फ्रांस में हजारों छात्र मैक्रों के खिलाफ सड़कों पर, 1,800 स्कूल बंद, 5000 से ज्यादा छात्र हिरासत में
छात्र शिक्षकों की कमी, अपर्याप्त बजट और खराब सुविधाओं के खिलाफ प्रदर्शन कर रहे हैं।
फ्रांस में स्कूलों में शिक्षकों की कमी, अपर्याप्त बजट और खराब सुविधाओं के खिलाफ जारी आंदोलन अब देशव्यापी विरोध का रूप ले चुका है। हजारों की संख्या में छात्र राष्ट्रपति Emmanuel Macron की नीतियों के खिलाफ देशभर में सड़कों पर उतर गए हैं। सितंबर में शुरू हुआ यह आंदोलन अब पूरे देश में फैल गया है। छात्र स्कूलों में बढ़ती भीड़, जर्जर इमारतों और शिक्षकों की कमी का विरोध कर रहे हैं।
पिछले एक हफ्ते में छात्रों ने 1,800 से ज्यादा सैकड़ों स्कूलों को बंद कराया। आंदोलन के दौरान कई जगह छात्रों और पुलिस के बीच झड़प भी हुई। लेंस शहर में एक स्कूल के पास हुए धमाके में 15 साल के एक छात्र का हाथ उड़ गया। उसे अस्पताल में भर्ती कराया गया। इससे पहले पिछले हफ्ते 14 साल के ईडन नाम के छात्र के सिर पर आंसू गैस का गोला लगने की खबर सामने आई थी। उसके जबड़े में दो जगह फ्रैक्चर हुआ था और उसे बड़ी सर्जरी करानी पड़ी।
प्रदर्शन के दौरान कम से कम 190 छात्र घायल हुए हैं, जबकि 5,060 प्रदर्शनकारी छात्रों को गिरफ्तार किया गया है। इनमें 87% नाबालिग हैं।
France 24 की एक रिपोर्ट के अनुसार, मंगलवार को हाई स्कूल के छात्र संगठनों और ट्रेड यूनियनों के नेतृत्व में देशभर में नाकेबंदी और सड़कों पर प्रदर्शनों की योजना है। इन प्रदर्शनों में हजारों लोगों के शामिल होने की उम्मीद है। आंदोलनकारी राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों की सरकार से शिक्षा व्यवस्था की समस्याओं को दूर करने के लिए ठोस कदम उठाने की मांग कर रहे हैं।
पिछले कुछ सप्ताह में उभरे इस आंदोलन की शुरुआत पेरिस के आर्थिक रूप से पिछड़े उपनगरीय इलाकों से हुई थी। अब यह देश के दूसरे हिस्सों तक फैल गया है। संपन्न इलाकों के स्कूलों के छात्र भी एकजुटता दिखाते हुए आंदोलन में शामिल हो गए हैं।
छात्रों का कहना है कि शिक्षकों और संसाधनों की कमी से उनकी पढ़ाई प्रभावित हो रही है। वे स्कूलों में बेहतर सुविधाएं और पढ़ाई के अनुकूल माहौल चाहते हैं।

सितंबर के अंतिम दिनों से छात्र प्रदर्शनकारियों ने सैकड़ों हाई स्कूलों के प्रवेश द्वारों को अवरुद्ध किया है। उनकी शिकायतों में शिक्षकों की गैरमौजूदगी, पढ़ाई का बेहद व्यस्त समय, जर्जर कक्षाएं और गर्मी से बचाव की पर्याप्त व्यवस्था का अभाव शामिल है। कई स्कूल भवन अधिक तापमान में पढ़ाई के लिए उपयुक्त नहीं हैं। छात्रों की मांग है कि सरकार इन समस्याओं को गंभीरता से ले और इन्हें दूर करने के लिए कार्रवाई करे।
आंदोलन के दौरान कई प्रदर्शन शांतिपूर्ण रहे हैं, लेकिन कुछ जगहों पर हिंसा और पुलिस के साथ झड़पों की घटनाएं भी सामने आई हैं। कुछ प्रदर्शनकारियों ने कूड़ेदानों में आग लगाई और बस स्टॉप के शेल्टर तोड़ दिए। दंगा नियंत्रण पुलिस ने जवाब में लाठियों, आंसू गैस और भीड़ नियंत्रण के लिए इस्तेमाल किए जाने वाले विशेष प्रक्षेप्यों का प्रयोग किया। अधिकारियों का आरोप है कि आंदोलन कुछ स्थानों पर हिंसा में बदल गया है।

फ्रांस के न्याय मंत्रालय के मुताबिक, प्रदर्शन शुरू होने के बाद से 5,060 लोगों को गिरफ्तार किया गया है। हिरासत में लिए गए लोगों में करीब 87 प्रतिशत नाबालिग हैं। मंत्रालय ने बताया कि 1,800 से अधिक लोगों पर आरोप लगाए गए हैं, जिनमें 1,483 नाबालिग शामिल हैं।
हालांकि, मंत्रालय ने यह स्पष्ट नहीं किया कि इन लोगों पर किन अपराधों के आरोप हैं। लगभग 790 मामले पहले ही बंद किए जा चुके हैं।

इतनी बड़ी संख्या में नाबालिगों की गिरफ्तारी और पुलिस की कार्रवाई पर ट्रेड यूनियनों तथा मानवाधिकार संगठनों ने सवाल उठाए हैं। इन संगठनों का आरोप है कि पुलिस ने बच्चों के खिलाफ जरूरत से ज्यादा बल प्रयोग किया। गृह मंत्री लॉरां नुनेज़ ने सोमवार को बताया कि प्रदर्शन शुरू होने के बाद पुलिस की कथित बर्बरता से जुड़े आरोपों की जांच के लिए 10 आंतरिक जांच शुरू की गई हैं।
इस बीच प्रधानमंत्री Sébastien Lecornu ने कहा है कि,
उन्होंने मंत्रियों को छात्रों की प्रमुख मांगों का अध्ययन करने के निर्देश दिए हैं। सरकार अनुपस्थित शिक्षकों की जगह दूसरे शिक्षक उपलब्ध कराने, सुबह आठ बजे से शाम छह बजे तक चलने वाले स्कूल दिवस की अवधि की समीक्षा और दोपहर के भोजन के लिए अधिक समय देने जैसे मुद्दों पर विचार करेगी। पुराने स्कूल भवनों की मरम्मत की जरूरतों को देखने का भी वादा किया गया है।
आंदोलन की शुरुआत 21 सितंबर को पेरिस के एक उपनगर स्थित सेंट-एक्जूपेरी हाई स्कूल से हुई थी। शिक्षक कर्मचारियों और संसाधनों की कमी के खिलाफ हड़ताल पर थे और छात्र उनके समर्थन में उतर आए। अतिरिक्त कर्मचारी भेजे जाने के बाद स्थानीय हड़ताल समाप्त हो गई, लेकिन तब तक विरोध दूसरे स्कूलों तक फैल चुका था।
छात्र नेता मानेस नादेल के मुताबिक,
आंदोलन जंगल की आग की तरह फैला। उन्होंने कहा कि इतने स्कूलों का एक साथ आंदोलन में शामिल होना अभूतपूर्व है और शिक्षा मंत्रालय संकट से निपटने में पूरी तरह असहाय नजर आया है।
पेरिस और आसपास के इलाकों में छात्रों ने स्कूलों के प्रवेश द्वार रोकने शुरू किए। कुछ ही दिनों में उत्तर के लील से दक्षिण के मार्सेई तक ऐसे प्रदर्शन फैल गए। कूड़ेदानों में आग लगाने, बैरिकेड खड़े करने, शिक्षकों पर हमले और पुलिस से झड़पों की तस्वीरों ने आंदोलन की दिशा तथा पुलिस की कार्रवाई पर सवाल खड़े किए हैं। अब तक 100 से अधिक हाई स्कूलों को नुकसान पहुंचा है।
पुलिस पर जरूरत से ज्यादा बल इस्तेमाल करने के आरोप भी लगे हैं। अलांसों में एक पुलिसकर्मी का वीडियो सामने आया, जिसमें वह एक लड़की की गर्दन जकड़ते दिखाई देता है। यह तरीका कानूनन प्रतिबंधित है। छात्र नेताओं का आरोप है कि सरकार उनकी मांगें सुनने के बजाय दमन का सहारा ले रही है।
सरकार की शुरुआती प्रतिक्रिया का बड़ा हिस्सा कट्टर वामपंथी पार्टी La France Insoumise (LFI) और प्रदर्शन स्थलों पर उसकी मौजूदगी पर केंद्रित रहा। वामपंथी पार्टी नेता Jean-Luc Mélenchon ने छात्रों के प्रदर्शन करने और अपनी पार्टी के वहां मौजूद रहने के अधिकार का समर्थन किया है। अगले वसंत में होने वाले राष्ट्रपति चुनाव में उनसे मजबूत प्रदर्शन की उम्मीद है।
छात्रों के आंदोलन से केवल ग्रेटर पेरिस क्षेत्र के स्कूलों में नुकसान लगभग 70 लाख यूरो आंका गया है। तकनीकी हाई स्कूलों की फीस से जुड़ी शुरुआती रियायत को बाद में सरकारी बजट से हटा दिया गया। नादेल ने इसे गैरजिम्मेदाराना बताते हुए कहा कि छात्रों की नाराजगी की वजह यही है कि उनकी बात सुनी नहीं जाती।
खराब सार्वजनिक वित्त भी सरकार की मुश्किल बढ़ा रहा है। वह 2027 के बजट में घाटा सकल घरेलू उत्पाद के लगभग पांच प्रतिशत तक लाना चाहती है, जिसके लिए खर्च में कड़ी कटौती जरूरी होगी। पिछले सप्ताह फ्रांस के दस वर्षीय सरकारी बॉन्ड की प्रतिफल दर कुछ समय के लिए पांच प्रतिशत से ऊपर पहुंच गई, जो 2002 के बाद सबसे ऊंचा स्तर है।
इस अशांति ने राष्ट्रपति चुनाव की राजनीतिक प्रतिस्पर्धा भी तेज कर दी है। फ्रांस में मई 1968 का छात्र आंदोलन देश की सबसे बड़ी हड़ताल में बदल गया था। आज प्रदर्शनकारी कहते हैं कि उनकी मांग असंभव नहीं है—वे केवल ऐसी शिक्षा व्यवस्था चाहते हैं, जिसमें उन्हें ठीक से पढ़ने का मौका मिले।