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नई दिल्ली घोषणापत्र पर BRICS नेताओं की मुहर, एकतरफा युद्ध कार्रवाइयों का सभी ने किया विरोध

TCN Desk TCN Desk | 41m ago · 5 min read
नई दिल्ली घोषणापत्र पर BRICS नेताओं की मुहर, एकतरफा युद्ध कार्रवाइयों का सभी ने किया विरोध

पश्चिम एशिया में जारी सैन्य संघर्ष के बीच एकतरफा युद्ध कार्रवाइयों का सभी सदस्य देशों ने विरोध किया।

नई दिल्ली में आयोजित BRICS शिखर सम्मेलन के दौरान शनिवार को सदस्य देशों के नेताओं ने सर्वसम्मति से ‘नई दिल्ली घोषणापत्र’ को स्वीकार कर लिया। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भारत मंडपम में आयोजित सम्मेलन के दौरान इस साझा दस्तावेज को अपनाए जाने की घोषणा की।


घोषणापत्र में संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद समेत प्रमुख बहुपक्षीय संस्थाओं में व्यापक सुधार, आतंकवाद के खिलाफ कड़ी कार्रवाई और अंतरराष्ट्रीय विवादों के शांतिपूर्ण समाधान पर विशेष जोर दिया गया है।


घोषणापत्र में,

संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (UNSC) सहित बहुपक्षीय संस्थानों में व्यापक संरचनात्मक सुधार की मांग की गई है। इसमें आतंकवाद की कड़ी निंदा करते हुए पश्चिम एशिया में जारी सैन्य संघर्ष के बीच एकतरफा युद्ध कार्रवाइयों का विरोध किया गया। साथ ही समुद्री यात्रियों और व्यापारिक जहाजों की सुरक्षा सुनिश्चित करने पर जोर दिया गया।

नई दिल्ली घोषणापत्र में कहा गया है कि मौजूदा वैश्विक परिस्थितियों को देखते हुए बहुपक्षीय संस्थाओं की संरचना में बदलाव आवश्यक हो गया है। BRICS देशों ने संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में ‘संरचनात्मक बदलाव’ की आवश्यकता बताते हुए वैश्विक संस्थाओं में विकासशील देशों और ‘ग्लोबल साउथ’ की भागीदारी बढ़ाने की मांग की।

घोषणापत्र में आतंकवाद के सभी स्वरूपों और अभिव्यक्तियों की कड़े शब्दों में निंदा की गई। सदस्य देशों ने इस बात पर जोर दिया कि आतंकवाद से निपटने के लिए दोहरे मानदंड नहीं अपनाए जाने चाहिए और अंतरराष्ट्रीय समुदाय को इस चुनौती के खिलाफ मिलकर काम करना चाहिए। सम्मेलन में शामिल संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद के दो स्थायी सदस्यों—चीन और रूस—ने भारत और ब्राज़ील की संयुक्त राष्ट्र तथा सुरक्षा परिषद में बड़ी भूमिका निभाने की आकांक्षाओं का समर्थन दोहराया।

घोषणापत्र में कहा गया कि,

BRICS देशों के बीच व्यापार अमेरिकी डॉलर के बजाय स्थानीय मुद्राओं में बढ़ाया जाना चाहिए। इसके अलावा, संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में अफ्रीका, एशिया, लैटिन अमेरिका और कैरेबियाई क्षेत्र के विकासशील देशों को अधिक प्रतिनिधित्व देने की मांग भी की गई।

नई दिल्ली घोषणापत्र में BRICS ने अधिक प्रतिनिधित्व वाली, न्यायपूर्ण और समावेशी वैश्विक व्यवस्था के प्रति अपनी प्रतिबद्धता दोहराई। समूह ने मजबूत बहुपक्षवाद और वैश्विक फैसलों में उभरती एवं विकासशील अर्थव्यवस्थाओं की अधिक भागीदारी पर जोर दिया। ब्रिक्स ने संयुक्त राष्ट्र और उसकी सुरक्षा परिषद में सुधारों का समर्थन करते हुए कहा कि विकासशील देशों को अंतरराष्ट्रीय संस्थाओं में अधिक प्रभावी आवाज मिलनी चाहिए। चीन और रूस ने संयुक्त राष्ट्र तथा सुरक्षा परिषद में बड़ी भूमिका निभाने की भारत और ब्राजील की आकांक्षाओं का समर्थन दोहराया।

वैश्विक संघर्षों पर BRICS ने पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव को लेकर गहरी चिंता जताई। समूह ने सभी पक्षों से अधिकतम संयम बरतने, नागरिकों एवं नागरिक बुनियादी ढांचे की रक्षा करने और स्थायी शांति के लिए संवाद तथा कूटनीति का रास्ता अपनाने की अपील की। घोषणापत्र में वैश्विक व्यापार, आपूर्ति शृंखलाओं और ऊर्जा की निर्बाध उपलब्धता बनाए रखने पर भी जोर दिया गया।

गाजा के मुद्दे पर BRICS ने युद्धविराम का पालन करने, मानवीय सहायता की निर्बाध पहुंच सुनिश्चित करने और लोगों के जबरन विस्थापन को रोकने की मांग की। समूह ने दो-राष्ट्र समाधान और संयुक्त राष्ट्र में फलस्तीन की पूर्ण सदस्यता का समर्थन भी दोहराया।

घोषणापत्र में आतंकवाद के सभी रूपों की कड़ी निंदा की गई। ब्रिक्स ने विशेष रूप से 22 अप्रैल, 2025 को पहलगाम में हुए आतंकवादी हमले की निंदा की, जिसमें 26 लोगों की मौत हुई थी। समूह ने सीमा पार आतंकवाद, आतंकी वित्तपोषण और आतंकवादियों को मिलने वाले सुरक्षित ठिकानों के खिलाफ सख्त कार्रवाई का आह्वान किया। साथ ही आतंकवादी गतिविधियों में शामिल लोगों और उनके सहयोगी नेटवर्क को जवाबदेह ठहराने की मांग की गई।


आर्थिक मोर्चे पर ब्रिक्स ने सदस्य देशों के बीच सहयोग को और गहरा करने की प्रतिबद्धता दोहराई। समूह ने सीमा पार भुगतान के लिए विभिन्न पेमेंट और मैसेजिंग प्रणालियों के बीच तालमेल बढ़ाने तथा व्यापारिक भुगतान एवं निवेश में स्थानीय मुद्राओं का अधिक इस्तेमाल करने पर काम आगे बढ़ाने की बात कही।

BRICS ने सीमा पार भुगतान को अधिक तेज, सस्ता, सुलभ, पारदर्शी और सुरक्षित बनाने के प्रयासों का समर्थन किया। इसके साथ ही ‘ब्रिक्स आर्थिक साझेदारी 2030’ को आगे बढ़ाने पर भी सहमति जताई गई।


BRICS राष्ट्रों ने संयुक्त राष्ट्र सचिवालय और अन्य अंतरराष्ट्रीय संगठनों में समान एवं संतुलित भौगोलिक प्रतिनिधित्व की मांग की। समूह ने कहा कि विकासशील देशों को लगातार कम प्रतिनिधित्व मिलता रहा है, खासकर वरिष्ठ और निर्णय लेने वाले पदों पर।

घोषणापत्र में नेतृत्वकारी पदों पर महिलाओं, विशेषकर उभरते बाजारों और विकासशील देशों की महिलाओं की अधिक भागीदारी का आह्वान किया गया। BRICS ने कहा कि संयुक्त राष्ट्र के कार्यकारी प्रमुखों और वरिष्ठ अधिकारियों की नियुक्तियां संयुक्त राष्ट्र चार्टर के अनुच्छेद 101 के अनुरूप पारदर्शिता, समावेशिता और व्यापक भौगोलिक प्रतिनिधित्व के आधार पर होनी चाहिए।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा कि विभिन्न वैश्विक चुनौतियों से निपटने के लिए ग्लोबल साउथ को अब केवल नियमों का पालन करने वाला नहीं, बल्कि ‘नियम बनाने वाला’ बनना होगा।

शिखर सम्मेलन के उद्घाटन सत्र में प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि ब्रिक्स ने वैश्विक मंच पर अपनी अलग पहचान बनाई है और यह समूह किसी के खिलाफ नहीं है। उनके इस बयान को अमेरिका और अन्य पश्चिमी शक्तियों के लिए एक संदेश के रूप में देखा जा रहा है।


प्रधानमंत्री मोदी ने कहा,

आज ग्लोबल साउथ वैश्विक संकटों की पहली पंक्ति में खड़ा है, लेकिन फैसले लेने की प्रक्रिया में सबसे पीछे है। हमें ‘विशेषाधिकारों के पिरामिड’ को ‘साझेदारी के मंच’ में बदलना होगा—जहां हर देश की आवाज हो, प्रत्येक सदस्य की हिस्सेदारी हो और हर प्रयास के केंद्र में मानवता का विकास हो।इस दिशा में मेरा प्रस्ताव है कि हम वैश्विक शासन में सुधार के लिए संयुक्त रूप से 10 प्रस्ताव तैयार करें और अगले शिखर सम्मेलन तक उन्हें ब्रिक्स सुधार रोडमैप का रूप दें।”