सैनिकों की मौत के आंकड़े छिपा रहा है अमेरिका, नए खुलासे से पेंटागन नाराज
Pentagon ने आंकड़ों में इस अंतर पर अखबार द्वारा पूछे गए सवालों का जवाब देने से इनकार कर दिया।
अमेरिकी अखबार The Washington Post ने रक्षा विभाग 6 अमेरिकी अधिकारियों के हवाले से खबर दी है कि ईरान से जारी ईरान युद्ध के दौरान मिडिल ईस्ट में जितने अमेरिकी सैनिकों की मौत हुई है, Pentagon ने सार्वजनिक तौर पर तादाद उससे कम बताई है।
The Washington Post की रिपोर्ट के अनुसार,
6 में से 5 अधिकारियों ने अखबार को बताया कि ईरान से युद्ध में कम से कम 22 अमेरिकी सैनिकों की मौत हुई है यह Pentagon के सार्वजनिक डेटाबेस, जिसे Defense Casualty Analysis System (DCAS) कहा जाता है, में दर्ज संख्या से 4 अधिक है। जबकि छठे अधिकारी ने बताया कि मरने वाले सैनिकों की तादाद 23 है। इन अधिकारियों ने अपनी पहचान गोपनीय रखने की शर्त पर यह जानकारी दी है।
रिपोर्ट के मुताबिक जिन मौतों को सार्वजनिक आंकड़ों में शामिल नहीं किया गया है, उनमें से सभी सीधे युद्ध से जुड़े नहीं हैं। हालांकि, इन मामलों में ऐसे अमेरिकी सैन्यकर्मी शामिल हैं जो जारी लड़ाई के दौरान मध्य पूर्व में तैनात थे। अधिकारी ने यह भी बताया कि लड़ाई शुरू होने के बाद से इस क्षेत्र में तैनात तीन अमेरिकी कॉन्ट्रैक्टरों की भी मौत हुई है। 18 सितंबर तक Pentagon के DCAS डेटाबेस में ईरान युद्ध शुरू होने के बाद से दुश्मन के हमलों और अन्य घटनाओं में मारे गए 18 अमेरिकी सैनिकों के नाम दर्ज थे।
सार्वजनिक रूप से उपलब्ध आंकड़ों में शामिल नहीं की गई मौतों के बारे में विस्तृत जानकारी- जैसे सैनिकों की पहचान, उनकी मौत कब, कैसे और कहां हुई, अभी स्पष्ट नहीं है। Pentagon ने आंकड़ों में इस अंतर पर अखबार द्वारा पूछे गए सवालों का जवाब देने से इनकार कर दिया।
18 सितंबर तक DCAS डेटाबेस में 14 मौतें Operation Epic Fury के तहत दर्ज थीं। ईरान के खिलाफ 28 फरवरी को अमेरिका द्वारा शुरू किए गए ऑपरेशन का नाम राष्ट्रपति ट्रम्प द्वारा यही रखा गया था इसके अलावा, चार अन्य मौतें Overseas Operations नाम की अलग श्रेणी में दर्ज हैं। ये मौतें वॉशिंगटन और तेहरान के बीच जुलाई में हुए सीजफायर के बाद की हैं।
Pentagon ने एक अलग बयान में कहा है कि फरवरी से अब तक मिडिल ईस्ट में दो अमेरिकी सैनिकों की मौत ऐसे मिशनों के दौरान हुई, जिनका ईरान युद्ध से कोई संबंध नहीं था। ये मौतें उन सैन्य ठिकानों पर हुईं, जिन पर ईरान ने हमले किए थे। हालांकि, DCAS डेटाबेस में इन दोनों सैन्यकर्मियों के नाम भी दर्ज नहीं हैं।
सेना के मुताबिक, Sgt. Devin A. Seibel की 31 मई को इराक के इरबिल में एक प्रशिक्षण दुर्घटना में मौत हुई थी।

रक्षा विभाग की प्रेस विज्ञप्ति में बताया गया कि वो Operation Inherent Resolve में तैनात थे- यह ISIS के लड़ाकों के खिलाफ जारी अभियान है। लेकिन DCAS में Operation Inherent Resolve के तहत दर्ज मौतों की सूची में साइबेल का नाम शामिल नहीं है।
Maj. Sorffly Davius को कुवैत में एक ऐसी मेडिकल इमरजेंसी हुई, जिसका विवरण सार्वजनिक नहीं किया गया। 6 मार्च को उनकी मौत हो गई। यह स्पष्ट नहीं है कि उनकी मौत किसी ईरानी हमले से जुड़ी थी या नहीं।

उनकी मौत की घोषणा में कहा गया कि वह Operation Spartan Shield के तहत तैनात थे, जिसका मकसद क्षेत्रीय सेनाओं के साथ साझेदारी करना है।
Pentagon के कैजुअल्टी डेटाबेस के मुताबिक, ईरान संघर्ष शुरू होने के बाद से 820 से ज्यादा अमेरिकी सैनिक युद्ध में घायल हुए हैं।
The Washington Post की इस रिपोर्ट को अमेरिकी रक्षा सचिव और पेंटागन के हेड Pete Hegseth ने पूरी तरह से खारिज किया है, उन्होंने वाशिंगटन पोस्ट की खबर को कोट करते हुए X पर लिखा-
यह घिनौना और फर्ज़ी और सरासर झूठ है! The Washington Post को शर्म आनी चाहिए- वह ईरान के सरकारी मीडिया से भी बदतर है।
28 फरवरी को ईरान से जंग शुरू होने के बाद से ही ट्रम्प प्रशासन और अमेरिकी मीडिया के बीच तनाव का महौल रहा है। पिछले 7 महीनों में मीडिया ने कई बड़े खुलासे किए जो ट्रम्प प्रशासन के लिए काफी असहज करने वाले थे। कई रिपोर्ट्स को लेकर ट्रम्प ने खुलकर नाराजगी जाहिर की थी।
इस कड़ी में शुक्रवार को खबर आई कि ट्रम्प प्रशासन ने कई मीडिया संस्थानों पर व्हाइट हाउस में एंट्री पर प्रतिबंध लगा दिया है। इसमें CNN, MS NOW, POLITICO जैसे मीडिया संस्थानों के नाम हैं। राष्ट्रपति ट्रम्प ने 'ट्रुथ सोशल' पर लिखा-

अभी से मैं फेक न्यूज फैलाने वाले CNN, MS NOW और POLTICO के व्हाइट हाउस में एंट्री पर रोक लगा रहा हूं, क्योंकि वे लगातार फर्जी रिपोर्टिंग कर रहे हैं। उन्होंने यह भी कहा कि वे और आउटलेट के नामों की घोषणा करेंगे।
CNN ने ट्रंप के इस फैसले पर प्रतिक्रिया दी है। CNN ने कहा कि यह प्रेस की स्वतंत्रता पर 'अवैध हमला' है।
राष्ट्रपतियों की ओर से मीडिया संस्थानों को वाइट हाउस से प्रतिबंधित करना दुर्लभ माना जाता है। रिपोर्ट के मुताबिक, ट्रंप ने अपने पहले कार्यकाल में भी CNN के एक रिपोर्टर की पहुंच प्रतिबंधित की थी।
Md. Tousif
मोहम्मद तौसिफ़ राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय खबरों पर नजर रखते हैं और ‘द क्रेडिबल हिस्ट्री’ में रिसर्चर के रूप में कार्यरत हैं।