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लंदन में कार्यक्रम गोपनीय रखने के बाद भी RSS प्रमुख मोहन भागवत का हुआ विरोध

TCN Desk TCN Desk | 1h ago · 6 min read
लंदन में कार्यक्रम गोपनीय रखने के बाद भी RSS प्रमुख मोहन भागवत का हुआ विरोध

आयोजकों द्वारा कार्यक्रम गोपनीय रखने के बाद भी लंदन के पार्लियामेंट स्क्वायर के बाहर प्रदर्शनकारियों ने मोहन भागवत और RSS का विरोध किया।

राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) प्रमुख मोहन भागवत 3 सितंबर को गोपनीय दौरे पर ब्रिटेन पहुंचे। आयोजकों द्वारा कार्यक्रम गोपनीय रखने के बाद भी लंदन के पार्लियामेंट स्क्वायर के बाहर प्रदर्शनकारियों ने मोहन भागवत और RSS का विरोध किया और खिलाफ में नारे लगाए। बता दें कि यह उनके अंतरराष्ट्रीय दौरे का अंतिम चरण था, जिसकी शुरुआत 25 अगस्त को अमेरिका से हुई थी और इस दौरान वह कनाडा भी गए। हालांकि, ब्रिटेन में उनके कार्यक्रम की सटीक जानकारी सार्वजनिक नहीं की गई थी। भागवत की गतिविधियों को लेकर कोई आधिकारिक पुष्टि न होने के बावजूद रविवार को लंदन के पार्लियामेंट स्क्वायर के बाहर प्रदर्शनकारी जुटे। इसके अगले दिन उनका ब्रिटेन दौरा समाप्त होने की संभावना थी।


ब्रिटिश संसद और बिग बेन की प्रतीकात्मक पृष्ठभूमि में प्रदर्शनकारी दो संदेश देना चाहते थे—

पहला, वे RSS के हिंदू बहुसंख्यकवादी विचारों को अस्वीकार करते हैं और दूसरा, वे भागवत की यात्रा पर ब्रिटिश सरकार की आधिकारिक चुप्पी का विरोध कर रहे हैं।

रविवार दोपहर से ही विभिन्न अभियान संगठनों, प्रवासी समुदायों, विद्यार्थियों और शिक्षाविदों से जुड़े लोग प्रदर्शनस्थल पर जुटने लगे। फिलिस्तीनी झंडों के साथ कई तख्तियां भी दिखाई दीं, जिन पर लिखा था—


2002 का गुजरात दंगा कभी मत भूलो”, “फासीवाद के खिलाफ एकजुट प्रवासी समुदाय” और “इंकलाब जिंदाबाद।” एक अन्य पोस्टर पर ब्रिटेन के प्रधानमंत्री एंडी बर्नहम से पूछा गया था—“क्या आप आरएसएस पर प्रतिबंध लगाएंगे?”

प्रदर्शन में शामिल एक हाईस्कूल शिक्षिका ने कहा कि,

प्रवासी भारतीय समुदाय को ऐसे विरोध प्रदर्शनों में अपनी उपस्थिति दर्ज करानी चाहिए, क्योंकि आरएसएस की राजनीति भारत में दमन को बढ़ावा देती है। उन्होंने उदाहरण के तौर पर हिंदुत्व समर्थक प्रभावशाली व्यक्ति स्वतंत्र भारद्वाज का मामला उठाया। भारद्वाज का एक इंटरव्यू पिछले सप्ताह सोशल मीडिया पर वायरल हुआ था, जिसमें उसने एक छात्र कार्यकर्ता के पिता पर हमला करने की शेखी बघारी थी।

शिक्षिका ने आरोप लगाया कि,

भागवत पश्चिमी देशों की यात्रा करके अपने “पूंजीपति मित्रों से लाखों-अरबों की रकम हासिल करते हैं, जिसका इस्तेमाल भारत में दमन के लिए किया जाता है।” उन्होंने कहा कि ऐसी परिस्थितियों में खुलकर विरोध करना और भी जरूरी हो जाता है।

एक अन्य वक्ता ने प्रदर्शन के उद्देश्य को व्यापक संदर्भ देते हुए भीड़ से कहा कि वे “नस्लीय राष्ट्रवाद की विचारधारा” के खिलाफ यहां एकत्र हुए हैं।

‘Hindus For Human Rights UK’ नामक संगठन के निदेशक राजीव सिन्हा ने दावा किया कि,

जैसे-जैसे भागवत का दौरा आगे बढ़ा, आरएसएस लगातार अधिक “डरा हुआ” दिखाई दिया।

उन्होंने कहा,

“अमेरिका छोड़ने से एक दिन पहले शनिवार को उन्होंने न्यूयॉर्क के मैडिसन स्क्वायर गार्डन में अपना मुख्य कार्यक्रम आयोजित किया। वहां उन्हें जबरदस्त विरोध का सामना करना पड़ा। बैठकें हासिल करने के लिए उन्हें अपनी पहचान, राजनीति और विचारधारा के बारे में झूठ बोलना पड़ा। लेकिन यहां ब्रिटेन में हमने उनकी गतिविधियों के बारे में कितना सुना? बहुत ज्यादा नहीं।”

भागवत के न्यूयॉर्क पहुंचने पर अमेरिका में धार्मिक स्वतंत्रता की निगरानी करने वाले एक आयोग USCIRF ने डोनाल्ड ट्रंप प्रशासन से उनका वीजा रद्द करने और भविष्य में भी उन्हें अमेरिका में प्रवेश के लिए “अयोग्य” घोषित करने की मांग की थी।


UNITED STATES COMMISSION ON INTERNATIONAL RELIGIOUS FREEDOM (USCIRF) ने कहा था कि,

वह भागवत की यात्रा को लेकर “बेहद चिंतित” है। आयोग ने आरोप लगाया कि हाल के वर्षों में आरएसएस से जुड़े समूहों ने ईसाइयों, दलितों, मुसलमानों और सिखों समेत धार्मिक अल्पसंख्यकों पर हिंसक हमले किए हैं।

आयोग ने आगे कहा,

“प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में भारत की सत्तारूढ़ भारतीय जनता पार्टी ने ऐसी नीतियां लागू की हैं, जो आरएसएस की हिंदुत्ववादी विचारधारा के काफी करीब हैं और स्वाभाविक रूप से धार्मिक अल्पसंख्यक समुदायों के साथ भेदभाव करती हैं।”

29 अगस्त को भागवत ने न्यूयॉर्क के मैडिसन स्क्वायर गार्डन में ‘वन वर्ल्ड, वन ह्यूमैनिटी’ नामक कार्यक्रम में लगभग पांच हजार हिंदू अमेरिकियों और प्रवासी भारतीयों को संबोधित किया था। कार्यक्रम में उनके साथ मंच साझा करने वाले दो धर्मगुरुओं ने बाद में कहा कि आयोजकों ने उन्हें यह जानकारी नहीं दी थी कि हिंदुत्ववादी नेता मोहन भागवत भी इसमें हिस्सा लेंगे।

रिवरसाइड चर्च की पादरी एड्रिएन थॉर्न ने आरोप लगाया कि उन्हें कार्यक्रम में शामिल होने के लिए “धोखे में रखा गया।” वहीं, एक अन्य धार्मिक नेता शम्सी अली ने अपनी भागीदारी को “निर्णय लेने में हुई गंभीर भूल” बताया।

न्यूयॉर्क में कार्यक्रम स्थल के बाहर भी कई लोगों ने विरोध प्रदर्शन किया था। भागवत के 31 अगस्त को कनाडा पहुंचने से पहले शुक्रवार को वहां के दो सांसदों ने सरकार से आरएसएस पर प्रतिबंध लगाने और उसके प्रमुख को देश में प्रवेश करने से रोकने की मांग की थी। उनका दावा था कि भागवत की कनाडा में मौजूदगी से “सामाजिक अव्यवस्था” पैदा हो सकती है।

इसके अलावा, कनाडा के 40 से अधिक नागरिक और धार्मिक संगठनों ने भी सार्वजनिक सुरक्षा मंत्री गैरी आनंदसंगरी से भागवत को देश में प्रवेश की अनुमति नहीं देने की अपील की थी।

USCIRF के राजीव सिन्हा ने दावा किया कि,

इन्हीं घटनाओं के परिणामस्वरूप, जब तक यह दौरा ब्रिटेन पहुंचा, तब तक भागवत के कार्यक्रम की पूरी जानकारी गोपनीय रखी गई।

उन्होंने भीड़ से कहा,

वे छिप रहे हैं, क्योंकि वे डरे हुए हैं—और उन्हें डरना भी चाहिए। उन्हें मालूम है कि हम सामने आएंगे और आज की तरह एकजुट होकर विरोध करेंगे।”

आयोजकों के मुताबिक, लंदन में ब्रिटिश संसद के ठीक सामने प्रदर्शन करने का फैसला उन ब्रिटिश अधिकारियों को संदेश देने के लिए लिया गया, जिन्होंने अब तक भागवत की यात्रा पर कोई स्पष्ट रुख नहीं अपनाया है। पिछले सप्ताह लेबर पार्टी की सांसद नादिया व्हिटोम ने संसद में लिखित सवाल पूछकर जानना चाहा था कि क्या सरकार ने गृह मंत्रालय की ‘अस्वीकार्य व्यवहार नीति’ के तहत भागवत की यात्रा का आकलन किया है।

ब्रिटेन के सुरक्षा मंत्री डैन जार्विस ने भागवत की मौजूदगी पर सीधे कुछ नहीं कहा। उन्होंने जवाब दिया कि गृह मंत्रालय व्यक्तिगत मामलों पर टिप्पणी नहीं कर सकता। हालांकि, उन्होंने कहा कि सरकार “हर तरह के खतरे” से निपटने और “हिंसा तथा नफरत को बढ़ावा देने वाले विचार फैलाने वालों” को जवाबदेह ठहराने के लिए प्रतिबद्ध है।

लंदन के मेयर सादिक खान से ‘हिंदूज फॉर ह्यूमन राइट्स यूके’ ने यह पुष्टि करने को कहा था कि भागवत की यात्रा के लिए न तो किसी नगर निकाय के आयोजन स्थल का इस्तेमाल होगा और न ही सार्वजनिक धन खर्च किया जाएगा। लेकिन सादिक खान ने इस पर सार्वजनिक रूप से कोई बयान नहीं दिया।

इसके अलावा, 20 से अधिक प्रवासी संगठनों के गठबंधन ने भी उनसे मांग की थी कि ग्रेटर लंदन अथॉरिटी के स्वामित्व वाले किसी भी आयोजन स्थल को आरएसएस के कार्यक्रमों के लिए उपलब्ध न कराया जाए। गठबंधन ने यह भी पूछा था कि मेट्रोपॉलिटन पुलिस ने भागवत की यात्रा के दौरान सुरक्षा को लेकर क्या कदम उठाए हैं।