शॉपिंग में UPI से 2000 रुपये से अधिक के पेमेंट पर देना होगा 0.4 % चार्ज, जानिए और कहां लगेगा चार्ज
2,000 रुपये से अधिक के भुगतान पर 0.4 प्रतिशत MDR लागू होगा।
मोदी सरकार द्वारा व्यापारियों को किए जाने वाले 2,000 रुपये से अधिक के UPI भुगतान पर 0.4 प्रतिशत मर्चेंट डिस्काउंट रेट (MDR) लगाने के फैसले का Fintech क्षेत्र के कुछ विशेषज्ञों ने कड़ा विरोध किया है।
BharatPe के पूर्व CEO अशनीर ग्रोवर ने ‘X’ पर सरकार के फैसले की आलोचना की।
अशनीर ग्रोवर ने कहा,
अगर सरकार ने सुभाष चंद्रा के 22,000 करोड़ रुपये माफ नहीं किए होते, तो 8,000 करोड़ रुपये की सरकारी सब्सिडी से भारत में UPI अगले 20 वर्षों तक मुफ्त रह सकता था।” ग्रोवर का इशारा कारोबारी और ZEE TV के मालिक सुभाष चंद्रा से जुड़े कर्ज और लोन सेटलमेंट स्कीम की ओर था।
उन्होंने आगे कहा कि,
UPI का संचालन करने वाली संस्था NPCI के पास अपनी बैलेंस शीट में करीब 6,119 करोड़ रुपये की नकदी है। इसके अलावा NPCI ने कर चुकाने से पहले करीब 1,900 करोड़ रुपये का लाभ कमाया है।
ग्रोवर के अनुसार,
NPCI अपनी नकदी और मुनाफे के दम पर UPI को अनिश्चित समय तक मुफ्त चला सकती है। इसके लिए सरकार से आर्थिक सहायता की जरूरत नहीं है। उन्होंने यह भी दावा किया कि सरकार ने पिछले वर्ष NPCI से करीब 1,000 करोड़ रुपये का टैक्स वसूला था।
बता दें कि सरकार ने बड़ी रकम वाले डिजिटल मर्चेंट भुगतान के लिए नया ढांचा लागू किया है। इसके तहत 75,000 या उससे अधिक के भुगतान पर अधिकतम ₹300 शुल्क लिया जाएगा।
अपनी बात के समर्थन में ग्रोवर ने कुछ आर्थिक आंकड़े भी साझा किए। उन्होंने कहा,
भारत में कोई पांच मिनट आंकड़े गूगल कर ले तो दूध का दूध और पानी का पानी हो जाएगा। भारतीय रिजर्व बैंक ने सरकार को 2.87 लाख करोड़ रुपये हस्तांतरित किए हैं। सूचीबद्ध बैंकों ने 4.11 लाख करोड़ रुपये का मुनाफा कमाया है, जबकि NPCI का कर-पूर्व लाभ 1,888 करोड़ रुपये रहा।
इन आंकड़ों का हवाला देते हुए उन्होंने सवाल किया कि,
UPI की वजह से वास्तव में किसे नुकसान हो रहा है और सरकार इस व्यवस्था को आखिर कितनी सब्सिडी दे रही है?
ग्रोवर ने ATM चलाने और नकदी के प्रबंधन पर होने वाले खर्च का भी उल्लेख किया। उनके अनुसार,
देश में ATM और कैश लॉजिस्टिक्स पर करीब 30,500 करोड़ रुपये खर्च होते हैं। उन्होंने सुझाव दिया कि ATM की संख्या कम करके और UPI को बढ़ावा देकर इन खर्चों को घटाया जा सकता है।
उन्होंने चेतावनी दी कि,
UPI पर किसी भी तरह का शुल्क लगाना वास्तव में टैक्स वसूली जैसा होगा। UPI भारत की एक ऐसी तकनीकी उपलब्धि है जिसकी दुनियाभर में सराहना हुई है, लेकिन अब इसे टैक्स वसूली के लिए कमजोर किया जा सकता है।
गौरतलब है केंद्र सरकार ने मंगलवार, 15 सितंबर को UPI लेनदेन के लिए नया मर्चेंट डिस्काउंट रेट (MDR) के ढांचे को लेकर अधिसूचना जारी किया। मोदी सरकार ने बड़ी चालाकी से पहले ये बताया कि इसके तहत किसी व्यक्ति को भेजे जाने वाले पैसे पर कोई शुल्क नहीं लगेगा, चाहे रकम कितनी भी हो। लेकिन इसमें एक पेंच जोड़ दिया कि दुकानदारों और दूसरे व्यापारियों को किए जाने वाले 2,000 रुपये से अधिक के भुगतान पर 0.4 प्रतिशत MDR लगाया जाएगा। नए नियम 15 अक्टूबर से लागू होंगे।
सरकार का कहना है कि,
MDR व्यापारियों से जुड़ी भुगतान व्यवस्था का शुल्क है, इसे ग्राहकों से नहीं वसूला जाएगा। व्यक्ति से व्यक्ति यानी P2P लेनदेन पूरी तरह मुफ्त रहेगा। परिवार, दोस्तों या किसी अन्य व्यक्ति को UPI से पैसे भेजने पर भेजने वाले या प्राप्त करने वाले से कोई शुल्क नहीं लिया जाएगा।
व्यापारियों को किए जाने वाले 2,000 रुपये तक के UPI भुगतान भी मुफ्त रहेंगे। लेकिन 2,000 रुपये से अधिक के भुगतान पर व्यापारी को 0.4 प्रतिशत MDR देना होगा।
यदि किसी व्यापारी को किया गया UPI भुगतान 75,000 रुपये से अधिक है, तो MDR की अधिकतम सीमा 300 रुपये प्रति लेनदेन होगी।
रेलवे, टेलीकॉम, बीमा, पेट्रोल-डीजल, बिजली, पानी, पाइप गैस, शिक्षा और कृषि सामग्री जैसी आवश्यक सेवाओं के भुगतान पर 0.4 प्रतिशत MDR नहीं लगेगा। इनके लिए केवल 5 रुपये प्रति लेनदेन का निश्चित शुल्क तय किया गया है।
म्यूचुअल फंड, शेयर बाजार, स्टॉक ब्रोकर और सिक्योरिटीज से जुड़े भुगतान पर 0.02 प्रतिशत MDR लगेगा। यहां भी अधिकतम शुल्क 300 रुपये प्रति लेनदेन होगा।
बिजली-पानी के मासिक बिल, OTT सब्स्क्रिप्शन और नियमित निवेश जैसे भुगतान अगर UPI AutoPay या UPI Mandate के माध्यम से किए जाते हैं, तो उन पर MDR नहीं लगेगा।
सरकार का कहना है कि दुकानदारों को MDR का खर्च ग्राहकों पर नहीं डालना चाहिए। बैंकों को यह सुनिश्चित करने की सलाह दी गई है कि व्यापारी ग्राहकों से अतिरिक्त शुल्क न वसूलें। UPI ऐप कंपनियों को भी किसी प्रकार का प्लेटफॉर्म शुल्क या छिपा हुआ चार्ज लगाने से स्पष्ट रूप से मना किया गया है।
NPCI का कहना है कि UPI पर लगने वाला MDR क्रेडिट कार्ड के शुल्क से काफी कम है। इसलिए दुकानदारों के पास वस्तुओं और सेवाओं की कीमत बढ़ाने का कोई मजबूत आर्थिक कारण नहीं है। ग्राहकों को सामान की तय कीमत ही चुकानी चाहिए।
UPI QR कोड के माध्यम से अपने व्यक्तिगत बैंक खातों में हर महीने 1 लाख रुपये तक प्राप्त करने वाले छोटे दुकानदारों, रेहड़ी-पटरी वालों और अन्य छोटे व्यापारियों से MDR नहीं लिया जाएगा। इन्हें P2PM यानी Person-to-Person-Merchant श्रेणी में रखा गया है। इन्हें अपना QR कोड बदलने या दोबारा पंजीकरण कराने की जरूरत नहीं होगी।
अगर किसी छोटे व्यापारी के खाते में लगातार तीन महीने तक हर महीने 1 लाख रुपये से अधिक का UPIभुगतान आता है, तो उसे सामान्य व्यापारी यानी P2M श्रेणी में डाल दिया जाएगा। इसके बाद 2,000 रुपये से अधिक के भुगतान पर 0.4 प्रतिशत MDR लागू होगा।
UPI के माध्यम से हर महीने अरबों लेनदेन होते हैं। NPCI का कहना है कि MDR से मिलने वाली राशि का इस्तेमाल भुगतान प्रणाली को अधिक मजबूत बनाने, नई तकनीक विकसित करने, साइबर सुरक्षा बढ़ाने और ग्राहक सेवाओं में सुधार करने के लिए किया जाएगा। सरकार के मुताबिक, नए MDR नियमों का असर केवल करीब चार प्रतिशत व्यापारी लेनदेन पर पड़ेगा। लगभग 96 प्रतिशत लेनदेन प्रभावित नहीं होंगे, क्योंकि वे या तो 2,000 रुपये से कम हैं या छोटे व्यापारियों को दी गई छूट के अंतर्गत आते हैं।
क्रेडिट कार्ड से भुगतान पर आमतौर पर 1.5 से 2.5 प्रतिशत तक MDR लगता है, जबकि डेबिट कार्ड का MDR अधिकतम 0.90 प्रतिशत तक हो सकता है। इसकी तुलना में UPI पर 2,000 रुपये से अधिक के व्यापारी भुगतान पर केवल 0.4 प्रतिशत MDR लगाया जाएगा। उच्च मूल्य वाले भुगतान पर इसकी अधिकतम सीमा 300 रुपये होगी।