VHP का फरमान, माथे पर तिलक, हाथ में रक्षा सूत्र बांधने के बाद ही गरबा में मिलेगा प्रवेश
आयोजकों से कहा गया है कि हिंदू पहचान की पुष्टि के लिए लोगों के माथे पर तिलक लगवाएं।
राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) प्रमुख मोहन भागवत द्वारा न्यूयॉर्क में आयोजित एक कार्यक्रम में ‘सार्वभौमिक एकता’ का संदेश दिए जाने के महज एक सप्ताह बाद विश्व हिंदू परिषद (VHP) ने महाराष्ट्र में दस दिवसीय नवरात्रि उत्सव के दौरान गरबा और डांडिया कार्यक्रमों में मुसलमानों के प्रवेश पर रोक लगाने का फैसला किया है। संगठन ने प्रतिभागियों के लिए सख्त नियम भी जारी किए हैं।
Indian Express की एक खबर के अनुसार, आयोजकों से कहा गया है कि वे लोगों के आधार कार्ड की जांच करें और हिंदू पहचान की पुष्टि के लिए उनके माथे पर तिलक लगवाएं।
वीएचपी का कहना है कि,
गरबा कार्यक्रमों में केवल हिंदुओं को प्रवेश मिलना चाहिए। इसके लिए प्रतिभागियों को माथे पर तिलक लगाना होगा, हाथ में रक्षा सूत्र बांधना होगा और किसी हिंदू देवी-देवता की पूजा करनी होगी। इन प्रक्रियाओं के बाद ही उन्हें कार्यक्रम में शामिल होने की अनुमति दी जाएगी।
संगठन के विदर्भ महासचिव प्रशांत तित्रे ने शनिवार को नागपुर में कहा कि,
कार्यक्रम में आने वाले लोगों पर ‘गोमूत्र’ भी छिड़का जाएगा। उन्होंने बताया कि नवरात्रि के दौरान वीएचपी और बजरंग दल के कार्यकर्ता गरबा पंडालों की निगरानी करेंगे, ताकि जारी दिशा-निर्देशों का पालन सुनिश्चित किया जा सके।
वीएचपी के अनुसार, ये कदम यह सुनिश्चित करने के लिए जरूरी हैं कि आयोजनों में केवल हिंदू ही प्रवेश करें और कथित ‘लव जिहाद’ जैसी घटनाएं न हों। ‘लव जिहाद’ शब्द का इस्तेमाल कुछ दक्षिणपंथी संगठन मुस्लिम पुरुषों द्वारा हिंदू लड़कियों और महिलाओं को धर्म परिवर्तन के लिए फंसाने के आरोपों के संदर्भ में करते हैं। नवरात्रि से पहले लगभग हर साल यह मुद्दा उठाया जाता रहा है।
वीएचपी के राष्ट्रीय प्रवक्ता श्रीराज नायर ने समाचार एजेंसी पीटीआई से कहा,
गरबा केवल नृत्य नहीं है, बल्कि देवी को प्रसन्न करने के लिए की जाने वाली उपासना का एक रूप है। वे लोग मूर्ति पूजा में विश्वास नहीं करते। इसलिए केवल उन्हीं लोगों को इसमें भाग लेने की अनुमति मिलनी चाहिए, जिनकी इन धार्मिक परंपराओं में आस्था है।”
विपक्ष ने वीएचपी और संघ परिवार पर ऐसे फरमानों के जरिए समाज में विभाजन पैदा करने का आरोप लगाया है। वहीं महाराष्ट्र सरकार में मंत्री और वरिष्ठ भाजपा नेता चंद्रशेखर बावनकुले ने कहा कि आयोजकों को यह तय करने का अधिकार है कि कार्यक्रम में किसे प्रवेश दिया जाए। उन्होंने कहा, “हर आयोजन समिति अपने कुछ नियम तय करती है और उसे ऐसा करने का अधिकार है। जब तक कार्यक्रम आयोजित करने के लिए पुलिस की अनुमति है, तब तक इसमें कोई समस्या नहीं है। महाराष्ट्र भाजपा के मीडिया प्रमुख नवनाथ बन ने कहा कि गरबा हिंदुओं का धार्मिक आयोजन है और दूसरे धर्मों के लोगों को इसमें “हस्तक्षेप नहीं करना चाहिए।”
दूसरी ओर, शिवसेना (उद्धव बालासाहेब ठाकरे) के नेता और राज्यसभा सांसद संजय राउत ने आरोप लगाया कि देश में जानबूझकर सांप्रदायिक माहौल बनाने की कोशिश की जा रही है। उन्होंने कहा,
देश में सांप्रदायिक माहौल बनाना ही इनकी रोजी-रोटी है। मैं यहां सभी धर्मों को समान सम्मान देने की बात नहीं कर रहा, लेकिन जिस तरह यह जहर फैलाया जा रहा है, वह न तो महाराष्ट्र को शोभा देता है और न ही देश को।”
कांग्रेस ने और कड़ा रुख अपनाते हुए कहा कि भाजपा से जुड़े संगठन सत्ता हासिल करने या सत्ता में बने रहने के लिए किसी भी हद तक जा सकते हैं।
कांग्रेस की ओर से कहा गया,
वे अपने राजनीतिक लाभ के लिए लोगों को और अधिक बांटना चाहते हैं तथा धर्म के नाम पर राजनीति करना चाहते हैं। वीएचपी का यह रुख नया नहीं है। उनका मकसद देश को अस्थिर करना है। सत्ता पाने के लिए वे देश का माहौल खराब करने की किसी भी सीमा तक जा सकते हैं। भाजपा से जुड़े सभी संगठन इसी तरीके से काम करते हैं। विविधता में एकता महाराष्ट्र की ताकत रही है और इसे कमजोर नहीं किया जाना चाहिए।”
महाराष्ट्र में नवरात्रि आयोजनों में मुसलमानों की भागीदारी पर रोक के बारे में वीएचपी के राष्ट्रीय प्रवक्ता और संयुक्त सचिव श्रीराज नायर ने कहा, “हमने नवरात्रि के दौरान गरबा-डांडिया में मुसलमानों को भाग लेने की अनुमति नहीं देने का फैसला किया है।” उन्होंने तर्क दिया, “नवरात्रि केवल गीत-संगीत और नृत्य का त्योहार नहीं है। यह देवी की आराधना का पर्व है। जो मुसलमान मूर्ति पूजा के विरोधी हैं, वे इस उत्सव में क्यों शामिल होना चाहते हैं?” हालांकि, उन्होंने यह भी स्पष्ट करने की कोशिश की कि मुसलमानों को नवरात्रि कार्यक्रमों में प्रवेश न देना किसी समुदाय के प्रति विरोध नहीं है।
गौरतलब है कि महज एक सप्ताह पहले आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत ने मैडिसन स्क्वायर गार्डन में आयोजित एक कार्यक्रम को संबोधित करते हुए कहा था,
अगर कोई हिंदू यह सोचता है कि भारत में मुसलमान नहीं होने चाहिए, तो वह हिंदू नहीं रहेगा। यदि आप स्वयं को हिंदू कहना चाहते हैं, तो आपको यह मानना होगा कि सभी रास्ते एक ही लक्ष्य की ओर जाते हैं। हर इंसान की अपनी गरिमा है और मनुष्यों के बीच कोई भेद नहीं है।
जब वीएचपी नेता से भागवत के इस बयान के बारे में पूछा गया तो उन्होंने कहा, “हम आरएसएस प्रमुख के बयान पर कोई टिप्पणी नहीं करते।”
नायर ने आगे कहा, “हम किसी के खिलाफ नहीं हैं। हम भी सामाजिक सद्भाव और शांति में विश्वास करते हैं। सवाल यह है कि जो मुसलमान हमारी धार्मिक मान्यताओं और पूजा-पद्धति को नहीं मानते, उनके लिए हम अपने दिशा-निर्देशों में ढील क्यों दें?”