पश्चिम बंगाल की भाजपा सरकार के विज्ञापन में देवी दुर्गा की 11 भुजाएं दिखाने पर उठा सियासी तूफान
भाजपा सरकार में अब हिंदू देवी-देवताओं के पारंपरिक रूप और रंग के साथ भी फेरबदल होने लगी है।
भाजपा सरकार में अब हिंदू देवी-देवताओं के पारंपरिक रूप और रंग के साथ भी फेरबदल होने लगी है। अयोध्या में राम मंदिर के लिए जो रामलला की नई प्रतिमा स्थापित की गई है उसको लेकर भी शास्त्रकारों और आलोचकों ने आपत्ति जताई थी। सवाल उठाया गया था कि हिंदू धर्मग्रंथों में भगवान राम को "सांवला" या "श्यामल" बताया गया है, लेकिन मंदिर में स्थापित मूर्ति पूरी तरह "काली" है। आरोप लगाया कि प्रतिमा का रंग शास्त्रों के विपरीत है। मूर्तिकार अरुण योगीराज द्वारा बनाई गई यह प्रतिमा दक्षिण भारत की बेहद खास 'कृष्ण शिला' (काले पत्थर) से बनी है। धार्मिक रूप से श्यामल रूप की उपासना के लिए कृष्ण शिला को उत्तम माना गया है।
अब नया विवाद पश्चिम बंगाल में हो रहा है जहां एक सरकारी विज्ञापन में देवी दुर्गा की प्रतिमा को 11 भुजाओं में दिखाया गया है। हमलोग बचपन से ही देखते आ रहे हैं कि देवी दुर्गा 10 भुजाओं वाली हैं। 10 भुजाओं वाली देवी दुर्गा के रुप हिंदुओं के जेहन में सदियों से चस्पां है। बता दें कि पश्चिम बंगाल में भाजपा की नई-नई सरकार बनी है।
Telegraph Online की एक एक खबर के अनुसार, पश्चिम बंगाल सरकार के एक विज्ञापन में देवी दुर्गा को 11 हाथों के साथ दिखाए जाने पर सोमवार को राजनीतिक विवाद खड़ा हो गया। विपक्षी दलों ने भाजपा सरकार पर दुर्गा के पारंपरिक धार्मिक और सांस्कृतिक स्वरूप को गलत तरीके से पेश करने का आरोप लगाया। सूचना एवं संस्कृति विभाग की ओर से जारी इस विज्ञापन में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और मुख्यमंत्री सुवेंदु अधिकारी की तस्वीरें भी थीं। विज्ञापन के जरिये बताया गया था कि मिलन मेला मैदान में राज्य प्रशासन और विभिन्न दुर्गा पूजा समितियों के प्रतिनिधियों की एक उच्चस्तरीय बैठक होगी। इस बैठक में मुख्यमंत्री सुवेंदु अधिकारी भी मौजूद रहेंगे।

ऑनलाइन और ऑफलाइन प्रसारित हुए विज्ञापन में देवी दुर्गा को 11 हाथों के साथ दिखाया गया था। इस तस्वीर ने तुरंत लोगों का ध्यान खींचा, क्योंकि बंगाल में देवी दुर्गा को परंपरागत रूप से ‘दशभुजा’ यानी 10 हाथों वाली देवी के रूप में पूजा जाता है। देवी का यह स्वरूप बंगाल की धार्मिक और सांस्कृतिक परंपरा का अहम हिस्सा है।
सीपीएम नेता शतरूप घोष ने विज्ञापन को सोशल मीडिया पर साझा करते हुए सरकार पर तीखा हमला बोला। उन्होंने लिखा,
यह एक अद्भुत सरकारी विज्ञापन है! इसमें देवी दुर्गा के 11 हाथ हैं। पौराणिक कथाओं के अनुसार, देवताओं ने राक्षस का वध करने के लिए दुर्गा को हथियारों से सुसज्जित 10 हाथ दिए थे, लेकिन भाजपा सरकार ने देवी को एक अतिरिक्त हाथ दे दिया।”
तृणमूल कांग्रेस ने सवाल उठाया कि इतनी बड़ी गलती के बावजूद विज्ञापन को सरकारी मंजूरी कैसे मिल गई।
पार्टी ने पूछा,
देवी दुर्गा के अचानक 11 हाथ कब से हो गए? देवी के पौराणिक स्वरूप को इस तरह गलत दिखाने का विचार किसका था और इसे सरकार की मंजूरी कैसे मिली?”
तृणमूल कांग्रेस के बेलेघाटा विधायक कुणाल घोष ने सुवेंदु अधिकारी से हस्तक्षेप कर तस्वीर में सुधार कराने की मांग की। उन्होंने कहा,
सरकारी विज्ञापन में दशभुजा माता को 11 हाथों वाली बना दिया गया है। धार्मिक ग्रंथों के अनुसार, एक हाथ कम किया जाना चाहिए। सरकार की ओर से हमें हर दिन कई उपदेश सुनने को मिलते हैं। ऐसे में देवी का एक हाथ बढ़ा देने से मामला और उलझ जाएगा।”
सुवेंदु अधिकारी ने विज्ञापन में हुई गलती स्वीकार करते हुए माफी मांगी। सोमवार दोपहर मिलन मेला में दुर्गा पूजा समितियों के प्रतिनिधियों को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा,
“मंगलवार सुबह जारी हुए गलत विज्ञापन के लिए मैं माफी मांगता हूं। विज्ञापन तैयार करने वाली एजेंसी को चेतावनी दे दी गई है। मैं भरोसा दिलाता हूं कि भविष्य में सरकार ऐसे मामलों में अधिक सावधानी बरतेगी।”
भाजपा के बंगाल अध्यक्ष समीक भट्टाचार्य ने भी गलती स्वीकार की, लेकिन राजनीतिक दलों से इसे विवाद का मुद्दा नहीं बनाने की अपील की।
उन्होंने कहा, अगर किसी विज्ञापन एजेंसी से ग्राफिक तैयार करते समय गलती हुई है तो इसे राजनीतिक मुद्दा नहीं बनाया जाना चाहिए। यह अनजाने में हुई गलती है और इसे जल्द ठीक कर दिया जाएगा।”
पूजा-पाठ और धार्मिक परंपराओं की जानकारी रखने वाले पुजारियों ने बताया कि ‘देवी महात्म्य’ या ‘दुर्गा सप्तशती’ में हर चित्रण में देवी दुर्गा के ठीक 10 हाथ होने की अनिवार्य बात स्पष्ट रूप से नहीं कही गई है। ‘दुर्गा सप्तशती’, मार्कंडेय पुराण का हिस्सा है और इसमें दुर्गा से जुड़ी कथाओं का वर्णन मिलता है। इस ग्रंथ में देवी के अलग-अलग स्वरूपों की कल्पना की गई है। कहीं देवी को हजार हाथों वाली बताया गया है तो ध्यान मंत्रों में विभिन्न स्वरूपों के हाथों की संख्या भी अलग-अलग है। नदिया के एक पुजारी ने नाम न बताने की शर्त पर कहा, “धार्मिक ग्रंथों में देवी का हजार हाथों वाला स्वरूप भी मिलता है। ध्यान मंत्रों में महाकाली को दशभुजा यानी 10 हाथों वाली बताया गया है। देवी के दूसरे स्वरूपों को 18 या आठ हाथों वाला भी बताया गया है।”
इस बीच भाजपा के नेतृत्व वाली पश्चिम बंगाल सरकार ने दुर्गा पूजा के लिए नए नियमों की घोषणा की है। इनमें शराब की बिक्री, तेज संगीत और सड़कों को बंद करने पर पाबंदियां लगाई गई हैं। साथ ही पूजा समितियों को दी जाने वाली आर्थिक सहायता की नीति में भी बदलाव किया गया है।
मुख्यमंत्री सुवेंदु अधिकारी ने घोषणा की कि,
त्योहार के सबसे महत्वपूर्ण दिनों में से एक महाअष्टमी पर शराब की दुकानें बंद रहेंगी। सरकार ने पूजा समारोह और विसर्जन यात्रा के दौरान डीजे बजाने पर भी रोक लगा दी है।
अधिकारी ने कहा,
दुर्गा पूजा के लिए राष्ट्रीय राजमार्गों को बंद नहीं किया जा सकता। कोलकाता में भी 14 प्रमुख सड़कों को पूजा के लिए बंद करने की अनुमति नहीं होगी। पूजा और विसर्जन के दिन डीजे संगीत नहीं बजाया जाएगा।” उन्होंने पूजा समितियों से इन निर्देशों का पालन करने की अपील की।
सरकार ने दुर्गा पूजा समितियों को दी जाने वाली आर्थिक सहायता की नीति भी बदल दी है। पिछली तृणमूल कांग्रेस सरकार ने बीते वर्ष प्रत्येक पूजा समिति को 1.10 लाख रुपये दिए थे। सुवेंदु अधिकारी ने कहा कि राज्य सरकार बड़े बजट वाली दुर्गा पूजा को आर्थिक सहायता नहीं देगी, क्योंकि सरकार को किसी धार्मिक आयोजन का खर्च नहीं उठाना चाहिए। उन्होंने कहा,
“मैं पहले ही कह चुका हूं कि राज्य सरकार बड़े बजट वाली दुर्गा पूजा को अनुदान नहीं देगी। बड़ी पूजा समितियों से अनुरोध है कि वे सरकारी सहायता न लें। ऐसा करने वाली समितियों को मैं अलग से धन्यवाद दूंगा।”
हालांकि, जो समितियां आर्थिक सहायता के बिना पूजा आयोजित नहीं कर सकतीं, उन्हें जांच के बाद एक लाख रुपये तक की मदद दी जाएगी। इसके साथ ही पूजा समितियों को कुछ राहत भी दी गई है। उनसे बिजली का शुल्क नहीं लिया जाएगा और अग्निशमन विभाग का लाइसेंस भी मुफ्त में जारी किया जाएगा।
भाजपा सरकार ने पिछली सरकार के दुर्गा पूजा कार्निवल की जगह ईडन गार्डन्स में चार घंटे का महालया कार्यक्रम आयोजित करने का फैसला किया है। सुवेंदु अधिकारी ने बताया कि इस कार्यक्रम में ड्रोन शो, आतिशबाजी और रोड शो होंगे। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी भी इसमें शामिल होंगे। सरकार ने पूजा आयोजकों से यह सुनिश्चित करने को भी कहा है कि थीम आधारित दुर्गा पूजा के कारण सनातन परंपराओं या लोगों की सांस्कृतिक भावनाओं को ठेस न पहुंचे।