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नहीं काम आया धौंस जमाना, कोर्ट ने स्वतंत्र भारद्वाज को 14 दिनों की न्यायिक हिरासत में भेजा

TCN Desk TCN Desk | 1h ago · 6 min read
नहीं काम आया धौंस जमाना, कोर्ट ने स्वतंत्र भारद्वाज को 14 दिनों की न्यायिक हिरासत में भेजा

दिल्ली की एक अदालत ने सोमवार को दक्षिणपंथी और स्वंय को हिंदुत्व का चेहरा कहने वाले स्वतंत्र भारद्वाज को 14 दिनों की न्यायिक हिरासत में भेज दिया।

दिल्ली की एक अदालत ने सोमवार को दक्षिणपंथी और स्वंय को हिंदुत्व का चेहरा कहने वाले स्वतंत्र भारद्वाज को 14 दिनों की न्यायिक हिरासत में भेज दिया। यह मामला जुलाई में जंतर-मंतर पर छात्रों के प्रदर्शन के दौरान एक दलित छात्रा निशु आजाद के पिता के साथ मारपीट से जुड़ा है।

Bar and Bench की एक रिपोर्ट के अनुसार, अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश (ASJ) सौरभ प्रताप सिंह ललेर ने वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से भारद्वाज की पेशी के बाद यह आदेश दिया। स्वतंत्र भारद्वाज को 5 सितंबर को उत्तर प्रदेश के बुलंदशहर से गिरफ्तार किया गया था।


उसके खिलाफ मारपीट के साथ-साथ अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति (अत्याचार निवारण) अधिनियम और यौन अपराधों से बच्चों का संरक्षण अधिनियम (पॉक्सो) की संबंधित धाराओं के तहत मामला दर्ज किया गया है।

शुरुआत में भारद्वाज पर भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 115(2) यानी साधारण चोट पहुंचाने और धारा 126(2) यानी गलत तरीके से रोकने के आरोप लगाए गए थे। बाद में भारद्वाज ने सोशल मीडिया पर दावा किया कि उसने छात्रा के पिता का सिर फोड़ दिया था और पुलिस ने उसे केवल कुछ घंटों के लिए हिरासत में रखा था। उसने भाजपा नेता कपिल मिश्रा और केंद्रीय मंत्री चिराग पासवान से करीबी संबंध होने का भी दावा किया था।

उधर, दिल्ली हाई कोर्ट ने भी सोमवार को दक्षिणपंथी स्वतंत्र भारद्वाज की बंदी प्रत्यक्षीकरण (हेबियस कॉर्पस) याचिका खारिज कर दी। भारद्वाज ने जुलाई में जंतर-मंतर पर कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के प्रदर्शन के दौरान एक छात्रा-कार्यकर्ता के पिता से मारपीट के मामले में दिल्ली पुलिस द्वारा की गई अपनी गिरफ्तारी को चुनौती दी थी। जस्टिस नवीन चावला और जस्टिस रविंदर डुडेजा की पीठ ने यह याचिका खारिज की। भारद्वाज ने अदालत में दावा किया था कि उनकी गिरफ्तारी अवैध है और उन्हें हिरासत से रिहा किया जाना चाहिए।


भारद्वाज ने अपनी गिरफ्तारी को अवैध बताते हुए दिल्ली हाईकोर्ट में बंदी प्रत्यक्षीकरण याचिका भी दायर की है। याचिका में उसने तत्काल रिहाई की मांग की है।


इस सप्ताह की शुरुआत में भारद्वाज ने एक पॉडकास्ट में स्वीकार किया था कि उसने नाबालिग दलित छात्रा के पिता का सिर “फोड़ दिया” था। इसके बावजूद उसके खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं हुई। उसके इस बयान के बाद तीखी प्रतिक्रिया हुई और शुक्रवार को कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) तथा भारतीय युवा कांग्रेस (IYC) ने दिल्ली के संसद मार्ग पुलिस थाने के बाहर प्रदर्शन किया। प्रदर्शनकारियों ने भारद्वाज के खिलाफ अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति अत्याचार निवारण अधिनियम की धाराएं लगाने की मांग की।

पिछले कुछ सप्ताह से भारद्वाज टीवी पैनलों, साक्षात्कारों और पॉडकास्ट में लगातार दिखाई देता रहा है। हालांकि, उसके सोशल मीडिया खातों को करीब से देखने पर पता चलता है कि उसने कई वर्षों में अपनी यह स्वयंभू पहचान तैयार किया है।

उसकी सोशल मीडिया सामग्री मुख्य रूप से हिंदुत्व, एआई से बनाए गए पोस्टरों और भाजपा नेताओं के साथ तस्वीरों पर आधारित है। इनमें बिहार के मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी, दिल्ली सरकार के मंत्री कपिल मिश्रा और लोकसभा सांसद मनोज तिवारी सहित कई नेता शामिल हैं। एक तस्वीर में वह केंद्रीय मंत्री और लोक जनशक्ति पार्टी (रामविलास) के अध्यक्ष चिराग पासवान के साथ भी दिखाई देता है।

स्वयं दलित समुदाय से आने वाले केंद्रीय मंत्री चिराग पासवान ने शुक्रवार को भारद्वाज की हरकतों की निंदा करते हुए कहा कि उसके खिलाफ लगे आरोप बेहद गंभीर हैं।


चिराग पासवान ने कहा,

जिस तरह एक व्यक्ति खुलेआम स्वीकार कर रहा है कि उसने किसी को इतनी बुरी तरह पीटा कि उसकी जान तक जा सकती थी, वह बेहद गंभीर मामला है। पॉडकास्ट पर इस बात को सार्वजनिक रूप से स्वीकार करने के बाद भी यदि उसके खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं होती है, तो मेरा मानना है कि इससे देश और समाज के सामने बहुत गलत उदाहरण जाएगा।”

पासवान ने आगे कहा,

मामले की गंभीरता को समझते हुए और क्योंकि उस व्यक्ति ने कई नेताओं के नामों के साथ मेरे नाम का भी दुरुपयोग किया है, मैंने उसके खिलाफ औपचारिक शिकायत दर्ज कराई है। साथ ही मैंने दिल्ली पुलिस से इस मामले की निष्पक्ष जांच करने का आग्रह किया है।”

अलग-अलग सोशल मीडिया मंचों पर स्वयं को हिंदुत्ववादी व्यक्ति बताने वाले भारद्वाज के इंस्टाग्राम पर लगभग 1.87 लाख और फेसबुक पर 3.26 लाख से अधिक फॉलोअर हैं। सोशल मीडिया पर खुद को “कट्टर हिंदू” के रूप में पेश करने वाला भारद्वाज असल में पटना का रहने वाला 21 वर्षीय छात्र है। भारद्वाज ने पटना के डॉन बॉस्को अकादमी से स्कूली शिक्षा पूरी की और 2022 में दिल्ली विश्वविद्यालय में दाखिला लिया। CJP के विरोध प्रदर्शनों के दौरान उसने लकड़ी के डंडे लेकर घूमते हुए अपने वीडियो पोस्ट किए थे। इनमें वह खुलेआम खुद को “असली गुंडा” बताता दिखाई दिया।

उसने आर्थिक आधार पर आरक्षण की मांग और विश्वविद्यालय अनुदान आयोग के ‘इक्विटी रेगुलेशंस, 2026’ को वापस लेने के अभियान के लिए ‘आर्थिक आरक्षण मोर्चा’ नाम से एक इंस्टाग्राम हैंडल भी शुरू किया था। इन नियमों पर सुप्रीम कोर्ट ने फिलहाल रोक लगा रखी है। इस अभियान को आजाद विनोद, मोहित और अंकित कुमार जैसे ‘सनातनी’ तथा हिंदुत्ववादी व्यक्तियों का समर्थन मिला। इन लोगों ने सेल्फी पोस्ट करके अभियान के प्रति अपना समर्थन जताया।

लेकिन पॉडकास्ट जारी होने के बाद स्वतंत्र भारद्वाज की सारी हेकड़ी निकल गई। उसका तीर उलटा उसे ही लग गया।


वीडियो में वह कहता सुनाई देता है,

“मैंने उसके पिता का सिर फोड़ दिया। आपको पता है कि ऐसे मामले में कौन-सी धारा लगती है। धारा 307, हाफ मर्डर की धारा लगती है। उसके सिर में सात टांके लगे थे। वह लगभग मरने वाला था और एम्बुलेंस में जा रहा था। उसकी बेटी पुलिस थाने के बाहर खड़ी होकर कह रही थी कि अगर उसके पिता को न्याय नहीं मिला, तो वह जहर खाकर अपनी जान दे देगी।”

वायरल पॉडकास्ट में भारद्वाज बार-बार भाजपा नेताओं के साथ अपनी नजदीकी का प्रदर्शन करता है। वह मानो इसी के जरिए यह बताने की कोशिश करता है कि उसके खिलाफ कोई कार्रवाई क्यों नहीं हुई।

वह कहता है,

“स्वतंत्र अगले ही दिन बाहर आ गया। मैं जेल भी नहीं गया। मैं पूरी रात घूम रहा था। पूरी दुनिया को यह बात पता चलनी चाहिए।”

वह आगे कहता है,

“कपिल मिश्रा मेरे बड़े भाई जैसे हैं। ये लोग यानी CJP वाले कह रहे हैं कि कपिल मिश्रा का फोन आया और मुझे छोड़ दिया गया। कपिल मिश्रा मेरे बड़े भाई हैं, चिराग पासवान मेरे बड़े भाई हैं—सभी मेरे बड़े भाई हैं। तुम बताओ, किस नेता को जानते हो? मोदी जी को जानते हो? मोदी जी भी मेरे बड़े भाई हैं। मेरे साथ सभी का समर्थन है।”

CJP प्रदर्शनकारियों पर इस्तेमाल किए गए डंडे कहां से मिले, यह पूछे जाने पर भारद्वाज अपने जूते की ओर इशारा करते हुए कहता है, “यह जूता दिल्ली पुलिस का है। हम दिल्ली पुलिस में शामिल होने के लिए फॉर्म नहीं भरते, हम अपने आप उसमें शामिल हो जाते हैं।”

नई दिल्ली के पुलिस उपायुक्त सचिन शर्मा ने पुष्टि की कि 23 जुलाई को भारद्वाज के खिलाफ शिकायत प्राप्त हुई थी।

भाजपा नेताओं के साथ तस्वीरें पोस्ट करने के अलावा भारद्वाज गौरक्षकों के साथ अपनी सामग्री अपलोड करता है और इजरायल के समर्थन में एआई से बनाए गए ग्राफिक्स भी साझा करता है।