पूर्व वित्त सचिव ने क्यों कहा GDP वृद्धि दर सिर्फ 2.6 प्रतिशत? सरकार के दावों पर सवाल
पूर्व वित्त सचिव सुभाष चंद्र गर्ग गर्ग ने दावा किया कि वास्तविक तिमाही जीडीपी वृद्धि 2.6 प्रतिशत है।
भारत के पूर्व वित्त सचिव सुभाष चंद्र गर्ग गर्ग ने दावा किया कि वास्तविक तिमाही जीडीपी वृद्धि 7.8 प्रतिशत नहीं, बल्कि करीब 2.6 प्रतिशत है। गर्ग के अनुसार,
पिछले वर्ष की पहली तिमाही की मौजूदा कीमतों पर जीडीपी को आधिकारिक तौर पर 86 लाख करोड़ रुपये बताया गया था। लेकिन इस वर्ष जारी आंकड़ों में उसी आधार को घटाकर 80 लाख करोड़ रुपये कर दिया गया। यानी इसमें करीब छह लाख करोड़ रुपये की कमी की गई।
उन्होंने तर्क दिया कि यदि इस वर्ष की वृद्धि की गणना पिछले वर्ष के मूल और बिना संशोधित आधार पर की जाए, तो तस्वीर बिल्कुल अलग दिखाई देती है। गर्ग ने कहा,
अगर आपने पिछले वर्ष की जीडीपी में संशोधन नहीं किया होता, तो मौजूदा कीमतों पर वृद्धि केवल 2.6 प्रतिशत होती।
सुभाष चंद्र गर्ग ने NDTV चैनल पर एंकर गौरी द्विवेदी के साथ एक साक्षात्कार के दौरान ये आंकड़ा सामने रखा है। यह बातचीत सामान्य सवाल-जवाब से अधिक सरकार द्वारा जारी आंकड़ों की विश्वसनीयता पर एक असहज बहस में बदल गई। साक्षात्कार के दौरान उन्होंने दो बार फिर इसी दावे को दोहराया और हर बार इन्हीं दोनों आंकड़ों को अपने तर्क का आधार बनाया। पूर्व वित्त सचिव ने यह भी स्पष्ट किया कि,
मूल और संशोधित—दोनों आंकड़े सरकार ने ही जारी किए थे। उनके मुताबिक, विनिर्माण क्षेत्र के आंकड़े और खपत में दर्ज “नकारात्मक वृद्धि” अर्थव्यवस्था के तेजी से आगे बढ़ने के सरकारी दावे को कमजोर करते हैं।
दरअसल मंगलवार को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने उजबेकिस्तान से सोशल मीडिया पर एक वीडियो साझा करते हुए इन आंकड़ों को देश की “सामूहिक शक्ति” का प्रमाण बताया। साथ ही उन्होंने अर्थव्यवस्था को लेकर निराशाजनक भविष्यवाणियां करने वालों पर भी निशाना साधा। मोदी ने लोगों से विदेश में छुट्टियां मनाने और शादियां आयोजित करने से बचने तथा सोना न खरीदने की अपील भी की। भारत सरकार के अनुसार, वित्त वर्ष 2026-27 की अप्रैल-जून तिमाही में देश की अर्थव्यवस्था 7.8 प्रतिशत की दर से बढ़ी। यह वृद्धि भारतीय रिजर्व बैंक के 7 प्रतिशत के अपेक्षाकृत सतर्क अनुमान से काफी अधिक रही।
दूसरी ओर, कांग्रेस ने इन दावों पर सवाल उठाते हुए कृषि क्षेत्र की कमजोर वृद्धि, विनिर्माण क्षेत्र की सुस्ती, रोजगार सृजन की स्थिति और बढ़ते कर्ज का मुद्दा उठाया।
इन्हीं परस्पर विरोधी दावों के बीच एनडीटीवी चैनल पर एंकर ने गर्ग से पूछा, “निश्चित रूप से आप यह संकेत तो नहीं दे रहे हैं कि आंकड़ों को इसलिए नीचे संशोधित किया जाता है, ताकि वे बेहतर दिखाई दें?” लेकिन गर्ग अपने दावे से पीछे नहीं हटे। उन्होंने कहा कि वह यह बयान “पूरी जिम्मेदारी के साथ” दे रहे हैं। इसके बाद एंकर ने उन्हें याद दिलाया कि सरकारी आंकड़ों की “एक निश्चित पवित्रता और विश्वसनीयता” होती है। साक्षात्कार के अंत तक सवालों का केंद्र आंकड़ों की जांच से हटकर खुद एंकर की विश्वसनीयता पर आ गया। एंकर ने गर्ग से कहा कि वह स्क्रीन पर दिखाए जा रहे “हर आंकड़े को नकार रहे हैं।”
अंत में एंकर ने गर्ग से पूछा कि पहली तिमाही में दिखाई गई वृद्धि को बनाए रखने के लिए वह सरकार को क्या सुझाव देंगे। इसके जवाब में गर्ग ने कहा कि,
सरकार को सबसे पहले “भारतीय अर्थव्यवस्था की वास्तविक स्थिति को स्वीकार करना चाहिए कि कोई वास्तविक वृद्धि नहीं हो रही है। इसके बाद आंकड़ों को किसी न किसी तरीके से समायोजित करने के बजाय सही सुधारात्मक कदम उठाने चाहिए।”
उन्होंने अपनी बात समाप्त करते हुए दोहराया, “सबसे पहले यह स्वीकार करना जरूरी है कि वास्तव में एक समस्या मौजूद है।”
इस मुद्दे पर सोशल मीडिया और राजनीतिक हलकों में बहस तेज होने के बाद सांख्यिकी एवं कार्यक्रम कार्यान्वयन मंत्रालय (MoSPI) ने बुधवार को उठाए जा रहे सवालों का छह बिंदुओं में जवाब दिया। मंत्रालय ने कहा कि उसकी कार्यप्रणाली सही है और सोमवार को जारी किए गए आंकड़े भी सटीक हैं। सोमवार को जारी MoSPI के आंकड़ों के अनुसार,
अप्रैल-जून तिमाही में भारत की जीडीपी 7.8 प्रतिशत की दर से बढ़ी। यह अधिकतर अर्थशास्त्रियों की उम्मीद से काफी ज्यादा और भारतीय रिजर्व बैंक के 7 प्रतिशत के अनुमान से भी अधिक थी।
पुराने आंकड़ों में भी संशोधन किया गया। इनमें जनवरी-मार्च तिमाही की वृद्धि को 7.8 प्रतिशत से बढ़ाकर 8.6 प्रतिशत करना शामिल है। मंत्रालय के अनुसार, ये संशोधन नए आउटपुट प्रोड्यूसर प्राइस इंडेक्स (PPI), औद्योगिक उत्पादन सूचकांक (IIP) की अद्यतन श्रृंखला और इस वर्ष जारी बैंकिंग सर्विसेज प्राइस इंडेक्स के इस्तेमाल के कारण किए गए।
हालांकि, कुछ अर्थशास्त्रियों, पूर्व नौकरशाहों और राजनेताओं ने इन आंकड़ों पर सवाल उठाए। कुछ अर्थशास्त्रियों ने विनिर्माण क्षेत्र के मौजूदा कीमतों वाले सकल मूल्य वर्धन को स्थिर कीमतों यानी वास्तविक GVA में बदलने के लिए इस्तेमाल किए गए “डिफ्लेटर” पर असहमति जताई।
वहीं, पूर्व वित्त सचिव सुभाष चंद्र गर्ग ने आंकड़ों की आलोचना करते हुए कहा कि अप्रैल-जून तिमाही में नॉमिनल जीडीपी वृद्धि 2.6 प्रतिशत होनी चाहिए और “वास्तविक रूप में यह शून्य के करीब” है।