वेस्ट बैंक से फिलिस्तीनियों को खत्म करने की साजिश रच रहा इजराइल, B’Tselem की नई रिपोर्ट में हुआ बड़ा खुलासा
यह रिपोर्ट लगभग 2,000 फिलिस्तीनियों की गवाहियों के आधार पर तैयार की गई है।
किसी भी सप्ताह कब्जे वाले वेस्ट बैंक में फिलिस्तीनियों को इजरायली हिंसा और दमन की दर्जनों ऐसी घटनाओं का सामना करना पड़ता है, जो पहली नजर में एक-दूसरे से अलग दिखाई देती हैं, लेकिन ये दरअसल में इजरायल की ओर से फिलिस्तीनियों को उनकी जमीन से बेदखल करने के लिए चलाए जा रहे सुनियोजित साजिश का एक हिस्सा है।
सितंबर की शुरुआत में इजरायली सैनिकों ने रामल्लाह के पूर्व में स्थित अल-मुघय्यिर में सैन्य छापेमारी के दौरान दो किशोरों की हत्या कर दी। इसके कुछ दिनों बाद मसाफेर यट्टा के खिरबेत अल-तब्बान में इजरायली सैनिकों ने सभी मकानों को ध्वस्त कर दिया। इससे लगभग 70 लोग बेघर हो गए, जिनमें 30 बच्चे भी शामिल थे। नाब्लुस के दक्षिण में स्थित कुसरा में इजरायली बसने वालों ने तीन परिवारों को एक महीने से अधिक समय से उनके घरों के भीतर घेर कर रखा है। उनके घरों की बिजली और पानी की आपूर्ति भी काट दी गई है।
इजरायली मानवाधिकार संगठन B’Tselem ने सोमवार को प्रकाशित अपनी नई रिपोर्ट The Elimination Project में कहा कि ये अलग-अलग घटनाएं नहीं हैं। संगठन के अनुसार, ये सभी कार्रवाइयां मिलकर एक ही उद्देश्य को पूरा करती हैं—
फिलिस्तीनियों के लिए अपनी जमीन पर जीवन को असंभव बनाना और उसकी जगह स्थायी इजरायली नियंत्रण स्थापित करना।
B’Tselem ने कहा कि वेस्ट बैंक की मौजूदा स्थिति “न तो कोई अस्थायी संकट है और न ही मानवाधिकार उल्लंघनों की अचानक हुई अलग-अलग घटनाओं का समूह।”
रिपोर्ट में कहा गया है कि,
यह “इजरायली नस्लभेदी व्यवस्था के भीतर चल रही फिलिस्तीनियों के खात्मे की परियोजना का एक हिस्सा है। यह परियोजना उनकी जमीन छीनने, उन्हें विस्थापित करने और वहां यहूदी-इजरायली संप्रभुता स्थापित करने की सेटलर-औपनिवेशिक सोच से प्रेरित है।” इस रिपोर्ट का नाम The Elimination Project यानी ‘उन्मूलन परियोजना’ रखा गया है।
लगभग 2,000 फिलिस्तीनियों की गवाहियों के आधार पर तैयार की गई इस रिपोर्ट में कहा गया है कि इजरायल द्वारा किए जा रहे अलग-अलग दिखाई देने वाली कार्रवाई असल में “उन्मूलन की एक व्यापक परियोजना” का हिस्सा हैं।
B’Tselem ने ‘उन्मूलन’ से फिलिस्तीनी समाज को योजनाबद्ध तरीके से बेदखल करने की प्रक्रिया का उल्लेख किया है। इसमें फिलिस्तीनी संस्थानों और अर्थव्यवस्था को कमजोर करना, लोगों की आवाजाही की स्वतंत्रता छीनना और उनके सामाजिक जीवन को नष्ट करना शामिल है।
रिपोर्ट ने इस प्रक्रिया को “सेटलर उपनिवेशवाद के बुनियादी तर्क” से जोड़ा है। इसका उद्देश्य एक ऐसे क्षेत्र पर “बसने वालों की स्थायी संप्रभुता” स्थापित करना है, जहां पहले से मूल निवासी रहते हैं। इसके लिए मूल निवासियों को उनकी जमीन से बाहर निकालना, उनकी संपत्ति छीनना और उनके सामूहिक अस्तित्व को खत्म करना शामिल है।
रिपोर्ट में ऐसे पांच मोर्चों की पहचान की गई है, जिनके माध्यम से यह प्रक्रिया संचालित होती है—
- हिंसा और धमकी
- आवाजाही पर प्रतिबंध
- आर्थिक रूप से कमजोर करना
- सामाजिक और राजनीतिक व्यवस्था को नष्ट करना
- जातीय सफाया और क्षेत्रीय कब्जा
B’Tselem ने इस सोच को 2017 में Bezalel Smotrich द्वारा तैयार की गई ‘डिसाइसिव प्लान’ से भी जोड़ा है। Smotrich इस समय इजरायल के वित्त मंत्री हैं।
B’Tselem के अनुसार,
इस योजना में फिलिस्तीनियों के सामने तीन विकल्प रखे गए थे—अपनी राष्ट्रीय आकांक्षाओं को छोड़कर यहूदी वर्चस्व स्वीकार करें, अपनी जमीन छोड़कर चले जाएं या हिंसक दमन का सामना करें। रिपोर्ट में कहा गया है कि इनमें से कुछ भी नया नहीं है। यह व्यवस्था दशकों से काम कर रही है। हालांकि, अब यह पहले की तुलना में कहीं ज्यादा गंभीर और खुली हो गई है।
साल 2022 के अंत में मौजूदा कट्टर-दक्षिणपंथी इजरायली सरकार के सत्ता में आने के बाद इस प्रक्रिया में तेजी आई। अक्टूबर 2023 में गाजा पट्टी में फिलिस्तीनियों के खिलाफ युद्ध शुरू होने के बाद स्थिति और गंभीर हो गई। रिपोर्ट ने इस युद्ध को “नरसंहारकारी युद्ध” बताया है।
वेस्ट बैंक और कब्जे वाले पूर्वी यरुशलम में रहने वाले लगभग 35 लाख फिलिस्तीनियों के दैनिक जीवन का दायरा लगातार सीमित होता जा रहा है। वे कई सड़कों का इस्तेमाल नहीं कर सकते, अपनी जमीन तक नहीं पहुंच सकते और उनके लिए सुरक्षित रूप से रहने, काम करने तथा आने-जाने की जगहें लगातार कम हो रही हैं।
दिसंबर 2025 तक इजरायल ने वेस्ट बैंक में आवाजाही रोकने वाली कम-से-कम 925 भौतिक बाधाएं स्थापित कर दी थीं। संयुक्त राष्ट्र द्वारा पिछले दो दशकों में दर्ज की गई यह सबसे बड़ी संख्या थी।
हेब्रोन के दक्षिण में स्थित दुरा के रहने वाले यूसुफ काशुर छह बच्चों के पिता और पेशे से ड्राइवर हैं। उन्होंने B’Tselem को बताया कि गेट और चेकपोस्ट के बढ़ते नेटवर्क ने उनके काम को “यातना” में बदल दिया है। उन्हें लंबे और खतरनाक वैकल्पिक रास्तों से होकर जाना पड़ता है। इसके कारण उन्हें उन यात्रियों की बुकिंग भी ठुकरानी पड़ रही है, जिनसे होने वाली आमदनी पर वह पहले निर्भर थे।
काशुर ने कहा,
ये यात्राएं बहुत थका देने वाली हैं, इनमें काफी समय लगता है और ईंधन का खर्च इतना अधिक है कि मैं अपने परिवार की जरूरतों को पूरा करने लायक कमाई भी नहीं कर पाता।”
इन प्रतिबंधों के कारण व्यापक स्तर पर आर्थिक संकट पैदा हो गया है। कब्जे की व्यवस्था फिलिस्तीनी क्षेत्रों की सीमाओं, व्यापार और राजस्व को नियंत्रित करती है। इसलिए वेस्ट बैंक की अर्थव्यवस्था के पास स्वतंत्र रूप से आगे बढ़ने की बहुत कम गुंजाइश बची है।
पिछले वर्ष के अंत तक वेस्ट बैंक में बेरोजगारी की दर बढ़कर लगभग 27.5 प्रतिशत हो गई थी। यह अक्टूबर 2023 की तुलना में लगभग दोगुनी थी। इसकी एक बड़ी वजह करीब 1,15,000 फिलिस्तीनियों के इजरायल में काम करने के परमिट पर रोक लगाना था।
रिपोर्ट के अनुसार,
यह आर्थिक दबाव जानबूझकर बनाया जा रहा है। जो परिवार कमाई नहीं कर सकता, उसे उसकी जमीन से उखाड़ना आसान हो जाता है। जब फिलिस्तीनी अपनी खेती और जमीन पर निर्भर होने की कोशिश करते हैं, तब वहां भी उनका पीछा नहीं छोड़ा जाता।
इजरायल में अपनी नौकरी गंवाने के बाद जमील अबू रयान ने हलहुल के पास अपने अंगूर के बाग में काम करना शुरू किया। लेकिन उन्होंने पाया कि इजरायली बसने वालों ने उनकी मुख्य जमीन पर एक अवैध चौकी स्थापित कर दी है। सैनिकों ने उन्हें एक अन्य भूखंड पर जाने से भी रोक दिया और उसे “[इजरायली] सरकारी जमीन” बताया।

अबू रयान ने B’Tselem को बताया कि उन्हें 2025 की अंगूर की फसल का करीब 60 प्रतिशत नुकसान उठाना पड़ा। अब वह अपनी जमीन पर ठीक से काम भी नहीं कर सकते। दक्षिणी हेब्रोन पहाड़ियों में जनवरी के आखिर में हुए एक हमले को याद करते हुए इस्माइल खलायलेह ने बताया कि,
एक इजरायली सेटलर ने उनके माथे पर बंदूक रखकर जगह छोड़ने की धमकी दी थी। उसने कहा था, “मैं तुम्हें यह जगह छोड़ने के लिए 24 घंटे का समय दे रहा हूं।”
दक्षिणी हेब्रोन पहाड़ियों में कई फिलिस्तीनी समुदाय जबरन विस्थापन के खतरे का सामना कर रहे हैं।
संयुक्त राष्ट्र मानवीय मामलों के समन्वय कार्यालय यानी OCHA ने पिछले वर्ष इजरायली बसने वालों द्वारा किए गए 1,600 से अधिक हमले दर्ज किए थे। यह दबाव फिलिस्तीनियों के मकान बनाने के अधिकार तक भी फैला हुआ है। OCHA के अनुसार, इजरायली अधिकारियों ने फिलिस्तीनियों के लिए भवन निर्माण की अनुमति प्राप्त करना “लगभग असंभव” बना दिया है।
जैसे-जैसे फिलिस्तीनी समुदायों को उनकी जमीन से हटाया जा रहा है, वैसे-वैसे अवैध इजरायली बस्तियों का विस्तार हो रहा है। मौजूदा इजरायली सरकार ने 2022 से अब तक रिकॉर्ड 104 नई बस्तियों को मंजूरी दी है।
इजराइल द्वारा पैदा की गई इन मुश्किलों का सामना सिर्फ वयस्क फिलिस्तीनीयों को ही नहीं बल्कि नवजात बच्चों को भी करना पड़ रहा है, France 24 की एक रिपोर्ट के अनुसार, गाजा में जन्म लेने वाले बच्चों के लिए दुनिया में कदम रखना बेहद जोखिम भरा है। इज़राइल और मिस्र की सीमा से लगे युद्ध से तबाह इस क्षेत्र में मानवीय हालात बेहद गंभीर बने हुए हैं। दक्षिणी गाजा के ख़ान यूनिस शहर स्थित नासिर अस्पताल के नवजात शिशु विभाग के प्रमुख हातेम धाहिर ने कहा,
स्थिति बेहद गंभीर है। इन बच्चों के लिए ऑक्सीजन उपलब्ध नहीं है और अस्पताल में एक भी अतिरिक्त इनक्यूबेटर नहीं है।”
उन्होंने समाचार एजेंसी एएफपी से कहा, “हम बच्चों को दूसरे अस्पतालों में स्थानांतरित करने की कोशिश कर रहे हैं, लेकिन वहां भी हमेशा जगह भरी रहती है। हालात बहुत ख़राब हैं। अधिकांश बच्चों को ऑक्सीजन की ज़रूरत है और उनका वज़न भी बेहद कम है। स्थिति लगातार बद से बदतर होती जा रही है।”
इज़राइल और हमास के बीच युद्ध ने फ़लस्तीनी क्षेत्र की स्वास्थ्य व्यवस्था को बुरी तरह तबाह कर दिया है। कई चिकित्सा केंद्र पूरी तरह या आंशिक रूप से भी काम करने की स्थिति में नहीं हैं। गाजा पट्टी में सामान के प्रवेश पर इज़राइल द्वारा लगाए गए प्रतिबंधों के कारण दवाओं, चिकित्सा उपकरणों और विशेषज्ञ उपचार से जुड़ी वस्तुओं की भी भारी कमी हो गई है।अक्टूबर 2025 में अमेरिका समर्थित युद्धविराम की घोषणा के बावजूद इज़राइली सेना फ़लस्तीनियों को निशाना बनाना जारी रखे हुए है।
जून में प्रकाशित संयुक्त राष्ट्र की एक जांच रिपोर्ट में कहा गया कि भोजन, चिकित्सा सामग्री और ईंधन की गंभीर कमी तथा स्वास्थ्य सेवाओं के ध्वस्त होने से मातृ स्वास्थ्य पर बहुत बड़ा असर पड़ा है।