थाने की डायरी से निकला सच, DCP ने पैलेट गन चलाने का दिया था आदेश
डायरी एंट्री से पता चला है कि 20 जुलाई को DCP रैंक के अधिकारी के आदेश पर प्रदर्शनकार छात्रों पर पेलेट गन चलाया गया था।
नई दिल्ली के पार्लियामेंट स्ट्रीट पुलिस थाने में रैपिड एक्शन फोर्स (RAF) की तरफ से दर्ज की गई एक डायरी एंट्री से पता चला है कि 20 जुलाई को पुलिस के एक डिप्टी कमिश्नर ऑफ पुलिस (DCP) रैंक के अधिकारी के आदेश पर प्रदर्शनकारियों पर पेलेट गन से दो राउंड फायरिंग की गई थी।
The Hindu की एक रिपोर्ट के अनुसार, 20 जुलाई को दोपहर 1:24 बजे जनरल डायरी में इस संबंध में एंट्री किया गया था। डायरी एंट्री से पता चला है कि 'कॉकरोच जनता पार्टी' के विरोध प्रदर्शन के दौरान भीड़ को काबू करने के लिए DCP के आदेश पर, RAF के डिप्टी कमांडेंट ने एंटी-रायट गन से 55 राउंड नॉन-इलेक्ट्रिकल शेल, 15 राउंड इलेक्ट्रिकल शेल, पांच टीयर स्मोक ग्रेनेड और प्लास्टिक पेलेट वाले बैलिस्टिक कारतूस से दो राउंड फायरिंग की।
20 जुलाई को हुए विरोध प्रदर्शन के दौरान तीन लोग पेलेट लगने से घायल हो गए थे। उनके परिवार के मुताबिक, घायलों में से एक 19 साल के युवक की दाईं आंख की पुतली में पेलेट लगने से उसकी रोशनी जाने का खतरा है। सेंट्रल रिज़र्व पुलिस फोर्स (CRPF) की एंटी-रायट यूनिट, RAF को 20 जुलाई को दिल्ली पुलिस के साथ जंतर-मंतर और उसके आस-पास तैनात किया गया था। 'कॉकरोच जनता पार्टी' ने केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग को लेकर संसद मार्च का आह्वान किया था।
दिल्ली पुलिस ने आधिकारिक तौर पर कहा है कि "शांतिपूर्ण प्रदर्शनकारियों" के खिलाफ पेलेट के इस्तेमाल के दावे पूरी तरह से "झूठे और गुमराह करने वाले" हैं। पीटीआई की रिपोर्ट के मुताबिक, CRPF और RAF ने अब तक इस मामले पर कोई टिप्पणी नहीं की है।
गौरतलब है कि बुधवार को RAF की इंस्पेक्टर जनरल (IG) सीमा धुंधिया की अध्यक्षता में हुई एक वर्चुअल मीटिंग में निर्देश दिया गया था कि दिल्ली में अगले आदेश तक पंप एक्शन गन (PAG), एंटी-रायट गन (ARG), इलेक्ट्रिक शॉक हथियार और इलेक्ट्रिक शील्ड का न तो इस्तेमाल किया जाएगा और न ही इन्हें जारी किया जाएगा। IG ने RAF के जवानों और अधिकारियों से यह भी कहा कि जंतर-मंतर पर विरोध प्रदर्शन के दौरान "बल का अत्यधिक इस्तेमाल" "अनुचित" था और इस बात पर ज़ोर दिया कि बल का इस्तेमाल हमेशा तय प्रोटोकॉल और RAF की ट्रेनिंग के अनुसार, चरणबद्ध और ज़रूरत के हिसाब से ही किया जाना चाहिए। RAF के भीतर इस पूरी घटना की जांच पहले ही शुरू हो चुकी है।
एंटी-रायट गन को भीड़ को नियंत्रित करने वाला कम घातक हथियार माना जाता है। यह पारंपरिक पैलेट गन से अलग है, लेकिन उसी श्रेणी में आता है। इसमें पारंपरिक पैलेट गन से दागे जाने वाले धातु के छर्रों के बजाय प्लास्टिक के छर्रों वाले कारतूसों का इस्तेमाल होता है। फायर करने पर, एक कारतूस कई टुकड़ों में बंट जाता है और एक साथ कई लोगों को लग सकता है। इसका मकसद भीड़ को तितर-बितर करना है, न कि किसी एक व्यक्ति को निशाना बनाना।
विपक्ष खासकर लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी प्रदर्शनकारियों पर पैलेट गन के इस्तेमाल को लेकर केंद्र सरकार को निशाना बना रहा है और संसद में गृह मंत्री अमित शाह से बयान की मांग कर रहा है।
इस बीच, यह मामला सुप्रीम कोर्ट भी पहुंच गया है। सोमवार को एक पूर्व IPS अधिकारी और दो ऐसे लोगों ने याचिका दायर की, जिनका दावा है कि वे विरोध प्रदर्शनों के दौरान चलाई गई पैलेट गन से घायल हुए थे। यशवर्धन आज़ाद, प्रशांत कुमार और शेख इरशाद मंसूरी द्वारा वकील वृंदा ग्रोवर के ज़रिए दायर याचिका में मांग की गई कि कानून लागू करने वाली एजेंसियों द्वारा नागरिकों की भीड़ को तितर-बितर करने के लिए पंप एक्शन राइफल या प्रोजेक्टाइल एक्शन गन (PAG) से दागे जाने वाले पूरी तरह या आंशिक रूप से धातु वाले पैलेट के इस्तेमाल को बंद करने या उन पर प्रतिबंध लगाने के निर्देश दिए जाएं।
दिल्ली में 20 जुलाई के विरोध प्रदर्शन के बाद कई आम नागरिकों को पेलेट गन से गंभीर चोटें आईं, जिनमें दिल्ली यूनिवर्सिटी का एक 19 साल का छात्र भी शामिल है, जिसकी एक आंख की रोशनी चोट के कारण जा सकती है।
दिल्ली के लेडी हार्डिंग अस्पताल के बेड पर सर्जरी के बाद भर्ती हुए 25 वर्षीय इरशाद शेख अभी भी उस दिन की घटना को याद कर सिहर उठते हैं। एमबीए ग्रेजुएट इरशाद का कहना है कि,
20 जुलाई को संसद मार्च के दौरान रैपिड एक्शन फोर्स (RAF) के एक जवान ने उन पर पैलेट गन चलाई, जिससे उनके चेहरे पर कई छर्रे लग गए। संसद मार्च के दौरान भीड़ को नियंत्रित करने के लिए दिल्ली पुलिस के साथ सीआरपीएफ की RAF भी तैनात थी। प्रदर्शन के दौरान हालात बिगड़ने पर पुलिस ने लाठीचार्ज और आंसू गैस के साथ पैलेट गन का भी इस्तेमाल किया था।
गौरतलब है कि जम्मू-कश्मीर में 2010 के विरोध प्रदर्शनों के बाद केंद्रीय बलों ने भीड़ नियंत्रण के लिए पैलेट गन का इस्तेमाल शुरू किया था। बाद में 2016 में जम्मू-कश्मीर, 2023 में मणिपुर, 2024 के किसान आंदोलन और 2025 के लेह आंदोलन में भी पैलेट गन के इस्तेमाल की खबरें सामने आई थीं।