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मोदी-शाह के संरक्षण में फर्जी राजनीतिक दलों के जरिये 10,000 करोड़ की हुई टैक्स चोरी: कांग्रेस

TCN Desk TCN Desk | 35m ago · 8 min read
मोदी-शाह के संरक्षण में फर्जी राजनीतिक दलों के जरिये 10,000 करोड़ की हुई टैक्स चोरी: कांग्रेस

कांग्रेस का आरोप हैं कि ऐसा दिखाई देता है कि भाजपा के संरक्षण में देश के भीतर ही काले धन को सफेद करने की योजना चल रही है।

कांग्रेस ने बुधवार को मोदी सरकार पर हमला बोलते हुए देश के 3,260 पंजीकृत गैर-मान्यता प्राप्त राजनीतिक दलों (RUPPs) के जरिये करीब 10 हजार करोड़ रुपये की टैक्स चोरी और मनी लॉन्ड्रिंग का आरोप लगाया। पार्टी ने मामले की जांच संयुक्त संसदीय समिति (JPC) से कराने की मांग की है। कांग्रेस के आरोपों पर सरकार की ओर से तत्काल कोई प्रतिक्रिया नहीं आई है।

कांग्रेस महासचिव जयराम रमेश ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर सवाल किया कि,

इन 3,260 फर्जी राजनीतिक दलों के पीछे कौन-सा ‘चाणक्य’ और इस घोटाले का असली सूत्रधार कौन है। मोदी सरकार को देश को जवाब देना होगा। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी विदेशों से काला धन वापस नहीं ला पाए और लोगों को वादा किए गए 15 लाख रुपये भी नहीं मिले। अब ऐसा दिखाई देता है कि भाजपा के संरक्षण में देश के भीतर ही काले धन को सफेद करने की योजना चल रही है।


जयराम रमेश ने सवाल उठाया कि फर्जी राजनीतिक दलों के जरिये टैक्स चोरी और मनी लॉन्ड्रिंग के मामले सामने आने के बावजूद सरकार ने संबंधित दलों और कर चोरों के विरुद्ध कार्रवाई क्यों नहीं की। जयराम रमेश ने कहा कि कांग्रेस नेता शक्तिसिंह गोहिल ने 3,260 पंजीकृत गैर-मान्यता प्राप्त राजनीतिक दलों के जरिए 10 हजार करोड़ रुपये से अधिक की टैक्स चोरी का दावा किया है। इसके बावजूद दोषियों पर 200 प्रतिशत जुर्माना लगाने और आपराधिक मुकदमे शुरू करने जैसी कार्रवाई नहीं की गई।

जयराम रमेश ने 2024 के लोकसभा चुनाव से पहले कांग्रेस के बैंक खातों पर लगी रोक और पार्टी को मिले आयकर नोटिसों का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा,

भारत के प्रमुख विपक्षी दल कांग्रेस को आर्थिक रूप से कमजोर करने के उद्देश्य से उसके बैंक खाते फ्रीज कर दिए गए और भारी टैक्स नोटिस थमा दिए गए। फिर इन 3,260 कथित फर्जी राजनीतिक दलों और उनसे जुड़े टैक्स चोरी के मामलों की जांच क्यों नहीं हो रही है? संभव है कि इन दलों को भाजपा नेतृत्व का संरक्षण प्राप्त हो और यह पूरा घोटाला सरकार की मौन स्वीकृति से चल रहा हो।

दिल्ली में संवाददाता सम्मेलन को संबोधित करते हुए कांग्रेस नेता शक्तिसिंह गोहिल ने दावा किया कि,

देश में 3,260 पंजीकृत गैर-मान्यता प्राप्त राजनीतिक दलों का इस्तेमाल आयकर चोरी के लिए किया जा रहा है। आयकर अधिनियम की धारा 80GGC के तहत किसी व्यक्ति और धारा 80GGB के तहत किसी भारतीय कंपनी को पात्र राजनीतिक दलों को दिए गए दान पर निर्धारित शर्तों के अनुसार कर कटौती का लाभ मिल सकता है। गोहिल ने आरोप लगाया कि इन्हीं प्रावधानों का दुरुपयोग कर फर्जी दलों के नाम पर हजारों करोड़ रुपये का दान दिखाया गया।


उन्होंने दावा किया कि,

इन 3,260 पंजीकृत गैर-मान्यता प्राप्त राजनीतिक दलों ने करीब 10 हजार करोड़ रुपये का चंदा जुटाया है।”

गोहिल ने आगे कहा कि ,

2025 में एक गैर-सरकारी संगठन की रिपोर्ट सामने आने के बाद सरकार को कार्रवाई करनी चाहिए थी, लेकिन ऐसा नहीं किया गया। उन्होंने कहा कि कानून के तहत धोखाधड़ी करने वाली कंपनियों पर 200 प्रतिशत तक जुर्माना लगाया जा सकता है, आपराधिक मुकदमे दर्ज किए जा सकते हैं और दोष सिद्ध होने पर सात साल तक की सजा का प्रावधान है। इसके बावजूद अब तक एक भी व्यक्ति के विरुद्ध कार्रवाई नहीं हुई है।

गोहिल ने आरोप लगाया कि,

इस टैक्स चोरी में कुछ चार्टर्ड अकाउंटेंटों की भी अहम भूमिका हो सकती है। आयकर अधिकारियों ने ऐसे चार्टर्ड अकाउंटेंटों के खिलाफ कार्रवाई की बात कही थी, लेकिन ऊपर से कोई आदेश नहीं आया।


उन्होंने दावा किया कि ,

ऐसा इसलिए है क्योंकि ये सरकार की अपनी ‘सी टीम’ हैं। आयकर अपीलीय न्यायाधिकरण भी कह चुका है कि इस तरह की कर चोरी देश के लिए घातक है। यह काला धन देश की अर्थव्यवस्था और सुरक्षा को कमजोर करेगा। क्या चुनाव आयोग इस मामले में भाजपा के साथ मिला हुआ है। गोहिल ने मुख्य चुनाव आयुक्त की नियुक्ति प्रक्रिया में किए गए बदलावों पर भी सवाल उठाया।

उन्होंने कहा कि पहले मुख्य चुनाव आयुक्त की नियुक्ति से जुड़ी समिति में प्रधानमंत्री, लोकसभा में विपक्ष के नेता और भारत के प्रधान न्यायाधीश शामिल होते थे। नई व्यवस्था में प्रधान न्यायाधीश के स्थान पर प्रधानमंत्री द्वारा नामित केंद्रीय मंत्री को शामिल किया गया है। कांग्रेस ने आरोप लगाया कि इससे सरकार का प्रभाव बढ़ गया है।

कांग्रेस ने इस कथित घोटाले की जांच के लिए संयुक्त संसदीय समिति गठित करने की मांग की है। पार्टी की अन्य प्रमुख मांगें हैं—

  1. आयकर कानून के संबंधित प्रावधानों के तहत दोषियों पर 200 प्रतिशत जुर्माना लगाया जाए।
  2. घोटाले में शामिल चार्टर्ड अकाउंटेंटों के खिलाफ आपराधिक मामले दर्ज किए जाएं।
  3. दोषी पाए जाने वाले चार्टर्ड अकाउंटेंटों के लाइसेंस रद्द किए जाएं।
  4. फर्जी राजनीतिक दलों के पदाधिकारियों और नेताओं के विरुद्ध आपराधिक कार्रवाई की जाए।
  5. चुनावी चंदे से संबंधित समस्त जानकारी सार्वजनिक की जाए।
  6. यह बताया जाए कि फर्जी दलों से जुड़े कितने लोग बाद में भाजपा में शामिल हुए।

The Print की एक रिपोर्ट के अनुसार,

देश में अज्ञात और गैर-मान्यता प्राप्त राजनीतिक दलों को मिलने वाले चंदे में पिछले कुछ वर्षों के दौरान असाधारण बढ़ोतरी दर्ज की गई है। उपलब्ध ऑडिट और योगदान रिपोर्टों के अनुसार, 2022 से 2024 के बीच ऐसे दलों को 10 हजार करोड़ रुपये से अधिक का चुनावी चंदा मिलने की बात सामने आई है। वर्ष 2015-16 में यह आंकड़ा महज 4.37 करोड़ रुपये था।

गुजरात के केवल पांच गैर-मान्यता प्राप्त राजनीतिक दलों ने 2019 से 2024 के बीच कुल 2,316 करोड़ रुपये की आय घोषित की। कई छोटे और लगभग अज्ञात दलों की घोषित आय तथा उन्हें मिला चंदा कुछ राष्ट्रीय राजनीतिक दलों से भी अधिक रहा है।

RUPPs यानी Registered Unrecognised Political Parties वे राजनीतिक दल हैं, जो चुनाव आयोग में औपचारिक रूप से पंजीकृत होते हैं, लेकिन राष्ट्रीय या राज्यस्तरीय मान्यता प्राप्त दल बनने की आवश्यक चुनावी शर्तें पूरी नहीं करते। दूसरे राजनीतिक दलों की तरह इन्हें भी निर्धारित नियमों के तहत आयकर संबंधी छूट मिल सकती है। इसी व्यवस्था में संभावित गड़बड़ी और दुरुपयोग को लेकर सवाल उठ रहे हैं।

चुनाव आयोग की अक्टूबर 2025 की अधिसूचना के अनुसार, देश में ऐसे दो हजार से अधिक दल पंजीकृत थे। कांग्रेस ने वर्तमान संख्या 3,260 बताई है। चुनाव आयोग ने पिछले वर्षों में उन गैर-मान्यता प्राप्त दलों को सूची से हटाने की कार्रवाई की है, जिन्होंने छह वर्षों में एक भी चुनाव नहीं लड़ा या जिनके कार्यालय दिए गए पते पर नहीं मिले। ऐसे मामलों को आयकर छूट के दावों की जांच के लिए केंद्रीय प्रत्यक्ष कर बोर्ड (CBDT) को भी भेजा जाता है। इसके बावजूद इन दलों के वित्तीय लेनदेन में पारदर्शिता की कमी बनी हुई है। कई दल समय पर ऑडिट और योगदान रिपोर्ट जमा नहीं करते।

पूर्व मुख्य चुनाव आयुक्त एसवाई कुरैशी का कहना है कि,

चुनाव आयोग के पास राजनीतिक दलों का पंजीकरण रद्द करने का अधिकार नहीं है। उन्होंने बताया कि सुप्रीम कोर्ट के 2002 के एक फैसले के कारण आयोग किसी दल को पूरी तरह अपंजीकृत नहीं कर सकता।

कुरैशी ने कहा,

हमारे पास यह पता लगाने का कोई प्रभावी तरीका नहीं है कि इन दलों को कितना पैसा मिल रहा है और वे कितनी आय अर्जित कर रहे हैं। उन्हें रिटर्न जमा करना चाहिए, लेकिन ऐसा नहीं करने पर भी चुनाव आयोग उनका पंजीकरण रद्द नहीं कर सकता। सरकार को कानून बनाकर चुनाव आयोग को राजनीतिक दलों का पंजीकरण रद्द करने का अधिकार देना चाहिए।

कुरैशी के अनुसार, नियमों में ‘डीलिस्टिंग’ जैसा कोई स्पष्ट शब्द नहीं है। चुनाव आयोग द्वारा किसी दल को सूची से हटाया जाना उसका पंजीकरण रद्द किए जाने के समान नहीं है।

नेशनल कैंपेन फॉर पीपुल्स राइट टू इन्फॉर्मेशन की सह-संयोजक अंजलि भारद्वाज ने कहा कि राजनीतिक दल के रूप में पंजीकरण का इस्तेमाल भ्रष्टाचार और मनी लॉन्ड्रिंग के लिए किया जा सकता है। इसमें शेल कंपनियों के माध्यम से धन भेजे जाने की भी आशंका रहती है।

अंजलि भारद्वाज ने सवाल किया,

जब पत्रकार और आम नागरिक इन दलों की वित्तीय स्थिति में गड़बड़ी देख सकते हैं, तब लोकपाल, प्रवर्तन निदेशालय, सीबीआई और अन्य नियामक एजेंसियां क्या कर रही हैं? ये राजनीतिक दल आयकर रिटर्न और चुनाव आयोग को अपनी रिपोर्ट जमा करते हैं। इसके बावजूद उनकी आय, चंदे और वास्तविक राजनीतिक गतिविधियों के बीच दिखाई देने वाले भारी अंतर की गंभीरता से जांच नहीं की जा रही है।

पूर्व मुख्य चुनाव आयुक्त कुरैशी के मुताबिक,

भारत में राजनीतिक दल का पंजीकरण कराना अपेक्षाकृत आसान है। पहले इसके लिए 30 सदस्यों की आवश्यकता होती थी, जबकि अब कम से कम 100 पंजीकृत मतदाताओं का संगठन होना जरूरी है। पंजीकरण के बाद दल चुनाव लड़ते हैं और चुनावी प्रदर्शन के आधार पर उन्हें राज्य या राष्ट्रीय दल की मान्यता मिल सकती है। किसी पार्टी को मान्यता प्राप्त राज्यस्तरीय दल बनने के लिए निर्धारित मत प्रतिशत और सीटों से जुड़ी शर्तों में से कोई एक पूरी करनी होती है। इनमें विधानसभा चुनाव में कम से कम छह प्रतिशत वैध मत हासिल करने के साथ न्यूनतम दो सीटें जीतना या विधानसभा की कुल सीटों में से कम से कम तीन प्रतिशत सीटें प्राप्त करना शामिल है। राष्ट्रीय दल की मान्यता के लिए भी चुनाव आयोग ने वोट प्रतिशत और लोकसभा सीटों से संबंधित अलग-अलग मानदंड निर्धारित किए हैं। इनमें चार या अधिक राज्यों में कम से कम छह प्रतिशत वोट के साथ लोकसभा की न्यूनतम चार सीटें जीतना अथवा कम से कम तीन राज्यों से लोकसभा की कुल सीटों का दो प्रतिशत प्राप्त करना शामिल है।

वर्तमान में भारत में छह मान्यता प्राप्त राष्ट्रीय दल और करीब 60 मान्यता प्राप्त राज्य या क्षेत्रीय दल हैं।