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अमेरिकी दबाव के आगे झुके पीएम मोदी, चुपचाप UPI पेमेंट पर चार्ज लगाने का रास्ता खोला: राहुल गांधी

TCN Desk TCN Desk | 1h ago · 6 min read
अमेरिकी दबाव के आगे झुके पीएम मोदी, चुपचाप UPI पेमेंट पर चार्ज लगाने का रास्ता खोला: राहुल गांधी

राहुल गांधी ने कहा है कि मोदी सरकार ने चुपचाप UPI पर शुल्क लगाने का रास्ता खोल दिया है।

लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने भाजपा के नेतृत्व वाली केंद्र सरकार की आलोचना करते हुए कहा कि उसने UPI पर शुल्क लगाने की प्रक्रिया शुरू करके अमेरिकी भुगतान निगमों के दबाव के आगे घुटने टेक दिए हैं।

एक एक्स पोस्ट में, गांधी ने तर्क दिया कि हालांकि सरकार का दावा है कि उपभोक्ताओं से सीधे शुल्क नहीं लिया जाएगा, लेकिन 2,000 रुपये से अधिक के व्यापारी लेनदेन पर व्यापारी छूट दर (MDR) की अनुमति देने से अंततः खुदरा कीमतें बढ़ जाएंगी।


राहुल गांधी ने कहा कि,

मोदी सरकार ने चुपचाप UPI पर शुल्क लगाने का रास्ता खोल दिया है। अब 2,000 रुपये से अधिक के UPI लेनदेन पर MDR (Merchant Discount Rate) लगाया जा सकता है। भले ही ये लेनदेन कुल लेनदेन का सिर्फ 5% हों, लेकिन यूपीआई के कुल लेनदेन मूल्य का लगभग 65% हिस्सा इन्हीं से बनता है। सरकार का कहना है कि ग्राहकों से कोई शुल्क नहीं लिया जाएगा। लेकिन दुकानदारों पर लगाया गया यह शुल्क आखिर आएगा कहां से? कीमतों में जोड़कर, सीधे ग्राहक की जेब से ही चुकाया जाएगा,

कांग्रेस नेता ने कहा कि,

अमेरिकी भुगतान कंपनियां लंबे समय से भारत की जीरो एमडीआर नीति का विरोध करती रही हैं, और आगे आरोप लगाया कि मोदी सरकार ने ठीक उसी दिशा में नीति बदलने का रास्ता खोल दिया है। अमेरिका के साथ व्यापार समझौते की तरह ही, समझौता करने वाले प्रधानमंत्री मोदी एक बार फिर अमेरिकी दबाव के आगे झुक रहे हैं।

ये टिप्पणियां वित्त मंत्रालय की उस अधिसूचना के बाद आई हैं जिसमें कहा गया है कि 2,000 रुपये तक के यूपीआई लेनदेन पर बैंकों या सिस्टम प्रदाताओं द्वारा कोई प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष शुल्क नहीं लगाया जा सकता है, जिससे प्रभावी रूप से मात्रा के हिसाब से लगभग 96 प्रतिशत यूपीआई लेनदेन शून्य शुल्क सीमा के भीतर रहते हैं।

आज सुबह कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने आरोप लगाया कि महंगाई से परेशान जनता को राहत देने के बजाय, मोदी सरकार हर दिन उनकी जेबें लूटने का नया तरीका खोज रही है।


अधिसूचना की आलोचना करते हुए उन्होंने कहा,

मोदी सरकार की लूट अब UPI तक पहुंच गई है। UPI पर कोई शुल्क नहीं' को बदलकर '2,000 रुपये तक के UPI लेनदेन पर कोई शुल्क नहीं' कर दिया गया है। आसमान छूती महंगाई ने पहले ही आम आदमी की जेब खाली कर दी है। थोक महंगाई दर लगभग 10% है, और भाजपा सरकार ने जनता पर 'डिजिटल भुगतान कर' लगाने की योजना बनाई है, जिसका मकसद उनकी बची-खुची बचत को भी खत्म करना है।
लोकसभा में नेता विपक्ष राहुल गांधी ने ये अकारण नहीं कहा है कि पीएम मोदी अमेरिकी दबाब के आगे झुक गए हैं इसलिए UPI पेमेंट पर चार्ज लगाने की तैयारी हो रही है। दरअसल सच ये है कि भारत में UPI की शुरुआत के बाद से ही अमेरिकी पेमेंट कंपनियां Visa और Mastercard संभावित कारोबार के नुकसान का मुद्दा उठाती रही हैं।

ऐसे समय में जब अमेरिका के साथ भारत सरकार ट्रेड डील को फाइनल करने की तैयारी में हैं उसी समय संसद में एक बिल पेश किया गया और अब सरकार अधिसूचना भी ले आई है जिसमें UPI और Rupay Debit Card के पेमेंट पर शुल्क लगाने की अनुमति मिल सकती है। यह अकारण नहीं है। दरअसल अमेरिका लगातार अपने अधिकांश व्यापारिक साझेदारों पर उनके डिजिटल पेमेंट सिस्टम में सभी कंपनियों पर ‘लेवल प्लेइंग फील्ड’ बनाने का दबाव डालता रहा है। UPI पेमेंट पर शुल्क लगने की तैयारी को भी आर्थिक जानकार ट्रंप प्रशासन के दबाव बनाने की नीति के रूप में ही देख रहे हैं।

Indian Express की एक रिपोर्ट के अनुसार, अमेरिकी व्यापार प्रतिनिधि ने मार्च 2026 में घरेलू कंपनियों को लाभ पहुंचाने वाली भारत की डिजिटल भुगतान नीतियों को विदेशी व्यापार बाधा के रूप में वर्गीकृत किया था। विभिन्न क्षेत्रों में ऐसी बाधाओं को हटाना ट्रेड डील के तहत अमेरिका की प्रमुख मांगों में शामिल है जिसमें UPI पेमेंट और क्रेडिट लेनदेन पर शुल्क लगाना भी है। बता दें कि भारत में UPI की लोकप्रियता लगातार बढ़ी है। इसकी सबसे बड़ी वजह इसका सुविधाजनक और फिलहाल बिना ट्रांजैक्शन शुल्क वाला होना है। हालांकि प्रस्तावित बदलावों के बाद बैंक और पेमेंट सिस्टम प्रोवाइडर UPI और RuPay डेबिट कार्ड से भुगतान पर शुल्क लगा सकते हैं और संभव है कि इसका बोझ आखिरकार ग्राहकों तक पहुंचे।

2016 में भारत में UPI की शुरुआत के बाद से अमेरिकी पेमेंट कंपनियां Visa और Mastercard संभावित कारोबार के नुकसान का मुद्दा उठाती रही हैं। भारत में लोग कार्ड से भुगतान करने के बजाय तेजी से मुफ्त UPI पेमेंट की ओर बढ़े हैं।

दिल्ली स्थित थिंक टैंक ग्लोबल ट्रेड रिसर्च इनिशिएटिव (GTRI) के मुताबिक, इन कंपनियों को UPI और RuPay पर जीरो ट्रांजैक्शन चार्ज, सरकार द्वारा RuPay को बढ़ावा देने और UPI के जरिए क्रेडिट कार्ड भुगतान में RuPay को शुरुआती बढ़त दिए जाने पर आपत्ति रही है। GTRI के अनुसार, इन नीतियों ने RuPay को मजबूत किया है और अमेरिकी कार्ड कंपनियों की फीस से होने वाली कमाई को प्रभावित किया है।

Visa और Mastercard ऐसे मॉडल पर काम करती हैं जिसमें बैंक, पेमेंट प्रोसेसर और कार्ड नेटवर्क व्यापारियों के ट्रांजैक्शन से फीस कमाते हैं। UPI जैसा व्यापक, इंटरऑपरेबल और जीरो मर्चेंट डिस्काउंट रेट यानी MDR वाला प्लेटफॉर्म इस कमाई को सीमित करता है। MDR वह शुल्क है जो भुगतान को प्रोसेस करने वाले बैंक व्यापारियों से लेते हैं। इसका इस्तेमाल ट्रांजैक्शन प्रोसेसिंग, सेटलमेंट और पेमेंट इंफ्रास्ट्रक्चर की लागत पूरी करने में किया जाता है।

GTRI के मुताबिक RuPay अमेरिकी कंपनियों के लिए एक और चुनौती है, क्योंकि यह भारत का अपना कार्ड नेटवर्क है और इसे देश की घरेलू नीतियों के साथ ज्यादा करीब से जोड़ा जा सकता है। मार्च में यूनाइटेड स्टेट्स ट्रेड रिप्रेजेंटेटिव यानी USTR ने भारत की उन डिजिटल पेमेंट नीतियों को विदेशी व्यापार बाधा के रूप में वर्गीकृत किया था, जिन्हें वह घरेलू कंपनियों के पक्ष में मानता है। ऐसे कई मुद्दे प्रस्तावित भारत-अमेरिका ट्रेड डील में अमेरिका की प्रमुख मांगों में शामिल हैं।

USTR के अनुसार,

31 दिसंबर 2025 तक अमेरिका के स्वामित्व वाली दो इलेक्ट्रॉनिक पेमेंट ऐप कंपनियां मिलकर भारत के 80 प्रतिशत से ज्यादा UPI ट्रांजैक्शन प्रोसेस कर रही थीं। ये कंपनियां Walmart समर्थित PhonePe और Google Pay हैं।

भारत ने ट्रेड डील के तहत अब तक अमेरिका की कई मांगों पर सहमति जताई है, खासकर डिजिटल सेक्टर में। सबसे प्रमुख कदमों में हालिया केंद्रीय बजट में भारत ने विदेशी कंपनियों को देश में डेटा सेंटर स्थापित करने पर 2047 तक टैक्स में छूट देने की घोषणा की। इसे अमेरिका की एक महत्वपूर्ण मांग से जोड़कर देखा गया।

पिछले साल सरकार ने टैरिफ दबाव के बीच 6 प्रतिशत का तथाकथित ‘Google Tax’ भी खत्म कर दिया था। अमेरिका का कहना था कि डिजिटल सर्विस टैक्स उसकी Apple, Amazon, Google और Facebook जैसी टेक कंपनियों के खिलाफ है।

भारत अकेला ऐसा देश नहीं है जिसके घरेलू पेमेंट सिस्टम को लेकर अमेरिका ने आपत्ति जताई है। पिछले महीने अमेरिका ने US Trade Act of 1974 की धारा 301 के तहत ब्राजील पर 25 प्रतिशत टैरिफ लगाया। यह प्रावधान अमेरिकी सरकार को उन देशों के खिलाफ जांच और कार्रवाई करने की अनुमति देता है जिनकी आर्थिक नीतियों को अमेरिकी व्यापार के लिए भेदभावपूर्ण या बाधा पैदा करने वाला माना जाता है।