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क्या अब मुफ्त में नहीं होगा UPI पेमेंट?

TCN Desk TCN Desk | 50m ago
क्या अब मुफ्त में नहीं होगा UPI पेमेंट?

RBI के गर्वनर ने कहा है कि इसकी लागत किसी न किसी को चुकानी ही होगी।

क्या बिना कोई शुल्क दिए मुफ्त में UPI भुगतान के दिन अब खत्म होने वाले हैं। आशंका जाहिर की जा रही है कि दुनिया के सबसे बड़े रियल-टाइम पेमेंट सिस्टम में से एक UPI यानी यूनिफाइड पेमेंट्स इंटरफेस पर जल्द ही 2,000 रुपये से अधिक के लेनदेन के लिए शुल्क लग सकता है। बैंकिंग के जानकारों का मानना है कि यह बदलाव पेमेंट एंड सेटलमेंट सिस्टम्स एक्ट में प्रस्तावित संशोधन का हिस्सा है, जिसे वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने संसद में पेश किया है। अगर यह संशोधन मंजूर हो जाता है, तो भारत में UPI भुगतान पर मर्चेंट डिस्काउंट रेट (MDR) फीस लगाने का रास्ता खुल सकता है। लेकिन ये फिलहाल पूरा सच नहीं है।

भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) के गवर्नर संजय मल्होत्रा ने कहा कि,

अभी यह निष्कर्ष निकालना जल्दबाजी होगी कि यूनिफाइड पेमेंट्स इंटरफेस (UPI) लेनदेन पर मर्चेंट डिस्काउंट रेट (MDR) लगाया जाएगा या नहीं।

सरकार की ओर से भुगतान कानून में प्रस्तावित संशोधनों के बाद देश में फ्री डिजिटल भुगतान व्यवस्था के भविष्य को लेकर बहस एक बार फिर तेज हो गई है। मौद्रिक नीति समिति (MPC) की बैठक के बाद मल्होत्रा ने कहा कि पेमेंट एंड सेटलमेंट सिस्टम्स (अमेंडमेंट) बिल, 2027 को लेकर अभी चर्चा चल रही है। RBI का फिलहाल मुख्य ध्यान यह तय करने पर नहीं है कि भविष्य में इस व्यवस्था का खर्च कैसे उठाया जाएगा, बल्कि देश के डिजिटल भुगतान ढांचे को और मजबूत करने पर है।

मौद्रिक नीति की घोषणा के बाद मीडिया से बातचीत में गवर्नर ने कहा,

"इसकी लागत किसी न किसी को चुकानी ही होगी। हम सभी चाहते हैं कि यह सार्वजनिक बुनियादी ढांचा लगातार मजबूत हो और अधिक कुशल बने। हम इसी दिशा में काम कर रहे हैं। फिलहाल यही हमारी प्राथमिकता है।"

उनकी यह टिप्पणी उन अटकलों के बीच आई है कि प्रस्तावित संशोधन भविष्य में सरकार को कुछ UPI मर्चेंट लेनदेन, खासकर अधिक मूल्य वाले भुगतानों पर MDR दोबारा लागू करने की अनुमति दे सकते हैं। पेमेंट एंड सेटलमेंट सिस्टम्स (अमेंडमेंट) बिल संसद में पेश किया जा चुका है, लेकिन इसमें UPI लेनदेन पर MDR लगाने या किसी तरह का शुल्क ढांचा तय करने का प्रावधान नहीं है। व्यापारियों पर शुल्क लगाने का कोई भी फैसला कानून लागू होने के बाद अलग से नीतिगत निर्णय के जरिये करना होगा।

फिलहाल जीरो MDR व्यवस्था के दायरे में आने वाले उपयोगकर्ताओं और व्यापारियों के लिए UPI भुगतान मुफ्त है। डिजिटल भुगतान को बढ़ावा देने के लिए यह व्यवस्था शुरू की गई थी। क्रेडिट और डेबिट कार्ड लेनदेन में व्यापारियों को बैंकों और भुगतान नेटवर्क को MDR देना पड़ता है, जबकि UPI के जरिये होने वाले मर्चेंट भुगतान पर अभी ऐसा कोई शुल्क नहीं लगता। केंद्र सरकार एक प्रोत्साहन योजना भी चलाती है, जिसके तहत छोटे व्यापारियों को किए गए कम-मूल्य वाले UPI लेनदेन के लिए बैंकों को भुगतान किया जाता है। इससे इन लेनदेन को प्रोसेस करने में आने वाली लागत के एक हिस्से की भरपाई होती है।

मल्होत्रा ने यह भी कहा कि,

भले ही आज UPI इस्तेमाल करने वाले लोग सीधे कोई शुल्क नहीं देते हों, लेकिन इस भुगतान व्यवस्था को चलाने की लागत अर्थव्यवस्था में कहीं न कहीं किसी के द्वारा वहन की जा रही है।"हो सकता है कि इसका खर्च व्यापक अर्थव्यवस्था उठा रही हो। कोई न कोई इसकी लागत चुका रहा है।"

UPI के भारत का प्रमुख खुदरा भुगतान प्लेटफॉर्म बनने के साथ ही इस मुद्दे पर चर्चा और तेज हो गई है। नेशनल पेमेंट्स कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया (NPCI) के अनुसार, जुलाई 2026 में UPI के जरिए रिकॉर्ड 23.66 अरब लेनदेन हुए, जिनकी कुल कीमत करीब ₹29.9 लाख करोड़ थी। UPI की शुरुआत के बाद किसी एक महीने में यह अब तक का सबसे अधिक लेनदेन मूल्य है।

UPI के तेजी से बढ़ते इस्तेमाल ने जीरो MDR मॉडल की दीर्घकालिक स्थिरता को लेकर सवाल फिर खड़े कर दिए हैं। बैंकों और भुगतान सेवा प्रदाताओं का कहना है कि डिजिटल भुगतान के बुनियादी ढांचे को बनाए रखने और उसे लगातार उन्नत करने में काफी लागत आती है। हालांकि, मल्होत्रा ने किसी खास वित्तपोषण व्यवस्था का समर्थन नहीं किया। उन्होंने कहा कि अभी यह अनुमान लगाना जल्दबाजी होगी कि भविष्य में MDR लागू किया जाएगा या कोई दूसरा मॉडल अपनाया जाएगा। उनके मुताबिक RBI की प्राथमिकता ऐसी भुगतान व्यवस्था में निवेश जारी रखना है, जो कुशल, सुरक्षित और सभी के लिए सुलभ बनी रहे।

उपभोक्ताओं के लिए फिलहाल कुछ नहीं बदल रहा है। UPI लेनदेन अभी भी मुफ्त हैं और व्यक्ति-से-व्यक्ति या व्यापारियों को किए जाने वाले भुगतानों पर शुल्क लगाने का कोई फैसला नहीं हुआ है। भविष्य में ऐसा कोई कदम उठाने से पहले नीतिगत फैसला और विस्तृत नियामकीय दिशा-निर्देश दोनों जरूरी होंगे।