ChatGPT से बनाया फर्जी PMO कार्ड, पीएम मोदी के मुंबई कार्यक्रम में ऐसे लगाई सेंध!
पारिख के खार स्थित आवास की तलाशी के दौरान PMO से जुड़े अंग्रेजी भाषा के कई जाली दस्तावेज बरामद हुए।
मुंबई के बांद्रा-कुर्ला कॉम्प्लेक्स (BKC) स्थित जियो वर्ल्ड प्लाजा में फर्जी प्रधानमंत्री कार्यालय (PMO) पहचान पत्र के जरिए प्रवेश करने के आरोप में गिरफ्तार 24 वर्षीय कारोबारी रोहन पारिख ने ChatGPT की मदद से जाली दस्तावेज तैयार करने की बात स्वीकार की है। गिरफ्तारी के पांच दिन बाद पुलिस अधिकारियों ने शुक्रवार को मजिस्ट्रेट अदालत में यह जानकारी दी।
यह घटना प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नजदीक स्थित नीता मुकेश अंबानी कल्चरल सेंटर में ‘ग्लोबल फिनटेक फेस्ट 2026’ का उद्घाटन करने से एक दिन पहले हुई थी। प्रधानमंत्री के कार्यक्रम को देखते हुए इलाके में सुरक्षा व्यवस्था पहले से कड़ी कर दी गई थी।
बता दें कि,
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के मुंबई स्थित बीकेसी के जियो वर्ल्ड प्लाजा के संभावित दौरे से एक दिन पहले पुलिस ने पारिख और उसके निजी सुरक्षाकर्मी को गिरफ्तार किया था। सुरक्षाकर्मी पूर्व सैन्यकर्मी है। दोनों पर पीएमओ से जुड़ा होने का दावा करते हुए परिसर में प्रवेश करने की कोशिश करने का आरोप है। उनके साथ मौजूद तीसरा व्यक्ति प्रथमेश बागुल मौके से फरार हो गया और अभी वांछित है।
पुलिस के अनुसार, पारिख ने 7 सितंबर को जियो वर्ल्ड प्लाजा के सुरक्षाकर्मियों को अपने मोबाइल फोन पर कथित पीएमओ पहचान पत्र दिखाया था। उसके रेडमी 5जी मोबाइल फोन से निकाले गए गूगल टेकआउट डेटा की जांच में पीएमओ का आधिकारिक पत्राचार तैयार करने से संबंधित सर्च मिलने का दावा किया गया है।
पुलिस की रिमांड अर्जी के मुताबिक,
पारिख ने स्वीकार किया कि वह वर्ष 2025 में ही ChatGPT की मदद से फर्जी PMO पहचान पत्र और उससे जुड़े आधिकारिक दस्तावेज तैयार किया था। पुलिस ने अदालत को बताया कि पारिख ने परिवार और सामाजिक दायरे में अपनी प्रतिष्ठा बढ़ाने, आत्मसम्मान मजबूत करने और लोगों को प्रभावित करने के उद्देश्य से ऐसा किया था। इस मामले में पारिख के साथ उसके सहयोगी और पूर्व सैन्यकर्मी 49 वर्षीय दिलीप कुंडे को भी गिरफ्तार किया गया है। जांच अधिकारी अब यह पता लगाने की कोशिश कर रहे हैं कि क्या इन जाली दस्तावेजों का इस्तेमाल किसी अन्य स्थान पर प्रवेश पाने या विशेष सुविधाएं हासिल करने के लिए भी किया गया था।
पुलिस के अनुसार,
पारिख के खार स्थित आवास की तलाशी के दौरान PMO से जुड़े अंग्रेजी भाषा के कई जाली दस्तावेज बरामद हुए। जांचकर्ताओं ने उसका मोबाइल फोन भी खंगाला, जिसमें प्रधानमंत्री कार्यालय से जुड़े पत्राचार का मसौदा तैयार करने संबंधी कई सर्च मिले। पुलिस ने अदालत को बताया कि जब्त किए गए मोबाइल फोन, लैपटॉप और अन्य इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों की विस्तृत फॉरेंसिक जांच की जा रही है।
यह मामला 7 सितंबर को सामने आया। उस दिन शाम करीब 4 बजकर 50 मिनट पर पारिख, कुंडे और एक अन्य व्यक्ति के साथ जियो वर्ल्ड प्लाजा पहुंचा था। उनका तीसरा साथी फिलहाल फरार बताया जा रहा है। मॉल के सुरक्षाकर्मियों ने कुंडे के पास रिवॉल्वर देखकर समूह को रोक लिया। इसके बाद सुरक्षाकर्मियों और आरोपियों के बीच बहस शुरू हो गई।
पुलिस के मुताबिक,
बहस के दौरान पारिख ने खुद को प्रधानमंत्री कार्यालय का अधिकारी बताया और मोबाइल फोन पर एक डिजिटल पहचान पत्र दिखाया। जांच करने पर यह पहचान पत्र फर्जी पाया गया। विवाद के बावजूद तीनों व्यक्ति थोड़ी देर के लिए मॉल में प्रवेश करने में सफल रहे। वहां उन्होंने एक परफ्यूम और एक वॉलेट खरीदा, जिसके बाद वे परिसर से बाहर निकल गए।
पुलिस ने मॉल में लगे CCTV कैमरों की रिकॉर्डिंग और आरोपियों द्वारा इस्तेमाल किए गए वाहन के विवरण की मदद से पारिख का पता लगाया। इसके बाद उसे खार से गिरफ्तार कर लिया गया, जबकि कुंडे को अलग से पकड़ा गया। कुंडे ने जांच अधिकारियों को बताया कि उसके पास मिली रिवॉल्वर उसका निजी हथियार था और वह पारिख के अंगरक्षक के रूप में काम करते समय व्यावसायिक तौर पर उसका इस्तेमाल करता था।
पुलिस ने अदालत को बताया कि,
हथियार का लाइसेंस नासिक ग्रामीण क्षेत्र के लिए जारी किया गया था। हालांकि, अधिकारियों ने स्पष्ट किया कि घटना का प्रधानमंत्री मोदी के कार्यक्रम से कोई सीधा संबंध सामने नहीं आया है। कार्यक्रम स्थल के नजदीक होने और घटना के समय के कारण शुरुआत में सुरक्षा संबंधी गंभीर आशंका पैदा हुई थी।
बचाव पक्ष ने अदालत को बताया क,
वर्ष 2024 में तरुण गुप्ता या तरुण कपूर नाम का इस्तेमाल करने वाले एक व्यक्ति ने पारिख से संपर्क किया था। उस व्यक्ति ने उसे रक्षा नीति से जुड़े सलाहकार पद की पेशकश की थी। बचाव पक्ष के मुताबिक, उस व्यक्ति ने पारिख को एक नियुक्ति प्रस्ताव पत्र, डिजिटल पहचान पत्र और प्रधानमंत्री के कथित हस्ताक्षर वाला पत्राचार भी भेजा था। हालांकि, जांच अधिकारियों ने कहा कि उन्हें अब तक ऐसी किसी नियुक्ति या कथित आधिकारिक बातचीत के समर्थन में कोई प्रमाण नहीं मिला है। पुलिस यह जांच कर रही है कि पारिख का यह दावा सही है या उसने जाली दस्तावेज बनाने अथवा अपने पास रखने की असली वजह छिपाने के लिए यह कहानी गढ़ी है।
खार निवासी पारिख पेशे से शेयर ब्रोकर है। उसने लंदन में पढ़ाई की है और उसकी शैक्षणिक पृष्ठभूमि गणित तथा विज्ञान से जुड़ी बताई गई है। पुलिस ने पहले यह भी कहा था कि वह ड्रोन तकनीक में पारिख की रुचि की जांच कर रही है, ताकि यह पता लगाया जा सके कि उसका इस मामले से कोई संबंध है या नहीं। शुक्रवार को पुलिस ने पारिख और कुंडे की हिरासत बढ़ाने की मांग की। पुलिस ने दलील दी कि जब्त इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों की जांच, जाली दस्तावेजों के अन्य स्थानों पर संभावित इस्तेमाल का पता लगाने और फरार आरोपी को पकड़ने के लिए दोनों से आगे की पूछताछ जरूरी है।
दोनों आरोपियों के वकील सतीश मानेशिंदे ने पुलिस की मांग का विरोध किया। उन्होंने कहा कि आरोपी दस्तावेज स्वयं तैयार करने की बात पहले ही स्वीकार कर चुके हैं और उनके फोन, लैपटॉप तथा अन्य सामग्री भी जब्त की जा चुकी है। अदालत ने माना कि पुलिस द्वारा बताए गए आधार आगे की हिरासत के लिए पर्याप्त नहीं हैं। इसके बाद पारिख और कुंडे को 14 दिन की न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया।