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ZEE ग्रुप के मालिक सुभाष चंद्रा के खिलाफ CBI ने लोन फ्रॉड मामले में दर्ज किया FIR

TCN Desk TCN Desk | 1h ago · 5 min read
ZEE ग्रुप के मालिक सुभाष चंद्रा के खिलाफ CBI ने लोन फ्रॉड मामले में दर्ज किया FIR

सीबीआई की बैंकिंग सिक्योरिटीज फ्रॉड ब्रांच ने 31 अगस्त को यह एफआईआर दर्ज की।

केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) ने ZEE TV के संस्थापक और ESSEL समूह के चेयरमैन सुभाष चंद्रा, कई कंपनियों तथा उनके निदेशकों के खिलाफ एफआईआर दर्ज की है। आरोप है कि लाइफ इंश्योरेंस कॉरपोरेशन हाउसिंग फाइनेंस लिमिटेड (LICHFL) से कर्ज लेने के लिए चंद्रा की कुल संपत्ति को बढ़ा-चढ़ाकर दिखाया गया। बाद में ये कर्ज डिफॉल्ट हो गए, जिससे सार्वजनिक क्षेत्र की ऋणदाता कंपनी को 1,322 करोड़ रुपये से अधिक का नुकसान हुआ।


सीबीआई की बैंकिंग सिक्योरिटीज फ्रॉड ब्रांच ने 31 अगस्त को यह एफआईआर दर्ज की। मामला LICHFL की महाप्रबंधक नीता मेंघानी की ओर से दी गई लिखित शिकायत पर आधारित है।

एफआईआर के मुताबिक,

LICHFLने वर्ष 2018 में दी गई दो ऋण सुविधाओं से संबंधित मामले में ब्याज और अन्य शुल्कों के अतिरिक्त 1,322 करोड़ रुपये से अधिक के नुकसान का आरोप लगाया है। दावा है कि इन दोनों ऋणों के लिए सुभाष चंद्रा ने व्यक्तिगत गारंटी दी थी।

एफआईआर में सुभाष चंद्रा के अलावा वसंत सागर प्रॉपर्टीज प्राइवेट लिमिटेड, उसके निदेशक पंकज सुरोलिया, पैन इंडिया इंफ्रास्ट्रक्चर प्राइवेट लिमिटेड, डिजिटल सब्सक्राइबर मैनेजमेंट एंड कंसल्टेंसी सर्विसेज प्राइवेट लिमिटेड, उसके निदेशक अमीश पांड्या, स्पिरिट इंफ्रा पावर एंड मल्टी वेंचर्स प्राइवेट लिमिटेड और उसके निदेशक राजीव ढोलकिया को आरोपी बनाया गया है। इसके साथ ही अज्ञात लोक सेवकों और कुछ अन्य लोगों के नाम भी शामिल हैं।

शिकायत के अनुसार,

LICHFLने वसंत सागर प्रॉपर्टीज प्राइवेट लिमिटेड और पैन इंडिया इंफ्रा प्रोजेक्ट्स प्राइवेट लिमिटेड को 500 करोड़ रुपये की ऋण सुविधा दी थी। इसके अतिरिक्त डिजिटल सब्सक्राइबर मैनेजमेंट एंड कंसल्टेंसी सर्विसेज प्राइवेट लिमिटेड तथा स्पिरिट इंफ्रा पावर एंड मल्टी वेंचर्स प्राइवेट लिमिटेड को 480 करोड़ रुपये का कर्ज दिया गया था।

शिकायत में आरोप लगाया गया है कि दोनों ऋण सुविधाओं के लिए सुभाष चंद्रा ने ‘लेटर ऑफ कंटिन्यूइंग गारंटी’ जारी किए थे। पहली गारंटी कथित रूप से 28 मार्च 2018 और दूसरी 10 अगस्त 2018 को दी गई थी।

LIC हाउसिंग फाइनेंस का आरोप है कि,

ये कर्ज सुभाष चंद्रा की ओर से जमा कराए गए नेटवर्थ सर्टिफिकेट के आधार पर स्वीकृत किए गए। वसंत सागर से जुड़े कर्ज के मामले में 28 मार्च 2018 के प्रमाणपत्र में 31 मार्च 2017 तक चंद्रा की कुल संपत्ति 6,197.62 मिलियन अमेरिकी डॉलर दिखाई गई थी। दस्तावेज में इसे लगभग 59,113.21 करोड़ रुपये के बराबर बताया गया था। वहीं, दूसरी ऋण सुविधा के लिए 6 जुलाई 2018 को जारी कथित प्रमाणपत्र में उनकी कुल संपत्ति 40,562 करोड़ रुपये दर्ज थी।

शिकायत में आगे कहा गया है कि व्यक्तिगत दिवाला समाधान प्रक्रिया से जुड़ी बाद की कार्यवाही के दौरान चंद्रा ने LICHFL को सौंपे गए प्रमाणपत्रों में दर्ज इतनी संपत्ति होने से इनकार किया था।

शिकायत के मुताबिक,

चंद्रा ने दावा किया कि वर्ष 2024 में उनकी कुल संपत्ति केवल 31.79 करोड़ रुपये थी। उन्होंने यह भी कहा कि वर्ष 2017-18 में भी उनकी संपत्ति 40,000 करोड़ रुपये से अधिक नहीं थी। एफआईआर में दर्ज विवरण के अनुसार, दोनों ऋण खातों में डिफॉल्ट हुआ। वसंत सागर से संबंधित ऋण में 570.50 करोड़ रुपये और डिजिटल सब्सक्राइबर से जुड़े ऋण में 507.25 करोड़ रुपये बकाया बताए गए हैं। इस पूरे मामले में कुल नुकसान 1,322 करोड़ रुपये आंका गया है।

LICHFL का आरोप है कि,

सुभाष चंद्रा ने कर्ज लेने वाली कंपनियों, उनके अधिकारियों और निदेशकों के साथ मिलकर फर्जी एवं बढ़ा-चढ़ाकर तैयार किए गए नेटवर्थ दस्तावेजों के आधार पर ऋणदाता को कर्ज देने के लिए प्रेरित किया। शिकायत में धन के दुरुपयोग और गलत इस्तेमाल का भी आरोप लगाया गया है। साथ ही दावा किया गया है कि वसूली की प्रक्रिया को विफल करने के उद्देश्य से व्यक्तिगत गारंटर की संपत्तियां उससे अलग कर दी गईं।

गौरतलब है ZEE Group के फाउंडर सुभाष चंद्रा को 99.97 हेयरकट देने के मामले पर जब राष्ट्रीय कंपनी विधि न्यायाधिकरण (NCLT) की चारों तरफ किरकिरी हुई, आलोचना हुई तो NCLT ने अपने आदेश पर फिलहाल रोक लगा दी है। NCLT ने माना कि ये हेयरकट जरूरत से ज्यादा थी और गैरकानूनी भी, इससे बैंकों को भारी नुकसान उठाना पड़ता।NCLT की नवगठित पांच सदस्यीय पीठ ने पिछले दिनों ज़ी समूह के संस्थापक सुभाष चंद्रा की 22,006 करोड़ रुपये से अधिक के स्वीकृत कर्ज दावों के बदले 6.25 करोड़ रुपये चुकाने की योजना को मंजूरी देने वाले आदेश पर रोक लगा दी थी।

पीठ ने मामले की नए सिरे से सुनवाई होने तक सुभाष चंद्रा को अपनी संपत्तियां बेचने या हस्तांतरित करने से भी रोक दिया है।

यह आदेश न्यायाधिकरण द्वारा रीपेमेंट प्रस्ताव को मंजूरी दिए जाने के महज एक सप्ताह बाद आया था। कुल दावों की तुलना में रीपेमेंट की बेहद कम राशि को लेकर HDFC , Union Bank , LIC Housing Finance ने कड़ी आलोचना की थी और हेयरकट देने के प्रस्ताव को नामंजूर कर दिया था।

NCLT के अध्यक्ष न्यायमूर्ति (सेवानिवृत्त) अनूपिंदर सिंह ग्रेवाल की अध्यक्षता वाली पीठ ने सुभाष चंद्रा सहित सभी पक्षों को नोटिस जारी कर जवाब मांगा है। पीठ ने स्पष्ट किया कि योजना को मंजूरी देने वाले 25 अगस्त के आदेश को फिलहाल लागू नहीं किया जा सकता, क्योंकि सदस्यों के बीच कोई बहुमत वाली राय नहीं बन पाई थी।