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महिला पत्रकार से यौन उत्पीड़न के आरोपी दिल्ली पुलिस के ACP विवेक भगत का प्रमोशन रुका

TCN Desk TCN Desk | 16h ago · 4 min read
महिला पत्रकार से यौन उत्पीड़न के आरोपी दिल्ली पुलिस के ACP विवेक भगत का प्रमोशन रुका

तीन महिला पत्रकारों ने जंतर-मंतर पर प्रदर्शन के दौरान दिल्ली पुलिस के अधिकारियों पर यौन उत्पीड़न का आरोप लगाया था।

दिल्ली सरकार ने सहायक पुलिस आयुक्त (एसीपी) विवेक भगत को अतिरिक्त पुलिस उपायुक्त (एडिशनल डीसीपी) पद का कार्यभार सौंपने का फैसला फिलहाल रोक दिया है। भगत पर 3 अक्टूबर को जंतर मंतर पर हुए प्रदर्शन के दौरान एक महिला पत्रकार का यौन उत्पीड़न करने का आरोप है। आरोपों की जांच पूरी होने तक उन्हें अतिरिक्त डीसीपी पद की नई जिम्मेदारी नहीं दी जाएगी।


दरअसल, तीन महिला पत्रकारों ने बीते शनिवार को जंतर-मंतर पर प्रदर्शन के दौरान दिल्ली पुलिस के अधिकारियों पर यौन उत्पीड़न का आरोप लगाया था। पुलिस ने बताया कि उसे इस बाबत शिकायतें मिली हैं जिन्हें आगे की जांच के लिए क्राइम ब्रांच को भेजा गया है और अब क्राइम ब्रांच इस मामले की जांच कर रही है।


विवेक भगत उन 12 दानिप्स अधिकारियों में शामिल थे, जिन्हें सोमवार को अतिरिक्त डीसीपी पद का मौजूदा कार्यभार सौंपने का आदेश जारी किया गया था। दिल्ली सरकार के मुताबिक, भगत ने स्वयं अनुरोध किया कि महिला पत्रकारों के कथित उत्पीड़न की पूरी जांच होने और उसके संतोषजनक निष्कर्ष तक पहुंचने से पहले उन्हें यह जिम्मेदारी नहीं दी जाए।

सरकार ने अपने बयान में कहा कि,

एसीपी भगत ने यह अनुरोध स्वेच्छा से किया है। इसके बाद उनके संबंध में कार्यभार सौंपने का आदेश रोकने का निर्णय लिया गया।

सरकार के अनुसार, अब 5 अक्टूबर को जारी आदेश में बदलाव किया जाएगा और बाकी 11 अधिकारियों के लिए संशोधित आदेश दोबारा जारी होगा। इस तरह भगत को फिलहाल इस अस्थायी व्यवस्था से बाहर रखा गया है। दिल्ली सरकार ने नई जिम्मेदारी सौंपने की प्रक्रिया के समय को लेकर भी स्पष्टीकरण दिया है। सरकार का कहना है कि सभी 12 अधिकारियों को अतिरिक्त कार्यभार देने का प्रस्ताव 25 अगस्त को शुरू किया गया था। बयान के मुताबिक, यह प्रक्रिया हाल की घटनाओं से काफी पहले आरंभ हुई थी और आवश्यक मंजूरी मिलने के बाद 5 अक्टूबर को आदेश जारी किए गए।


इससे पहले सोमवार को उपराज्यपाल तरनजीत सिंह संधू ने दिल्ली पुलिस में कार्यरत 12 दानिप्स अधिकारियों को तत्काल प्रभाव से अतिरिक्त डीसीपी पद का मौजूदा कार्यभार सौंपने की मंजूरी दी थी। विवेक भगत भी इस सूची में शामिल थे। वह फिलहाल कनॉट प्लेस के उपमंडलीय पुलिस अधिकारी यानी एसडीपीओ के पद पर तैनात हैं। सरकार ने स्पष्ट किया कि अतिरिक्त डीसीपी पद का कार्यभार सौंपने की यह व्यवस्था अस्थायी है। इससे संबंधित अधिकारियों को कोई वित्तीय लाभ नहीं मिलेगा। बयान में यह भी कहा गया कि मौजूदा कार्यभार संभालने वाले अधिकारी नियमित रूप से उस पद पर नियुक्त अधिकारी के वैधानिक अधिकारों और दायित्वों का इस्तेमाल नहीं कर सकते।

विवेक भगत दिल्ली पुलिस के उन अधिकारियों में शामिल हैं, जिन पर 3 अक्टूबर के प्रदर्शन के दौरान महिला पत्रकारों के यौन उत्पीड़न के आरोप लगे हैं। यह प्रदर्शन निर्वाचन आयोग के कामकाज मेंअनियमितताओं और मतदाता सूचियों के विशेष गहन पुनरीक्षण यानी एसआईआर के खिलाफ आयोजित किया गया था। प्रदर्शन के दौरान पुलिस अधिकारियों के व्यवहार को लेकर महिला पत्रकारों ने शिकायतें की हैं।
तीन महिला पत्रकारों ने दिल्ली पुलिस के अधिकारियों पर यौन उत्पीड़न का आरोप लगाया है। दिल्ली पुलिस को उनकी शिकायतें मिली हैं और उन्हें आगे की जांच के लिए क्राइम ब्रांच को भेज दिया गया है। फिलहाल ये आरोप जांच के दायरे में हैं। शिकायतों की जांच अपराध शाखा को सौंपे जाने की जानकारी पुलिस ने सार्वजनिक बयान में भी दी है।

आरोप सामने आने के बाद कई स्वतंत्र पत्रकारों ने भी विरोध प्रदर्शन किया। उन्होंने संसद मार्ग थाने के बाहर एकत्र होकर संबंधित पुलिस अधिकारियों के खिलाफ प्राथमिकी यानी एफआईआर दर्ज करने की मांग की। प्रदर्शनकारी पत्रकारों की मांग थी कि महिला पत्रकारों की शिकायतों पर कार्रवाई की जाए और आरोपों के संबंध में मामला दर्ज हो।

लोकसभा में विपक्ष के नेता और कांग्रेस सांसद राहुल गांधी ने इस मुद्दे पर केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह से जवाब मांगा भी मांगा है। एक्स पोस्ट में उन्होंने कहा कि अमित शाह को जवाब देना चाहिए।

उन्होंने लिखा कि ,

जंतर-मंतर पर एक महिला पत्रकार ने एक पुलिस अधिकारी पर बदसलूकी का आरोप लगाया है। घंटों से सैकड़ों पत्रकार सिर्फ इतनी मांग लेकर बैठे हैं कि FIR दर्ज कर ली जाए। ये तो पुलिस का बुनियादी काम है न? वो भी नहीं किया।

राहुल गांधी ने कहा कि,

महिला प्रदर्शनकारियों के साथ बदसलूकी के आरोप हैं। कैमरे छीने गए, पत्रकार घसीटे गए। और ये पहली बार नहीं है - इससे पहले भी हमने वीडियो सबूतों के साथ देखा है कि पुलिस के अफसर महिलाओं के साथ घिनौनी बदसलूकी करते हैं।

राहुल गांधी ने आगे लिखा,

पूरी दिल्ली की महिलाएं, छात्राएं अपनी सुरक्षा को लेकर घबराहट में हैं, सत्याग्रह कर रही हैं - मगर जिस पुलिस पर महिलाओं की हिफाजत की जिम्मेदारी है, वही महिलाओं पर हाथ उठा रही हैं। और एक महिला की शिकायत दर्ज करने से जो सरकार डरती है - वो आखिर किसकी हिफाजत कर रही है? दिल्ली पुलिस गृह मंत्रालय के अधीन है। अमित शाह जी, कहां हैं आप? जवाब आपको ही देना है।