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मणिपुर में फिर भड़की हिंसा, गर्भवती महिला समेत चार लोगों की हत्या

TCN Desk TCN Desk | 1h ago · 4 min read
मणिपुर में फिर भड़की हिंसा, गर्भवती महिला समेत चार लोगों की हत्या

मणिपुर में रविवार को अज्ञात बंदूकधारियों ने दो अलग-अलग हमलों में कुकी-जो समुदाय के चार लोगों की हत्या कर दी

मणिपुर में रविवार को अज्ञात बंदूकधारियों ने दो अलग-अलग हमलों में कुकी-जो समुदाय के चार लोगों की हत्या कर दी। मृतकों में एक दंपती और एक गर्भवती महिला शामिल हैं। हमले में एक छह वर्षीय बच्चा घायल हुआ है।

The Telegraph की एक रिपोर्ट के अनुसार, पहला हमला तड़के नागा-बहुल तामेंगलोंग जिले के दूरदराज स्थित कुकी-जो गांव एल. टोलेन में हुआ। बंदूकधारियों ने गांव पर धावा बोलकर लिंगजंगाई सिंगसिट और उनके पति सेनेह सिंगसिट की गोली मारकर हत्या कर दी। हमले में दंपती का छह वर्षीय बेटा हेनमिसनांग घायल हो गया। उसे इलाज के लिए असम के सिलचर ले जाया गया है। उसके दोनों बड़े भाई सुरक्षित हैं।


दूसरा हमला दोपहर में तामेंगलोंग की सीमा से सटे नागा-बहुल नोनी जिले के लोंगपी गांव में हुआ। कुकी-जो समुदाय के एक नेता के मुताबिक, रोएल गांगटे और जूली सिंगसन घरेलू जरूरतों से जुड़े काम के लिए निकले थे, तभी घात लगाकर उन पर हमला किया गया। दोनों की मौके पर ही मौत हो गई। वेस्टर्न विलेज वॉलंटियर्स के ओबेद सिंगसन ने बताया कि जूली गर्भवती थीं।

बता दें कि,

कुकी-जो समुदाय हर वर्ष 13 सितंबर को ‘सहनित नी’ यानी ‘कुकी ब्लैक डे’ के रूप में मनाता है। इस दिन 1993 में शुरू हुए कुकी-नागा संघर्ष में मारे गए समुदाय के लोगों को याद किया जाता है। कुकी-जो संगठनों का दावा है कि 1993 से 1997 तक चली हिंसा में समुदाय के कम से कम 1,157 लोग मारे गए थे। बताया जाता है कि 13 सितंबर 1993 को अकेले 115 कुकी-जो लोगों की हत्या हुई थी। इन हत्याओं का आरोप नेशनल सोशलिस्ट काउंसिल ऑफ नगालिम—इसाक मुइवा (NSCN-IM) के उग्रवादियों पर लगाया गया था। ये घटनाएं मणिपुर के नागा-बहुल तामेंगलोंग और सेनापति जिलों में हुई थीं।

इस संघर्ष में 200 से अधिक नागा समुदाय के लोगों की भी मौत हुई थी। दोनों समुदायों के परस्पर विरोधी क्षेत्रीय दावों के कारण यह संघर्ष भड़का था। हालांकि, कुकी पक्ष में मौतों और विस्थापन की संख्या अधिक रही। रविवार को जिस एल. टोलेन गांव पर हमला हुआ, वह इंफाल से लगभग 162 किलोमीटर और सिलचर से 30 किलोमीटर दूर है। यह गांव दोनों शहरों को जोड़ने वाले राष्ट्रीय राजमार्ग-37 के पास स्थित है। आधिकारिक सूत्रों ने हमले की पुष्टि करते हुए बताया कि इलाके में अतिरिक्त सुरक्षाबलों को तैनात किया गया है।

एल. टोलेन ग्राम प्राधिकरण ने अपने “शांतिपूर्ण गांव” पर हुए हमले की निंदा करते हुए इसके लिए दो नागा उग्रवादी संगठनों—NSCN-IM और ZUF-K—को जिम्मेदार ठहराया है। प्राधिकरण ने आरोप लगाया कि,

यह हमला कुकी-जो ग्रामीणों को उनकी पैतृक जमीन से आतंकित करके हटाने और जातीय सफाया करने की “सुनियोजित और जानबूझकर की गई कोशिश” है। उसके अनुसार, इसका उद्देश्य NSCN-IM के ‘ग्रेटर नगालिम’ के एजेंडे को पूरा करना है।

NSCN-IM वर्ष 1997 से केंद्र सरकार के साथ शांति वार्ता कर रहा है। संगठन नगालैंड, मणिपुर, अरुणाचल प्रदेश, असम और म्यांमार के नागा-बहुल इलाकों को मिलाकर एक संयुक्त ‘नगालिम’ बनाने की मांग करता रहा है।

मणिपुर, अरुणाचल प्रदेश और असम इस मांग का विरोध करते हैं। कुकी-बहुल कांगपोकपी जिले में 13 मई को तीन कुकी-जो चर्च नेताओं की घात लगाकर हत्या किए जाने के बाद से अब तक अज्ञात हमलावर कम से कम 25 कुकी-जो और नागा नागरिकों की जान ले चुके हैं। नागा संगठन और विधायक कांगपोकपी में 13 मई को अगवा किए जाने के बाद मारे गए छह नागा लोगों के लिए न्याय की मांग कर रहे हैं। दोनों समुदाय हिंसा के लिए एक-दूसरे का समर्थन करने वाले उग्रवादी संगठनों को जिम्मेदार ठहराते हैं।

रविवार की हत्याओं ने पहाड़ी इलाकों में सुरक्षा की नाजुक स्थिति को एक बार फिर उजागर कर दिया है।

इन क्षेत्रों में मुख्य रूप से कुकी-जो और नागा समुदाय रहते हैं। राज्य पहले से ही 3 मई 2023 को शुरू हुई मैतेई-कुकी हिंसा के प्रभावों से जूझ रहा है। एल. टोलेन ग्राम प्राधिकरण ने गांव और आसपास के कुकी इलाकों में पर्याप्त केंद्रीय सुरक्षाबलों की तैनाती की मांग की है। इसके साथ ही प्राथमिकी दर्ज करने, स्वतंत्र और पारदर्शी जांच कराने तथा आरोपियों को गिरफ्तार करने की अपील की गई है।

प्राधिकरण ने केंद्र सरकार, राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग और अन्य संबंधित अधिकारियों से “और निर्दोष लोगों की जान जाने से पहले तत्काल हस्तक्षेप” करने की मांग की है। नागा गांव कैमाई के ग्राम प्राधिकरण ने भी हमले की निंदा करते हुए इसे समुदायों को बांटने की कोशिश बताया है।

कुकी इनपी जिरी, तामेंगलोंग और नोनी ने कहा है कि,

यह हमला इलाके में तैनात सुरक्षाबलों से “सिर्फ कुछ सौ मीटर की दूरी” पर हुआ। संगठन ने निष्पक्ष और व्यापक जांच के लिए मामला राष्ट्रीय जांच एजेंसी (NIA) को सौंपने की मांग की है। संगठन ने सरकार को ठोस कार्रवाई शुरू करने के लिए 24 घंटे का समय दिया है। इसके साथ ही 24 घंटे की आर्थिक नाकेबंदी की घोषणा करते हुए चेतावनी दी है कि मांगें पूरी नहीं होने पर अनिश्चितकालीन पूर्ण बंद किया जाएगा।