25 लाख टन चीनी लायक गन्ना एथेनॉल में चला गया, अब 10 लाख टन चीनी कर रहे हैं आयात
चीनी के शुरुआती स्टॉक में करीब 20% की गिरावट की आशंका।
एथेनॉल से इंधन बनाने की नीति ने बिना वजह आम लोगों पर कमरतोड़ महंगाई की मार ला दी है। अब यह स्पष्ट हो गया है कि 25 लाख टन चीनी-लायक गन्ना एथेनॉल में चला गया, जिससे केवल पिछले तीन महीनों में चीनी 48 रुपये से बढ़कर 67 रुपये प्रति किलो और गुड़ 50 रुपये से बढ़कर 65 रुपये प्रति किलो हो गया। चावल और मक्के का आटा भी 16% और 11% महंगा हो गया है। पशु आहार की कीमत भी 10.34% बढ़ गया है।
अब जब संकट इतना गहरा हो गया तो केंद्र सरकार ने गुरुवार को 10 लाख टन कच्ची चीनी के आयात की अनुमति दे दी। पिछले एक दशक में यह पहली बार है जब भारत चीनी का आयात करने जा रहा है। यह फैसला ऐसे समय लिया गया है, जब आगामी चीनी सीजन में शुरुआती स्टॉक में कम से कम 20% की गिरावट की आशंका जताई जा रही है।
विदेश व्यापार महानिदेशालय (DGFT) ने 10 लाख मीट्रिक टन कच्ची चीनी के आयात के लिए टैरिफ रेट कोटा (TRQ) के आवेदन और आवंटन की प्रक्रिया भी जारी कर दी है। ऐसी चीनी मिलें और रिफाइनर आवेदन कर सकते हैं, जिनके पास कच्ची चीनी को सफेद या रिफाइंड चीनी में बदलने की अपनी चालू क्षमता मौजूद है। आवेदन की अवधि 21 अगस्त से 28 अगस्त 2026 तक रखी गई है। आवेदकों को अपनी रिफाइनिंग क्षमता का स्व-घोषणा पत्र देना होगा। इसके समर्थन में राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की ओर से जारी Consent to Operate की प्रति भी जमा करनी होगी।
उन आयातकों को आवंटन में प्राथमिकता दी जाएगी, जो 15 अक्टूबर 2026 तक आयात पूरा करने का वचन देंगे। तय समय में आवंटित मात्रा का इस्तेमाल नहीं करने या उसे वापस नहीं करने को नियमों का उल्लंघन माना जाएगा।
कितनी अजीब बात है हम पिछले साल तक चीनी का निर्यात कर रहे थे। हमारे पास चीनी की सरप्लस मात्रा होती थी। सरकार ने पिछले साल नवंबर में 15 लाख टन चीनी के निर्यात की अनुमति दी थी। बाद में इसे बढ़ाकर 20 लाख टन कर दिया गया। हालांकि मई 2026 में सरकार ने 2025-26 सीजन के लिए चीनी का निर्यात रोक दिया। तब तक करीब 8 लाख टन चीनी का निर्यात किया जा चुका था। अब सरकार ने इसके उलट 10 लाख टन कच्ची चीनी के आयात की अनुमति दी है।
अक्टूबर 2025 की शुरुआत में देश में चीनी का शुरुआती स्टॉक करीब 50 लाख टन था। अक्टूबर 2026 में इसके घटकर करीब 30-40 लाख टन रहने का अनुमान है। कुछ उद्योग अनुमानों में इसे 40-42 लाख टन बताया गया है, जबकि कुछ शोधकर्ताओं का अनुमान केवल 32-35 लाख टन है। इस गिरावट की बड़ी वजह चीनी उत्पादन में कमी है। उत्पादन घटकर करीब 296 लाख टन रह गया, जो 2019-20 के चीनी सीजन के बाद सबसे कम है। अगले फसल वर्ष में उद्योग ने करीब 324 लाख टन उत्पादन का अनुमान लगाया है।
इस फैसले से ठीक पहले खाद्य मंत्रालय ने आदेश जारी किया था कि,
कन्फेक्शनरी कंपनियां, सॉफ्ट ड्रिंक निर्माता, फूड प्रोसेसिंग उद्योग, मिठाई विक्रेता और दूसरे संस्थागत खरीदार, जो हर महीने 10 टन से अधिक चीनी इस्तेमाल करते हैं, 15 दिनों की खपत से ज्यादा चीनी का स्टॉक नहीं रख सकेंगे। मसलन, अगर कोई संस्था महीने में 12 टन चीनी इस्तेमाल करती है तो वह किसी भी समय अधिकतम 6 टन चीनी का स्टॉक रख सकेगी। यह आदेश 1 सितंबर से 30 नवंबर 2026 तक लागू रहेगा।
हालांकि, चीनी उद्योग का कहना है कि देश में चीनी की कोई कमी नहीं है। मिलों के पास नवंबर-दिसंबर तक घरेलू मांग पूरी करने के लिए पर्याप्त स्टॉक मौजूद है। इसके बाद नए सीजन की चीनी बाजार में आने लगेगी।
अधिकारियों के मुताबिक, भारत में सालाना चीनी की खपत करीब 280 लाख टन है। फरवरी में जारी 2025-26 सीजन के तीसरे अग्रिम अनुमान में उद्योग ने करीब 290 लाख टन शुद्ध चीनी उत्पादन का अनुमान लगाया था। इसमें एथेनॉल उत्पादन के लिए इस्तेमाल होने वाली करीब 31 लाख टन चीनी शामिल नहीं थी। मौजूदा सीजन के उत्पादन का अंतिम आंकड़ा अगले महीने जारी होने की संभावना है।
सरकार के ये फैसले ऐसे समय आए हैं जब चीनी की कीमतें तेजी से बढ़ रही हैं। उपभोक्ता मामलों के विभाग के आंकड़ों के मुताबिक, 18 अगस्त को चीनी की औसत खुदरा कीमत 52.30 रुपये प्रति किलो थी। एक साल पहले यह 46.34 रुपये प्रति किलो थी। यानी सालाना आधार पर कीमत करीब 13% बढ़ी है। चीनी की एक्स-मिल कीमतों में और भी तेज बढ़ोतरी हुई है। अखिल भारतीय औसत एक्स-मिल कीमत बढ़कर करीब 5,400-5,500 रुपये प्रति क्विंटल पहुंच गई, जबकि एक साल पहले यह करीब 3,900 रुपये प्रति क्विंटल थी। अगस्त से नवंबर के बीच गणेश चतुर्थी, दशहरा और दिवाली जैसे बड़े त्योहारों के कारण चीनी की मांग आमतौर पर बढ़ जाती है।
सरकार ने जमाखोरी और सट्टेबाजी पर लगाम लगाने के लिए चीनी डीलरों पर भी स्टॉक सीमा लगाई है। 1 अगस्त से 30 नवंबर तक लागू आदेश के तहत कोई डीलर प्राप्ति की तारीख से 30 दिनों से ज्यादा समय तक 4,000 क्विंटल से अधिक चीनी का स्टॉक नहीं रख सकता। डीलरों के लिए अपने स्टॉक की जानकारी देना और उसे हर सप्ताह अपडेट करना भी अनिवार्य किया गया है।
खाद्य मंत्री प्रह्लाद जोशीने कहा कि,
हर महीने 10 टन से अधिक चीनी इस्तेमाल करने वाले थोक उपभोक्ता अब अपनी 15 दिनों की जरूरत से ज्यादा स्टॉक नहीं रख सकेंगे। खाद्य मंत्रालय ने इसे Sugar (Stockholding Limit of Bulk Consumers) Order, 2026 के तहत अधिसूचित किया है।
इंडियन शुगर एंड बायो-एनर्जी मैन्युफैक्चरर्स एसोसिएशन (ISMA) का कहना है कि आयात की अनुमति से बाजार को स्पष्ट संदेश मिला है कि सट्टेबाजी के कारण होने वाली अनुचित मूल्य वृद्धि को जारी नहीं रहने दिया जाएगा। एसोसिएशन के मुताबिक, आयात की अनुमति देश में चीनी की कमी के कारण नहीं, बल्कि त्योहारों के दौरान बाजार में अतिरिक्त भरोसा और पर्याप्त उपलब्धता सुनिश्चित करने के लिए एहतियाती कदम के तौर पर दी गई है।
