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दिल्ली पीजी हादसे में 5 की मौत, मालिक फरार, कौन है जिम्मेदार?

TCN Desk TCN Desk | 2h ago · 6 min read
दिल्ली पीजी हादसे में 5 की मौत, मालिक फरार, कौन है जिम्मेदार?

पुलिस ने इमारत के मालिक हरिराम और अन्य लोगों के खिलाफ दक्षिण कैंपस थाने में गैर इरादतन हत्या, इमारत के रखरखाव में लापरवाही के आरोप में मामला दर्ज किया है।

दक्षिण दिल्ली के सत्या निकेतन इलाके में छात्रों के लिए पेइंग गेस्ट (PG) के रूप में इस्तेमाल की जा रही करीब 50 साल पुरानी पांच मंजिला इमारत रविवार दोपहर ढह गई। हादसे में पांच लोगों की मौत हो गई, जबकि करीब 15 से 20 लोगों के मलबे में फंसे होने की आशंका जताई गई। देर रात तक कई एजेंसियां राहत और बचाव अभियान में जुटी रहीं।


ऑल इंडिया इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेज (AIIMS) ट्रॉमा सेंटर के अनुसार, हादसे में घायल 10 लोगों को अस्पताल लाया गया।

AIIMS ने एक बयान में कहा,

चार लोगों को मृत अवस्था में अस्पताल लाया गया, जबकि गंभीर हालत में भर्ती एक अन्य मरीज ने बाद में इलाज के दौरान दम तोड़ दिया। तीन मरीज अस्पताल में भर्ती हैं और उनका इलाज चल रहा है। एक मरीज के पैर में सर्जरी की गई, जबकि मामूली चोट वाले एक अन्य मरीज को निगरानी के बाद छुट्टी दे दी गई।"

पुलिस ने इमारत के मालिक हरिराम और अन्य लोगों के खिलाफ दक्षिण कैंपस थाने में गैर इरादतन हत्या, इमारत के रखरखाव में लापरवाही और दूसरों की जान को खतरे में डालने के आरोप में मामला दर्ज किया है।

अधिकारियों के मुताबिक,

दिल्ली विश्वविद्यालय के साउथ कैंपस के पास सत्या निकेतन की एक संकरी गली में स्थित करीब 50 साल पुरानी पांच मंजिला इमारत रविवार दोपहर ढह गई। इमारत में छात्रों के लिए लड़कों का हॉस्टल संचालित हो रहा था। हादसे में कई लोग मलबे में दब गए।अब तक आठ लोगों को मलबे से बाहर निकाला जा चुका है। इनमें से एक को अस्पताल पहुंचने पर मृत घोषित कर दिया गया, जबकि एक अन्य की इलाज के दौरान मौत हो गई।

AIIMS के अनुसार, आठ घायलों में से तीन को मृत अवस्था में अस्पताल लाया गया था, जबकि एक की हालत बेहद गंभीर थी। रविवार रात गंभीर रूप से घायल व्यक्ति ने भी इलाज के दौरान दम तोड़ दिया, जिससे मृतकों की संख्या बढ़कर चार हो गई थी।

स्थानीय लोगों का दावा है कि इमारत के मलबे में अब भी करीब 40 से 50 लोग फंसे हो सकते हैं। इमारत में एक बेसमेंट और उसके ऊपर पांच मंजिलें थीं।

एक वरिष्ठ अधिकारी के मुताबिक,

हादसे के समय बेसमेंट में मरम्मत का काम चल रहा था। इसी दौरान दोपहर करीब 1:30 बजे इमारत ढह गई। इस इमारत का इस्तेमाल छात्रों के लिए PG के रूप में किया जा रहा था। स्थानीय लोगों का कहना है कि पिछले कई दिनों से हो रही बारिश के कारण बेसमेंट में पानी जमा हो गया था। उनके मुताबिक, पानी जमा होने से इमारत की नींव कमजोर हुई और अंततः पूरी संरचना ढह गई।

दिल्ली पुलिस, राष्ट्रीय आपदा मोचन बल (NDRF), दिल्ली अग्निशमन सेवा और दिल्ली आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (DDMA) की टीमें मौके पर पहुंचीं। दमकल की गाड़ियों और CATS एंबुलेंस की मदद से राहत एवं बचाव अभियान शुरू किया गया। यह इलाका बेहद संकरी और भीड़भाड़ वाली गलियों के लिए जाना जाता है, जहां बड़ी संख्या में खाने-पीने की दुकानें और छात्रों के लिए PG मौजूद हैं।


घनी आबादी वाली इमारतों और बड़ी संख्या में छात्रों की मौजूदगी के कारण यहां बचाव वाहनों के लिए घटनास्थल तक पहुंचना काफी मुश्किल रहा। स्थानीय लोगों के अनुसार, इस इलाके में रहने वाले अधिकांश छात्र केरल, हरियाणा और उत्तर प्रदेश से हैं और सामने स्थित दिल्ली विश्वविद्यालय के विभिन्न कॉलेजों में पढ़ते हैं। बचावकर्मियों के मलबा हटाने के दौरान स्थानीय लोग भी मदद के लिए आगे आए। उन्होंने अपने हाथों और उपलब्ध औजारों की मदद से मलबे में दबे लोगों की तलाश की।

हादसे की सूचना मिलने के बाद दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता, उपराज्यपाल तरनजीत सिंह संधू, पुलिस आयुक्त अनुराग कुमार और सांसद बांसुरी स्वराज मौके पर पहुंचे। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने हादसे में हुई मौतों पर दुख जताया। उन्होंने कहा कि उन्होंने मुख्यमंत्री, पुलिस आयुक्त और राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (NDMA) के महानिदेशक से बात कर मौके की स्थिति का जायजा लिया है।उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर लिखा कि घायलों को हर जरूरी चिकित्सा सहायता दी जा रही है और उन्होंने सभी घायलों के जल्द स्वस्थ होने की प्रार्थना की।

नई दिल्ली रेंज के संयुक्त पुलिस आयुक्त, दक्षिण-पश्चिम जिले के डीसीपी और अतिरिक्त डीसीपी बचाव अभियान की निगरानी कर रहे हैं। एक अधिकारी ने बताया कि,

इमारत को 'हॉस्टल डेज' के नाम से जाना जाता था और इसका मालिक गुरुग्राम में रहता है। पुलिस के अनुसार, इमारत करीब 50 साल पुरानी थी। FIR दर्ज करने की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है और इमारत के मालिक की तलाश के लिए सात से आठ पुलिस टीमें लगाई गई हैं।

दिल्ली पुलिस ने एक बयान में कहा, "फिलहाल मलबे में फंसे या घायल लोगों की सही संख्या का पता नहीं चल पाया है। जैसे-जैसे जानकारी की पुष्टि होगी, आगे की जानकारी साझा की जाएगी।"

स्थानीय निवासी राजेन छेत्री ने बताया कि,

इमारत में करीब 15 कमरे थे और प्रत्येक कमरे में दो से तीन छात्र रहते थे। यहां रहने वाले ज्यादातर छात्र केरल, हरियाणा और उत्तर प्रदेश से हैं। वे मुख्य रूप से मोतीलाल नेहरू कॉलेज, आत्मा राम सनातन धर्म कॉलेज और श्री वेंकटेश्वर कॉलेज में पढ़ते हैं। छात्र प्रति बेड करीब 12,000 रुपये किराया देते थे। मैं पिछले 20 वर्षों से यहां रह रहा हूं। बेसमेंट में कुछ निर्माण कार्य चल रहा था, जहां पानी जमा होने लगा था। इमारत की नींव भी बेहद कमजोर थी।"

एक प्रत्यक्षदर्शी ने कहा कि यदि यह हादसा कामकाजी दिन में हुआ होता तो स्थिति और भयावह हो सकती थी, क्योंकि सप्ताहांत होने के कारण कई छात्र अपने घर लौट गए थे। उस समय यहां बहुत कम छात्र मौजूद थे। दिल्ली में शुक्रवार से लगातार बारिश हो रही है। स्थानीय लोगों ने इलाके की अन्य इमारतों की हालत और उनके रखरखाव को लेकर भी चिंता जताई है। इस क्षेत्र में कई मकानों को PG में बदल दिया गया है।

पिछले दो दशकों से इलाके में रह रहीं प्रियंका ने कहा,

"यहां इमारतें पांच से छह मंजिल तक बनाई जा रही हैं। कई मकानों को लड़कों के PG में बदल दिया गया है। मालिक खुद कहीं और चले जाते हैं। वे सिर्फ इन संपत्तियों को PG का नाम देते हैं, ऑनलाइन किराया लेते हैं और इलाके में वापस आकर यह तक नहीं देखते कि वहां क्या स्थिति है।"

उन्होंने आगे कहा,

"मैंने यहां कभी कोई रखरखाव का काम होते नहीं देखा। बारिश हो रही थी, इसलिए ज्यादातर छात्र अपने कमरों के अंदर थे, जबकि कुछ सप्ताहांत होने के कारण घर चले गए थे।"

मौके पर पहुंचे बीजेपी विधायक अनिल शर्मा ने कहा, "हमें उन लोगों के फोन भी आ रहे हैं, जो अभी अंदर फंसे हुए हैं।पुलिस ने स्थानीय लोगों और मौके पर मौजूद लोगों से घटनास्थल से दूर रहने की अपील की है।बचाव अभियान के दौरान एंबुलेंस की आवाजाही सुचारु रखने के लिए अर्धसैनिक बलों को भी तैनात किया गया है।