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बांग्लादेश के पीएम तारिक रहमान ने BRICS सम्मेलन में आने से किया इनकार

TCN Desk TCN Desk | 1h ago · 7 min read
बांग्लादेश के पीएम तारिक रहमान ने BRICS सम्मेलन में आने से किया इनकार

बांग्लादेश के प्रधानमंत्री तारिक रहमान दिल्ली में होने वाले BRICS शिखर सम्मेलन में शामिल नहीं हो सकते हैं।

बांग्लादेश के प्रधानमंत्री तारिक रहमान दिल्ली में होने वाले BRICS शिखर सम्मेलन में शामिल नहीं हो सकते हैं। बांग्लादेश के विदेशी मामलों के राज्य मंत्री हुमायूं कबीर ने कहा है कि प्रधानमंत्री तारिक रहमान को सम्मेलन का निमंत्रण नहीं मिला है। उनके मुताबिक, यह आमंत्रण BIMSTEC के मौजूदा अध्यक्ष को भेजा गया है।


बांग्लादेशी अखबार The Daily Star के अनुसार, कबीर ने कहा,

हम कैसे जाएंगे? क्या बांग्लादेश सरकार के किसी व्यक्ति को आमंत्रित किया गया है? हमारे प्रधानमंत्री को निमंत्रण नहीं मिला। आपसे किसने कहा कि प्रधानमंत्री को बुलाया गया है? निमंत्रण BIMSTEC अध्यक्ष को दिया गया है।

हालांकि, समाचार एजेंसी PTI के मुताबिक BRICS की मेजबानी कर रहे भारत ने तारिक रहमान को BIMSTEC के वर्तमान अध्यक्ष की हैसियत से सम्मेलन के आउटरीच सत्र में शामिल होने के लिए आमंत्रित किया है। BIMSTEC में भारत, श्रीलंका, थाईलैंड, बांग्लादेश, म्यांमार, नेपाल और भूटान शामिल हैं।

कबीर ने यह भी कहा कि,

बांग्लादेश सरकार अनुकूल समय पर प्रधानमंत्री की द्विपक्षीय भारत यात्रा की व्यवस्था करने पर काम कर रही है। रहमान के 23 अगस्त से तीन दिवसीय आधिकारिक यात्रा पर भारत आने की संभावना थी, लेकिन यह दौरा स्थगित कर दिया गया। इसके स्थगित होने के कारण और उसके बाद के घटनाक्रम भारत-बांग्लादेश संबंधों की मौजूदा स्थिति को दर्शाते हैं।

इससे पहले मंगलवार को भारतीय विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने नई दिल्ली में कहा था कि BRICS सम्मेलन में बांग्लादेशी प्रधानमंत्री की भागीदारी को लेकर ढाका की ओर से पुष्टि पर साझा करने के लिए फिलहाल कोई नई जानकारी नहीं है।

बांग्लादेश की ओर से प्रधानमंत्री को आमंत्रित नहीं किए जाने संबंधी बयान ऐसे समय आया है, जब भारत और बांग्लादेश के रिश्तों में तनाव बना हुआ है। यह तनाव पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना को भारत में राजनीतिक शरण दिए जाने के नई दिल्ली के फैसले के बाद बढ़ा है। अगस्त 2024 में युवाओं के नेतृत्व वाले आंदोलन के बाद सत्ता से हटने पर हसीना भारत आ गई थीं।

BRICS शिखर सम्मेलन 12 और 13 सितंबर को नई दिल्ली के भारत मंडपम में आयोजित होगा। भारत की मेजबानी में होने वाले इस सम्मेलन में रूस और ईरान के राष्ट्रपतियों समेत कई नेता शामिल होंगे। इस वर्ष सम्मेलन का आधिकारिक विषय “Building for Resilience, Innovation, Cooperation and Sustainability” है। BRICS में शुरुआत में ब्राजील, रूस, भारत, चीन और दक्षिण अफ्रीका शामिल थे। वर्ष 2024 में मिस्र, इथियोपिया, ईरान और संयुक्त अरब अमीरात को इसमें जोड़ा गया, जबकि इंडोनेशिया 2025 में संगठन का सदस्य बना।

गौरतलब है कि BRICS शिखर सम्मेलन से पहले अगस्त के महीने में बांग्लादेश के पीएम तारिक रहमान के भारत दौरे को लेकर लगभग पूरी तैयारी हो चुकी थी, लेकिन 21 अगस्त को अचानक कार्यक्रम रद्द कर दिया गया।

21 अगस्त,2026 शुक्रवार को एक असामान्य घटनाक्रम में राष्ट्रपति भवन ने बांग्लादेश के प्रधानमंत्री तारिक रहमान की प्रस्तावित नई दिल्ली यात्रा से जुड़ी अपनी आधिकारिक प्रेस विज्ञप्ति जारी करने के एक घंटे से भी कम समय में वापस ले ली थी।

Indian Express की एक रिपोर्ट के अनुसार,

21 अगस्त 2026 को राष्ट्रपति भवन की ओर से जारी विज्ञप्ति में कहा गया था कि बांग्लादेश के प्रधानमंत्री तारिक रहमान के औपचारिक स्वागत की फुल ड्रेस रिहर्सल के कारण शनिवार का ‘चेंज ऑफ गार्ड’ समारोह रद्द रहेगा। लेकिन कुछ ही देर बाद इस विज्ञप्ति को वापस ले लिया गया था। इससे इस हाई-प्रोफाइल यात्रा को लेकर स्थिति और ज्यादा उलझ गई थी।

यह घटनाक्रम 12-13 सितंबर को होने वाले BRICS शिखर सम्मेलन से पहले नई दिल्ली और ढाका के बीच जारी कूटनीतिक तनाव को भी उजागर करता है। हाल के दिनों में दोनों देशों के संबंधों में तनाव बढ़ा है, जिसकी एक प्रमुख वजह बांग्लादेश की ओर से अपदस्थ पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना के प्रत्यर्पण की मांग है।

21 अगस्त यानी शुक्रवार दोपहर करीब 2 बजे राष्ट्रपति भवन की ओर से जारी प्रेस विज्ञप्ति में कहा गया था कि,

शनिवार यानी 22 अगस्त को होने वाली ‘चेंज ऑफ गार्ड’ सेरेमनी नहीं होगी, क्योंकि बांग्लादेश के प्रधानमंत्री के औपचारिक स्वागत से पहले फुल ड्रेस रिहर्सल की जानी है।

इससे पहले ‘इस शनिवार 22 अगस्त को चेंज ऑफ गार्ड समारोह नहीं होगा’ शीर्षक वाली विज्ञप्ति में कहा गया था, “राष्ट्रपति भवन के प्रांगण में होने वाला चेंज ऑफ गार्ड समारोह इस शनिवार (22 अगस्त, 2026) को नहीं होगा, क्योंकि बांग्लादेश के प्रधानमंत्री के औपचारिक स्वागत के लिए फुल ड्रेस रिहर्सल की जाएगी।” हालांकि, इस हाई-प्रोफाइल यात्रा की आधिकारिक घोषणा तब तक न तो नई दिल्ली और न ही ढाका की ओर से की गई थी। इसके बाद राष्ट्रपति भवन ने विज्ञप्ति वापस ले ली। करीब 3 बजे राष्ट्रपति कार्यालय की ओर से जारी नए बयान में कहा गया,

21 अगस्त, 2026 को ‘इस शनिवार चेंज ऑफ गार्ड समारोह नहीं होगा’ विषय पर जारी प्रेस विज्ञप्ति वापस ली जाती है।

भारत की राजकीय यात्रा पर आने वाले राष्ट्राध्यक्षों और अन्य विदेशी गणमान्य व्यक्तियों के लिए राष्ट्रपति भवन में औपचारिक स्वागत समारोह आयोजित किया जाता है। यह भारत की एक महत्वपूर्ण सैन्य और कूटनीतिक परंपरा है। राष्ट्रपति भवन के प्रांगण में होने वाले इस समारोह में तीनों सेनाओं की ओर से औपचारिक ‘गार्ड ऑफ ऑनर’, दोनों देशों के राष्ट्रगान और भारत के राष्ट्रपति तथा प्रधानमंत्री से औपचारिक परिचय शामिल होता है। इस समारोह से एक दिन पहले फुल ड्रेस रिहर्सल की जाती है। बाद में राष्ट्रपति की ओर से अतिथि नेता के सम्मान में रात्रिभोज भी आयोजित किया जाता है।

मंगलवार को भारतीय उच्चायुक्त दिनेश त्रिवेदी ने ढाका में बांग्लादेशी कारोबारी नेताओं और भारत से आए एक प्रतिनिधिमंडल के लिए आयोजित स्वागत समारोह के दौरान दोनों देशों के बीच जारी तनाव को कम करने की कोशिश की थी। कार्यक्रम के दौरान उन्होंने बताया था कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी चाहते हैं कि रहमान की यात्रा “यादगार” बने। त्रिवेदी ने कहा था, प्रधानमंत्री मोदी ने बस एक बात कही—हमें मिलना चाहिए।”

हालांकि, ढाका के कूटनीतिक गलियारों से मिल रहे संकेत अब भी सतर्कता भरे थे। गुरुवार को सरकारी समाचार एजेंसी BSS को दिए एक इंटरव्यू में बांग्लादेश के विदेश मामलों के सलाहकार हुमायूं कबीर ने कहा था कि,

रहमान की शिखर सम्मेलन के लिए भारत यात्रा की संभावना तब तक “कम” है, जब तक “आपसी विश्वास” का माहौल नहीं बनता और नई दिल्ली की ओर से “सम्मानजनक निमंत्रण” नहीं मिलता।

रहमान सरकार भारत-विरोधी नीति पर नहीं चल रही है और वह नई दिल्ली के साथ स्थिर तथा मैत्रीपूर्ण संबंध चाहती है। हालांकि, उनका कहना है कि नई सरकार ऐसा कोई संदेश भी नहीं देना चाहती कि वह बांग्लादेश की राष्ट्रीय गरिमा और संप्रभुता से समझौता कर रही है।

बांग्लादेश मामलों के जानकार के अनुसार,

इस सरकार का संदेश भारत-विरोधी नहीं है, जैसा कि यूनुस के नेतृत्व वाली पिछली अंतरिम सरकार के दौरान था। न ही इस सरकार ने भारत-विरोधी बयानबाजी की है। इसके बावजूद भारत का रवैया अब भी वैसा ही है, जैसा पिछली सरकार के समय था।

बांग्लादेशी नागरिकों के लिए भारत द्वारा पर्यटक वीजा बहाल करने में हुई देरी का भी जिक्र किया जा रहा है। रहमान सरकार ने इस साल फरवरी में शपथ ली थी,

लेकिन जून के अंत तक पर्यटक वीजा निलंबित रहे। जब इन्हें दोबारा शुरू किया गया, तब भी पहले की तरह लंबी अवधि वाले वीजा जारी नहीं किए गए। ढाका के लिए अब यह मुद्दा केवल दोनों सरकारों के आपसी संबंधों तक सीमित नहीं है, बल्कि जनता के बीच बन रही धारणा का भी है।

एक जानकार ने कहा, “सत्तारूढ़ बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी (BNP) से ज्यादा आम जनता के बीच यह धारणा है कि भारत केवल दिखावे के लिए बातें कर रहा है और ‘बांग्लादेश 2.0’ के साथ संबंध स्थापित करने को लेकर गंभीर नहीं है।

रहमान भी जनता की इस भावना के खिलाफ जाते हुए नहीं दिखना चाहेंगे। उनके समर्थक उन्हें “जनतार पीएम” यानी “जनता का प्रधानमंत्री” कहते हैं। ऐसे में वह नई दिल्ली की ओर से बदले में कोई ठोस कदम उठाए बिना भारत के सामने रियायत देते हुए नहीं दिख सकते।