सुप्रीम कोर्ट ने CEC ज्ञानेश कुमार को दिया नोटिस, सस्पेंड करने से इनकार
ज्ञानेश कुमार के खिलाफ ये याचिकाएं स्पेशल इंटेन्सिव रिवीजन (SIR) से जुड़े फैसलों को लेकर दाखिल की गई थीं।
सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को CEC ज्ञानेश कुमार को नोटिस जारी कर जवाब मांगा है। इसके साथ ही कोर्ट ने ज्ञानेश कुमार को सस्पेंड करने का आदेश जारी करने से इनकार कर दिया।
ज्ञानेश कुमार के खिलाफ ये याचिकाएं स्पेशल इंटेन्सिव रिवीजन (SIR) से जुड़े फैसलों को लेकर दाखिल की गई थीं।
आरोप है कि,
SIR से जुड़े करीब 14 फैसले दो अन्य चुनाव आयुक्तों की सहमति के बिना लिए गए। याचिकाकर्ताओं ने इन फैसलों को पलटने, ज्ञानेश कुमार पर मुकदमा चलाने और SIR में मतदाताओं के नाम हटाने की SIT जांच की मांग की है। साथ ही CEC को अंतिम फैसला आने तक पद के कामकाज से अलग रखने की भी मांग की गई है।
Live Law की एक रिपोर्ट के अनुसार, याचिका पटना के राकेश कुमार सिंह ने दायर की है। इसमें कहा गया है कि चुनाव आयोग एक बहुसदस्यीय संस्था है। इसलिए इसके फैसले एकतरफा नहीं लिए जा सकते। आयोग के मूल रिकॉर्ड की जांच कराने की मांग की गई है। ताकि यह पता लगाया जा सके कि विवादित कदम संवैधानिक और कानूनी व्यवस्था के अनुसार उठाए गए थे या नहीं। अंतरिम राहत के तौर पर
याचिका में ज्ञानेश कुमार को CEC पद से निलंबित करने की मांग की गई थी।
दूसरी याचिका एडवोकेट शैलेंद्र मणि त्रिपाठी ने दाखिल की है। इसमें एकतरफा लिए गए 14 फैसलों को रद्द करने की मांग की गई है। याचिका में रिटायर्ड सुप्रीम कोर्ट जज की अध्यक्षता में स्वतंत्र न्यायिक जांच कमीशन या SIT बनाने की मांग की गई है। इसमें साइबर सिक्योरिटी और IT एक्सपर्ट भी रखे जाएं। प्रस्तावित जांच में ECINet और ERONet डेटाबेस का फोरेंसिक ऑडिट कराने की मांग की गई है।
SIR के दौरान 30 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में 13 करोड़ नाम हटाए जाने की परिस्थितियों की जांच की भी मांग की गई है।
याचिका में सक्षम प्राधिकरण को जनप्रतिनिधित्व अधिनियम 1950 की धारा 32 के तहत शिकायत दर्ज करने और मुकदमा शुरू करने का निर्देश देने की मांग की गई है। यह कार्रवाई ज्ञानेश कुमार, सीनियर डिप्टी इलेक्शन कमिश्नर मनीष गर्ग, डायरेक्टर जनरल (IT) सीमा खन्ना और जिम्मेदार पाए जाने वाले अन्य अधिकारियों के खिलाफ मांगी गई है। याचिका में धारा 32 का हवाला दिया गया है। इस प्रावधान में मतदाता सूची तैयार करने, उसमें संशोधन या सुधार से जुड़े सरकारी कर्तव्य के उल्लंघन पर सजा का प्रावधान है।
याचिकाकर्ता ने यह भी आरोप लगाया है कि Form 6 में बिना अनुमति बदलाव किया गया। इसके अलावा, वोटर लिस्ट के डेटाबेस को सेंट्रलाइज करने का भी आरोप लगाया गया है।
याचिका में कहा गया है कि ECINet सिस्टम के जरिए पात्र मतदाताओं के नाम दोबारा बहाल नहीं किए गए। इसमें ECI के नाम पर बताए गए मतदाताओं को शामिल करने को चुनौती देते हुए पश्चिम बंगाल में 16.10 लाख अपीलें दाखिल किए जाने का भी जिक्र है।
इस पूरे मामले की शुरुआत इंडियन एक्सप्रेस की एक रिपोर्ट से हुई थी, जिसमें SIR को लेकर चुनाव आयोग के अधिकारियों के बीच मतभेदों का जिक्र था। रिपोर्ट के अनुसार, चुनाव आयुक्त सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी ने चुनाव पैनल के भीतर SIR प्रक्रिया को लेकर बार-बार चिंता जताई थी। रिपोर्ट के मुताबिक, SIR प्रक्रिया की देखरेख तीनों अधिकारियों ने की है, लेकिन संधू और जोशी ने पिछले 10 महीनों में कम से कम 14 बार औपचारिक रूप से आपत्तियां दर्ज कराईं। इनमें से 4 आपत्तियां एक ही दिन में दर्ज की गईं। रिपोर्ट में यह भी बताया गया है कि ये आपत्तियां उन फैसलों और आदेशों को लेकर थीं, जिन्हें संधू और जोशी की जानकारी के बिना जारी किया गया था।
विपक्ष एक बार फिर ज्ञानेश कुमार के खिलाफ महाभियोग प्रस्ताव लाने की योजना बना रहा है। अप्रैल 2026 में भी विपक्ष ने ज्ञानेश कुमार के खिलाफ महाभियोग नोटिस दिया था लेकिन लोकसभा में वह प्रस्ताव खारिज हो गया था, जबकि राज्यसभा में अभी भी लंबित है।
सूत्रों के मुताबिक, इस बार भी महाभियोग प्रस्ताव को कांग्रेस ही लीड कर रही है। कांग्रेस ने इस मुद्दे पर विपक्षी दलों से बात की है। संभावना है कि इसे अगले 2 हफ्तों के भीतर पेश किया जाएगा। एक और मामला सुप्रीम कोर्ट भी पहुंचा है, जहां एक वकील ने भारत के अटॉर्नी जनरल को पत्र लिखकर ज्ञानेश कुमार के खिलाफ अवमानना कार्रवाई चलाने की मांग की है।