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UPI टैक्स पर घिरी मोदी सरकार, कांग्रेस ने संसदीय समिति में समर्थन के दावे को किया खारिज

TCN Desk TCN Desk | 17 Sep, 2026 · 5 min read
UPI टैक्स पर घिरी मोदी सरकार, कांग्रेस ने संसदीय समिति में समर्थन के दावे को किया खारिज

कांग्रेस ने कहा कि वित्त विभाग के पास समिति के सदस्यों के साथ बैठक के समय ‘UPI टैक्स’ से संबंधित कोई ठोस प्रस्ताव नहीं था।

कांग्रेस ने गुरुवार को उन दावों को खारिज कर दिया कि संसद की वित्त संबंधी स्थायी समिति में शामिल उसके सांसदों ने अधिक राशि वाले UPI पेमेंट पर शुल्क लगाने के फैसले का समर्थन किया था। पार्टी ने आरोप लगाया कि,

मोदी सरकार ‘UPI टैक्स’ के फैसले के बाद पैदा हुए भारी विरोध से ध्यान भटकाने की ‘बेहद कमजोर’ कोशिश कर रही है।

कांग्रेस की यह प्रतिक्रिया तब आई जब सरकार ने व्यापारियों को 2,000 रुपये से अधिक के UPI पेमेंट पर शुल्क लगाने के फैसले की राहुल गांधी द्वारा की गई आलोचना पर सवाल उठाए। सरकार का कहना था कि संसद की स्थायी समिति ने इस तरह की व्यवस्था का समर्थन किया था और समिति में शामिल कांग्रेस सांसदों ने भी इस पर सहमति जताई थी।

सरकार के एक वरिष्ठ पदाधिकारी के अनुसार,

संसद की वित्त संबंधी स्थायी समिति ने UPI के लिए चरणबद्ध मर्चेंट डिस्काउंट रेट (MDR) या राजस्व व्यवस्था लागू करने की सिफारिश की थी। समिति ने कहा था कि इसकी अधिसूचना जारी कर इसे बिना देरी लागू किया जाना चाहिए।
भाजपा पदाधिकारी ने दावा किया कि 12 अगस्त को रिपोर्ट स्वीकार किए जाने के दौरान पी. चिदंबरम, मनीष तिवारी, गौरव गोगोई, किशोरी लाल और के. गोपीनाथ सहित कांग्रेस के पांच सांसद मौजूद थे। प्रकाशित कार्यवाही में उनकी ओर से किसी असहमति का उल्लेख नहीं है।
हालांकि, कांग्रेस सांसद गौरव गोगोई ने इन दावों को खारिज करते हुए कहा कि वित्त संबंधी संसदीय स्थायी समिति में मोदी सरकार द्वारा हाल में घोषित UPI टैक्स’ प्रस्ताव पर कोई चर्चा नहीं हुई थी।

गोगोई के मुताबिक,


वित्त विभाग के पास समिति के सदस्यों के साथ बैठक के समय ‘UPI टैक्स’ से संबंधित कोई ठोस प्रस्ताव नहीं था। MDR की आवश्यकता को लेकर सवाल जरूर उठाए गए थे, लेकिन सरकारी प्रतिनिधियों के पास उस समय कोई स्पष्ट या संतोषजनक जवाब नहीं था।

गोगोई ने सोशल मीडिया मंच ‘एक्स’ पर लिखा,

मैं फिर दोहराता हूं कि हाल की UPI टैक्स नीति से छोटे भारतीय व्यापारियों, दुकानदारों और उद्यमियों को नुकसान होगा, जबकि बड़ी अमेरिकी कंपनियों को फायदा मिलेगा। UPI टैक्स वापस लिया जाए। प्रधानमंत्री मोदी, आत्मसमर्पण बंद कीजिए।”

कांग्रेस नेता मनीष तिवारी की पोस्ट साझा करते हुए कांग्रेस महासचिव जयराम रमेश ने कहा कि,


मोदी सरकार के दौर में पनपी ‘प्लांटेड न्यूज’ की व्यवस्था बेनकाब हो गई है। उन्होंने एक अन्य पोस्ट में आरोप लगाया कि सरकार UPI टैक्स के खिलाफ पैदा हुए भारी जनविरोध से ध्यान हटाने के लिए इस तरह के दावे कर रही है। रमेश ने कहा कि यह फैसला अमेरिकी कंपनियों और ‘डोनाल्ड भाई’ को खुश करने के लिए लिया गया है।

कांग्रेस सांसद मनीष तिवारी ने भी सरकार पर निशाना साधा। उन्होंने कहा कि संसदीय स्थायी समितियों की कार्यवाही गोपनीय मानी जाती है, लेकिन सरकार अब राजनीतिक लाभ लेने के लिए उसका इस्तेमाल कर रही है।


तिवारी ने कहा,

“मेरे सहयोगी गौरव गोगोई सही कह रहे हैं। 15 अक्टूबर 2026 से UPI लेनदेन पर लागू होने वाले MDR से संबंधित कोई विशिष्ट प्रस्ताव वित्त संबंधी संसदीय स्थायी समिति के सामने नहीं रखा गया था। समिति के सामने शुल्क की दर, मात्रा, अधिकतम सीमा और छूट की श्रेणियों जैसी जानकारियां भी प्रस्तुत नहीं की गई थीं। उन्होंने कहा कि MDR के सिद्धांत और आवश्यकता को लेकर भी समिति की विभिन्न बैठकों में सदस्यों ने सवाल उठाए थे। ऐसे में यह दावा करना गलत और भ्रामक है कि समिति के कुछ सदस्यों ने इस विशेष कदम का समर्थन किया था।

इससे पहले सरकार के एक पदाधिकारी ने सवाल उठाया था कि राहुल गांधी उस व्यवस्था का विरोध क्यों कर रहे हैं, जिसका उनकी पार्टी के सांसदों—पूर्व वित्त मंत्री पी. चिदंबरम और पूर्व केंद्रीय मंत्री मनीष तिवारी सहित—ने संसदीय समिति में समर्थन किया था। सरकार द्वारा व्यापारियों को किए जाने वाले 2,000 रुपये से अधिक के UPI भुगतान पर शुल्क लगाने के फैसले पर राहुल गांधी ने आरोप लगाया था कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के सामने ‘घुटने टेकने’ और अमेरिका को बड़ी रकम देने का फैसला किया है। लोकसभा में विपक्ष के नेता ने यह फैसला वापस लेने की मांग भी की।

भाजपा सांसद भर्तृहरि महताब की अध्यक्षता वाली स्थायी समिति की रिपोर्ट के अनुसार, समिति ने अपनी पिछली सिफारिश का उल्लेख करते हुए कहा था कि डिजिटल भुगतान प्रणाली के लिए व्यावहारिक राजस्व मॉडल जरूरी है। इसी उद्देश्य से चरणबद्ध MDR व्यवस्था लागू करने के लिए कानूनी प्रावधान किए गए हैं। हालांकि, समिति ने सरकार द्वारा आवंटित 2,000 करोड़ रुपये और डिजिटल भुगतान उद्योग की अनुमानित 20,700 करोड़ रुपये की परिचालन लागत के बीच भारी अंतर पर गहरी चिंता जताई थी।

समिति के अनुसार,

अधिक राशि वाले लेनदेन पर संतुलित MDR लागू करने के लिए कानूनी व्यवस्था मौजूद होने के बावजूद इसकी अधिसूचना और क्रियान्वयन में देरी से भुगतान सेवा प्रदाता अपर्याप्त सरकारी सब्सिडी पर निर्भर बने रहेंगे। इससे साइबर सुरक्षा, धोखाधड़ी की रोकथाम और नेटवर्क बुनियादी ढांचे में आवश्यक निवेश प्रभावित हो सकता है।

RuPay डेबिट कार्ड और कम राशि वाले BHIM-UPI पर्सन-टू-मर्चेंट लेनदेन को बढ़ावा देने के लिए प्रोत्साहन योजना पर समिति ने कहा कि,

वित्त वर्ष 2026-27 के लिए 2,000 करोड़ रुपये का बजट आवंटित किया गया है। इसका उद्देश्य RuPayऔर कम राशि वाले UPI भुगतान पर शून्य-MDR नीति के कारण पैदा होने वाली लागत की भरपाई करना है।

रिपोर्ट के मुताबिक,

UPI से हर महीने 150 अरब तक लेनदेन होने और 60 करोड़ नए उपयोगकर्ता जुड़ने की उम्मीद है। इसके बावजूद मौजूदा सरकारी प्रोत्साहन राशि उद्योग की वास्तविक लागत का केवल 11 प्रतिशत और संभावित MDR संग्रह का करीब 14 प्रतिशत ही पूरा करती है। इससे लंबी अवधि के बुनियादी ढांचे में निवेश के लिए बड़ा वित्तीय अंतर पैदा हो रहा है।

समिति ने सिफारिश की कि टियर-3 से टियर-6 शहरों में डिजिटल भुगतान को बढ़ावा देने के लिए प्रस्तावित तीन वर्षीय योजना और कैशबैक व्यवस्था आवश्यक हैं। इसके साथ ही वित्तीय सेवा विभाग को एक आत्मनिर्भर और चरणबद्ध राजस्व मॉडल की संभावनाओं पर भी काम करना चाहिए।