दोहरे अंक के करीब पहुंची महंगाई, लगातार 4 महीनों से आम आदमी बेहाल
देश में थोक मूल्य सूचकांक (WPI) पर आधारित महंगाई अगस्त 2026 में बढ़कर 9.92 प्रतिशत हो गई।
देश में थोक मूल्य सूचकांक (WPI) पर आधारित महंगाई अगस्त 2026 में बढ़कर 9.92 प्रतिशत हो गई। जुलाई में यह 9.78 प्रतिशत थी। वाणिज्य मंत्रालय द्वारा 14 सितंबर को जारी आंकड़ों के मुताबिक, ईंधन, प्रोसेस्ड फूड प्रोडक्ट और केमिकल की कीमतों में बढ़ोतरी के कारण थोक महंगाई बढ़ी है। हालांकि, प्राथमिक वस्तुओं की महंगाई में कुछ नरमी दर्ज की गई।
Money Control की रिपोर्ट के अनुसार,
थोक महंगाई लगातार चार महीनों से दोहरे अंक के करीब बनी हुई है। मार्च में यह 3.98 प्रतिशत थी, जो अप्रैल में बढ़कर 8.36 प्रतिशत और मई में 9.88 प्रतिशत हो गई। जून में थोक महंगाई संशोधित रूप से 9.97 प्रतिशत रही, जबकि जुलाई में यह मामूली घटकर 9.78 प्रतिशत पर आ गई थी।
जून की महंगाई दर के शुरुआती अनुमान को भी 9.87 प्रतिशत से संशोधित कर 9.97 प्रतिशत कर दिया गया है। अगस्त में ईंधन और बिजली श्रेणी थोक कीमतों पर दबाव का सबसे बड़ा स्रोत बनी रही। इस श्रेणी में महंगाई जुलाई के 20.05 प्रतिशत से बढ़कर अगस्त में 22.93 प्रतिशत हो गई।
WPI में सबसे अधिक भार रखने वाले विनिर्मित उत्पादों की महंगाई भी 8.29 प्रतिशत से बढ़कर 8.37 प्रतिशत हो गई। ईंधन और बिजली श्रेणी के भीतर खनिज तेल की महंगाई 32.40 प्रतिशत से बढ़कर 38.48 प्रतिशत पर पहुंच गई।

वहीं, कच्चे पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस की महंगाई 26.99 प्रतिशत से बढ़कर 34.41 प्रतिशत हो गई। कोयला और लिग्नाइट की कीमतें सालाना आधार पर 1.57 प्रतिशत बढ़ीं। जुलाई में इनमें 0.56 प्रतिशत की गिरावट आई थी। दूसरी ओर, बिजली की कीमतों में सालाना आधार पर 1.73 प्रतिशत की कमी दर्ज की गई।
ईंधन और बिजली सूचकांक जुलाई के 105.4 से बढ़कर अगस्त में 108.3 हो गया। खनिज तेल सूचकांक 113.2 से बढ़कर 118.4 और कच्चे पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस का सूचकांक 114.8 से बढ़कर 120.3 हो गया।
अगस्त के दौरान खाद्य वस्तुओं की कीमतों का दबाव भी बढ़ा। व्यापक WPI खाद्य सूचकांक पर आधारित महंगाई जुलाई के 6.65 प्रतिशत से बढ़कर अगस्त में 7.05 प्रतिशत हो गई। पिछले कुछ महीनों से खाद्य महंगाई में लगातार तेजी देखी जा रही है।

मार्च में खाद्य सूचकांक पर आधारित महंगाई महज 1.92 प्रतिशत थी। यह अप्रैल में बढ़कर 3.29 प्रतिशत, मई में 4.58 प्रतिशत और जून में 6.23 प्रतिशत हो गई। प्राथमिक खाद्य वस्तुओं की महंगाई जुलाई के 5.44 प्रतिशत से बढ़कर अगस्त में 5.67 प्रतिशत हो गई। वहीं, प्रसंस्कृत खाद्य उत्पादों की महंगाई 8.89 प्रतिशत से तेजी से बढ़कर 9.65 प्रतिशत पर पहुंच गई।
विनिर्माण क्षेत्र में कीमतों का दबाव व्यापक स्तर पर बना रहा, हालांकि अलग-अलग उद्योगों में स्थिति अलग दिखाई दी। रसायन और रासायनिक उत्पादों की महंगाई 13.12 प्रतिशत से बढ़कर 14.30 प्रतिशत हो गई। रबर और प्लास्टिक उत्पादों की महंगाई भी 10.38 प्रतिशत से बढ़कर 11.18 प्रतिशत पर पहुंच गई। पश्चिम एशिया में दोबारा शुरू हुई सैन्य झड़पों का असर इन उद्योगों पर भी पड़ा है। इसके विपरीत, कंप्यूटर, इलेक्ट्रॉनिक और ऑप्टिकल उत्पादों की कीमतों में सालाना आधार पर 0.47 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई। दवा उत्पादों की महंगाई भी जुलाई के 4.75 प्रतिशत से घटकर अगस्त में 3.40 प्रतिशत रह गई। WPI के आंकड़ों के साथ सरकार ने उत्पादन उत्पादक मूल्य सूचकांक (Output PPI) के अस्थायी अनुमान भी जारी किए।
सभी वस्तुओं के लिए अखिल भारतीय Output PPI जुलाई के 109.9 से बढ़कर अगस्त में 110.8 हो गया। हालांकि, उत्पादकों की इनपुट लागत की तस्वीर इससे काफी अलग रही। विनिर्माण क्षेत्र के लिए सरकार का परीक्षण आधारित इनपुट उत्पादक मूल्य सूचकांक (IPPI) जुलाई के 105.9 से घटकर अगस्त में 104.2 हो गया।
पेट्रोलियम से जुड़े इनपुट की कीमतों में यह अंतर सबसे अधिक रहा। कोक और परिष्कृत पेट्रोलियम उत्पादों का इनपुट मूल्य सूचकांक जुलाई के 99.9 से गिरकर अगस्त में 86.7 पर आ गया। मई में यह सूचकांक 111.8 के स्तर पर था।