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H-1B वीजा को खत्म करने के पक्ष में अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस, भारतीयों की बढ़ी चिंता

TCN Desk TCN Desk | 48m ago · 4 min read
H-1B वीजा को खत्म करने के पक्ष में अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस, भारतीयों की बढ़ी चिंता

गौरतलब है कि भारतीय नागरिक H-1B लाभार्थियों का एक बड़ा हिस्सा हैं।

अमेरिका के उपराष्ट्रपति जेडी वेंस ने H-1B वीजा कार्यक्रम को “पूरी तरह खराब” बताते हुए इसे समाप्त करने का समर्थन किया है। उन्होंने आरोप लगाया कि अमेरिकी कंपनियाँ इस व्यवस्था का इस्तेमाल अमेरिकी कर्मचारियों की जगह कम वेतन वाले विदेशी कर्मचारियों को नियुक्त करने के लिए कर रही हैं। उनका यह बयान ऐसे समय आया है, जब नए H-1B आवेदनों पर एक लाख डॉलर की फीस लगाने की ट्रंप प्रशासन की कोशिश अदालतों में चुनौती का सामना कर रही है।


वेंस ने गुरुवार को Real America Voice पर प्रसारित एक लाइव इंटरव्यू में कहा कि,

मेरे विचार में H-1B वीजा कार्यक्रम पूरी तरह खराब हो चुका है और मैं इसे समाप्त करने का पूरा समर्थन करूँगा। लेकिन जब तक यह लागू है, हमें अमेरिकी कर्मचारियों की सुरक्षा करनी होगी।

गौरतलब है कि भारतीय नागरिक H-1B वीजा लाभार्थियों का एक बड़ा हिस्सा हैं। इसलिए H-1B वीजा समाप्त होने या भर्ती की शर्तें कड़ी होने से भारतीय आईटी कर्मचारियों, इंजीनियरों और अन्य पेशेवरों के अमेरिकी रोजगार के अवसर प्रभावित हो सकते हैं।

अमेरिका में पहले से कार्यरत भारतीयों के लिए फिलहाल वेंस के इस बयान का असर नहीं होगा जिसमें उन्होंने H-1B वीजा कार्यक्रम को समाप्त करने की मांग दोहराई है। एक लाख डॉलर वाली व्यवस्था भी मौजूदा वीजा के नवीनीकरण और अमेरिका में छात्र वीजा से पात्र स्थिति में बदलाव करने वालों पर लागू नहीं थी। इसलिए सभी भारतीय कर्मचारियों पर तत्काल यह अतिरिक्त खर्च पड़ने का निष्कर्ष सही नहीं होगा।

फिर भी, संभावित असर के तौर पर नियोक्ता विदेशी कर्मचारियों की भर्ती में अधिक सावधानी बरत सकते हैं। छँटनी करने वाली कंपनियों के आवेदनों की अतिरिक्त जाँच से नियुक्तियों और नौकरी बदलने की योजनाओं में अनिश्चितता बढ़ सकती है। कार्यक्रम में किसी व्यापक बदलाव का वास्तविक असर अंतिम नियमों और अदालतों के फैसलों पर निर्भर करेगा।

अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस ने आरोप लगाया कि,

इस कार्यक्रम का दुरुपयोग केवल टेक्नोलॉजी कंपनियों तक सीमित नहीं है। उनके मुताबिक, अकाउंटिंग कंपनियाँ और दूसरे नियोक्ता भी इसका फायदा उठाकर अमेरिकी कर्मचारियों के साथ धोखा कर रहे हैं।

वेंस ने अत्यधिक कुशल विदेशी पेशेवरों की भर्ती और कर्मचारियों पर होने वाला खर्च घटाने के लिए विदेशी श्रमिकों को नियुक्त करने के बीच अंतर बताया। उन्होंने कहा कि,

अगर आप सालाना 60,000 डॉलर कमाने वाले अमेरिकी अकाउंटेंट की जगह 45,000 डॉलर में काम करने वाला विदेशी अकाउंटेंट ला रहे हैं, तो आप किसी प्रतिभाशाली व्यक्ति को लाने के लिए इस कार्यक्रम का इस्तेमाल नहीं कर रहे। आप अमेरिकी नौकरियाँ खत्म कर रहे हैं और अमेरिकी जनता को धोखा दे रहे हैं।

उन्होंने H-1B मामले में राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की नीतियों का बचाव भी किया। वेंस के अनुसार, एक लाख डॉलर की फीस लगाने का विचार उनके, राष्ट्रपति ट्रंप और व्हाइट हाउस के वरिष्ठ सलाहकार स्टीफन मिलर के बीच हुई बातचीत से निकला था। उनका कहना था कि यह कदम तब सोचा गया, जब उन्हें लगा कि कांग्रेस कार्यक्रम में सुधार के लिए कार्रवाई नहीं करेगी।

वेंस ने कहा कि,

यदि किसी कंपनी का उद्देश्य अमेरिकी अकाउंटेंट की जगह सस्ता विदेशी अकाउंटेंट नियुक्त करना है, तो वह एक लाख डॉलर नहीं चुकाएगी। उनके अनुसार, इस फीस का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना था कि कंपनियाँ कार्यक्रम का इस्तेमाल उसके वास्तविक मकसद के लिए करें।

राष्ट्रपति के बेटे डोनाल्ड ट्रंप जूनियर ने वेंस का इंटरव्यू एक्स पर साझा करते हुए उनका समर्थन किया।

उन्होंने लिखा कि,

वह इस विचार से पूरी तरह सहमत हैं और विरोध करने वाले वे लोग हैं, जो खुली सीमाओं तथा सस्ते श्रम का समर्थन करते हैं।

हालाँकि, एक लाख डॉलर की फीस को लेकर प्रशासन को नया कानूनी झटका लगा है। कैलिफोर्निया के ओकलैंड में अमेरिकी जिला न्यायाधीश हेवुड गिलियम ने बुधवार को संबंधित एजेंसियों को फीस लागू करने से रोक दिया। उन्होंने पाया कि United States Citizenship and Immigration Servicesऔर विदेश विभाग ने आवश्यक नियम बनाने की प्रक्रिया का पालन नहीं किया। मुकदमे का निपटारा होने तक अंतरिम रोक लगाई गई है।

यह राहत श्रमिक संगठनों, नियोक्ताओं और गैर-लाभकारी संस्थाओं के गठबंधन की याचिका पर दी गई। इससे पहले भी एक अदालत फीस पर रोक लगा चुकी थी। कारोबारियों का तर्क है कि H-1B वीजा कार्यक्रम अत्यधिक कुशल पेशेवरों की भर्ती और कुछ उद्योगों में योग्य अमेरिकी कर्मचारियों की कमी दूर करने में मदद करता है।

इस बीच, 18 सितंबर के आदेश में विदेश, श्रम और गृह सुरक्षा विभागों को H-1B वीजा आवेदनों की समीक्षा करते समय नियोक्ता की हालिया या प्रस्तावित छँटनी पर विचार करने का निर्देश दिया गया है। श्रम विभाग को पहले जमा किए गए श्रम-शर्त संबंधी आवेदनों की भी जाँच करनी है।