यमन के पेरिम द्वीप पर हूथियों का कब्जा, बाब अल-मंदेब पर बढ़ा खतरा
यमन में ईरान समर्थित हूथी विद्रोहियों ने रणनीतिक पेरिम द्वीप पर कब्जा कर लिया है।
यमन में ईरान समर्थित हूथी विद्रोहियों ने रणनीतिक पेरिम द्वीप पर कब्जा कर लिया है। इससे बाब अल-मंदेब स्ट्रेट को लेकर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर चिंता बढ़ गई है। एक दिन पहले हूथियों ने महत्वपूर्ण बंदरगाह शहर मोचा पर भी नियंत्रण हासिल करने का दावा किया था। Red Sea के इस इलाके में हूथियों की बढ़ती पकड़ का असर वैश्विक समुद्री व्यापार, तेल की कीमतों और अमेरिका-ईरान संघर्ष पर पड़ सकता है।
यमनी सरकार से जुड़े दो अधिकारियों ने शुक्रवार को CNN को बताया कि ईरान समर्थित हूथी विद्रोहियों ने रणनीतिक पेरिम द्वीप पर कब्जा कर लिया है। यह द्वीप बाब अल-मंदेब स्ट्रेट के बेहद करीब स्थित है और इसकी भौगोलिक स्थिति इसे सैन्य तथा व्यापारिक दृष्टि से बेहद महत्वपूर्ण बनाती है।
हूथी विद्रोहियों ने इससे एक दिन पहले Red Sea के किनारे स्थित मोचा बंदरगाह शहर पर भी कब्जा करने का दावा किया था। इसके बाद आशंका बढ़ गई है कि हूथी यमन के पश्चिमी तट के बड़े हिस्से पर अपना नियंत्रण स्थापित करने की कोशिश कर रहे हैं।
बता दें कि,
बाब अल-मंदेब स्ट्रेट दुनिया के प्रमुख समुद्री मार्गों में शामिल है। यह Red Sea को अदन की खाड़ी से जोड़ता है और इसके जरिए एशिया तथा यूरोप के बीच बड़े पैमाने पर माल की आवाजाही होती है। यह मार्ग स्वेज नहर से जुड़ा हुआ है। ऐसे में बाब अल-मंदेब में किसी भी तरह की बड़ी बाधा का असर केवल यमन या मध्य पूर्व तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि वैश्विक सप्लाई चेन पर भी पड़ सकता है।
हालांकि तेल व्यापार के लिहाज से बाब अल-मंदेब, हॉर्मुज जितना महत्वपूर्ण नहीं है, लेकिन यहां से हर दिन बड़ी मात्रा में तेल और अन्य जरूरी सामान की आवाजाही होती है।
ईरान और अमेरिका के बीच जारी युद्ध के बीच बाब अल-मंदेब की रणनीतिक अहमियत और बढ़ गई है। हॉर्मुज में जहाजों की आवाजाही प्रभावित होने के बाद सऊदी अरब अपने Red Sea वाले निर्यात मार्ग पर अधिक निर्भर हो रहा है। ऐसे में यदि हूथी बाब अल-मंदेब पर अपना प्रभाव और बढ़ाते हैं, तो सऊदी अरब के लिए Red Sea के रास्ते तेल और ईंधन की आपूर्ति बनाए रखना चुनौतीपूर्ण हो सकता है।
इसका सीधा असर अंतरराष्ट्रीय तेल बाजार पर पड़ने की आशंका है। गुरुवार को हूथियों के Red Sea वाले क्षेत्र में बढ़ते प्रभाव की खबरों के बाद ब्रेंट क्रूड की कीमत करीब 4 फीसदी बढ़कर 105 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गई थी। हालांकि शुक्रवार को इसमें करीब 3 फीसदी की गिरावट दर्ज की गई।
हूथियों ने पिछले महीने मोचा बंदरगाह पर कब्जा करने के लिए अपना अभियान तेज किया था।
कुछ सप्ताह पहले हूथियों ने बंदरगाह पर 25 से ज्यादा रॉकेट दागे थे। उस समय वहां व्यावसायिक जहाजों से सामान उतारा जा रहा था।
गुरुवार सुबह तक मोचा पर नेशनल रेजिस्टेंस फोर्सेज का नियंत्रण था। यह सऊदी अरब समर्थित संगठन है, जिसकी कमान यमन सरकार के उपराष्ट्रपति तारिक सालेह के पास है।
बाद में हूथियों ने मोचा पर कब्जे का दावा किया और इसके बाद उनके दूसरे तटीय इलाकों की ओर बढ़ने की खबरें सामने आईं।
इस बीच सऊदी क्राउन प्रिंस मोहम्मद बिन सलमान ने गुरुवार को अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप से दो बार फोन पर बातचीत की। मामले से परिचित सूत्रों के मुताबिक, सऊदी नेतृत्व ने अमेरिका से हूथियों के खिलाफ सैन्य कार्रवाई करने का आग्रह किया। हालांकि, एक सूत्र ने बताया कि ट्रंप ने फिलहाल अमेरिकी हमले के लिए सहमति नहीं दी है।
अमेरिका पहले ही यमन में सऊदी अभियान को खुफिया जानकारी और सैन्य लक्ष्य तय करने से जुड़ी सहायता दे रहा है। हालांकि अमेरिकी सेना सीधे हमलों में शामिल नहीं है और न ही सऊदी विमानों को ईंधन भरने या अन्य प्रत्यक्ष सैन्य अभियान में सहायता कर रही है।
इंटरनेशनल क्राइसिस ग्रुप के यमन मामलों के वरिष्ठ विश्लेषक अहमद नागी के मुताबिक,
Red Sea के किनारे रणनीतिक इलाकों पर कब्जा करने से हूतियों को दो बड़े फायदे हो सकते हैं।
पहला, इससे उन्हें बाब अल-मंदेब के आसपास अपना प्रभाव बढ़ाने का मौका मिलेगा। दूसरा, इस इलाके पर नियंत्रण से वे संभावित जमीनी सैन्य अभियान से खुद को बेहतर तरीके से सुरक्षित कर सकते हैं।
पेरिम द्वीप और मोचा पर नियंत्रण हूथियों को Red Sea में अपनी स्थिति मजबूत करने और यमन के पश्चिमी तट के अधिक हिस्से पर दबाव बढ़ाने में मदद कर सकता है।
हूथियों के बढ़ते प्रभाव ने वैश्विक समुद्री व्यापार को लेकर चिंता बढ़ा दी है। यदि बाब अल-मंदेब से जहाजों की आवाजाही बाधित होती है, तो एशिया और यूरोप के बीच माल पहुंचाने में देरी और लागत बढ़ सकती है।
हालांकि हूथी अधिकारियों ने अंतरराष्ट्रीय समुद्री यातायात को लेकर चिंता खारिज की है। समूह का कहना है कि उसका निशाना केवल सऊदी जहाज हैं। इसके बावजूद विशेषज्ञों का मानना है कि स्थिति तेजी से बदल सकती है। यदि बाब अल-मंदेब प्रभावी रूप से बंद होता है, तो अमेरिका को सैन्य हस्तक्षेप करना पड़ सकता है। इससे ईरान के साथ चल रहे संघर्ष का एक नया मोर्चा खुल सकता है और अमेरिकी सैन्य संसाधनों पर अतिरिक्त दबाव पड़ेगा।
यमन पहले से ही दुनिया के सबसे गंभीर मानवीय संकटों में शामिल है। लंबे समय से जारी संघर्ष के बीच हूथियों और सऊदी समर्थित बलों के बीच दोबारा तेज हुई लड़ाई आम नागरिकों की मुश्किलें बढ़ा सकती है।
फिलहाल सबसे बड़ा सवाल यह है कि सऊदी नेतृत्व वाला गठबंधन हूथियों के बढ़ते कब्जे का किस तरह जवाब देता है। विशेषज्ञों के मुताबिक, पेरिम और मोचा पर कब्जा लड़ाई का अंत नहीं है। आने वाले दिनों में Red Sea के आसपास सैन्य और राजनीतिक स्थिति में और बदलाव देखने को मिल सकते हैं।