विदेशी मुद्रा भंडार में सबसे बड़ी गिरावट, शेयर मार्केट धड़ाम, निवेशकों के 14 लाख करोड़ डूबे
पिछले चार दिनों में निवेशकों के 14 लाख करोड़ रुपये डूब गए।
मोदी सरकार इन दिनो हर मोर्चे पर कमजोर होती दिखाई दे रही है। पेपर लीक के खिलाफ देशव्यापी आंदोलन, उसके बाद चुनाव आयोग के अंदर से ही धांधली की खबर बाहर आई। इसके बाद अब एक और चिंताजनक खबर आई है। Bloomberg की रिपोर्ट के अनुसार, भारत का विदेशी मुद्रा भंडार 14.88 अरब डॉलर घट गया है। यह करीब दो साल में सबसे बड़ी साप्ताहिक गिरावट है। सोमवार और मंगलवार लगातार दो दिन शेयर मार्केट में भारी गिरावट दर्ज की गई।
रिपोर्ट में दिए गए आंकड़ों के अनुसार,
18 सितंबर को समाप्त सप्ताह में विदेशी मुद्रा भंडार घटकर 765.9 अरब डॉलर रह गया। नवंबर 2024 के बाद यह सबसे बड़ी साप्ताहिक गिरावट है।
विदेशी मुद्रा भंडार में यह कमी ऐसे समय आई है जब भारतीय रिज़र्व बैंक (RBI) रुपये को सहारा देने के लिए डॉलर बेच रहा है। रुपया इस साल एशिया की सबसे कमजोर प्रदर्शन करने वाली मुद्रा रहा है। ईरान में अमेरिका और इज़रायल के साथ युद्ध शुरू होने से पहले ही रुपये में गिरावट आ रही थी; पश्चिम एशिया के संकट ने इस पर दबाव और बढ़ा दिया है। विशेषज्ञों ने चेतावनी दी है कि अगर पश्चिम एशिया में संकट जारी रहा, तो रुपया एक अमेरिकी डॉलर के मुकाबले 100 या उससे भी नीचे जा सकता है।
उधर, भारतीय शेयर बाजार के प्रमुख सूचकांकों में मंगलवार को लगातार दूसरे कारोबारी सत्र में भारी गिरावट दर्ज की गई। निफ्टी 50 गिरावट के साथ 22,732 पर खुला और शुरुआती कुछ मिनटों में 22,569 के निचले स्तर तक पहुंच गया। इस स्तर पर पिछले दो सत्रों में निफ्टी की कुल गिरावट करीब 571 अंक हो गई।
बिजनेस न्यूज पोर्टल Mint के अनुसार, शेयर मार्केट की हालत पिछले सेशन से काफी खराब है। 4 दिन से भी कम समय में सेंसेक्स 2700 अंक से अधिक टूट चुका है। इस अवधि में बीएसई पर लिस्टेड कंपनियों का मार्केट कैप 483 लाख करोड़ से घटकर 469 लाख करोड़ रुपये रह गया है।
यानी इस अवधि में,
निवेशकों के 14 लाख करोड़ रुपये डूब गए। इस गिरावट के पीछे सबसे बड़े 3 कारणों में अमेरिका और ईरान के बीच बातचीत में गतिरोध के बाद कच्चे तेल की कीमतों में उछाल, अमेरिकी बांड यील्ड में उछाल और घरेलू मार्केट से विदेशी निवेशकों की लगातार निकासी है।
23 सितंबर को बीएसई सेंसेक्स 74828 के लेवल पर बंद हुआ था। 24 सितंबर को गिरावट के साथ खुला और 1247 अंक लुढ़क कर 73580 के लेवल पर बंद हुआ। हालांकि, 25 सितंबर को सेंसेक्स 315 अंक ऊपर 73895 के लेवल पर बंद हुआ था, लेकिन जब सोमवार 28 सितंबर को बंद हुआ तो 1124 अंकों की चोट दे चुका था। सेंसेक्स कई महीने के निचले लेवल 72, 771 के लेवल पर बंद हो गया।
मंगलवार यानी 29 सितंबर को 700 से अधिक अंक टूटकर 72,064 के निचले स्तर तक आ गया था। हालांकि, अभी ट्रेडिंग जारी है। सेंसेक्स का ऑल टाइम हाई 86,159 है, जो दिसंबर 2025 में बना था। इसी तरह निफ्टी पिछले चार सेशन में 23,446 से 22,569 के लेवल तक आ गया है। इस अवधि में निफ्टी 877 अंकों का गोता लगा चुका है। इस साल निफ्टी 15 प्रतिशत से अधिक टूट चुका है।
बाजार में इस दबाव के पीछे मुख्य रूप से कच्चे तेल की बढ़ती कीमतें, अमेरिका की ऊंची बॉन्ड यील्ड और विदेशी निवेशकों की बिकवाली को माना जा रहा है।
अमेरिका और ईरान के बीच बातचीत में गतिरोध के बाद तेल की कीमतों में तेजी आई। सोमवार को ब्रेंट क्रूड करीब 2% चढ़कर 106.50 डॉलर प्रति बैरल के आसपास पहुंच गया। स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को फिर से खोलने और संघर्ष खत्म करने के ईरान के प्रस्ताव को अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा खारिज किए जाने के बाद बाजार में तेल आपूर्ति को लेकर चिंता बढ़ी।
वहीं, भारतीय अर्थव्यवस्था के लिए सबसे चिंताजनक खबर ये हैं कि सितंबर में विदेशी पोर्टफोलियो निवेशक (FPI) भारतीय शेयरों में बिकवाली कर रहे हैं। 25 सितंबर तक FPIs ने शेयर बाजार के जरिए करीब 25,682 करोड़ की इक्विटी बेची थी।
Money Control की एक रिपोर्ट के अनुसार, नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (NSE) के आंकड़ों के मुताबिक, सोमवार को विदेशी संस्थागत निवेशकों (FII) ने भारतीय शेयर बाजार में 5,353.22 करोड़ रुपये के शेयर बेचे। यह सितंबर में एक दिन की सबसे बड़ी शुद्ध बिकवाली है। विदेशी निवेशकों ने एक दिन में भारतीय शेयर बाजार से 5,353.22 करोड़ रुपये निकाल लिए। विदेशी निवेशकों की यह एक दिन की सबसे बड़ी निकासी 31 अगस्त के बाद दर्ज हुई है। उस दिन सूचकांकों में बदलाव से जुड़ी रीबैलेंसिंग के बीच उन्होंने 7,985.88 करोड़ रुपये के शेयर बेचे थे।
सोमवार के कारोबार में FII ने 9,047.56 करोड़ रुपये के शेयर खरीदे और 14,400.78 करोड़ रुपये के शेयर बेचे। दूसरी ओर, DII ने 15,918.32 करोड़ रुपये के शेयर खरीदे और 10,729.30 करोड़ रुपये के शेयर बेचे।
सितंबर में विदेशी निवेशकों की बिकवाली बढ़ी है। इस महीने के 19 कारोबारी सत्रों में वे 14 दिन शुद्ध बिकवाल और केवल पांच दिन शुद्ध खरीदार रहे। NSE के दैनिक नकद बाजार के आंकड़ों के आधार पर सितंबर में उनकी कुल शुद्ध निकासी लगभग 23,885 करोड़ रुपये पहुंच गई है। इस दौरान घरेलू निवेशकों की शुद्ध खरीदारी, विदेशी निवेशकों की निकासी से लगभग 2.4 गुना रही। इस साल अब तक FII ने कुल 3,74,378.55 करोड़ रुपये की शुद्ध बिकवाली की है, जबकि DII ने 6,08,278.85 करोड़ रुपये की शुद्ध खरीदारी की है।
बाजार विशेषज्ञों के मुताबिक,
दुनिया भर में बॉन्ड यील्ड बढ़ने, कच्चे तेल की ऊंची कीमतों, कंपनियों के कमजोर तिमाही नतीजों की आशंका, रुपये में कमजोरी और ब्याज दरें लंबे समय तक ऊंची रहने की आशंका से बाजार पर दबाव है।
बॉन्ड यील्ड केवल अमेरिका में नहीं, बल्कि वैश्विक स्तर पर बढ़ रही है। अमेरिका के 10 साल के बॉन्ड की यील्ड 5 प्रतिशत पार कर गई है, जो 2007 के बाद सबसे ऊंचा स्तर है। जापान के 10 साल के बॉन्ड की यील्ड 1996 के बाद और फ्रांस की 2008 के बाद के उच्चतम स्तर पर है। बेहतर रिटर्न के कारण निवेशक शेयरों और अन्य परिसंपत्तियों से पैसा निकालकर बॉन्ड में लगा रहे हैं।
वहीं, अमेरिका–ईरान युद्ध के बाद कच्चे तेल की कीमतें ऊंचे स्तर पर बनी रहने से महंगाई बढ़ने की चिंता फिर पैदा हुई है। भारत अपनी घरेलू तेल जरूरत का करीब 85 प्रतिशत आयात करता है। ऐसे में महंगा कच्चा तेल अर्थव्यवस्था की वृद्धि पर दबाव डाल सकता है और महंगाई बढ़ने से राजकोषीय घाटा भी बढ़ सकता है।