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हो जाइए तैयार, दिवाली के बाद UPI पेमेंट पर लागू होगा मर्चेंट शुल्क

TCN Desk TCN Desk | 1h ago · 4 min read
हो जाइए तैयार, दिवाली के बाद UPI पेमेंट पर लागू होगा मर्चेंट शुल्क

पहले यह व्यवस्था 15 अक्टूबर से लागू होनी थी।

UPI के जरिए व्यापारियों को किए जाने वाले चुनिंदा भुगतानों पर मर्चेंट डिस्काउंट रेट यानी एमडीआर अब दिवाली के बाद लागू होगा। नेशनल पेमेंट्स कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया यानी NPCI ने मंगलवार, 13 अक्टूबर को इसकी जानकारी दी। यूपीआई एंड सर्विसेज स्टीयरिंग कमेटी ने त्योहारी सीजन को ध्यान में रखते हुए शुल्क लागू करने का समय आगे बढ़ाने का फैसला किया है। पहले यह व्यवस्था 15 अक्टूबर से लागू होनी थी। अब इसकी नई तारीख अलग से घोषित की जाएगी।

NPCI ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर जारी बयान में बताया कि चुनिंदा व्यक्ति-से-व्यापारी यानी पर्सन-टू-मर्चेंट यूपीआई लेनदेन पर एमडीआर दिवाली के तुरंत बाद लागू किया जाएगा।


हालांकि, मंगलवार के बयान में उन सभी श्रेणियों का विस्तृत उल्लेख नहीं किया गया, जिन पर शुल्क लगेगा। इसके लिए पहले घोषित शुल्क ढांचे और संबंधित दिशा-निर्देशों को आधार बनाया जाएगा। फिलहाल, व्यापारियों को त्योहारी खरीदारी के दौरान इस अतिरिक्त भुगतान लागत से अस्थायी राहत मिली है।

एमडीआर वह शुल्क है, जो डिजिटल भुगतान को प्रोसेस करने के बदले व्यापारी से लिया जाता है। घोषित व्यवस्था के तहत 2,000 रुपये से अधिक के चुनिंदा यूपीआई मर्चेंट भुगतानों पर लेनदेन की राशि का 0.4 प्रतिशत शुल्क लगेगा। इसे 40 आधार अंक भी कहा जाता है। यह शुल्क ग्राहक के बजाय भुगतान स्वीकार करने वाले व्यापारी को देना होगा। किसी व्यक्ति द्वारा दूसरे व्यक्ति को पैसे भेजने वाले पर्सन-टू-पर्सन लेनदेन इस शुल्क के दायरे से बाहर रहेंगे।

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नए ढांचे में सामान्य मर्चेंट भुगतान के लिए एमडीआर की अधिकतम सीमा 300 रुपये प्रति लेनदेन रखी गई है।
उदाहरण के तौर पर, लागू श्रेणी में 10,000 रुपये का यूपीआई भुगतान स्वीकार करने पर व्यापारी को 40 रुपये शुल्क देना होगा।
इसी तरह 5,000 रुपये के भुगतान पर शुल्क 20 रुपये होगा।
75,000 रुपये के लेनदेन पर यह राशि 300 रुपये तक पहुंच जाएगी। इससे अधिक रकम वाले भुगतान पर भी निर्धारित सीमा के कारण शुल्क 300 रुपये से ज्यादा नहीं होगा।


यहां 2,000 रुपये की सीमा को समझना जरूरी है। घोषित नियम 2,000 रुपये से अधिक के संबंधित मर्चेंट भुगतानों पर लागू होंगे। इसलिए ठीक 2,000 रुपये के भुगतान पर एमडीआर नहीं लगेगा। 2,000 रुपये पर 8 रुपये शुल्क का उदाहरण 0.4 प्रतिशत की गणना समझाने के लिए दिया गया है, लेकिन शुल्क लागू होने की सीमा अलग है। साथ ही, प्रतिशत वाला शुल्क केवल 2,000 रुपये से ऊपर के हिस्से पर नहीं, बल्कि पात्र लेनदेन की पूरी राशि पर निकाला जाएगा।

कुछ जरूरी सेवाओं के लिए प्रतिशत आधारित शुल्क के बजाय 5 रुपये प्रति लेनदेन का निश्चित एमडीआर रखा गया है। इनमें रेलवे, दूरसंचार सेवाएं, बीमा और ईंधन शामिल हैं। वित्त मंत्रालय की पहले जारी जानकारी में कृषि संबंधी इनपुट भी इस सूची में शामिल हैं। इन श्रेणियों में भी शुल्क 2,000 रुपये से अधिक के संबंधित यूपीआई भुगतान पर लागू होगा। भुगतान की रकम बढ़ने पर निश्चित शुल्क नहीं बढ़ेगा।

वित्त मंत्रालय के अनुसार, ग्राहक से एमडीआर वसूलने की अनुमति नहीं है। इस शुल्क व्यवस्था की कानूनी पृष्ठभूमि संसद से पारित कराधान और अन्य कानून संशोधन विधेयक, 2026 से जुड़ी है। संसद ने 11 अगस्त को यह विधेयक पारित किया था। इसके जरिए भुगतान और निपटान प्रणाली अधिनियम, 2007 की धारा 10ए में बदलाव कर सरकार को निर्दिष्ट डिजिटल भुगतान माध्यमों पर शुल्क की अनुमति देने का अधिकार दिया गया। इसके बाद यूपीआई स्टीयरिंग कमेटी ने पिछले महीने संबंधित मर्चेंट लेनदेन के लिए एमडीआर दर तय की।

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शुल्क लागू करने का समय व्यापारियों के लिए खास मायने रखता है। दिवाली के दौरान दुकानों और ऑनलाइन कारोबार में खरीदारी बढ़ती है। मनीकंट्रोल की रिपोर्ट के अनुसार, सरकार को चिंता थी कि बढ़ती महंगाई के बीच एमडीआर लागू होने से त्योहारी बिक्री के दौरान कारोबार की लागत बढ़ सकती है। यह आशंका भी जताई गई कि कुछ व्यापारी इस अतिरिक्त खर्च की भरपाई किसी रूप में ग्राहकों से करने की कोशिश कर सकते हैं।

व्यापारी संगठनों, फिनटेक कंपनियों और भुगतान सेवा कंपनियों ने भी व्यवस्था लागू करने के लिए अधिक समय मांगा था। उनकी चिंताओं में अलग-अलग श्रेणियों की शुल्क दरें, नियमों का पालन और विभिन्न यूपीआई भुगतानों पर उनकी लागू होने की स्थिति शामिल थी। नई व्यवस्था में यह पहचानना जरूरी होगा कि कौन-सा भुगतान सामान्य प्रतिशत आधारित शुल्क के दायरे में आएगा और किस पर निश्चित शुल्क लगेगा। तारीख आगे बढ़ने से संबंधित पक्षों को तैयारी का अतिरिक्त समय मिलेगा।

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वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने आठ अक्टूबर को कहा था कि यूपीआई पर एमडीआर का मामला संबंधित मर्चेंट संभालेंगे। उन्होंने शुल्क लागू करने के समय का फैसला भुगतान व्यवस्था से जुड़े पक्षों पर छोड़ा था। अब एनपीसीआई के निर्णय के बाद नई तारीख का इंतजार रहेगा। आम लोगों के लिए प्रमुख बात यह है कि व्यक्तिगत पैसे भेजने पर शुल्क नहीं लगेगा और घोषित एमडीआर की जिम्मेदारी संबंधित व्यापारी की होगी।