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37 साल बाद फिर कश्मीरी पंडित खौफ में, पिछले 17 दिनों में मिले 2 धमकी भरे खत

TCN Desk TCN Desk | 1h ago · 7 min read
37 साल बाद फिर कश्मीरी पंडित खौफ में, पिछले 17 दिनों में मिले 2 धमकी भरे खत

ये धमकियां ‘यूनाइटेड लिबरेशन काउंसिल’ यानी ULC नामक एक छद्म संगठन ने जारी की है

जिस दहशत और घर छोड़ने की टीस को कश्मीरी पंडित भूलने की कोशिश कर रहे थे, वो दहशत और टीस एक बार फिर से घाटी में पसरने लगा है। कश्मीर में तैनात कश्मीरी पंडित सरकारी कर्मचारियों ने सोशल मीडिया पर धमकी भरे पोस्टर सामने आने के बाद अपनी सुरक्षा को लेकर गंभीर चिंता जताई है। इन पोस्टरों में कुछ कर्मचारियों के नाम, घर के पते, फोन नंबर और वाहनों की जानकारी होने का दावा किया गया है। कर्मचारियों ने संवेदनशील जानकारियां लीक होने की जांच और सुरक्षा व्यवस्था मजबूत करने की मांग की है।

ये धमकियां ‘यूनाइटेड लिबरेशन काउंसिल’ यानी ULC नामक एक छद्म संगठन ने जारी की है।

ऑल पीएम पैकेज एम्प्लॉइज फोरम कश्मीर ने मुख्य सचिव को लिखे पत्र में कहा कि,

23 अगस्त, 2026 की तारीख वाला एक धमकी भरा पोस्टर सोशल मीडिया पर प्रसारित हो रहा है, जिससे कर्मचारियों और उनके परिवारों में डर का माहौल है।

धमकी भरा पत्र सामने आने के बाद कश्मीरी पंडित एक बार फिर डर के साये में जी रहे हैं। घर छोड़ने के 37 साल बाद भी उनके मन से भय खत्म नहीं हुआ है।

बताया जा रहा है कि इस पत्र में केवल कश्मीरी पंडितों के नाम ही नहीं, बल्कि उनके घरों के पते, वाहनों के रंग और रजिस्ट्रेशन नंबर तक लिखे गए हैं। निजी जानकारियां लीक होने से समुदाय की चिंता और बढ़ गई है।

खुफिया एजेंसियों के मुताबिक,

ये धमकी भरे पत्र ‘यूनाइटेड लिबरेशन काउंसिल’ यानी ULC ने एक टेलीग्राम चैनल के माध्यम से जारी किए हैं। एजेंसियां ULC को लश्कर-ए-तैयबा का मुखौटा संगठन मानती हैं। बताया जा रहा है कि आतंकियों से जुड़ी संपत्तियां जब्त किए जाने से यह संगठन नाराज है। ULC ने सरकारी विभागों और कश्मीरी पंडितों को निशाना बनाने का दावा किया है।

ANI की एक रिपोर्ट के मुताबिक,


धमकियों के बाद स्थानीय प्रशासन ने सरकारी कर्मचारियों और कश्मीरी पंडितों को घर से काम करने की सलाह दी है। अनंतनाग में रहने वाले 40 वर्षीय कश्मीरी पंडित साहिल रैना राजस्व विभाग में कार्यरत हैं। वह कहते हैं कि,

सोशल मीडिया पर हमारे नाम के साथ ऐसी धमकियां देखना बेहद डरावना है। हमारे परिवार ने 1990 के दशक में भी यह सब देखा था और हमें कश्मीर छोड़ना पड़ा था। अब हमारे बुजुर्ग और माता-पिता फिर डरे हुए हैं। हम इतिहास को दोहराते हुए नहीं देखना चाहते।

साहिल के मुताबिक,

सुरक्षा एजेंसियों को सबसे पहले यह पता लगाना चाहिए कि धमकी भरे पत्र सोशल मीडिया पर कौन डाल रहा है और उनके पास लोगों की निजी जानकारी कैसे पहुंची।

वह कहते हैं,

अगर ये पत्र फर्जी हैं तो इसे स्पष्ट किया जाना चाहिए। अगर ये असली हैं तो इनके पीछे मौजूद लोगों की पहचान होनी चाहिए। यह भी पता लगाया जाना चाहिए कि इन्हें पाकिस्तान से नियंत्रित किया जा रहा है या कोई और इनके पीछे है।

साहिल का कहना है कि,

सरकार कश्मीरी पंडितों को घाटी में दोबारा बसाने की बात करती है, लेकिन प्रधानमंत्री पैकेज के तहत लौटे करीब छह हजार कर्मचारी भी यहां ठीक तरीके से बस नहीं पाए हैं। उनके मुताबिक, संसद में लगभग तीन हजार आवास उपलब्ध कराने की जानकारी दी गई थी, लेकिन अब भी कई परिवारों को मकान नहीं मिले हैं।

साहिल चाहते हैं कि केंद्रीय गृह मंत्री घाटी का दौरा करें और कर्मचारियों तथा उनके परिवारों से मुलाकात करें। वह कहते हैं,

“हम सरकार पर भरोसा करके वापस आए थे। 37 साल हो चुके हैं। अब पुनर्वास की प्रक्रिया तेज की जानी चाहिए।

साहिल का कहना है कि,

प्रशासन की ‘वर्क फ्रॉम होम’ की सलाह कोई स्थायी समाधान नहीं है। बच्चों को स्कूल जाना है, हमें बाजार जाना है और बीमार व बुजुर्ग परिजनों के लिए दवाइयां खरीदनी हैं। हम सामान्य और सुरक्षित जीवन जीना चाहते हैं।”

उन्होंने नागरिक संगठनों और गैर-सरकारी संगठनों से भी इन धमकियों की निंदा करने की अपील की है। साहिल का कहना है कि अगर सरकार सुरक्षा उपलब्ध नहीं करा सकती तो कर्मचारियों को आत्मरक्षा के लिए लाइसेंसी हथियार और प्रशिक्षण दिया जाना चाहिए।

जम्मू में रह रहे विस्थापित कश्मीरी पंडित राकेश कौल का कहना है कि,

इन धमकी भरे पत्रों ने उस पुराने डर को फिर जगा दिया है, जिसके कारण उन्हें 37 साल पहले अपना घर छोड़ना पड़ा था। पहले अखबारों में हमें कश्मीर छोड़ने और गद्दार बताने वाले संदेश प्रकाशित होते थे। आज भी उसी भाषा का इस्तेमाल किया जा रहा है।

राकेश कौल ने कहा,

एजेंसियों को इन धमकियों की जड़ तक पहुंचना चाहिए, खासकर तब जब पत्रों में लोगों के नाम और पते मौजूद हैं। कश्मीरी पंडित परिवारों में डर है, लेकिन ऐसी धमकियां हमारा मनोबल नहीं तोड़ सकतीं। हमने 400 वर्षों से अधिक का इतिहास देखा है। कश्मीरी पंडित न कभी झुके हैं और न कभी झुकेंगे।

कौल का दावा है कि कश्मीर में आज भी बड़ी संख्या में ऐसे लोग हैं, जो कश्मीरी पंडितों के योगदान और उनकी वापसी के अधिकार को समझते हैं।

हालांकि, वह कहते हैं,

कुछ लोग ऐसे भी हैं जो नहीं चाहते कि हम वापस लौटें। ये पत्र लिखने वाले लोग भी उन्हीं में शामिल हैं। आरोप है कि इनमें से कुछ लोगों ने विस्थापित परिवारों की जमीन और संपत्तियों पर कब्जा कर रखा है।

कौल के मुताबिक, कश्मीरी पंडितों का 37 वर्षों से विस्थापित रहना केवल अलग-अलग सरकारों की ही नहीं, बल्कि समाज की भी विफलता है। उन्होंने बार-बार मिल रही धमकियों की जांच कराने और इनके पीछे मौजूद लोगों तथा उनके उद्देश्य का पता लगाने की मांग की है।

पनुन कश्मीर के संस्थापक-संयोजक डॉ. अग्निशेखर ने विस्थापित कश्मीरी पंडितों के लिए अलग भूमि की मांग की है।

डॉ. अग्निशेखर का कहना है कि,

सरकारें दावा करती हैं कि कश्मीर के हालात बदल चुके हैं और लाखों पर्यटक घाटी पहुंच रहे हैं। अगर वास्तव में सब कुछ बदल गया है तो कश्मीरी पंडित आज भी घाटी से बाहर क्यों हैं? अनुच्छेद 370 हटाए जाने के बाद भी उनकी वापसी और पुनर्वास क्यों नहीं हो पाया?

डॉ. अग्निशेखर का दावा है कि,

आतंक का नेटवर्क और उसका पूरा तंत्र अब भी मौजूद है। आतंकवाद का स्वरूप बदल गया है और हाइब्रिड आतंकवाद जैसी नई चुनौतियां सामने आई हैं। हालिया धमकियां प्रधानमंत्री पैकेज के तहत कश्मीर लौटे कर्मचारियों की सुरक्षा पर गंभीर सवाल खड़े करती हैं। अगर ये कर्मचारी और उनके परिवार ही सुरक्षित नहीं हैं तो हम किसकी वापसी की बात कर रहे हैं?”

डॉ. अग्निशेखर ने कहा कि,

कश्मीरी पंडितों के पुनर्वास के लिए एक ठोस नीति की आवश्यकता है। घर से काम करना कोई स्थायी समाधान नहीं है। सामान्य जीवन जीने के लिए सरकारी कर्मचारियों और उनके परिवारों को घर से बाहर निकलना ही पड़ेगा।हालिया धमकियां किसी बड़ी घटना की तैयारी का संकेत हो सकती हैं। उन्होंने अधिकारियों से इन धमकियों को गंभीरता से लेने की अपील की है।

पुलिस और सुरक्षा एजेंसियां जांच कर रही हैं कि धमकी भरे पत्र असली हैं या फर्जी और इन्हें कहां से जारी किया गया है। इस मामले में पुलिस और प्रशासन से प्रतिक्रिया लेने का प्रयास किया गया, लेकिन उनकी ओर से कोई टिप्पणी नहीं की गई है।

टेक्नोक्रेट और सामाजिक कार्यकर्ता संजय सप्रू ने धमकियों और लोगों की निजी जानकारी सार्वजनिक किए जाने को लेकर राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू को एक खुला पत्र लिखा है। सप्रू ने राष्ट्रपति से हस्तक्षेप की मांग करते हुए कहा है कि केंद्र सरकार और जम्मू-कश्मीर प्रशासन एक निश्चित समयसीमा में मामले की जांच करें। इसके साथ ही धमकियों के लिए जिम्मेदार लोगों और उनके पूरे नेटवर्क का पर्दाफाश किया जाए।

प्रधानमंत्री विशेष पैकेज के तहत भर्ती होकर घाटी में कार्यरत कश्मीरी प्रवासी कर्मचारी सनी रैना ने कहा कि,

अगस्त के पहले सप्ताह में भी इसी तरह के धमकी भरे पत्र सामने आए थे। लेकिन ताजा पत्र में कर्मचारियों के जम्मू स्थित घरों के पते, वाहन नंबर और फोन नंबर जैसी निजी जानकारियां भी दर्ज हैं।

रैना ने कहा,

हमारी निजी जानकारी लीक करके सोशल मीडिया पर साझा की गई है।” उन्होंने सुरक्षा एजेंसियों से यह पता लगाने की मांग की कि कर्मचारियों की संवेदनशील जानकारियां धमकी देने वालों तक किसने और कैसे पहुंचाईं।

उन्होंने कहा कि,

कश्मीरी पंडित कर्मचारी और उनके परिवार भय के साये में जी रहे हैं। तत्काल एहतियात के तौर पर कर्मचारियों को घर से काम करने की अनुमति दी जानी चाहिए। यदि यह संभव नहीं है, तो उनके घरों और कार्यस्थलों के बाहर पर्याप्त सुरक्षा तैनात की जाए।

रैना के मुताबिक,

वर्ष 2022 में पीएम विशेष पैकेज के कर्मचारी राहुल भट की हत्या के बाद से लगातार ऐसे धमकी भरे पत्र सामने आ रहे हैं। उन्होंने कहा, “हमें नहीं पता कि ये धमकियां कहां से आ रही हैं। मेरा मानना है कि राहुल भट की हत्या के बाद से यह 36वां या 37वां धमकी भरा पत्र है।

उन्होंने मौजूदा हालात की तुलना 1990 के दशक से करते हुए आरोप लगाया कि कश्मीरी पंडितों में भय पैदा करके उन्हें घाटी छोड़ने के लिए मजबूर करने का वही पुराना तरीका अपनाया जा रहा है।

ऑल पीएम पैकेज एम्प्लॉइज फोरम कश्मीर के अनुसार,

पुलिस या सुरक्षा एजेंसियों ने अभी तक पोस्टर की प्रामाणिकता की पुष्टि नहीं की है। हालांकि, निजी और संवेदनशील जानकारियों वाले ऐसे धमकी भरे पत्रों का बार-बार प्रसारित होना गंभीर चिंता का विषय है। फोरम ने बताया कि मामले को सत्यापन और आवश्यक कार्रवाई के लिए पुलिस एवं सुरक्षा एजेंसियों के संज्ञान में लाया जा चुका है। संगठन ने पुराने लक्षित हमलों का उल्लेख करते हुए कहा कि कथित धमकी भरे पोस्टरों ने कर्मचारियों में असुरक्षा और भय की भावना बढ़ा दी है।