Politics

राघव चड्ढा के धोखे का AAP ने लिया बदला? ड्राफ्ट वोटर लिस्ट से नाम हटा

TCN Desk TCN Desk | 1h ago · 5 min read
राघव चड्ढा के धोखे का AAP ने लिया बदला? ड्राफ्ट वोटर लिस्ट से नाम हटा

राज्यसभा सांसद राघव चड्ढा ने आम आदमी पार्टी पर बदले की राजनीति का लगाया आरोप।

भारतीय जनता पार्टी के राज्यसभा सांसद राघव चड्ढा ने गुरुवार को दावा किया कि पंजाब में विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) के बाद तैयार की गई मतदाता सूची के मसौदे से उनका नाम हटा दिया गया है। पंजाब से राज्यसभा सांसद चड्ढा के अनुसार,

चुनाव आयोग ने उन्हें मोहाली स्थित उनके रजिस्टर्ड पते से कहीं अन्यत्र स्थानांतरित हो चुका मतदाता बताया है। राघव चड्ढा ने इसे राज्य की आम आदमी पार्टी सरकार की ओर से की गई “स्पष्ट राजनीतिक बदले की कार्रवाई” करार दिया

वहीं, आम आदमी पार्टी ने आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि मतदाता सूची के पुनरीक्षण की पूरी प्रक्रिया चुनाव आयोग ने संचालित की है। किसका नाम सूची में शामिल होगा या हटाया जाएगा, यह तय करने में राज्य सरकार की कोई भूमिका नहीं होती।

SIR प्रक्रिया में पंजाब से अपना नाम हटने पर राघव ने आम आदमी पार्टी पर आरोप लगाया है। उन्होंने x पर पोस्ट करते हुए लिखा है कि,

पंजाब में आम आदमी पार्टी (AAP) सरकार ने अब अपने बदले की राजनीति को मतदाता सूची के मसौदे तक पहुंचा दिया है। मैं पंजाब से राज्यसभा का मौजूदा सांसद हूं और मेरा मतदाता पहचान पत्र मोहाली, पंजाब में पंजीकृत है। फिर भी, मतदाता सूची के मसौदे में मेरा नाम "स्थानांतरित" के रूप में दर्ज किया गया है”।



राघव चड्ढा ने पंजाब की सरकार से कई सवाल पूछे है और अपने नाम हटाने के मामले में आरोप भी लगाया है क्योंकि पंजाब में आम आदमी पार्टी की सरकार है और उनके अधिकारी ही SIR की प्रक्रिया कर रहे हैं।

आगे राघव इस मामले में कहते हैं कि,

शुक्र है, ये केवल मतदाता सूची का मसौदा है, अंतिम मतदाता सूची नहीं। नामों को 'दावे और आपत्तियां' प्रक्रिया के दौरान सुधारा जाता है, जो अभी जारी है। अंतिम मतदाता सूची अक्टूबर 2026 में प्रकाशित होगी। मैं पहले से ही SIR दिशानिर्देशों के तहत उपलब्ध उपायों का लाभ उठाने की प्रक्रिया में हूं। यह महज़ एक लिपिकीय त्रुटि नहीं लगती। यह स्पष्ट रूप से राजनीतिक प्रतिशोध का मामला है।

हाल में ही राघव चड्ढा आम आदमी पार्टी से भारतीय जनता पार्टी में 6 लोगों के साथ शामिल हो गए थे, इसलिए उन्होंने नाम हटने पर सीधे तौर पर आम आदमी पार्टी के तरफ ही आरोप लगते हुए कहा है कि यह राजनीतिक प्रतिशोध का मामला है 26 अप्रैल को चड्ढा के नेतृत्व में आम आदमी पार्टी के 10 में से सात राज्यसभा सांसद पार्टी से अलग होकर उच्च सदन में भाजपा में शामिल हो गए थे। राज्यसभा के सभापति सीपी राधाकृष्णन ने 27 अप्रैल को इस विलय को स्वीकार कर लिया था।

हालांकि, आम आदमी पार्टी ने कहा कि,

यह सार्वजनिक रूप से दर्ज तथ्य है कि चड्ढा पंजाब में नहीं, बल्कि दिल्ली में रह रहे हैं। यदि वह अब पंजाब में नहीं रहते हैं तो अपने मतदाता पंजीकरण को बनाए रखना या उसे स्थानांतरित कराना उनकी अपनी जिम्मेदारी थी।

AAP ने यह भी आरोप लगाया कि चड्ढा एक “पिछली तारीख वाली प्रक्रिया” के माध्यम से अपना मतदाता पंजीकरण दिल्ली के राजेंद्र नगर विधानसभा क्षेत्र में स्थानांतरित कराने की कोशिश कर रहे हैं। पार्टी ने इस मामले की जांच की मांग की है।

पंजाब उन 16 राज्यों में शामिल है, जहां SIR के तीसरे चरण के अंतर्गत मतदाता सूची का पुनरीक्षण किया जा रहा है। अंतिम मतदाता सूची 12 अक्टूबर को जारी की जानी है। इस प्रक्रिया का पहला चरण 2025 में बिहार में चलाया गया था। इसके बाद 2025 के अंतिम महीनों और 2026 की पहली छमाही में इसे पश्चिम बंगाल, उत्तर प्रदेश और तमिलनाडु सहित 12 राज्यों एवं केंद्रशासित प्रदेशों तक विस्तारित किया गया।

SIR की शुरुआत के बाद से ही यह आशंका जताई जाती रही है कि इस प्रक्रिया के कारण वास्तविक मतदाताओं के नाम सूची से बाहर हो सकते हैं और चुनावी नतीजे भी प्रभावित किए जा सकते हैं। आम आदमी पार्टी ने पंजाब सरकार के विरुद्ध चड्ढा के आरोपों पर पलटवार करते हुए सवाल खड़े किए।


पार्टी ने सोशल मीडिया मंच X पर लिखा,

SIR की प्रक्रिया चुनाव आयोग संचालित करता है, राज्य सरकार नहीं। इसलिए मतदाता सूची में किसका नाम शामिल या हटाया जाए, यह तय करने में पंजाब सरकार की कोई भूमिका नहीं है।”

पार्टी ने आगे दावा किया कि,

उसे “चुनाव आयोग के सूत्रों” से जानकारी मिली है कि चड्ढा पिछली तारीख वाली प्रक्रिया के जरिये दिल्ली के राजेंद्र नगर में मतदाता के रूप में अपना नाम दर्ज कराने का प्रयास कर रहे हैं। यदि पिछली तारीख से ऐसी कोई प्रक्रिया अपनाई गई है या कोई गैरकानूनी कार्रवाई हुई है तो इसकी जांच होनी चाहिए और पूरा सच जनता के सामने लाया जाना चाहिए।”

AAP ने यह भी कहा कि अगर भाजपा या किसी अन्य व्यक्ति ने ऐसी प्रविष्टि कराने में सहायता की है तो उस भूमिका की भी जांच की जानी चाहिए। हालांकि, इस रिपोर्ट के लिए उपलब्ध सामग्री में पिछली तारीख से मतदाता पंजीकरण कराने संबंधी दावों के समर्थन में कोई दस्तावेजी प्रमाण मौजूद नहीं था।

वहीं, राघव आम आदमी पार्टी पर ही आरोप लगाए हुए कहते हैं,

उनको चिन्हित और सत्यापित करने का काम पंजाब के अधिकारी ने ही किया है, और कहा है आम आदमी पार्टी राज्य के अधिकारियों के माध्यम से राजनीतिक दबाव डालकर राजनीतिक प्रतिशोध लेना चाहती है और पुंजाब पुलिस और पंजाब की प्रशासनिक अधिकारियों के मध्ययम से उन्हें और अन्य सांसदों को जिन्होंने भाजपा में विलय किया है उनको निशाना बना रही है।

राघव चड्ढा का कहना है जब से उन्होंने आम आदमी पार्टी छोड़ी है तब से आम आदमी पार्टी गुस्से से जल रही है।

यदि मेरा नाम चिह्नित किया गया था, तो अनुच्छेद 4(डी) के अनुसार मुझे मसौदा मतदाता सूची में शामिल किया जाना चाहिए था। इस निर्देश की अनदेखी नहीं की गई। मेरे मामले में इसका जानबूझकर उल्लंघन किया गया। आम आदमी पार्टी पंजाब सरकार चला रही हो, लेकिन पंजाब की मसौदा मतदाता सूची उसकी निजी संपत्ति नहीं है”।

पंजाब में मतदाता सूची से अनेकों लोगों के नाम काटने की खबर आ रही है। इंडियन एक्स्प्रेस की खबर के अनुसार मतदाता सूची से लगभग 13.37 करोड़ नाम ड्राफ्ट लिस्ट से हटाई गई है।