैत्रीपूर्ण संबंध चाहती है। हालांकि, उनका कहना है कि नई सरकार ऐसा कोई संदेश भी नहीं देना चाहती कि वह बांग्लादेश की राष्ट्रीय गरिमा और संप्रभुता से समझौता कर रही है।

बांग्लादेश मामलों के जानकार के अनुसार,

इस सरकार का संदेश भारत-विरोधी नहीं है, जैसा कि यूनुस के नेतृत्व वाली पिछली अंतरिम सरकार के दौरान था। न ही इस सरकार ने भारत-विरोधी बयानबाजी की है। इसके बावजूद भारत का रवैया अब भी वैसा ही है, जैसा पिछली सरकार के समय था।

बांग्लादेशी नागरिकों के लिए भारत द्वारा पर्यटक वीजा बहाल करने में हुई देरी का भी जिक्र किया जा रहा है। रहमान सरकार ने इस साल फरवरी में शपथ ली थी,

लेकिन जून के अंत तक पर्यटक वीजा निलंबित रहे। जब इन्हें दोबारा शुरू किया गया, तब भी पहले की तरह लंबी अवधि वाले वीजा जारी नहीं किए गए। ढाका के लिए अब यह मुद्दा केवल दोनों सरकारों के आपसी संबंधों तक सीमित नहीं है, बल्कि जनता के बीच बन रही धारणा का भी है।

एक जानकार ने कहा, “सत्तारूढ़ बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी (BNP) से ज्यादा आम जनता के बीच यह धारणा है कि भारत केवल दिखावे के लिए बातें कर रहा है और ‘बांग्लादेश 2.0’ के साथ संबंध स्थापित करने को लेकर गंभीर नहीं है।

रहमान भी जनता की इस भावना के खिलाफ जाते हुए नहीं दिखना चाहेंगे। उनके समर्थक उन्हें “जनतार पीएम” यानी “जनता का प्रधानमंत्री” कहते हैं। ऐसे में वह नई दिल्ली की ओर से बदले में कोई ठोस कदम उठाए बिना भारत के सामने रियायत देते हुए नहीं दिख सकते।