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पाकिस्तानी फाइटर जेट गिराने वाले अभिनंदन ने क्यों छोड़ी भारतीय वायुसेना की नौकरी?

TCN Desk TCN Desk | 1h ago · 6 min read
पाकिस्तानी फाइटर जेट गिराने वाले अभिनंदन ने क्यों छोड़ी भारतीय वायुसेना की नौकरी?

मिग-21 से एटीआर तक। पायलट अभिनंदन का कॉकपिट तो वही है, लेकिन अब मिशन बदल चुका है।

मिग-21 से एटीआर तक। पायलट अभिनंदन का कॉकपिट तो वही है, लेकिन अब मिशन बदल चुका है। वीरता पुरस्कार से सम्मानित पूर्व लड़ाकू पायलट अभिनंदन वर्धमान ने भारतीय वायुसेना की नौकरी छोड़ दी है। अभिनंदन ने भारतीय वायुसेना से रिटायरमेंट लेकर निजी विमानन कंपनी FLY91 में कमर्शियल पायलट के रूप में नई जिम्मेदारी संभाली है। एयरलाइन के मुताबिक, वह फिलहाल गोवा-हैदराबाद मार्ग पर प्रशिक्षण ले रहे हैं।

Hindustan Times की एक खबर के अनुसार,

पूर्व ग्रुप कैप्टन अभिनंदन वर्धमान अब आसमान में अपनी दूसरी पारी की तैयारी कर रहे हैं। जरूरी प्रशिक्षण और नियामकीय मंजूरियां पूरी होने के बाद अभिनंदन प्राइवेट एयरलाइन के लिए एटीआर विमान उड़ाएंगे। अभिनंदन ने संपर्क किए जाने पर FLY91 ने वर्धमान के एयरलाइन से जुड़ने की पुष्टि की, लेकिन उनके प्रशिक्षण या भविष्य के उड़ान कार्यक्रम से संबंधित अधिक जानकारी देने से इनकार कर दिया।

जब एयरलाइन से पूछा गया कि पूर्व लड़ाकू पायलट कब से व्यावसायिक उड़ानें शुरू करेंगे और भविष्य में किन मार्गों पर विमान उड़ाएंगे, तो उसने बताया कि वर्धमान अपनी पेशेवर या निजी यात्रा के बारे में फिलहाल कोई अतिरिक्त जानकारी साझा नहीं करना चाहते। उनका यह रुख उस सादगी और लो-प्रोफाइल जीवनशैली के अनुरूप है, जिसे उन्होंने देश की सबसे चर्चित सैन्य हस्तियों में शामिल होने के बाद भी बनाए रखा है।

गौरतलब है कि फरवरी 2019 में हुई हवाई मुठभेड़ के दौरान अभिनंदन ने पाकिस्तान के एक एफ-16 लड़ाकू विमान को मार गिराया था। इसके बाद उनका मिग-21 बाइसन भी दुश्मन के हमले की चपेट में आ गया।


विमान क्षतिग्रस्त होने के कारण उन्हें पाकिस्तान के कब्जे वाले इलाके में इजेक्ट करना पड़ा, जहां पाकिस्तानी सुरक्षाबलों ने उन्हें हिरासत में ले लिया। वह तीन दिनों तक पाकिस्तान की कैद में रहे।
अभिनंदन को एफ-16 विमान मार गिराने वाले दुनिया के एकमात्र मिग-21 पायलट के रूप में जाना जाता है। हवाई संघर्ष के दौरान “कर्तव्य के प्रति असाधारण निष्ठा” दिखाने के लिए उन्हें वर्ष 2021 में भारत के तीसरे सबसे बड़े युद्धकालीन वीरता पुरस्कार ‘वीर चक्र’ से सम्मानित किया गया था।

पुरस्कार प्रशस्ति-पत्र में उस डॉगफाइट के दौरान उनकी वीरता की सराहना की गई, जिसमें संख्या के लिहाज से कहीं अधिक मजबूत पाकिस्तानी वायुसेना का सामना करने के बावजूद उन्होंने दुश्मन के विमानों को चुनौती दी थी। उस समय वह विंग कमांडर के पद पर तैनात थे। बाद में भारतीय वायुसेना ने उन्हें पदोन्नत कर ग्रुप कैप्टन बना दिया। लेकिन उस घटना के सात साल बाद वर्धमान एक बार फिर कॉकपिट में लौटने की तैयारी कर रहे हैं। मगर इस बार वह किसी लड़ाकू अभियान पर नहीं, बल्कि यात्रियों को उनकी मंजिल तक पहुंचाने के लिए विमान उड़ाएंगे।


विमान और मिशन में आया यह बदलाव बेहद महत्वपूर्ण है। मिग-21 बाइसन युद्ध के लिए तैयार किया गया एक सुपरसोनिक लड़ाकू विमान था। इसके विपरीत, एटीआर एक टर्बोप्रॉप यात्री विमान है, जिसका इस्तेमाल विशेष रूप से कम दूरी के क्षेत्रीय मार्गों पर शहरों को जोड़ने के लिए किया जाता है। हालांकि, अभिनंदन के लिए विमान उड़ाने से जुड़ी बुनियादी जरूरतें अब भी जानी-पहचानी रहेंगी—अनुशासन, सटीकता, परिस्थितियों के प्रति सजगता, निर्धारित प्रक्रियाओं का पालन और दबाव में महत्वपूर्ण निर्णय लेने की क्षमता।

नागरिक विमानन की कार्यप्रणाली सैन्य उड़ानों से बिल्कुल अलग होती है। लड़ाकू पायलटों को युद्ध, रणनीतिक निर्णय और अत्यधिक जोखिम वाले अभियानों के लिए प्रशिक्षित किया जाता है। वहीं, एयरलाइन पायलट एक अत्यंत व्यवस्थित ढांचे में काम करते हैं, जहां सुरक्षा प्रक्रियाओं, कॉकपिट में आपसी तालमेल, संचार और निरंतरता को सबसे अधिक महत्व दिया जाता है। इसलिए अभिनंदन को अपने व्यापक सैन्य उड़ान अनुभव को नागरिक विमानन की प्रणालियों और प्रक्रियाओं के अनुरूप ढालना होगा।

माना जा रहा है कि FLY91 के साथ उनका मौजूदा प्रशिक्षण इसी बदलाव का हिस्सा है। प्रशिक्षण पूरा होने के बाद ही वह एयरलाइन पायलट की नियमित जिम्मेदारियां संभालेंगे।

भारतीय विमानन उद्योग के लिए भी उनका यह कदम कई मायनों में खास है। भारत-पाकिस्तान के बीच हुए सबसे तनावपूर्ण हवाई संघर्षों में से एक के दौरान लड़ाकू विमान उड़ाने के कारण पूरे देश में पहचाने गए पायलट अब क्षेत्रीय मार्गों पर आम भारतीय यात्रियों को लेकर उड़ान भरने की तैयारी कर रहे हैं।

वर्धमान की नई नियोक्ता कंपनी FLY91 एक क्षेत्रीय एयरलाइन है, जिसका उद्देश्य भारत के टियर-2 और टियर-3 शहरों के बीच हवाई संपर्क मजबूत करना है।

विमानन उद्योग के अनुभवी लोगों द्वारा स्थापित और पेशेवर निवेशकों के सहयोग से संचालित इस एयरलाइन ने देश के बड़े महानगरों से बाहर भी हवाई यात्रा को अधिक सुलभ बनाने के विचार को अपने केंद्र में रखा है। क्षेत्रीय संपर्क पर कंपनी के इसी जोर के कारण एटीआर विमान उसके संचालन का महत्वपूर्ण हिस्सा हैं। ये विमान कम दूरी की उड़ानों और छोटे शहरों के बीच संपर्क स्थापित करने के लिए उपयुक्त माने जाते हैं।

21 जून 1983 को चेन्नई में जन्मे वर्धमान ने सैनिक स्कूल, अमरावतीनगर से शिक्षा प्राप्त की और इसके बाद राष्ट्रीय रक्षा अकादमी से स्नातक किया। जून 2004 में उन्हें भारतीय वायुसेना की लड़ाकू शाखा में कमीशन मिला। अपने सैन्य करियर के दौरान उन्होंने मिग-21 बाइसन स्क्वाड्रन में तैनाती से पहले सुखोई-30 एमकेआई भी उड़ाया। उन्होंने फ्लाइंग ऑफिसर, फ्लाइट लेफ्टिनेंट, स्क्वाड्रन लीडर और विंग कमांडर के रूप में सेवाएं दीं। दिसंबर 2021 में उन्हें ग्रुप कैप्टन के पद पर पदोन्नत किया गया। हालांकि, फरवरी 2019 की हवाई मुठभेड़ ने उन्हें एक सेवारत लड़ाकू पायलट से देश के घर-घर में पहचाना जाने वाला नाम बना दिया। उनकी विशिष्ट मूंछें, शांत स्वभाव और पाकिस्तान में पकड़े जाने के बाद भारत लौटने की परिस्थितियां भारत-पाकिस्तान संबंधों के सबसे चर्चित घटनाक्रमों में से एक की प्रतीक बन गईं।

अब उनके उड़ान करियर का अगला अध्याय लड़ाकू स्क्वाड्रन से बिल्कुल अलग वातावरण में शुरू होने वाला है। मिग-21 भारत की लड़ाकू विमानन विरासत और वर्धमान के सैन्य पायलट जीवन का प्रतीक था। वहीं, एटीआर विमानन की उस भूमिका का प्रतिनिधित्व करता है, जिसका उद्देश्य युद्ध या दुश्मन के विमान को रोकना नहीं, बल्कि लोगों और शहरों को जोड़ना है।

कभी विवादित और तनावपूर्ण आसमान में उड़ान भरने वाला यह पायलट अब बिल्कुल अलग परिस्थितियों में उड़ने की तैयारी कर रहा है। वर्धमान की पहली व्यावसायिक उड़ान की तारीख और भविष्य में उनके द्वारा संचालित किए जाने वाले मार्गों की जानकारी उनके अनुरोध पर अभी सार्वजनिक नहीं की गई है।

लेकिन एक बात स्पष्ट है—लड़ाकू विमानों, युद्ध प्रशिक्षण और भारत के सैन्य इतिहास की एक असाधारण घटना से पहचाने जाने वाले अभिनंदन वर्धमान एक बार फिर उड़ान भरने को तैयार हैं। इस बार विमान के केबिन में आम नागरिक होंगे और मिशन युद्ध नहीं, बल्कि लोगों तथा शहरों को जोड़ना होगा।