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सत्य निकेतन हादसा: छात्रों का आरोप, मृतकों की वास्तविक संख्या छिपा रही है दिल्ली सरकार

TCN Desk TCN Desk | 1h ago · 4 min read
सत्य निकेतन हादसा: छात्रों का आरोप, मृतकों की वास्तविक संख्या छिपा रही है दिल्ली सरकार

प्रदर्शनकारी छात्रों ने कहा कि कम से कम तीन से चार छात्रों का अभी तक कोई पता नहीं चला है। यह संख्या ज्यादा भी हो सकती है।

दिल्ली के सत्य निकेतन में पीजी इमारत गिरने के बाद राहत एवं बचाव अभियान बंद किए जाने के बाद पिछले दो दिनों से दिल्ली विश्वविद्यालय के 150 से अधिक छात्रों ने अनिश्चितकालीन प्रदर्शन शुरू कर दिया है। छात्रों का दावा है कि कई विद्यार्थी अभी भी लापता हैं। प्रदर्शनकारी छात्रों का आरोप है दिल्ली सरकार मृतकों की वास्तविक संख्या छिपा रही है। उन्होंने सरकार से हादसे से जुड़े सभी आंकड़े सार्वजनिक करने की मांग की है। इस हादसे में सात लोगों की मौत हुई थी, जबकि पांच लोग घायल हुए थे।

The Hindu की एक रिपोर्ट के अनुसार, प्रदर्शनकारी छात्रों ने आरोप लगाया कि दिल्ली सरकार मृतकों की वास्तविक संख्या छिपा रही है। आइसा (AISA) के प्रतिनिधि उन्नयन ने कहा,

कम से कम तीन से चार छात्रों का अभी तक कोई पता नहीं चला है। यह संख्या ज्यादा भी हो सकती है। उनके माता-पिता ने एम्स और सफदरजंग अस्पताल जाकर तलाश की, लेकिन उनके बच्चे वहां नहीं मिले। हम इन छात्रों का पता लगाने की कोशिश कर रहे हैं।

उन्होंने यह भी दावा किया कि,

इमारत के बेसमेंट को अभी तक पूरी तरह खाली नहीं कराया गया है और वहां कुछ मजदूर फंसे हो सकते हैं।

छात्रों ने आरोप लगाया कि,

कुछ पीड़ितों के परिजनों और दोस्तों को एम्स ट्रॉमा सेंटर में प्रवेश नहीं दिया जा रहा है, जिससे हादसे को लेकर भ्रम और परेशानी बढ़ रही है।

प्रदर्शनकारी छात्रों की प्रमुख मांगों में प्रत्येक मृतक के परिवार को एक करोड़ रुपये का मुआवजा, सभी पीजी आवासों का सुरक्षा ऑडिट, नियमों का उल्लंघन करने वाले जिम्मेदार लोगों को जेल भेजना और छात्रों के लिए पर्याप्त छात्रावास उपलब्ध कराना शामिल है।

गौरतलब है कि बुधवार को सत्य निकेतन पीजी इमारत हादसे के बाद दिल्ली विश्वविद्यालय के साउथ कैंपस में विभिन्न छात्र संगठनों ने जोरदार प्रदर्शन किया। छात्रों ने हादसे के लिए जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कार्रवाई और निजी पीजी आवासों की सुरक्षा व्यवस्था में तत्काल सुधार की मांग उठाई। प्रदर्शन में नेशनल स्टूडेंट्स यूनियन ऑफ इंडिया (NSUI), आइसा और ASAP और अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (ABVP) समेत कई छात्र संगठन शामिल हुए। प्रदर्शनकारियों ने मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता के इस्तीफे और निजी पीजी आवासों के लिए सख्त सुरक्षा नियम लागू करने की मांग की।

ABVP ने विश्वविद्यालय के रग्बी ग्राउंड से आर्ट्स फैकल्टी तक बड़े स्तर पर ‘छात्र सुरक्षा मार्च’ निकाला। इसमें दिल्ली विश्वविद्यालय के विभिन्न कॉलेजों के छात्रों ने हिस्सा लिया। ‘आखिर कब तक?’ नारे के साथ संगठन ने छात्र बहुल इलाकों में मौजूद सभी पीजी का तत्काल ढांचागत और अग्नि सुरक्षा ऑडिट कराने तथा हादसे के दोषियों पर कड़ी कार्रवाई की मांग की।

संगठन की प्रमुख मांगों में 30 दिनों के भीतर सभी पीजी का सुरक्षा ऑडिट, छात्रों के लिए नए छात्रावासों का निर्माण और निजी पीजी आवासों को नियंत्रित करने के लिए स्पष्ट नियम-कानून तैयार करना शामिल है।

ABVP के दिल्ली प्रदेश सचिव सार्थक शर्मा ने कहा कि इस पहल का उद्देश्य छात्रों को अपने आवास में मौजूद खतरों की पहचान करने और असुरक्षित परिस्थितियों की जानकारी अधिकारियों तक पहुंचाने का एक आसान माध्यम उपलब्ध कराना है। छात्र सुरक्षा को लेकर ठोस कार्रवाई दिखाई देने तक हमारा अभियान जारी रहेगा।”

वहीं, NSUI ने दिल्ली विश्वविद्यालय प्रशासन को निशाने पर लिया। संगठन ने हादसे के कुछ ही दिनों बाद कुलपति के आधिकारिक कार्यक्रमों में शामिल होने पर सवाल उठाए। NSUI कार्यकर्ताओं ने विश्वविद्यालय के एक कार्यक्रम के दौरान प्रदर्शन करते हुए आरोप लगाया कि प्रशासन ने हादसे से प्रभावित छात्रों के प्रति संवेदनशीलता नहीं दिखाई।

इस बीच, आमतौर पर छात्रों से गुलजार रहने वाली सत्य निकेतन की गलियों में सूटकेस, बड़े बैग और अन्य सामान दिखाई दे रहे हैं। असुरक्षित इमारतों को खाली कराने के निर्देश के बाद सैकड़ों छात्रों ने अपने पीजी छोड़ना शुरू कर दिया है।


कई छात्रों ने बताया कि,

सबसे पहले चार या उससे अधिक मंजिलों वाले पीजी भवनों में रहने वालों को जगह खाली करने के लिए कहा जा रहा है। आशंका है कि अवैध निर्माण के खिलाफ कार्रवाई के तहत ऐसी इमारतों को गिराया जा सकता है।

हादसे के समय शहर से बाहर गए कई छात्रों का सामान लेने उनके दोस्त और रिश्तेदार पीजी पहुंच रहे हैं। एक रिश्तेदार ने बताया, “मेरी भतीजी को एक महीने पहले मैत्रेयी कॉलेज में दाखिला मिला था और वह यहां एक पीजी में रहने लगी थी। उसके माता-पिता गुवाहाटी में हैं और इतनी जल्दी इतनी दूर से नहीं आ सकते थे। उनका फोन आने के बाद हम उसे और उसका सामान लेने आए हैं।”

बड़ी संख्या में छात्रों के पीजी खाली करने से इलाके में अनिश्चितता का माहौल बन गया है। घनी आबादी वाले सत्य निकेतन में दिल्ली विश्वविद्यालय के दक्षिण परिसर के विद्यार्थियों के लिए बड़ी संख्या में पीजी संचालित होते हैं। फिलहाल छात्रों की सबसे बड़ी चिंता रहने के लिए सुरक्षित जगह तलाशना है। वहीं, इलाके की अन्य इमारतों की मजबूती और सुरक्षा को लेकर भी गंभीर सवाल बने हुए हैं।