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हरियाणा में पिछले दरवाजे से कॉर्पोरेट घरानों को सौंपा जा रहा है बिजली वितरण?

Jagdeep Singh Sindhu Jagdeep Singh Sindhu | 1h ago · 7 min read
हरियाणा में पिछले दरवाजे से कॉर्पोरेट घरानों को सौंपा जा रहा है बिजली वितरण?

किसानों और ग्रामीण घरेलू उपभोक्ताओं पर बिजली दरों का भारी बोझ बढ़ेगा।

हरियाणा सरकार द्वारा कॉर्पोरेट घरानों को बिजली वितरण सौंपने के विरोध में ऑल इंडिया पावर इंजीनियर्स फेडरेशन ने हरियाणा इलेक्ट्रिसिटी रेगुलेटरी कमीशन को कड़ी चेतावनी दी है। गुरुग्राम एवं नूंह में इलेवन पावर को समानांतर विद्युत वितरण लाइसेंस देने के किसी भी एकतरफा निर्णय के विरुद्ध हरियाणा के समस्त बिजली कर्मचारी, किसान, खाप पंचायतें एवं सामाजिक संगठनों को आह्वान किया है कि “हरियाणा के सर्वाधिक राजस्व अर्जित करने वाले विद्युत क्षेत्रों के बैक-डोर निजीकरण का लोकतांत्रिक एवं कानूनी माध्यमों से पुरजोर विरोध किया जाएगा।

ऑल इंडिया पावर इंजीनियर्स फेडरेशन ने हरियाणा विद्युत नियामक आयोग को कड़ी चेतावनी दी है कि गुरुग्राम एवं नूंह के लिए इलेवन पावर प्राइवेट लिमिटेड को समानांतर विद्युत वितरण लाइसेंस प्रदान करने के संबंध में कोई भी एकतरफा, जल्दबाजी पूर्णअथवा पूर्व निर्धारित निर्णय सरकार द्वारा न लिया जाये ।

हरियाणा के पूर्व वित्त मंत्री और इंडियन नेशनल लोक दल (INLD) के वरिष्ठ नेता प्रो. संपत सिंह ने जुलाई 2026 में ,

गुरुग्राम और नूंह जिलों में बिजली वितरण का काम निजी कंपनी (एलेवन पावर प्राइवेट लिमिटेड) को सौंपने के प्रस्ताव को उजागर किया था । उन्होंने हरियाणा विद्युत विनियामक आयोग (HERC) के समक्ष 112 से अधिक आपत्तियां दर्ज कराई थी और इस कदम को "बैकडोर प्राइवेटाइजेशन" (पीछे के दरवाजे से निजीकरण) और "कॉर्पोरेट लूट" करार दिया। इस मुद्दे को संपत सिंह पुरे प्रदेश में लगातार उठा रहे है और सरकार की बिजाई वितरण को निजी हाथों में सौंपने की साजिश का खुलासा कर रहे हैं।

संपत सिंह का कहना है कि,

दक्षिण हरियाणा बिजली वितरण निगम (DHBVN) के कुल राजस्व का लगभग 42 प्रतिशत हिस्सा अकेले गुरुग्राम से आता है, जहां लाइन लॉस मात्र 4.70% है। यदि यह मुनाफे वाला हिस्सा निजी कंपनी के पास चला गया, तो सरकारी निगम वित्तीय रूप से बेहद कमजोर हो जाएगा और आने वाले समय में सरकार बिजली वितरण निगम को अन्य शहरों में भी खोल देगी। हरियाणा इलेक्ट्रिसिटी रेगुलेटरी कमिशन (HERC) द्वारा गठित की गई तीन सदस्यीय विशेषज्ञ समिति (Expert Committee) की रिपोर्ट को संपत सिंह ने "कॉर्पोरेट लूट का एक सोची-समझी योजना" कहा।

उन्होंने आरोप लगाया कि आयोग बाहरी पैनल के भरोसे अपनी वैधानिक जिम्मेदारियों से पीछे हट रहा है और बंद कमरों की कार्यवाही को सार्वजनिक नहीं किया जा रहा है।

इस प्रकार की नीति से क्रॉस-सब्सिडी ढांचा टूटने का डर वास्तविक है। वर्तमान सरकारी व्यवस्था में कमर्शियल उपभोक्ताओं से होने वाली कमाई का एक हिस्सा ग्रामीण और कृषि (किसान) उपभोक्ताओं को सस्ती बिजली (सब्सिडी) देने में इस्तेमाल होता है। निजीकरण से यह ढांचा कमजोर होगा, जिससे अंततः किसानों और ग्रामीण घरेलू उपभोक्ताओं पर बिजली दरों का भारी बोझ बढ़ेगा। उन्होंने कहा कि यह बिजली क्षेत्र का कोई सुधार नहीं है, बल्कि स्मार्ट सिटी योजना (1,608 करोड़ रुपये) और RDSS योजना (3,584 करोड़ रुपये) के तहत जनता के पैसे से तैयार किए गए सरकारी बुनियादी ढांचे और पब्लिक एसेट्स को सीधे निजी हाथों में सौंपने की कोशिश है।

यह आरोप भी पूर्व वित्त मंत्री संपत सिंह ने लगाया है कि,

सरकारी बिजली कंपनियों के निजीकरण या समानांतर लाइसेंस देने को लेकर अदालतों द्वारा तय किए गए वित्तीय स्वास्थ्य, अनुभव और जनहित (Public Interest) से जुड़े नियमों और गाइडलाइंस का इस प्रक्रिया में खुला उल्लंघन हो रहा है। इलेवन पावर प्राइवेट लिमिटेड को जून 2025 में ही 1 करोड़ रुपये की पेड-अप शेयर कैपिटल के साथ शुरू किया गया था, फिर भी यह 4,716.73 करोड़ रुपये के अनुमानित प्रोजेक्ट को पूरा करने का प्रस्ताव रखती है, जिसके लिए 1,415.02 करोड़ रुपये के इक्विटी योगदान की ज़रूरत है। उन्होंने आरोप लगाया कि कंपनी ने अपनी वित्तीय मज़बूती दिखाने के लिए ऑडिट की गई बुक वैल्यू के बजाय अपनी होल्डिंग कंपनी के शेयरों की मार्केट वैल्यू का सहारा लिया।

ऑल इंडिया पॉवर इंजीनियर्स फेडरेशन ने कहा कि,

जिस प्रकार से इस मामले की कार्यवाही आगे बढ़ रही है, उससे पावर इंजीनियरों, कर्मचारियों, उपभोक्ताओं तथा अन्य संबंधित हितधारकों के बीच गंभीर आशंकाएं उत्पन्न हुई हैं। यह मामला इसलिए और अधिक गंभीर है क्योंकि इलेवन पावर ने माननीय पंजाब एवं हरियाणा उच्च न्यायालय में पहले ही कैविएट दाखिल कर दी है, जिससे यह प्रतीत होता है कि उसे हरियाणा इलेक्ट्रिसिटी रेगुलेटरी कमिशन की कार्यवाही के संभावित परिणाम के विरुद्ध किसी कानूनी चुनौती की पहले से आशंका है।

फेडरेशन ने इस संबंध में अपनी गंभीर चिंता हरियाणा इलेक्ट्रिसिटी रेगुलेटरी कमिशन के समक्ष पहले ही दर्ज कराते हुए पूर्ण पारदर्शिता एवं विधिसम्मत प्रक्रिया सुनिश्चित करने की मांग की है। एलेवन पावर प्राइवेट लिमिटेड (जो 2025 में बनी कंपनी है) के पास बिजली वितरण क्षेत्र का कोई स्वतंत्र परिचालन या तकनीकी अनुभव नहीं है। कंपनी पूरी तरह से अपने कंसोर्टियम पार्टनर्स पर निर्भर है। स्वाभाविक रूप से यह प्रश्न उठता है कि जब नियामक कार्यवाही अभी जारी है, तब कोई आवेदक भविष्य में होने वाली कानूनी चुनौती का इतनी निश्चितता के साथ पूर्वानुमान कैसे लगा सकता है। यह घटनाक्रम गंभीर आशंका उत्पन्न करता है जिसे नजरअंदाज नहीं किया जा सकता। हम यह आरोप नहीं लगा रहे हैं कि हरियाणा इलेक्ट्रिसिटी रेगुलेटरी कमीशन ने इलेवन पावर के पक्ष में पहले ही कोई निर्णय कर लिया है, लेकिन परिस्थितियां पूर्ण पारदर्शिता की मांग करती हैं।

फेडरेशन की यह भी आपत्ति है कि उन्हें तथा अन्य सभी प्रभावित हितधारकों को पूर्ण एवं सार्थक सुनवाई का अवसर दिए बिना लाइसेंस प्रदान करने की दिशा में कोई कदम उठाया जाता है, तो इससे नियामक प्रक्रिया की निष्पक्षता एवं स्वतंत्रता पर अत्यंत गंभीर प्रश्नचिह्न खड़ा होगा। ऐसे राजस्व-संपन्न क्षेत्रों को नियामकीय प्रक्रिया के माध्यम से किसी निजी संस्था को सौंपने का कोई भी प्रयास, यदि मौजूदा सार्वजनिक डिस्कॉम, उपभोक्ताओं, किसानों, कर्मचारियों तथा सार्वजनिक विद्युत क्षेत्र की समग्र वित्तीय व्यवहार्यता पर उसके प्रभाव का व्यापक मूल्यांकन किए बिना किया जाता है, तो यह बैक-डोर निजीकरण के समान होगा।

फेडरेशन के चेयरमैन शैंडेर दुबे ने कहा कि यदि निष्पक्ष, पारदर्शी एवं सभी की प्रभावी भागीदारी वाली प्रक्रिया का पालन किए बिना इलेवन पावर को समानांतर वितरण लाइसेंस देने का कोई एकतरफा निर्णय लिया जाता है, तो फेडरेशन के पास व्यापक जनहित में सभी लोकतांत्रिक, संवैधानिक एवं कानूनी माध्यम अपनाने के अतिरिक्त कोई विकल्प नहीं बचेगा, जिसमें सक्षम न्यायिक मंच के समक्ष उचित कानूनी उपचार प्राप्त करना भी शामिल है।

हम सार्वजनिक विद्युत वितरण व्यवस्था को पिछले दरवाजे से निजीकरण के माध्यम से विखंडित नहीं होने देंगे। हरियाणा की जनता, विद्युत उपभोक्ताओं, किसानों एवं पावर कर्मचारियों को यह जानने का पूरा अधिकार है कि सार्वजनिक डिस्कॉम के सर्वाधिक राजस्व अर्जित करने वाले क्षेत्रों को समानांतर निजी वितरण लाइसेंस के लिए क्यों लक्षित किया जा रहा है।

सार्वजनिक संपत्ति को पूंजीपतियों के हवाले करने की एक बड़ी साजिश रची जा रही है। हरियाणा बिजली कर्मचारी एवं इंजीनियर संयुक्त संघर्ष मोर्चा के बलजीत सिंह बेनीवाल ने सरकार की नीतियों पर सवाल उठाए हैं। उन्होंने कहा कि हरियाणा में DHBVN और UHBVN के ज़रिए पहले से ही बिजली वितरण का एक व्यापक नेटवर्क मौजूद है। एक और वितरण लाइसेंसधारी को लाने से इंफ्रास्ट्रक्चर, मीटरिंग सिस्टम, ग्राहक सेवा व्यवस्था और प्रशासनिक खर्चों का दोहराव होगा, साथ ही 'राइट-ऑफ-वे' (रास्ते के अधिकार) से जुड़े विवाद और कामकाज से जुड़ी जटिलताएँ भी पैदा होंगी।

हरियाणा के बिजली सेक्टर में पहले से किए गए बड़े सार्वजनिक निवेश से स्थापित संसाधनों को निजी हाथों में सौंपने में जाने में सरकार की रुचि सवालों के घेरे में है।
Jagdeep Singh Sindhu

Jagdeep Singh Sindhu

वरिष्ठ पत्रकार और राजनैतिक विवेचक जगदीप सिंह सिंधू राष्ट्रीय हिंदी दैनिक हरिभूमि,पीपल्स समाचार,महाकौशल आदि में वरिष्ठ पदों पर रहे हैं। वह एफ एम रेडियो तरंग 104 के पूर्व स्टेशन हेड तथा पूर्व राज्यपाल सत्यपाल मलिक के राजनीतिक सलाहकार रहे हैं।