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पाकिस्तानी युद्धपोत ने तोड़ा 1991 का समझौता, पाक हाई कमिश्नर को दिल्ली ने किया तलब

TCN Desk TCN Desk | 21h ago · 4 min read
पाकिस्तानी युद्धपोत ने तोड़ा 1991 का समझौता, पाक हाई कमिश्नर को दिल्ली ने किया तलब

पाकिस्तानी राजनयिक को विदेश मंत्रालय के जनपथ स्थित कार्यालय में तलब किया गया था, जहां वह करीब 30 मिनट तक रुके रहे।

पाकिस्तान नौसेना का एक वॉरशिप भारतीय नौसेना के अग्रिम मोर्चे के एक गश्ती जहाज से टकरा गया। यह घटना अरब सागर के अंतरराष्ट्रीय जलक्षेत्र में 15 सितंबर की शाम 7:10 PM पर हुई। खबर है कि भारतीय नौसेना का फ्रंटलाइन युद्धपोत उत्तर अरब सागर में नियमित निगरानी मिशन पर था। इसी दौरान पाकिस्तान नौसेना का एक जहाज तेज गति से भारतीय युद्धपोत के करीब आया, जिससे दोनों की टक्कर हो गई। कल सोशल मीडिया पर एक वीडियो भी वायरल हुआ था, जिसमें दोनों जहाजों को काफी पास-पास चलते देखा जा सकता है।


वीडियो में साफ तौर पर देखा जा सकता है कि दोनों जहाजों के बीच सुरक्षित दूरी नहीं रह गई थी और आखिरकार उनकी टक्कर हो गई। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, पाकिस्तानी जहाज का नाम PNS हुसैन बताया जा रहा है। इस जहाज का इस्तेमाल समुद्री निगरानी और गश्त के लिए किया जाता है। इस टक्कर में पाकिस्तानी जहाज को काफी नुकसापहुंचा है, जिसकी वजह से उसे वापस बंदरगाह पर लौटना पड़ा। हालांकि, भारतीय नौसेना के जिस जहाज से इसकी टक्कर हुई, उसका अभी तक पता नहीं चल पाया है।

इस घटना के सामने आने के बाद भारत ने पाकिस्तान के चार्ज डी’अफेयर्स को तलब किया है। विदेश मंत्रालय ने कहा कि पाकिस्तानी राजनयिक साद अहमद वाराइच को तलब कर अंतरराष्ट्रीय जलक्षेत्र में पाकिस्तानी नौसैनिक इकाइयों के “अस्वीकार्य और गैर-पेशेवर आचरण” को लेकर कड़ा विरोध दर्ज कराया गया। मंत्रालय के मुताबिक, इसी आचरण के चलते दोनों जहाजों के बीच टक्कर हुई। मंत्रालय ने बयान में कहा कि यह घटना अंतरराष्ट्रीय जलक्षेत्र में हुई और इससे कोई बड़ा नुकसान नहीं हुआ।


पाकिस्तान के चार्ज डी’अफेयर्स को संबंधित पाकिस्तानी अधिकारियों तक यह बात पहुंचाने के लिए कहा गया कि सभी सैन्य इकाइयों को उचित सावधानी बरतनी चाहिए और दोनों देशों के बीच हुए संबंधित समझौतों के प्रावधानों का सम्मान करना चाहिए, ताकि ऐसी घटनाएं दोबारा न हों। पाकिस्तानी राजनयिक को भारत का संदेश पाकिस्तान के विदेश मंत्रालय तक भी पहुंचाने का निर्देश दिया गया। बयान में आगे कहा गया, “इस्लामाबाद में भारत के चार्ज डी’अफेयर्स को भी इस्लामी गणराज्य पाकिस्तान के विदेश मंत्रालय के समक्ष इसी तरह का विरोध दर्ज कराने का निर्देश दिया गया है।”

पाकिस्तानी राजनयिक को विदेश मंत्रालय के जनपथ स्थित कार्यालय में तलब किया गया था, जहां वह करीब 30 मिनट तक रुके रहे। मंत्रालय ने कहा कि पाकिस्तानी नौसैनिक जहाज का आचरण 1991 में भारत और पाकिस्तान के बीच हुए उस समझौते के अनुच्छेद 10 का सीधा उल्लंघन था।

दरअसल, भारत और पाकिस्तान के बीच,

6 अप्रैल 1991 को एक समझौता हुआ था। इस समझौते के मुताबिक, दोनों देशों को सीमा के नज़दीक होने वाली बड़ी सैन्य गतिविधियों, युद्धाभ्यास और सैनिकों की आवाजाही के बारे में एक-दूसरे को पहले से जानकारी देनी होती है। जब यह समझौता हुआ था, उस वक्त भारत के प्रधानमंत्री चंद्रशेखर थे। यह समझौता 19 अगस्त 1992 से लागू हुआ और दिसंबर 1994 में भारत ने इसे संयुक्त राष्ट्र में भी दर्ज कराया।

35 साल पहले हुए इस समझौते का मकसद यह सुनिश्चित करना था कि अंतरराष्ट्रीय समुद्र में दोनों देशों के जहाज और पनडुब्बियां एक-दूसरे के बहुत करीब न आएं, ताकि टक्कर और दूसरी दुर्घटनाओं से बचा जा सके। इसके तहत सैन्य अभ्यास और सैनिकों की आवाजाही की जानकारी पहले देना जरूरी है। इसमें युद्धपोतों और पनडुब्बियों के बीच दूरी को लेकर भी नियम तय किए गए थे। इस समझौते के आर्टिकल-10 में लिखा है कि भारत और पाकिस्तान के युद्धपोत और पनडुब्बियां अंतरराष्ट्रीय समुद्र में एक-दूसरे से 3 नॉटिकल मील यानी करीब 5.56 किलोमीटर से कम दूरी पर नहीं आ सकते।

हालांकि, इस मामले पर पाकिस्तान की तरफ से भी बयान आया है। BBC की एक रिपोर्ट के मुताबिक, पाकिस्तान ने आरोप लगाया है कि,

उसके विशेष आर्थिक क्षेत्र में भारतीय नौसेना ने उकसावे वाली कार्रवाई” की है। इस मुद्दे पर पाकिस्तानी विदेश मंत्रालय ने इस्लामाबाद में भारतीय हाई कमीशन के प्रभारी राजदूत को तलब किया और मंगलवार को भारतीय नौसैनिक युद्धपोत के साथ टकराव पर विरोध दर्ज कराया।

पाकिस्तानी विदेश मंत्रालय ने बुधवार को एक बयान में कहा कि जब पाकिस्तान नौसेना अपना द्विवार्षिक CPARK-26 अभ्यास कर रही थी, तब भारतीय पोत पाकिस्तानी नौसैनिक पोत के बेहद करीब आकर आक्रामक तरीके से युद्धाभ्यास कर रहा था। पाकिस्तानी विदेश मंत्रालय ने अपने बयान में कहा, “प्रभारी राजदूत से कहा गया कि वह भारत सरकार तक यह संदेश पहुंचाएं कि पाकिस्तान इस भारतीय कार्रवाई को कड़े शब्दों में खारिज करता है।”

इस तरह का एक मामला पहले भी हो चुका है। 2011 में भी INS दोगावरी और पाकिस्तान के PNS बाबर के बीच अरब सागर/हाई सीज़ क्षेत्र में इसी तरह की घटना हुई थी। उस समय भी दोनों पक्षों ने एक-दूसरे पर खतरनाक मैन्युवरिंग के आरोप लगाए थे और भारत ने आर्टिकल 10 का हवाला देते हुए पाकिस्तान के खिलाफ विरोध दर्ज कराया था।